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Spiritual Knowledge,Kundalini Tantra ,Mahavidya Sadhana ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://alaukikshaktiyan.com/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [कालसर्प योग क्या है? अभिशाप या वरदान?](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-योग-क्या-है-अभिशा/2026/08/कालसर्प-योग-क्या-है-अभिशा.html): कालसर्प योग क्या है? अभिशाप या वरदान? राहु-केतु, ज्योतिष, आध्यात्मिकता और मनोविज्ञान से समझिए पूरा रहस्य कालसर्प योग वैदिक ज्योतिष के सबसे अधिक चर्चित और विवादित विषयों में से एक है। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में इसका नाम सुनते ही अक्सर उसके मन में भय पैदा हो जाता है—क्या विवाह में बाधा आएगी? क्या करियर - [क्या सचमुच कोई चेहरा देखकर आपका भूत‑भविष्य बता सकता है?](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-सचमुच-कोई-चेहरा-देखक/2026/05/क्या-सचमुच-कोई-चेहरा-देखक.html): तांत्रिक विद्याएँ, मनोविज्ञान, अंतर्ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक विस्तृत विश्लेषण मनुष्य सदियों से भविष्य जानने की जिज्ञासा रखता आया है। हर व्यक्ति अपने जीवन के आने वाले समय को लेकर उत्सुक रहता है—कब सफलता मिलेगी, कब संकट आएगा, कौन मित्र है, कौन शत्रु, कौन सा कार्य लाभ देगा और कौन सा हानि। इसी जिज्ञासा - [छिपे हुए देवताओं के वैज्ञानिक प्रमाण[ Scientific Evidence of Hidden Gods]](https://alaukikshaktiyan.com/छिपे-हुए-देवताओं-के-वैज्ञ/2026/03/छिपे-हुए-देवताओं-के-वैज्ञ.html): "क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि जिसे आप अब तक सिर्फ 'आस्था' कहते थे, वो असल में एक 'एडवांस्ड साइंस' है? फरवरी और मार्च २०२६ की इन हेडलाइंस को देखिए— IIT दिल्ली का दावा कि वैदिक मंत्रों में 'क्वांटम प्रूफ' मिला है। राजस्थान की गुफाओं में LiDAR तकनीक से देवताओं के 'चुंबकीय क्षेत्र' - [क्या सच में जागृत की जा सकती है आध्यात्मिक ऊर्जा ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-सच-में-जागृत-की-जा-सकत/2026/02/क्या-सच-में-जागृत-की-जा-सकत.html): अधिकतर लोग तंत्र शब्द सुनते ही डर जाते हैं, लेकिन सच यह है कि— “तंत्र कोई जादू नहीं, बल्कि चेतना का विज्ञान है।” तंत्र का अर्थ है— वह विधि, जिससे मानव अपनी छुपी हुई शक्तियों को पहचान सके। तंत्र में—मंत्र (ध्वनि की शक्ति),यंत्र (ज्यामिति की शक्ति) और साधना (चेतना की शक्ति) तीनों का संतुलन होता - [तंत्र का रहस्य और विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-का-रहस्य-और-विज्ञान/2026/01/तंत्र-का-रहस्य-और-विज्ञान.html): तंत्र और उसकी परिभाषा ================== तंत्र शब्द दो धातुओं "तन "व् "त्रे "से मिलकर बना है |"तन "धातु का अर्थ विस्तार करना ,फैलाना ,तानना ,उत्पन्न करना ,रूप देना ,ग्रंथादिक लिखना ,रचना करना आदि है |"त्रे "का अर्थ रक्षण करना है |तंत्र का धातु मूलक अर्थ होगा "जिस किसी वस्तु ,विचार या शक्ति का विस्तार - [ईष्ट देवता और आराध्य देवता में क्या अंतर है ?](https://alaukikshaktiyan.com/ईष्ट-देवता-और-आराध्य-देवत/2025/12/ईष्ट-देवता-और-आराध्य-देवत.html): कौन हैं आपके ईष्ट देवता ?कितने तरह के ईष्ट देवता होते हैं ? ---------------------------------------------------------------- कैसे करे ईष्ट देवी-देवता का चुनाव [व्यक्तिगत पूजा के सन्दर्भ में ] =================================================== आस्तिक लोगों द्वारा विभिन्न ईश्वर रूपों की उपासना ,आराधना ,प्रार्थना ,पूजा ,साधना की जाती है और जिन देवी देवताओं की पूजा -आराधना की जाती है वह उनके - [चेहरा देखकर भविष्य ज्ञान कैसे होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/चेहरा-देखकर-भविष्य-ज्ञान/2025/12/चेहरा-देखकर-भविष्य-ज्ञान.html): चेहरा बोलता है ,भूत -भविष्य बताता है ========================== चेहरा मन का ही दर्पण नहीं ,भूत -वर्तमान और भविष्य का भी प्रतिबिम्ब होता है |चेहरे पर बिगत जीवन लिखा होता है ,चेहरा वर्तमान की स्थिति बताता है और चेहरा आगामी जीवन की स्थिति और भविष्य भी बयां कर देता है | मतलब नहीं की चेहरे - [वशीकरण हो जायेगा ,आप खुद कीजिये](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-हो-जायेगा-आप-खुद-की/2025/11/वशीकरण-हो-जायेगा-आप-खुद-की.html): वशीकरण शक्ति संतुलन पर निर्भर करता है ============================ वशीकरण एक तांत्रिक षट्कर्म विद्या है जहाँ एक निश्चित दिशा में ऊर्जा प्रक्षेपण कर लक्ष्य के सोच ,स्वभाव ,पसंद -नापसंद में परिवर्तन करते हुए व्यक्ति विशेष के वशीभूत और अपने नियंत्रण में किया जाता है |यह बहुत से मामलों में सफल होता है किन्तु अधिकतर असफल - [क्यों एक समान जन्म समय पर भी भाग्य अलग होते हैं?](https://alaukikshaktiyan.com/क्यों-एक-समान-जन्म-समय-पर-भ/2025/10/क्यों-एक-समान-जन्म-समय-पर-भ.html): क्यों एक समान जन्म समय पर भी भाग्य अलग होते हैं? ========================================== -------------------तंत्रिकीय विश्लेषण ------------------ अक्सर एक प्रश्न ज्योतिष जगत में उठाया जाता है की एक ही समय एक ही स्थान पर एक ही घर में यहाँ तक की एक ही गर्भ अर्थात एक ही माता पिता की जुडवा संतानों के भाग्य अलग क्यों - [भविष्य जानने से क्या हानि होती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/भविष्य-जानने-से-क्या-हानि/2025/09/भविष्य-जानने-से-क्या-हानि.html): भविष्य जानना खतरनाक भी हो सकता है ? --------------------------------------------------- बिना सोचे उपाय करने से होने वाली स्थायी हानि को कोई नहीं सुधार सकता ==================================================== हर व्यक्ति अपने भविष्य के प्रति उत्सुक होता है और जिसे देखो यहाँ वहां हाथ फैला देता है ,अपनी कुंडली डाल देता है भविष्य जानने के लिए ,पर भविष्य जानने - [व्यापार -व्यवसाय में उन्नति क्यों नहीं हो रही ?](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-में-उन्न/2025/02/व्यापार-व्यवसाय-में-उन्न.html): क्यों नहीं उन्नति कर पा रहे आप ----------------------------------- आज का समय बेहद संघर्षमय हो चूका है |व्यक्ति को जीने के लिए अनेक तरह के संघर्ष करने पड़ते हैं |बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें आसान जीवन और सुख सुविधाएं मिल पाती हैं |शुरूआती जीवन माता -पिता पर आश्रित होता है और हर माता -पिता अपनी - [घर में नेगेटिविटी तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/घर-में-नेगेटिविटी-तो-नहीं/2025/02/घर-में-नेगेटिविटी-तो-नहीं.html): आप पर या घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है ============================================== प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा या शक्ति हमारे लिए लाभदायक और नकारात्मक उर्जा या शक्तिया नुक्सान करने वाली या परेशानी उत्पन्न करने वाली होती है ,,,यह समस्त प्रकृति दो प्रकार की शक्तियों या उर्जाओं से बनता है ,धनात्मक और रिनात्मक ,सूर्य और - [पूजा का दंड पीढ़ियाँ भुगतेंगी](https://alaukikshaktiyan.com/पूजा-का-दंड-पीढ़ियाँ-भुगत/2025/08/पूजा-का-दंड-पीढ़ियाँ-भुगत.html): पूजो साईं /पीर पीढियां भुगतेंगी ===================== आजकल पुराने संस्कार बहुत तेजी से विलुप्त हो रहे हैं और नासमझी का ऐसा दौर चल रहा है की केवल तात्कालिक लाभ लोगों को दिख रहा |कोई न तो भविष्य देख रहा न ही अपनी आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोच रहा |अपने माँ -बाप -दादा -दादी - [भगवान सूर्य के 21 नाम](https://alaukikshaktiyan.com/भगवान-सूर्य-के-21-नाम/2025/07/भगवान-सूर्य-के-21-नाम.html): भगवान सूर्य के 21 नाम ================= 1. विकर्तन यानी विपत्तियों को नष्ट करने वाले 2. विवस्वान यानी प्रकाश रूप 3. मार्तंड 4. भास्कर 5. रवि 6. लोकप्रकाशक 7. श्रीमान 8. लोक चक्षु 9. गृहेश्वर 10. लोक साक्षी 11. त्रिलोकेश 12. कर्ता 13. हर्ता 14. तमिस्त्रहा यानी अंधकार को नष्ट करने वाले 15. तपन 16. तापन - [विष्णु भगवान के २४ अवतार](https://alaukikshaktiyan.com/विष्णु-भगवान-के-२४-अवतार/2025/07/विष्णु-भगवान-के-२४-अवतार.html): भगवान् विष्णु और उनके २४ अवतार ============================== चराचर जगत के पालनकर्ता 'श्री विष्णु, श्री हरि, श्री नारायण' इत्यादि नामों से विख्यात हैं तथा कमला या लक्ष्मी देवी के पति हैं। आद्या शक्ति काली, सात्विक स्वरूप में साक्षात् श्री हरि में विद्यमान योगमाया या महामाया हैं, सर्वदा क्षीर सागर के मध्य, शेष नाग की शय्या - [क्या अपनी बर्बादी का रास्ता खुद बना रहे ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-अपनी-बर्बादी-का-रास्/2025/07/क्या-अपनी-बर्बादी-का-रास्.html): क्या अपने भविष्य की बर्बादी खुद लिख रहे ? =================================== कभी सोचा है ----------------- आप जिस देवता को पूजते हैं आपका अंतिम पड़ाव उस देवता तक ही अधिकतम हो सकता है ,अर्थात आप अधिक से अधिक उसके लोक तक ही जा सकते हैं ,अगर वह प्रसन्न हो गया अथवा सिद्ध हो गया तो |आप - [क्यों आवश्यक है कुलदेवी /देवता की पूजा ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्यों-आवश्यक-है-कुलदेवी-द/2025/07/क्यों-आवश्यक-है-कुलदेवी-द.html): :::::कुलदेवता /देवी की पूजा अवश्य करें ::::: =================================== प्रत्येक हिन्दू वंश और कुलों में कुल देवता अथवा कुल देवी की पूजा की परंपरा रही है |इस परंपरा को हमारे पूर्वजों और ऋषियों ने शुरू किया था |उद्देश्य था एक ऐसे सुरक्षा कवच का निर्माण जो हमारी सुरक्षा भी करे और हमारी उन्नति में भी - [अपने बच्चों को सुरक्षित रखिये](https://alaukikshaktiyan.com/अपने-बच्चों-को-सुरक्षित-र/2025/07/अपने-बच्चों-को-सुरक्षित-र.html): ताकि आप और बच्चा सुरक्षित रहें ======================= हर माता -पिता की चाहत होती है की उनके बच्चे आगे बढ़ें ,उन्नति करें ,पढ़ें ,जीवन में सफल हो पर आजकल अधिकतर देखा जा रहा कि उतनी सफलता नहीं मिलती जितनी लोग चाहते हैं |इसके अनेक कारण हो सकते हैं जिनमे एक कारण यह भी होता है - [रोने से भाग्य बिगड़ता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/रोने-से-भाग्य-बिगड़ता-है/2025/06/रोने-से-भाग्य-बिगड़ता-है.html): आंसुओ का भाग्य पर प्रभाव =================== बच्चा पैदा होता है रोता ही आता है ,जब कष्ट होता है तब रोता है ,बड़े होने पर भी यह आदत नहीं बदलती कभी कष्ट पर तो कभी असंतुष्टि पर ,कभी भाग्य पर तो कभी परिजनों पर रोता ही जाता है |बचपन से रोने की ऐसी आदत बनती - [बगलामुखी कवच-पाठ](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-कवच-पाठ/2017/12/बगलामुखी-कवच-पाठ.html): ::::::::::::::::::बगलामुखी कवच-पाठ :::::::::::::::::::: ================================== शिरो मेंपातु ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं पातुललाटकम । सम्बोधनपदं पातु नेत्रे श्रीबगलानने ।। १ श्रुतौ मम रिपुं पातु नासिकां नाशयद्वयम् । पातु गण्डौ सदा मामैश्वर्याण्यन्तं तु मस्तकम् ।। २ देहिद्वन्द्वं सदा जिह्वां पातु शीघ्रं वचो मम । कण्ठदेशं मनः पातु वाञ्छितं बाहुमूलकम् ।। ३ कार्यं साधयद्वन्द्वं तु करौ पातु सदा - [बगलामुखी [ब्रह्मास्त्र विद्या ]महासाधना](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-ब्रह्मास्त्र-व/2017/12/बगलामुखी-ब्रह्मास्त्र-व.html): :::::::::::बगलामुखी [ब्रह्मास्त्र विद्या ]महासाधना और प्रभाव :::::::::: =================================================== ...................महाविद्या श्री बगलामुखी दश महाविद्या के अंतर्गत श्री कुल की महाविद्या है ,जिनकी पूजा साधना से सर्वाभीष्ट की प्राप्ति होती है ,,ग्रह दोष ,शत्रु बाधा ,रोग-शोक-दुष्ट प्रभाव ,वायव्य बाधा से मुक्ति मिलती है ,सर्वत्र विजय ,सम्मान ,ऐश्वर्य प्राप्त होता है ,वाद-विवाद ,मुकदमे में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग - [व्यावसायिक अभिचार हटायें दिव्य गुटिका से](https://alaukikshaktiyan.com/व्यावसायिक-अभिचार-हटायें/2017/08/व्यावसायिक-अभिचार-हटायें.html): किया -कराया/अभिचार /नकारात्मक ऊर्जा /बंधन हटाती है दिव्य गुटिका ====================================== सामान्यतया शेयर ,सट्टा ,लाटरी ,कमोडिटी अथवा सेल्स -मार्केटिंग जैसे आकस्मिक आय से जुड़े लोगों के लिए बनाई जाने वाली चमत्कारी दिव्या गुटिका बेहद प्रतिक्रियाशील होती है ,जो घर में अथवा व्यक्ति के किसी भी प्रकार के नकारात्मक ऊर्जा ,अभिचार ,वायव्य बाधा ,टोने-टोटके ,स्थान दोष ,वास्तु - [टोटके और व्यापार -व्यवसाय](https://alaukikshaktiyan.com/टोटके-और-व्यापार-व्यवसाय/2017/08/टोटके-और-व्यापार-व्यवसाय.html): टोटके और व्यापार -व्यवसाय ----------------------------- १. आठ गोमतीचक्र, आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें। उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि के लिए - [भुवनेश्वरी दरिद्रता नाशक साधना](https://alaukikshaktiyan.com/भुवनेश्वरी-दरिद्रता-नाशक/2017/11/भुवनेश्वरी-दरिद्रता-नाशक.html): भुवनेश्वरी दरिद्रता नाशक साधना ==================== ( ग्रहण काल का अचूक प्रयोग ) नाम से ही स्पष्ट है की ये साधना कितनी महत्वपूर्ण है,जिस पर माँ भुवनेश्वरी की कृपा हो जाये,वो कभी दरिद्र नहीं रह सकता,क्युकी माँ कभी अपनी संतान को दुखी नहीं देख सकती है। ग्रहण काल में - [देव रति ,स्पर्श रति और पैशाचिक रति](https://alaukikshaktiyan.com/देव-रति-स्पर्श-रति-और-पैशा/2025/05/देव-रति-स्पर्श-रति-और-पैशा.html): तंत्र में रति को ११ विभिन्न प्रकारों में परिभाषित किया गया है जिनमे से ७ प्रकार की रति के विषय में हम पहले बता आये हैं |इस लेख में हम चार अन्य प्रकार की रतियों के विषय में लिख रहे जिनमे से देव रति और स्पर्श रति ही तंत्र में स्वीकार्य हैं अन्य दो को - [तंत्र और कृत्रिम रति](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-और-कृत्रिम-रति/2025/05/तंत्र-और-कृत्रिम-रति.html): . कृत्रिम रति ========== रति के ११ प्रकारों में एक कृत्रिम रति को भी परिभाषित किया गया है जो रति तो हो सकती है किन्तु यह सम्भोग नहीं होता क्योंकि सम्भोग में दो लोगों का साथ में बराबर भोग होता है इसीलिए इसका महत्त्व बहुत कम है तंत्र आदि में |कृत्रिम उपायों से की - [ब्रह्म रति और मानसिक सम्भोग](https://alaukikshaktiyan.com/ब्रह्म-रति-और-मानसिक-सम्भ/2025/05/ब्रह्म-रति-और-मानसिक-सम्भ.html): कुंडलिनी तंत्र साधना या मूल भैरवी साधना में शारीरिक रति को महत्व नहीं दिया जाता |मूलतः पूरा तंत्र ही ऊर्जा तरंगों की रति को महत्व देता है ,जिसके भावों में प्रत्येक बार अंतर होता है और भावो के अनुसार ऊर्जा तरंगें भी भिन्न होती हैं |तंत्र का मानना है की एक ही जोड़े की विभिन्न - [राक्षस रति और पशु रति](https://alaukikshaktiyan.com/राक्षस-रति-और-पशु-रति/2025/05/राक्षस-रति-और-पशु-रति.html): तंत्र में रतिक्रीड़ा का बहुत महत्व है चाहे वह कुंडलिनी तंत्र की भैरवी साधना हो ,भैरवी साधना का कोई अन्य प्रकार हो या वाम मार्ग की ऐसी साधना हो जिनमे जनन उर्जा साधना का आधार हो | कुछ साधनाओं में प्रत्यक्ष शारीरिक रति होती है तो कुछ में ऊर्जा तरंगों की रति को आधार - [कुण्डलिनी तंत्र में आत्मिक और मानव रति](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-तंत्र-में-आत्म/2025/05/कुण्डलिनी-तंत्र-में-आत्म.html): कुण्डलिनी तंत्र और भैरवी साधना में सम्भोग ================================== तंत्र में रतिक्रीड़ा का बहुत महत्व है चाहे वक् कुंडलिनी तंत्र की भैरवी साधना हो ,भैरवी साधना का कोई अन्य प्रकार हो या वाम मार्ग की ऐसी साधना हो जिनमे जनन उर्जा साधना का आधार हो | कुछ साधनाओं में प्रत्यक्ष शारीरिक रति होती है तो - [कुण्डलिनी तंत्र साधना में आयु](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-तंत्र-साधना-मे/2025/05/कुण्डलिनी-तंत्र-साधना-मे.html): कुंडलिनी तंत्र में मानसिक साधना और उपयुक्त आयु ==================================== मानसिक क्रियाओं का शरीर के श्वास और ह्रदय तंत्र पर विशेष प्रभाव पड़ता है |कोई शुभ समाचार सुनकर हार्ट अटैक हो जाना ,अशुभ समाचार से ब्लड प्रेसर में अंतर हो जाना ,सेक्सी मूड में श्वास गति में वृद्धि हो जाना ,किसी से लड़ाई होते देखकर - [आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के मार्ग](https://alaukikshaktiyan.com/आध्यात्मिक-शक्ति-प्राप्त/2025/04/आध्यात्मिक-शक्ति-प्राप्त.html): आध्यात्मिक /पारलौकिक प्राप्तियों के मार्ग ================================== वैदिक दर्शन ========= समस्त आध्यात्मिक जगत संयम ,ब्रह्मचर्य ,और कठोर ताप का उपदेश देते हैं |भैरवी विद्या भोग में मुक्ति और सिद्धि की बात करती है |दोनों में से सत्य क्या है |यह प्रश्न अक्सर मष्तिष्क में उठ सकते हैं |इसका उत्तर जानने के लिए इस रहस्य को - [काली मंत्र से रिद्धि -सिद्धि](https://alaukikshaktiyan.com/काली-मंत्र-से-रिद्धि-सिद्/2025/04/काली-मंत्र-से-रिद्धि-सिद्.html): रिद्धि -सिद्धि प्राप्त होता है काली के इस मंत्र से ================================= धन -संपत्ति ,शक्ति और शत्रुनाश आसान मंत्र से ================================ ॐ काली काली महाकाली ,मदे मांसे करे देवाली इंद्रा की बेटी ,ब्रह्मा की साली ,घोड़े की पीठ बजावे ताली चाम की कोथली हाड़ की जप माली पाताल की सर्पिणी उडू मंडल की बिजुली जहाँ पठाऊँ - [भविष्य आप भी देख सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/भविष्य-आप-भी-देख-सकते-हैं/2025/04/भविष्य-आप-भी-देख-सकते-हैं.html): आप भविष्य को दर्पण की तरह देख सकते हैं ---------------------------------------------------- हम सभी की चाहत रहती है कि जीवन में आने वाली घटनाओं को जान सकें। इसके लिए ज्योतिषी एवं भविष्यवक्ता से संपर्क करते हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि हम सभी भविष्य और भूत की घटनाओं को दर्पण की तरह देख सकते हैं। मानव - [अतीन्द्रिय शक्तियां आपमें ही हैं](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-शक्तियां-आपमे/2025/04/अतीन्द्रिय-शक्तियां-आपमे.html): हमारा शरीर अतीन्द्रिय ज्ञान का स्रोत है ------------------------------------------ जब मन में तरंग उठती है तो आदमी बेभान हो जाता है। उसे भान ही नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है, क्या करना है? विचार की तरंग का प्रभाव विचित्र होता है। एकाग्रता बहुत बड़ी शक्ति है। जिस व्यक्ति में एकाग्रता की शक्ति विकसित - [अतीन्द्रिय शक्ति क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-शक्ति-क्या-है/2025/04/अतीन्द्रिय-शक्ति-क्या-है.html): अतीन्द्रिय ज्ञान क्या है ? ================== आमतौर पर हमें वर्तमान की, अपने आसपास की घटनाओं की जानकारी होती है। भविष्य अथवा पूर्वजन्मों की घटनाओं का हमें ज्ञान नहीं होता है। परंतु यह भी एक वास्तविकता है कि यदा-कदा हरेक के जीवन में एक न एक ऐसी घटना घट जाती है, जिसके आधार पर कहा - [रहस्यमय अतीन्द्रिय शक्तियां](https://alaukikshaktiyan.com/रहस्यमय-अतीन्द्रिय-शक्ति/2025/04/रहस्यमय-अतीन्द्रिय-शक्ति.html): अतीन्द्रिय शक्ति का विज्ञान और उसकी पृष्ठभूमि ------------------------------------------------------- अतीन्द्रिय ज्ञान-एक्स्ट्रा सेंसरी पर्सेप्शन-अब एक वैज्ञानिक तथ्य है। सामान्यतया पाँच ज्ञानेन्द्रियों की सहायता से ज्ञान सम्पादन होता है, पर अब विश्लेषण का एक विषम छठी इन्द्रिय-सिक्सथ सेन्स-भी बन गया है। मनुष्य कई बार ऐसी जानकारियाँ प्राप्त करता है जो इन्द्रिय ज्ञान की परिधि से सर्वथा बाहर - [अपनी बर्बादी का रास्ता खुद बना रहे हैं आप ?](https://alaukikshaktiyan.com/अपनी-बर्बादी-का-रास्ता-खु/2025/04/अपनी-बर्बादी-का-रास्ता-खु.html): संतानों का भविष्य आप बिगाड़ रहे हैं ============================= आज का स्वार्थ कल का अभिशाप बन जाएगा ==================================== हम अपने जीवन में अक्सर ऐसी गलतियाँ कर जाते हैं जिसके बारे में हमें अनुमान तक नहीं होता कि वास्तव आप जिस देवता को पूजते हैं आपका अंतिम पड़ाव उस देवता तक ही अधिकतम हो सकता है - [कुलदेवी /देवता की स्थापना कैसे करें जबकि वह ज्ञात न हों ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवी-देवता-की-स्थापना/2025/04/कुलदेवी-देवता-की-स्थापना.html): कुलदेवता /देवी का पता न हो ,जानकारी न हो तो क्या करें ? ======================================== कैसे उन्हें पूजा दें ,कैसे उनकी पूजा करें ------------------------------------------------ आज के समय में स्थान -स्थान से लोगों के स्थानांतरित होकर कहीं और बस जाने के कारण अथवा संयुक्त परिवार के विघटन या अलग शहरों में रहने की परंपरा अथवा आधुनिकता - [ईश्वर पूजा ले रहे या प्रेत ले रहा ?](https://alaukikshaktiyan.com/ईश्वर-पूजा-ले-रहे-या-प्रेत/2025/04/ईश्वर-पूजा-ले-रहे-या-प्रेत.html): ईष्ट तक आपकी पूजा पहुँच रही क्या ? ========================== पूजा का लाभ क्यों नहीं मिल रहा ? ------------------------------------ आप पूजा पाठ रोज कर रहे किन्तु क्या आपने सोचा है आपके जीवन में क्या परिवर्तन आ रहा |पूजा पाठ का मतलब मात्र भावना और श्रद्धा नहीं ,भावना और श्रद्धा प्रार्थना ,उपासना में होती है ,पूजा - [कुलदेवी /देवता जानने की विधि](https://alaukikshaktiyan.com/अपनी-कुलदेवी-देवता-जानने/2025/04/अपनी-कुलदेवी-देवता-जानने.html): कौन हैं आपके कुलदेवी /देवता ?क्या पूजा पद्धति है आपके कुलदेवता /देवी की ? ----------------------------------------------------------------------------------------- कैसे जाने अपने कुलदेवता को ?कैसे उनकी पूजा पद्धति बने ? ========================================= कुलदेवता और कुलदेवी पर हमने बीसियों वर्षों से ध्यान दिया है ,अध्ययन किया है ,समझा है और पाया है की लोगों की अधिकतर समस्याओं के पीछे कहीं - [कुलदेवी /देवता कोप पर क्या होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवी-देवता-कोप-पर-क्या/2025/04/कुलदेवी-देवता-कोप-पर-क्या.html): क्या होता है जब कुलदेवता /देवी रुष्ट /असंतुष्ट होते हैं ? ====================================== कुलदेवता प्रत्येक वंश के उत्पत्ति कर्ता ऋषि के वह आराध्य हैं जिनकी आराधना उन्होंने अपने वंश की वृद्धि और रक्षा के लिए अपने वंश के लिए उपलब्ध सामग्रियों के साथ अपने लिए उपयुक्त समय में की थी |यह कुलदेवता हर ऋषि के - [क्यों कुलदेवता /देवी रुष्ट हो जाते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्यों-कुलदेवता-देवी-रुष्/2025/04/क्यों-कुलदेवता-देवी-रुष्.html): क्यों कुलदेवता /देवी रुष्ट हो जाते हैं ? ========================= जब हम किसी समस्या से परेशान होते हैं और उसका भौतिक हल नहीं मिलता तो हम उसका समाधान आध्यात्मिक जगत में खोजते हैं और तब हम किसी ज्ञानी जानकार से मदद लेने की कोशिश करते हैं |वह कारण पकड़ने की कोशिश करता है और आज - [कुलदेवता /कुलदेवी रुष्ट या तटस्थ तो नहीं हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवता-कुलदेवी-रुष्ट-य/2025/04/कुलदेवता-कुलदेवी-रुष्ट-य.html): कहीं आपके कुलदेवता /कुलदेवी रुष्ट /क्रुद्ध या निर्लिप्त तो नहीं =========================================== हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के - [पित्र दोष खत्म नहीं होगा यदि ऐसा है तो ?](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-दोष-खत्म-नहीं-होगा-य/2025/04/पित्र-दोष-खत्म-नहीं-होगा-य.html): पित्र शान्ति नहीं होगी चाहे कितने भी उपाय कर लो ======================================= उपाय तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक वह कहीं स्वीकार न हों |उपाय एक ऊर्जा प्रक्षेपण है |उपाय से ऊर्जा उत्पन्न कर एक निश्चित दिशा में भेजी जाती है |यह ऊर्जा जब तक कहीं स्वीकार न की जाए अंतरिक्ष में निरुद्देश्य - [कुलदेवता /कुलदेवी में कितनी शक्ति होती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवता-कुलदेवी-में-कित/2025/04/कुलदेवता-कुलदेवी-में-कित.html): कुलदेवता /कुलदेवी में कितनी शक्ति होती है ? =============================== हमारे पूर्वजों ने अलग अलग स्थान पर बसने पर अपने कुल वंश की रक्षा के लिए स्थानिक रूप से अनुकूल एक देवी देवता या शक्ति को स्थानीय रूप से उपलब्ध वस्तुओं को अर्पित करते हुए पूजना शुरू किया जिससे वह शक्ति उस कुल खानदान की - [कुलदेवी /देवता की पूजा क्यों आवश्यक है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवी-देवता-की-पूजा-क्य/2025/04/कुलदेवी-देवता-की-पूजा-क्य.html): :::::कुलदेवता /देवी की पूजा अवश्य करें :::::: =============================== प्रत्येक हिन्दू वंश और कुलों में कुल देवता अथवा कुल देवी की पूजा की परंपरा रही है |इस परंपरा को हमारे पूर्वजों और ऋषियों ने शुरू किया था |उद्देश्य था एक ऐसे सुरक्षा कवच का निर्माण जो हमारी सुरक्षा भी करे और हमारी उन्नति में भी - [क्या अप्सरा /यक्षिणी रति करती हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-अप्सरा-यक्षिणी-रति-क/2025/04/क्या-अप्सरा-यक्षिणी-रति-क.html): भ्रम या सच: अप्सरा /यक्षिणी रति करती हैं ================================ अप्सरा /परी /यक्षिणी का नाम ,कथा -कहानी से लेकर पुराण ,शास्त्र ,तंत्र जगत ,में भी आता है ।विश्वामित्र की याद आती है अप्सरा का नाम सुनते ही ।इंद्र की याद आती है अप्सरा और सुंदरियों के लिए ।तंत्र जगत में आते ही अक्सर साधकों के - [कुलदेवता /कुलदेवी का विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवता-कुलदेवी-का-विज्/2025/04/कुलदेवता-कुलदेवी-का-विज्.html): आखिर कुलदेवी- देवता कौन होते हैं ? ========================== हमारे पूर्वजों ने अलग अलग स्थान पर बसने पर अपने कुल वंश की रक्षा के लिए स्थानिक रूप से अनुकूल एक देवी देवता या शक्ति को स्थानीय रूप से उपलब्ध वस्तुओं को अर्पित करते हुए पूजना शुरू किया जिससे वह शक्ति उस कुल खानदान की रक्षा - [नशे की लत प्रेत बाधा के कारण भी हो सकती है .](https://alaukikshaktiyan.com/नशे-की-लत-प्रेत-बाधा-के-कार/2025/04/नशे-की-लत-प्रेत-बाधा-के-कार.html): नशे की आदत प्रेत बाधा से भी आती है =========================== नशे की लत पारिवारिक ,सामाजिक ,व्यक्तिगत कारणों से तो उत्पन्न होती ही है पर यह बहुत से मामलों में उपरी बाधाओं जैसे भूत -प्रेत -पिशाच आदि के प्रभाव होने पर भी उत्पन्न होती है |अधिकतर बाहरी बाधाएं अतृप्त आत्माएं होती हैं जो तामसिक प्रवृत्ति - [प्यार या विवाह में धोखा मिले तो ?](https://alaukikshaktiyan.com/प्यार-या-विवाह-में-धोखा-मि/2025/04/प्यार-या-विवाह-में-धोखा-मि.html): प्यार -वैवाहिक जीवन -धोखा और तंत्र प्रयोग ============================== आज के समय में युवा वर्ग खुले समाज और तकनिकी युग में जी रहा है ,वह पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावत हो रहा |भारतीय संस्कार उसे पुरातन लग रहे ,परम्पराओं और मर्यादाओं को वह पिछडापन मान रहा |माता -पिता ,बुजुर्गों द्वारा शादी विवाह करना उसे नहीं भा - [अप्सरा साधना असफल क्यों हो जाती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-साधना-असफल-क्यों-ह/2025/03/अप्सरा-साधना-असफल-क्यों-ह.html): अप्सरा साधना असफल क्यों हो जाती है =========================== अक्सर लोग हमसे सम्पर्क करते हैं की उन्होंने अप्सरा साधनाएं की लेकिन न तो अप्सरा सिद्ध हुई न ही कोई अनुभूति हुई ,ज्यादातर लोगों को विपरीत परिणाम ही मिले |लाभ तो कुछ नहीं हुआ परेशानी और महसूस हुई |इसके बाद भी लोगों में चाहत इतनी है - [लीलावती साधना](https://alaukikshaktiyan.com/लीलावती-साधना/2025/03/लीलावती-साधना.html): लीलावती अप्सरा साधना [[ Lilavati Apsara Sadhna ]] ======================================= अप्सराएं प्रकृति की ऊर्जा शक्तियाँ हैं जिनके गुणों के आधार पर इनके नाम और प्रसिद्धि हैं |यह देवताओं की सहायक शक्तियाँ हैं जो योगिनियों ,भैरवों के स्तर के नीचे की शक्तियाँ हैं और पृथ्वी तथा स्वर्ग के देवताओं के बीच समान सम्बन्ध रख सकती हैं |मुख्य - [कैसे सिद्ध होती हैं अप्सरा /यक्षिणी ?](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-सिद्ध-होती-हैं-अप्सर/2025/03/कैसे-सिद्ध-होती-हैं-अप्सर.html): कैसे सिद्ध होती हैं अप्सरा /यक्षिणी ? ------------------------------------------- सामाजिक रूप से गृहस्थ जीवन में रहने वाला हर व्यक्ति हमेशा से यह चाहता रहा है की उसके साथ कोई अलौकिक शक्ति जुड़ जाय ,कोई पारलौकिक सहायता मिले ,उसकी क्षमता बढ़ जाय की वह अपने समस्त कष्टों से ,दुखिन से मुक्त हो जाय ,निरोग हो जाय - [तिलोत्तमा साधना](https://alaukikshaktiyan.com/तिलोत्तमा-साधना/2025/03/तिलोत्तमा-साधना.html): तिलोत्तमा अप्सरा साधना [[Tilottama Apsara Sadhna ]] ========================================= प्रकृति के ऊर्जा स्तर में त्रिदेवों और त्रिशक्तियों के बाद देवताओं की उपस्थिति मानी जाती है जिनके मनोरंजन और कार्य पूर्ती हेतु कुछ सहायिकाएं हैं |इन्हें अप्सरा अथवा पारी के नाम से जाना जाता है |इनका ऊर्जा स्तर देवताओं ,योगिनियों ,भैरवों आदि के बाद का होता है - [अप्सरा /यक्षिणी आसानी से सिद्ध नहीं होती](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-यक्षिणी-आसानी-से-स/2025/03/अप्सरा-यक्षिणी-आसानी-से-स.html): यक्षिणी /अप्सरा सीधे सिद्ध नही होती ========================= आज के समय में अधिकतर साधकों का उद्देश्य भौतिक उपलब्धि प्राप्त करना होता है ,आध्यात्मिक उद्देश्य को सामने रखकर लाखों में कोई एक साधना करता है ,उनमे भी अधिकतर पहले भौतिक रूप से सक्षम होना चाहते हैं ,ऐसे में बहुत से लोग अप्सरा ,यक्षिणी ,बेताल ,यक्ष ,किन्नर - [मेनका और तिलोत्तमा अप्सरा](https://alaukikshaktiyan.com/मेनका-और-तिलोत्तमा-अप्सर/2025/03/मेनका-और-तिलोत्तमा-अप्सर.html): अप्सरा मेनका : =========== मेनका स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा थी। महान तपस्वी ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्ग के निर्माण के लिए जब तपस्या शुरू की तो उनके तप से देवराज इन्द्र ने घबराकर उनकी तपस्या भंग करने के लिए मेनका को भेजा। मेनका ने अपने रूप और सौंदर्य से तपस्या में लीन विश्वामित्र का - [रम्भा और उर्वशी अप्सरा](https://alaukikshaktiyan.com/रम्भा-और-उर्वशी-अप्सरा/2025/03/रम्भा-और-उर्वशी-अप्सरा.html): अप्सरा रम्भा : =========== रम्भा का नाम कथाओं कहानियों में विशेष सुंदरी के तौर पर आता है |यह एक अप्सरा थी ,जिसे समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक रत्न बताया जाता है |कथाओं में कई रम्भाओं का उल्लेख मिलता है ,एक रम्भा समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थी और दूसरी - [अप्सरा /परी कौन होती हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-परी-कौन-होती-हैं/2025/03/अप्सरा-परी-कौन-होती-हैं.html): :::::अप्सरा [APSARA ]::::: ====================== भारतीय संस्कृति में अप्सरा एक जाना -पहचाना नाम है ,यह नाम वैदिक युग से ही विभिन्न कारणों से जाना जाता है ,,तंत्र जगत में कई धर्मो -सम्प्रदायों में अप्सरा की साधना की जाती है विभिन्न नामों से |अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम, अति सुंदर, अनेक कलाओं में दक्ष, तेजस्वी - [5 मिनट में जीवन बदलेगा :आजमा लीजिये](https://alaukikshaktiyan.com/5-मिनट-में-जीवन-बदलेगा-आजमा/2025/03/5-मिनट-में-जीवन-बदलेगा-आजमा.html): :::केवल 5 मिनट खुद को दीजिये :जीवन बदल जायेगा :::: ======================================== अपने दिनभर के २४ घंटे के समय में से केवल 5 मिनट अगर हम एकाग्र होकर खुद को दे दें तो हमारा जीवन बदल सकता है |सकारात्मकता का ऐसा संचार हो सकता है सोच-कर्म-ले सब कुछ बदलने लगता है |इस छोटे और मामूली - [अमावश्या -पूर्णिमा को मन विचलित क्यों होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अमावश्या-पूर्णिमा-को-मन-व/2025/03/अमावश्या-पूर्णिमा-को-मन-व.html): :::::पूर्णिमा और अमावस्या ::::: ====================== वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनमें से ही माह में पड़ने वाले दो दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं- पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। खासकर अमावस्या के प्रति - [अष्ट मातृका कौन हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/अष्ट-मातृका-कौन-हैं/2025/03/अष्ट-मातृका-कौन-हैं.html): मातृका - गण ========= दुर्गा सप्तशती के अनुसार शुम्भ निशुम्भ के विनाश और देवताओ की विजय के लिये ब्रह्मा, शिव, कार्तिकेय, विष्णु, वराह, नृसिंह और इंद्र के शरीर से उनकी शक्तियाँ निकली और उन्ही का स्वरुप धारण कर भगवती चण्डिका के पास आई। जिस देवता का जैसा आकार, आभूषण, और वाहन था, उसी के - [कुमारी पूजन कैसे करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुमारी-पूजन-कैसे-करें/2025/03/कुमारी-पूजन-कैसे-करें.html): देवी आराधना और कुमारी पूजन :: नियम ,आवश्यकता ===================================== देवी आराधना के क्रम में आराधक व् साधक कुमारी पूजन करते हैं |हमारे शास्त्रों ने कुमारी पूजन किये जाने को महत्वपूर्ण बतलाते हुए समय-समय पर इसकी महत्ता एवं फल का वर्णन मुक्तकंठ से किया है |अपने घर-परिवार और राष्ट्र के दुःख-दारिद्र्य का नाश करने के - [देवी पूजा में विल्वपत्र क्यों आवश्यक है ?](https://alaukikshaktiyan.com/देवी-पूजा-में-विल्वपत्र-क/2025/03/देवी-पूजा-में-विल्वपत्र-क.html): देवी पूजा में विल्व पत्र की महत्ता ====================== किसी भी पूजन में पूजन सामग्री का बहुत महत्त्व होता है |देवी या देवता के अनुकूल पूजन सामग्री का उपयोग पूजा में होता है और उन्हें अर्पित किया जाता है |जैसी पूजा -साधना हो उस प्रकार की सामग्री उपयोग में लाइ जाती है |पूजा और सामग्री - [देवी पूजा सफल हो ऐसा क्या करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/देवी-पूजा-सफल-हो-ऐसा-क्या-क/2025/03/देवी-पूजा-सफल-हो-ऐसा-क्या-क.html): भगवती पूजा और सफलता के सहायक कुछ तत्व ================================= देवी के सभी रूप उस परम आद्या शक्ति के ही अंश हैं ,अतः रूपों में भिन्नता केवल विशिष्ट कार्य कारणवश ही हमें दृष्टिगत होती है ,अन्यथा इनमे परस्पर कोई भेद नहीं है |इसीलिए अक्सर हमने सूना है की शिव जी कहते हैं जो मुझमे और - [कात्यायनी दुर्गा और तंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/कात्यायनी-दुर्गा-और-तंत्/2025/03/कात्यायनी-दुर्गा-और-तंत्.html): :::::देवी कात्यायनी ::::: ================ मां दुर्गा के छठे स्वरूप को कात्यायनी कहते हैं। कात्यायनी महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की थी, इसीलिए ये कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। मां कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं। - [दुर्गा सप्तशती कैसे सिद्ध करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/दुर्गा-सप्तशती-कैसे-सिद्/2025/03/दुर्गा-सप्तशती-कैसे-सिद्.html): :::::देवी [सप्तशती] पाठ विधि:::::: ============================ भुवनेश्वरी संहिता में कहा गया है- जिस प्रकार से ''वेद'' अनादि है, उसी प्रकार ''सप्तशती'' भी अनादि है। श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में ''मार्कण्डेय पुराण'' के माध्यम से मानव मात्र के कल्याण के लिए इसकी रचना की गई है। जिस प्रकार योग का सर्वोत्तम गं्रथ गीता है - [दुर्गा सप्तशती की तंत्र में उपासना](https://alaukikshaktiyan.com/दुर्गा-सप्तशती-की-तंत्र-म/2025/03/दुर्गा-सप्तशती-की-तंत्र-म.html): दुर्गा सप्तशती और तांत्रिक दृष्टि ========================= भारतीय आस्तिक सम्प्रदाय की सर्वमान्य ग्रंथावली में मूर्धन्य स्थान को प्राप्त "दुर्गा सप्तशती "का सम्मान वेदों के सामान ही चिरकाल से किया जा रहा है |भुवनेश्वरी संहिता के अनुसार जिस प्रकार वेद अनादी हैं उसी प्रकार सप्तशती भी अनादी ही है ,तथापि नारायणावतार श्री व्यास जी द्वारा रचित - [भगवती दुर्गा का उर्जा रहस्य](https://alaukikshaktiyan.com/भगवती-दुर्गा-का-उर्जा-रहस/2025/03/भगवती-दुर्गा-का-उर्जा-रहस.html): :::दुर्गा :: संहार के साथ सृष्टि की शक्ति :::: ============================= नवरात्र ,शक्ति आराधना का पर्व ,शक्ति आराधना का समय ,शक्ति को आत्मसात करने का समय ,भगवती दुर्गा की आराधना का समय ,भगवती के विविध रूपों की आराधना का समय ,अर्थात प्रकृति की विभिन्न शक्तियों की आराधना का समय ,प्रकृति की विभिन्न शक्तियों को सम्मान - [नागा साधू कैसे बनते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/नागा-साधू-कैसे-बनते-हैं/2025/03/नागा-साधू-कैसे-बनते-हैं.html): नागा साधू बनने की प्रक्रिया. ====================== नागा साधु बनने की प्रक्रिया कठिन तथा लम्बी होती है। नागा साधुओं के पंथ में शामिल होने की प्रक्रिया में लगभग छह साल लगते हैं। इस दौरान नए सदस्य एक लंगोट के अलावा कुछ नहीं पहनते। कुंभ मेले में अंतिम प्रण लेने के बाद वे लंगोट भी त्याग - [नागा साधुओं की जीवनचर्या](https://alaukikshaktiyan.com/नागा-साधुओं-की-जीवनचर्या/2025/03/नागा-साधुओं-की-जीवनचर्या.html): ::::::: नागा साधू और उनका जीवन ::::::: ============================= सामान्य जनमानस में अक्सर सुनने -देखने में आता है की लोग कहते हुए मिल जाते हैं की साधू बनना सबसे आसान है ,आराम का जीवन जीते हैं ,मुफ्त को खाने को मिल जाता है ,कुछ करना नहीं होता ,पर क्या वास्तव में ऐसा होता है ,क्या - [नागा साधुओं का इतिहास](https://alaukikshaktiyan.com/नागा-साधुओं-का-इतिहास/2025/03/नागा-साधुओं-का-इतिहास.html): :::::नागा साधूओं का इतिहास ::::: ========================== सबसे पहले वेद व्यास ने संगठित रूप से वनवासी संन्यासी परंपरा शुरू की। उनके बाद शुकदेव ने, फिर अनेक ऋषि और संतों ने इस परंपरा को अपने-अपने तरीके से नया आकार दिया। बाद में शंकराचार्य ने चार मठ स्थापित कर दसनामी संप्रदाय का गठन किया। बाद में अखाड़ों - [अघोरपंथ की विशेषता](https://alaukikshaktiyan.com/अघोरपंथ-की-विशेषता/2025/03/अघोरपंथ-की-विशेषता.html): अघोर पंथ एक विशिष्ट शैव पंथ ====================== अघोर पंथ हिंदू धर्म का एक संप्रदाय है। इसका पालन करने वालों को अघोरी कहते हैं। अघोर पंथ की उत्पत्ति के काल के बारे में अभी निश्चित प्रमाण नहीं मिले हैं, परन्तु इन्हें कपालिक संप्रदाय के समकक्ष मानते हैं। ये भारत के प्राचीनतम धर्म "शैव" (शिव साधक) से - [अघोरियों के तांत्रिक पीठ](https://alaukikshaktiyan.com/अघोरियों-के-तांत्रिक-पीठ/2025/03/अघोरियों-के-तांत्रिक-पीठ.html): अघोर पंथियों के तांत्रिक पीठ --------------------------------- अघोर पंथ को शैव और शाक्त संप्रदाय की एक तांत्रिक शाखा माना गया है। अघोर पंथ की उत्पत्ति काल के बारे में कोई निश्चित प्रमाण नहीं है, लेकिन इन्हें कपालिक संप्रदाय के समकक्ष मानते हैं। वाराणसी या काशी को भारत के सबसे प्रमुख अघोर स्थान के तौर पर मानते - [अघोरी कैसे साधना करते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/अघोरी-कैसे-साधना-करते-हैं/2025/03/अघोरी-कैसे-साधना-करते-हैं.html): अघोरी और उनकी साधना ================= जिनसे समाज घृणा करता है अघोरी उन्हें अपनाता है। लोग श्मशान, लाश, मुर्दे के मांस व कफन आदि से घृणा करते हैं लेकिन अघोर इन्हें अपनाता है। अघोर विद्या व्यक्ति को ऐसा बनाती है जिसमें वह अपने-पराए का भाव भूलकर हर व्यक्ति को समान रूप से चाहता है, उसके - [अघोरियों की रहस्यमय दुनिया](https://alaukikshaktiyan.com/अघोरियों-की-रहस्यमय-दुनि/2025/03/अघोरियों-की-रहस्यमय-दुनि.html): धरती पर शिव का रूप हैं : अघोरी साधु =========================== शिव का अघोरी रूप सबसे खूबसूरत माना जाता है. अघोरी शिव के रूप की पूजा आप भी करते हैं. सावन की सोमवारी पूजा हो, शिवरात्रि या आम दिनों की शिव पूजा भांग और धतूरे को शिव की सबसे प्रिय वस्तु मानकर हर शिव-भक्त शिवलिंग - [अघोरी संप्रदाय अघोर पंथ](https://alaukikshaktiyan.com/अघोरी-संप्रदाय-अघोर-पंथ/2025/03/अघोरी-संप्रदाय-अघोर-पंथ.html): ::::अघोर पंथ और अघोरी ::::: =================:===== अघोरियों का नाम सुनते ही अमूमन लोगों के मन में डर बैठ जाता है। अघोरी की कल्पना की जाए तो शमशान में तंत्र क्रिया करने वाले किसी ऐसे साधू की तस्वीर जहन में उभरती है जिसकी वेशभूषा डरावनी होती है। आधी रात के बाद का समय। घोर अंधकार - [विवाह योग पर भी विवाह नहीं हो रहा ,क्यों ?](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-योग-पर-भी-विवाह-नहीं/2017/08/विवाह-योग-पर-भी-विवाह-नहीं.html): मांगलिक कार्य में बाधा ---------------------------- विवाह हिन्दुओं के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है और यह लगभग सभी धर्म सम्प्रदायों में विभिन्न रूपों में मान्यताप्राप्त है |इस संस्कार द्वारा देव अनुमति से संतानोत्पत्ति की अनुमति प्रदान की जाती है और इसके बाद दो लोग एक साथ जीवन के सुख दुःख बांटने को साथ - [संकटा योगिनी साधना](https://alaukikshaktiyan.com/संकटा-योगिनी-साधना/2017/11/संकटा-योगिनी-साधना.html): संकटा योगिनी साधना: ================ योगिनियों का तंत्र में क्या महत्व ये तो सभी जानते है|.अप्सरा और यक्षिणियों से भी ऊपर है योगिनिया,| माँ का ही दूसरा स्वरुप माना जाता है इन्हे और यह सिद्धि दात्री भी मानी गयी है.| इनकी साधनाए अत्यंत क्लिष्ट होती है,क्युकी योगिनिया पूर्ण समर्पण मांगती है.और समर्पण ही सफलता की कुंजी - [धन-संमृद्धि ,ऐश्वर्य प्रदायक कमला [[लक्ष्मी]] साधना](https://alaukikshaktiyan.com/धन-संमृद्धि-ऐश्वर्य-प्रद/2017/11/धन-संमृद्धि-ऐश्वर्य-प्रद.html): धन-संमृद्धि ,ऐश्वर्य प्रदायक कमला [[लक्ष्मी]] साधना =================================== जीवन में समस्त प्रकार के सुखों की प्राप्ति तथा भौतिक उन्नति के इच्छुक व्यक्तियों को सर्व सुख प्रदायक चमत्कारी कमला [लक्ष्मी] साधना प्रयोग एक बार अवश्य ही संपन्न कर लेना चाहिए |इस प्रयोग को विधि पूर्वक संपन्न कर लेने से साधक को अपने जीवन में धन-धान्य ,सुख -संमृद्धि - [भैरव गंडा निर्माण विधि](https://alaukikshaktiyan.com/भैरव-गंडा-निर्माण-विधि-2/2017/11/भैरव-गंडा-निर्माण-विधि-2.html): ::::::::::::::भैरव गंडा निर्माण विधि ::::::::::::::: ================================== श्री भैरव भगवान शिव का एक रुप माने जाते है. पुराणों तथा तंत्र शास्त्र में भैरव जी के अनेक रुपों का वर्णन प्राप्त होता है. इनके प्रमुख रुप इस प्रकार हैं:- असितांग भैरव, चण्ड भैरव, रुरु भैरव, क्रोध भैरव, कपालि भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव उन्मत्त भैरव इत्यादि ! - [अक्षय तृतीया से करें मातंगी साधना](https://alaukikshaktiyan.com/अक्षय-तृतीया-से-करें-मातं/2017/11/अक्षय-तृतीया-से-करें-मातं.html): :::::::::::::::::: अक्षय तृतीया से करें मातंगी साधना.:::::::::::::::: ============================================== दसमहाविद्याओ मे भगवती मातंगी कि साधना अत्यंत सौभाग्यप्रद मानी जाती है,क्युकी यह केवल साधना ही नहीं अपितु सही अर्थो मे पुरे जीवन को आमूलचूल परिवर्तित कर देने कि ऐतिहासिक घटना है,|मातंगी महाविद्या दस महाविद्याओं में श्री कुल के अंतर्गत मानी जाने वाले महाविद्या हैं ,इन्हें सरस्वती का - [ऋण मुक्ति भैरव साधना](https://alaukikshaktiyan.com/ऋण-मुक्ति-भैरव-साधना/2017/11/ऋण-मुक्ति-भैरव-साधना.html): ऋण मुक्ति भैरव साधना ================ हर व्यक्ति के जीवन में ऋण एक अभिशाप है !एक वार व्यक्ति इस में फस गया तो फंसता ही चला जाता है ! व्याज की चिंता धीरे धीरे मष्तिष्क पर हावी होती चली जाती है जिस का असर स्वस्थ पर होना भी स्वाभाविक है ! प्रत्येक व्यक्ति पर छ किस्म - [षडक्षर वक्रतुंड गणपति साधना](https://alaukikshaktiyan.com/षडक्षर-वक्रतुंड-गणपति-सा/2017/11/षडक्षर-वक्रतुंड-गणपति-सा.html): षडक्षर वक्रतुंड गणपति साधना ===================== भगवान गणपति का ६ अक्षरों का वक्रतुंड मंत्र साधकों को अभीष्ट प्रदान करता है |प्रातः कालीन कृत्या करने के पश्चात चन्द्रमा व् तारों के बल से परिपूर्ण शुभ मुहूर्त में एकांत में जप स्थल का निर्धारण करें ,और गणपति पूजन से नंदी श्राद्ध तक के कर्म करें |तदन्तर कूर्म्शोधित - [उच्छिष्ट गणपति साधना](https://alaukikshaktiyan.com/उच्छिष्ट-गणपति-साधना/2017/11/उच्छिष्ट-गणपति-साधना.html): उच्छिष्ट गणपति साधना ================ गणपति एक सात्विक देवता सामान्य रूप से माने जाते हैं |दक्षिण मार्ग और वैष्णव या वैदिक मार्ग में इन्हें परम सात्विक देवता माना जाता है |tantra में यह सात्विक और तामसिक दोनों रूपों से पूजित होते हैं |तंत्र में इनका एक रूप उच्छिष्ट गणपति का भी पूजित होता है जो अत्यंत - [चितबदला क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/चितबदला-क्या-है/2025/02/चितबदला-क्या-है.html): चितबदला और स्वभाव परिवर्तन =========================== ग्रामीण अंचलों में विशेषकर उत्तर प्रदेश ,बिहार ,बंगाल ,छत्तीसगढ़ ,मध्यप्रदेश आदि उत्तरी -पूर्वी भारत के गावों में अथवा परम्परागत तांत्रिक किसी का स्वभाव बदलने के लिए एक जड़ी -बूटी का प्रयोग करते हैं जिसे चितबदला कहते हैं |भारत के दुसरे हिस्सों में भी इसे अलग नामों से हो सकता - [उच्छिष्ट गणपति साधना](https://alaukikshaktiyan.com/उच्छिष्ट-गणपति-साधना-2/2017/11/उच्छिष्ट-गणपति-साधना-2.html): उच्छिष्ट गणपति साधना ================== गणेश या गणपति ऐसे देवता है जो सभी मार्गों में पूजे जाते हैं |मूलतः tantra के और शिव परिवार के इस देव को वैदिक मार्ग में भी प्रमुख स्थान है और इन्हें ही प्रथम पूज्य माना जाता है |इनकी साधनाएं भी वैदिक मार्ग ,tantra मार्ग और योग मार्ग तीनो प्रकार से - [सर्वकार्य साधक श्री गणपति साधना](https://alaukikshaktiyan.com/सर्वकार्य-साधक-श्री-गणपत/2017/11/सर्वकार्य-साधक-श्री-गणपत.html): सर्वकार्य साधक श्री गणपति साधना ======================= श्री गणपति की साधना और उनकी कृपा से विवाह बाधा, नौकरी प्राप्ति में या प्रमोशन में बाधा, धन प्राप्ति में बाधा, बॉस से अनबन या टेंशन, धन का स्थायित्व, संतान बाधा ,ग्रह नक्षत्र बाधा , दरिद्रता और रोग इत्यादि का निवारण इसके माध्यम से आसानी - [बटुक भैरव साधना](https://alaukikshaktiyan.com/बटुक-भैरव-साधना/2017/11/बटुक-भैरव-साधना.html): बटुक भैरव साधना::::: दुखों से छुटकारा और अकाल मौत से बचाव =========================================== तंत्र साधना में शांति कर्म, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण नामक छ: तांत्रिक षट् कर्म होते हैं। इसके अलावा नौ प्रयोगों का वर्णन मिलता है:- मारण, मोहनं, स्तंभनं, विद्वेषण, उच्चाटन, वशीकरण, आकर्षण, यक्षिणी साधना, रसायन क्रिया तंत्र के - [महाकाल बटुक भैरव साधना](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाल-बटुक-भैरव-साधना/2017/11/महाकाल-बटुक-भैरव-साधना.html): महाकाल बटुक भैरव साधना ================= [[ कालाग्नि रूद्र प्रणीत ]] ---------------------------------- भैरव साधना भगवान शिव कि ही साधना है क्योंकि भैरव तो शिव का ही स्वरुप है| उनका ही एक नर्तनशील स्वरुप. भैरव भी शिव की ही तरह अत्यन्त भोले हैं,| एक तरफ अत्यधिक प्रचंड स्वरूप जो पल भर में प्रलय ला दे और एक - [दुकान /मकान खाली करवाने का तंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/दुकान-मकान-खाली-करवाने-का/2025/03/दुकान-मकान-खाली-करवाने-का.html): अपनी जमींन /मकान कब्जे से छुडाने का उपाय ================================ बहुत से लोगों की जमींन या मकान कभी कभी दुसरे दुश्मन या दबंग लोग कब्जा कर लेते हैं ,कभी कभी कोई किरायेदार कब्जा कर लेता है ,कभी कभी कोई दूकान कोई किरायेदार खाली नहीं करता ,मुकदमा -विवाद शुरू हो जाता है तथा कभी कभी माकन - [कर्ज से मुक्ति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ज-से-मुक्ति-के-उपाय/2025/03/कर्ज-से-मुक्ति-के-उपाय.html): ऋण(कर्ज ) मुक्ति के ज्योतिषीय और तंत्रिकीय सरल उपाय ========================================= वर्तमान समय में जादातर लोग अपनी सुविधाओ के लिए किसी न किसी प्रकार का कर्ज लेते है अथवा लोन आदि लेते हैं परन्तु वे यह नहीं सोचते की यह लोन समय पर वापस होगा या नहीं |.जब लोन या क़र्ज़ हम पर बड़ता जाता है - [किया -कराया /बंधन हटाती है डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/किया-कराया-बंधन-हटाती-है-ड/2025/03/किया-कराया-बंधन-हटाती-है-ड.html): किया -कराया /अभिचार /नकारात्मक ऊर्जा /बंधन हटाती है दिव्य गुटिका ================================================ सामान्यतया शेयर ,सट्टा ,लाटरी ,कमोडिटी अथवा सेल्स -मार्केटिंग जैसे आकस्मिक आय से जुड़े लोगों के लिए बनाई जाने वाली चमत्कारी दिव्या गुटिका बेहद प्रतिक्रियाशील होती है ,जो घर में अथवा व्यक्ति के किसी भी प्रकार के नकारात्मक ऊर्जा ,अभिचार ,वायव्य बाधा ,टोने-टोटके - [व्यापारिक उन्नति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापारिक-उन्नति-के-उपाय/2025/03/व्यापारिक-उन्नति-के-उपाय.html): १. गुंजा और कारोबार में बरकत ==================== किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार के दिन 1 तांबे का सिक्का, 6 लाल गुंजा लाल कपड़े में बांधकर प्रात: 11 बजे से लेकर 1 बजे के बीच में किसी सुनसान जगह में अपने ऊपर से 11 बार उसार कर 11 इंच गहरा गङ्ढा खोदकर - [आपकी उन्नति में बाधा तो नहीं डाली जा रही ?](https://alaukikshaktiyan.com/आपकी-उन्नति-में-बाधा-तो-नह/2025/03/आपकी-उन्नति-में-बाधा-तो-नह.html): कहीं आपकी उन्नति रोकी तो नहीं जा रही ============================ आपकी उन्नति में बाधा तो नहीं डाली जा रही ------------------------------------------------------- आप यथासंभव पूरी मेहनत करते हैं ,पूरी योग्यता है आपमें की आप अच्छी स्थिति में पहुंचें ,आप अच्छी बुद्धि ,क्षमता रखते हैं फिर भी आप उन्नति नहीं कर पा रहे |आप अच्छे पृष्ठभूमि से हैं - [दूकान -व्यवसाय पर बुरी नजर और बंधन](https://alaukikshaktiyan.com/दूकान-व्यवसाय-पर-बुरी-नजर/2025/03/दूकान-व्यवसाय-पर-बुरी-नजर.html): दूकान /व्यवसाय बंधी होने या कुदृष्टि ग्रस्त होने पर ==================================== कभी-कभी देखने में आता है कि खूब चलती हुई दूकान भी एकदम से ठप्प हो जाती है । जहाँ पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, वहाँ सन्नाटा पसरने लगता है । यदि किसी चलती हुई दुकान को कोई तांत्रिक बाँध दे, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न - [व्यवसाय पर हुई बुरी क्रिया हटायें ?](https://alaukikshaktiyan.com/व्यवसाय-पर-हुई-बुरी-क्रिय/2025/03/व्यवसाय-पर-हुई-बुरी-क्रिय.html): व्यवसाय पर तंत्र क्रिया होने पर ------------------------------------- १. यदि कोई शत्रु आपसी जलन या द्वेष, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण आप पर तंत्र-मंत्र का कोई प्रयोग करके आपके व्यवसाय में बाधा डाल रहा हो, तो ईसे में नीचे लिखे सरल शाबर मंत्र का प्रयोग करके आप अपनी तथा अपने व्यवसाय की रक्षा कर सकते हैं । - [व्यवसाय वृद्धि प्रयोग और टोटके](https://alaukikshaktiyan.com/व्यवसाय-वृद्धि-प्रयोग-और/2025/03/व्यवसाय-वृद्धि-प्रयोग-और.html): व्यावसायिक आय वृद्धि हेतु ================== १. आठ गोमतीचक्र, आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें। उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि के लिए - [व्यावसायिक सफलता का गणेश प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/व्यावसायिक-सफलता-का-गणेश/2025/03/व्यावसायिक-सफलता-का-गणेश.html): दैनिक व्यावसायिक सफ़लता और बाधा निवारण हेतु प्रयोग -------------------------------------------------------------------- यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते है ,कम से कम विघ्न-बाधाओं का सामना करना चाहते है ,तो निम्न प्रयोग करे ,आपके भाग्य तो नहीं बदल जायेगे ,किंतू जो मिलना है वह पूरा मिल पायेगा ऐसा विश्वास रखे - [सोचिये -क्यों उन्नति नहीं हो रही ?](https://alaukikshaktiyan.com/सोचिये-क्यों-उन्नति-नहीं/2025/03/सोचिये-क्यों-उन्नति-नहीं.html): क्यों नहीं उन्नति कर पा रहे आप ----------------------------------------- आज का समय बेहद संघर्षमय हो चूका है |व्यक्ति को जीने के लिए अनेक तरह के संघर्ष करने पड़ते हैं |बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें आसान जीवन और सुख सुविधाएं मिल पाती हैं |शुरूआती जीवन माता -पिता पर आश्रित होता है और हर माता -पिता - [कामाख्या कवच [ Kamakhya ]](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-कवच-kamakhya/2025/03/कामाख्या-कवच-kamakhya.html): कामख्या कवच /ताबीज ================ कामाख्या देवी ,कामाख्या शक्ति पीठ का नाम लगभग सभी भारतवासी जानते हैं और इनके बारे में सुनते रहते हैं जो कि विश्व के सबसे प्रसिद्द शक्तिपीठ में से एक है |यह शक्तिपीठ ५१ शक्तिपीठ में से सबसे प्रमुख भी है और सबसे अधिक शक्तिशाली भी क्योंकि माता कामाख्या कि शक्ति - [बगलामुखी यन्त्र नकारात्मक उर्जा हटाता है](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-यन्त्र-नकारात्म/2025/03/बगलामुखी-यन्त्र-नकारात्म.html): बगलामुखी यन्त्र से रोके/हटाये भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा ================================================= भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना - [विपरीत प्रत्यंगिरा कवच](https://alaukikshaktiyan.com/विपरीत-प्रत्यंगिरा-कवच/2025/03/विपरीत-प्रत्यंगिरा-कवच.html): विपरीत प्रत्यंगिरा कवच ----------------- जब सभी पूजा पाठ ,सामान्य उपाय ,सामान्य क्रियाएं असफल हो जाती हैं तब प्रत्यंगिरा विद्या का प्रयोग होता है | प्रत्यंगिरा विद्या की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यदि इसके साधक पर किसी भी शत्रु द्वारा भयंकरतम अभिचार प्रयोग किया गया हो तो यह विद्या उसे नष्ट कर डालती - [Pratyangira Kavach](https://alaukikshaktiyan.com/pratyangira-kavach/2025/03/pratyangira-kavach.html): प्रत्यंगिरा कवच ----------------- भगवती महाकाली का एक स्वरुप प्रत्यंगिरा का है |यह नाम इनका इसलिए पड़ा क्योंकि इनके इस स्वरुप की आराधना ऋषि अंगिरस और प्रत्यांगिरस नामक दो ऋषियों ने की थी और इनके नाम पर ही इनका नाम प्रत्यंगिरा पड़ा |इनके बारे में कहा जाता है की कोई महाविद्या या महाशक्ति की साधना - [किया -कराया नष्ट करने की विद्या](https://alaukikshaktiyan.com/किया-कराया-नष्ट-करने-की-वि/2025/03/किया-कराया-नष्ट-करने-की-वि.html): किये -कराये को वापस करने की विद्या ========================== टोना -टोटका ,किया -कराया नष्ट करने की विद्या ================================= तंत्र -मंत्र ,टोने टोटके ,तांत्रिक अभिचार ,वशीकरण ,मारण ,मूठ ,कृत्या ,भूत -प्रेत को वापस या नष्ट करने के दो तरीके होते हैं शाबर तंत्र और प्रत्यंगिरा तंत्र |शाबर तंत्र और मन्त्र से केवल शाबर आधारित क्रिया ही - [दुर्गा महाविजय कवच](https://alaukikshaktiyan.com/दुर्गा-महाविजय-कवच/2025/03/दुर्गा-महाविजय-कवच.html): दुर्गा महाविजय कवच ------------------------- हम सभी भगवती देवी दुर्गा जी को जानते हैं जिनकी उपासना का मुख्य समय नवरात्र होता है | दुर्गा पौराणिक ग्रन्थ मार्कंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती की मूल अधिष्ठात्री देवी हैं जिनमे समस्त देवी देवताओं की शक्तियां सन्निहित हैं |इनका विस्तार इनके नौ रूपों में होता है जिनमे यह अपने - [महामृत्युंजय और मृतसंजीवनी में अंतर](https://alaukikshaktiyan.com/महामृत्युंजय-और-मृतसंजीव/2025/03/महामृत्युंजय-और-मृतसंजीव.html): लघु मृत्युंजय ,मृत्युंजय ,महामृत्युंजय ,संजीवनी और मृत संजीवनी में अंतर ================================================== जब कभी मनुष्य के प्राणों पर संकट आता है ,दुर्घटना ,बीमारी ,अकाल मृत्यु की सम्भावना किसी को दिखती है या कोई बताता है तब प्राण रक्षक उपायों की बात चलती है |इस स्थिति में सबसे पहले सभी के मन में महामृत्युंजय या मृत्युंजय - [मृत संजीवनी विद्या [Mritsanjivani Mantra]](https://alaukikshaktiyan.com/मृत-संजीवनी-विद्या-mritsanjivani-mantra/2025/03/मृत-संजीवनी-विद्या-mritsanjivani-mantra.html): मृत संजीवनी विद्या ::पुनर्जीवन दे ======================= शास्त्रों में,पुराणों में और हिन्दू धर्म में भी गायत्री मंत्र और मृत्युंजय मंत्र का बहुत ही महत्त्व है| इन दोनों ही मंत्रो को बहुत बड़े मन्त्र माना जाता है, जो आपको सभी संकटों से मुक्त कर सकात्मकता से भर देते है| लेकिन भारतीय शास्त्रों में ऐसे मन्त्र का - [षोडशी कवच उन्नति देता है](https://alaukikshaktiyan.com/षोडशी-कवच-उन्नति-देता-है/2025/03/षोडशी-कवच-उन्नति-देता-है.html): चरित्रहीनता ,नशे की प्रवृत्ति रोकती है षोडशी कवच =================================== वर्तमान समय में किसी भी परिवार में सबसे अधिक क्षति -हानि -टूट आदि केवल दो ही वजह से हो रही चारित्रिक दोष और दुर्व्यसन से |चारित्रिक दोष में विवाहेत्तर सम्बन्ध ,अनैतिक प्रेम सम्बन्ध ,खानदान -परिवार की मर्यादा के विपरीत प्रेम सम्बन्ध ,कहीं भी किसी के - [त्रिपुरा कवच से क्या लाभ होते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/त्रिपुरा-कवच-से-क्या-लाभ-ह/2025/03/त्रिपुरा-कवच-से-क्या-लाभ-ह.html): षोडशी -त्रिपुरसुन्दरी [श्री विद्या ] यन्त्र /कवच धारण से क्या लाभ होते हैं ? ================================================== षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दश महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र - [त्रिपुरा कवच की आवश्यकता कब पड़ती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/त्रिपुरा-कवच-की-आवश्यकता/2025/03/त्रिपुरा-कवच-की-आवश्यकता.html): षोडशी त्रिपुरसुन्दरी यन्त्र /कवच कब धारण करें ? ================================= षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दश महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र और यम चारो इनके अधीन हैं - [बगलामुखी कवच से क्या लाभ हो सकते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-कवच-से-क्या-लाभ-ह/2025/03/बगलामुखी-कवच-से-क्या-लाभ-ह.html): बगलामुखी यन्त्र /कवच कब धारण करते हैं ? क्या लाभ होते हैं ? ============================================ भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक मुख्य शक्ति हैं | इनकी एक विशेष प्रकृति और विशेष स्वरुप है जो बेहद पवित्र किन्तु उग्र है जिससे इनका भौतिक उपयोग विशेष स्थितियों में अधिक लाभप्रद होता है ,यद्यपि यह सभी उद्देश्य पूर्ण - [महामाया कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महामाया-कवच/2025/03/महामाया-कवच.html): भुवनेश्वरी कवच =========== भगवती भुवनेश्वरी दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या हैं |जिस प्रकार श्री विद्या त्रिपुरसुन्दरी सृष्टि की देवी हैं अर्थात सृष्टि उत्पन्न करती हैं और महाकाली उस सृष्टि के संहार की जिम्मेदारी उठाती हैं उसी तरह भुवनेश्वरी के अधीन समस्त जगत का पालन पोषण है |जैसे वेदों में विष्णु को पालन - [ताबीज /कवच /यन्त्र का रहस्यमय संसार](https://alaukikshaktiyan.com/ताबीज-कवच-यन्त्र-का-रहस्य/2025/03/ताबीज-कवच-यन्त्र-का-रहस्य.html): ताबीज /यन्त्र /जंतर का रहस्यमय संसार =========================== हम बहुत से लोगों को देखते हैं की वह गले में अथवा बाजू में ताबीज /जन्तर पहले होते हैं |कुछ लोग लाकेट पहनते हैं तो कुछ स्मृति चिन्ह |इनके धारण का मनोवैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही महत्त्व होता है |सामान्य लाकेट /स्मृति चिन्ह या देवी देवताओं के - [भैरवी कवच /यन्त्र /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-कवच-यन्त्र-ताबीज/2025/03/भैरवी-कवच-यन्त्र-ताबीज.html): भैरवी कवच ======== यह कवच अति विशिष्ट है जो कुआंरी कन्याओं ,स्त्रियों ,पुरुषों ,बालको ,वृद्धों और पूजा ,आराधना ,उपासना ,साधना करने वालों के लिए विशेष उपयोगी है यद्यपि इसे कोई भी धारण कर सकता है |यह कवच महाविद्या श्री त्रिपुरसुन्दरी से सम्बन्धित है जिनका स्वरुप नवा दुर्गा में ब्रह्मचारिणी देवी सा लगभग है |यह - [भैरव रक्षा कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/भैरव-रक्षा-कवच-ताबीज/2025/03/भैरव-रक्षा-कवच-ताबीज.html): भैरव रक्षा कवच /ताबीज ================ बालकों -पुरुषों के लिए विशेष उपयोगी ========================= भगवान् भैरव शिव जी के अंश हैं और इनके सभी स्वरुप रक्षा ,संहार और वरदान के साथ पूर्णता देने वाले हैं |मुख्यतया काल भैरव ,स्वर्णाकर्षण भैरव और बटुक भैरव की ही स्वतंत्र उपासना की जाती है जबकि मुख्य आठ भैरव होते हैं - [नवग्रह दुष्प्रभाव रोधक कवच](https://alaukikshaktiyan.com/नवग्रह-दुष्प्रभाव-रोधक-क/2025/03/नवग्रह-दुष्प्रभाव-रोधक-क.html): सभी ग्रहों के दुष्प्रभाव निवारण का समग्र उपाय ================================ ज्योतिषीय उपाय और नवग्रह कवच /ताबीज ============================= हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी ग्रह की प्रतिकूलता अवश्य आती है |कुछ के लिए कई ग्रह प्रतिकूल हो सकते हैं या दशा -अन्तर्दशा -गोचर के अनुसार एक साथ अनेक ग्रह प्रतिकोल्ल प्रभाव देने लगते हैं - [बगलामुखी कवच का समस्याओं में प्रयोग कैसे करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-कवच-का-समस्याओं/2025/03/बगलामुखी-कवच-का-समस्याओं.html): बगलामुखी कवच का समस्याओं में प्रयोग कैसे करें ? =================================== बगलामुखी कवच अर्थात देवी बगलामुखी की शक्ति द्वारा सुरक्षा ,संरक्षा और समृद्धि |कवच दो तरह के होते हैं ,एक तो पाठ करने वाले स्तोत्र कवच और दुसरे धारण करने वाले ताबीज |ताबीज को हिंदी या संस्कृत में कवच कहते हैं अर्थात खोल |बगलामुखी के - [व्यापार वृद्धिकारक यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-वृद्धिकारक-यन्त्/2025/03/व्यापार-वृद्धिकारक-यन्त्.html): व्यापार वृद्धिकारक यन्त्र ================ इस यन्त्र की रचना दीवाली की आधी रात को की जाती है |इसको सिन्दूर या हिंगुल से दीवार पर [दूकान के बाहर ] लिखा जाता है |इसे भोजपत्र पर लिखाकर लटकाया भी जा सकता है अथवा धारण भी किया जा सकता है |दूकान में लटका कर नित्य धूप दीप करते - [प्रेत बाधा नाशक यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेत-बाधा-नाशक-यन्त्र/2025/03/प्रेत-बाधा-नाशक-यन्त्र.html): प्रेत बाधा नाशक यन्त्र =============== इस यन्त्र की रचना दीपावली की रात्री में की जाती है |अपरिहार्य होने पर किसी अमावस्या में भी यन्त्र रचना की जा सकती है |इस यन्त्र को कोरे सफ़ेद कागज़ पर अथवा भोजपत्र पर अनार की लेखनी से अष्टगंध द्वारा लिखकर पूजन और धूप -दीप करके त्रिलौह के कवच - [महालक्ष्मी यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महालक्ष्मी-यन्त्र-कवच/2025/03/महालक्ष्मी-यन्त्र-कवच.html): महालक्ष्मी यन्त्र ========== महालक्ष्मी का यन्त्र महालक्ष्मी की प्रतिमा के तुल्य होता है |दीवाली की रात्री में इस यन्त्र की रचना अष्टगंध से भोजपत्र पर अनार की कलम से की जाती है |फिर उसका विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और पूजन कर महालक्ष्मी के मंत्र का जप किया जाता है |पूजन में लाल चन्दन ,लाल पुष्प - [श्री सिद्धगोपाल यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-सिद्धगोपाल-यन्त्र/2025/03/श्री-सिद्धगोपाल-यन्त्र.html): श्री सिद्धगोपाल यन्त्र ============== भगवान् विष्णु के अवतार श्री कृष्ण जी के अनेक नाम रूप और लीला प्रसंग हैं |ज्ञान ,बुद्धि ,शौर्य ,पराक्रम ,राज -वैभव और मोक्ष ,सबकुछ श्री कृष्ण की कृपा से प्राप्त हो जाता है |श्री कृष्ण के बाल रूप गोपाल से सम्बंधित "श्री सिद्ध गोपाल यन्त्र "भक्तों की कामनापूर्ति का सुनिश्चित - [सिद्ध महालक्ष्मी यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/सिद्ध-महालक्ष्मी-यन्त्र/2025/03/सिद्ध-महालक्ष्मी-यन्त्र.html): श्री सिद्ध महालक्ष्मी यंत्र ================ चिड़िया की आकृति का यह यंत्र सिद्ध महालक्ष्मी यंत्र है |इस यंत्र को अनार की कलम से अष्टगंध की स्याही द्वारा भोजपत्र पर लिखकर और एक ताम्बे के पात्र पर रखकर ,पात्र को घर में पश्चिम दिशा में रख दें |इसके पश्चात् पीले वस्त्र तथा पीला जनेऊ धारण करके - [संजीवनी मृत्युंजय कवच](https://alaukikshaktiyan.com/संजीवनी-मृत्युंजय-कवच/2025/03/संजीवनी-मृत्युंजय-कवच.html): संजीवनी मृत्युंजय कवच ================ हम सभी ने महामृत्युंजय मंत्र ,यन्त्र के बारे में सुना है किन्तु हममें से अधिकतर लोग लघु मृत्युंजय ,मृत्युंजय और महामृत्युंजय के अंतर को नहीं जानते ,बहुत से लोग लघु मृत्युंजय और मृत्युंजय को भी महा मृत्युंजय ही कहते हैं जबकि इनमे बहुत बड़ा अंतर होता है |सभी के प्रयोग - [मृत्युंजय अधिकारी वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/मृत्युंजय-अधिकारी-वशीकरण/2025/03/मृत्युंजय-अधिकारी-वशीकरण.html): मृत्युंजय [रुष्ट व्यक्ति अधिकारी ] वशीकरण यन्त्र ================================== दो भोजपत्र के टुकड़ों पर लोहे की कील से दो यन्त्र लिखकर इन्हें परस्पर संपुटित [ जोड़ ]कर दें |धरती पर इसी अवस्था में रखकर उस पर कोई भारी पत्थर रखकर साधक ४ -5 कदम चले |यन्त्र के प्रभाव से रुष्ट व्यक्ति या अधिकारी अनुकूल होगा |अधिकारी - [मृतसंजीवनी यन्त्र /कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/मृतसंजीवनी-यन्त्र-कवच-ता/2025/03/मृतसंजीवनी-यन्त्र-कवच-ता.html): मृतसंजीवनी यन्त्र ============ मृत संजीवनी विद्या भगवान् शिव द्वारा प्रकट की गयी विद्या है जिस पर दैत्य गुरु शुक्राचार्य का पूर्ण अधिकार था और वह इससे दैत्यों की देवताओं के साथ युद्ध में मृत्यु हो जाने पर भी उनको जीवित कर दिया करते थे |इस विद्या को जानने के लिए देव गुरु वृहस्पति को - [मृत्युंजय यन्त्र /कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/मृत्युंजय-यन्त्र-कवच-ताब/2025/03/मृत्युंजय-यन्त्र-कवच-ताब.html): प्राण रक्षक मृत्युंजय यंत्र ================= यन्त्र चिंतामणि में भगवान् शिव ने प्राणों की रक्षा के लिए मृत्युंजय यन्त्र का विधान बतलाया है |जब कोई क्रुद्ध शासक अहित करना चाहता हो अथवा कोई शत्रु घात करना चाहता हो ,रात दिन पीछे पडा रहता हो ,तो आत्मरक्षा के लिए लोहे की कलम से यक्ष कर्दम से - [महामृत्युंजय कवच /यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/महामृत्युंजय-कवच-यन्त्र/2025/03/महामृत्युंजय-कवच-यन्त्र.html): महामृत्युंजय उर्ध्वमुख यन्त्र ================== वैदिक देवताओं में पांच शक्तियाँ आती हैं ,अग्नि ,वायु ,इंद्र ,विष्णु और रूद्र |इन सब में रूद्र मृत्यु के देवता हैं जिनका कार्य संहार है |इन रूद्र को मृत्युंजय महादेव भी कहते हैं और इनका एक विशिष्ट स्वरुप है |मृत्यु ,यम आदि सब इनके ही अधीन हैं और यह एक - [कैसे -कितना प्रभाव देते हैं यन्त्र/ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-कितना-प्रभाव-देते-है/2025/03/कैसे-कितना-प्रभाव-देते-है.html): आपकी सफलता पर यंत्रों -ताबीजों का प्रभाव ============================== आपकी सफलता -असफलता आपकी योग्यता ,व्यवहार और सोच पर निर्भर करती है ,ऐसा सामान्य स्थिति में होता है |यह भाग्य पर भी काफी कुछ निर्भर करता है जिसके अनुसार आपकी क्षमता-सोच-व्यक्तित्व का निर्धारण हुआ होता है |अर्थात जब भाग्य पूरा साथ दे तो आपकी नैसर्गिक क्षमता - [त्रिपुरसुन्दरी कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/त्रिपुरसुन्दरी-कवच-ताबी/2025/03/त्रिपुरसुन्दरी-कवच-ताबी.html): ::::::धारण करें षोडशी यन्त्र और रहें सुखी- संपन्न ::::::: ====================================== षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दश महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र और यम चारो इनके अधीन - [चिंतामणि कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/चिंतामणि-कवच-ताबीज/2025/03/चिंतामणि-कवच-ताबीज.html): चिंतामणि यन्त्र ========== चिंतामणि यन्त्र की रचना दीपावली ,होली ,अक्षय तृतीय अथवा रविपुष्य योग में किया जाता है |निर्माणकर्ता को सात्विक ,पवित्र और आध्यात्मिक शक्ति संपन्न होना आवश्यक है | यह सभी प्रकार की चिंता दूर करने वाला होता है |चिंतामणि यन्त्र भोजपत्र पर अनार की कलम से चन्दन -सिन्दूर से लिखकर माथे पर - [लाखिया कवच :प्रेम -सम्मान हेतु](https://alaukikshaktiyan.com/लाखिया-कवच-प्रेम-सम्मान-ह/2025/03/लाखिया-कवच-प्रेम-सम्मान-ह.html): लाखिया यन्त्र [प्रेम और सम्मान प्राप्ति हेतु ] ============================== इस यन्त्र को दीवाली की रात्री या विशिष्ट शुभ मुहूर्त में भोजपत्र पर अनार की कलम से सोनागेरू अथवा अष्टगंध से लिखकर पास रखने से अग्नि भय से बचाव होता है, |अग्नि से रक्षा करने में इसका प्रभाव अचूक माना जाता है |,अधिकारी वर्ग ,स्वामी - [दुर्गा शक्ति बीसा यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/दुर्गा-शक्ति-बीसा-यन्त्र/2025/03/दुर्गा-शक्ति-बीसा-यन्त्र.html): दुर्गा शक्ति बीसा यन्त्र ================ इस यन्त्र की रचना नवरात्र अथवा किसी शुभ मुहूर्त में अष्टगंध की स्याही से अनार की कलम से भोजपत्र पर होती है ,प्राण प्रतिष्ठा के बाद यन्त्र को लाल आसन पर प्रतिष्ठित कर ,स्वयं लाल वस्त्र पहन कर ,लाल वस्तुओं की पुजन सामग्री के साथ पूजन करे ,फिर रुद्राक्ष - [पारद शिवलिंग :सर्व कष्ट निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/पारद-शिवलिंग-सर्व-कष्ट-नि/2025/03/पारद-शिवलिंग-सर्व-कष्ट-नि.html): पारद शिवलिंग ------------------- अपने जीवन में भौतिक सुखों में कमी से ,परिवार में सौहार्द्र -सुख-समृद्धि में कमी से ,रोजगार -नौकरी की समस्या से ,अधिकारी वर्ग से ,कोर्ट कचहरी के विवादों से ,शत्रुओं से ,वायव्य अथवा ग्रह बाधाओं से ,राजकीय बाधाओं से ,असाध्य अथवा दुह्साध्य रोगों से ,तांत्रिक अभिचार अथवा शत्रुता वश किये गए तांत्रिक - [व्यापार वृद्धि कवच](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-वृद्धि-कवच/2025/03/व्यापार-वृद्धि-कवच.html): व्यापार-व्यवसाय वृद्धि कवच =================== कई बार अच्छा चलता व्यापार अचानक ही मंदा हो जाता है |एक ही व्यवसाय से सम्बंधित कई दुकाने आसपास होने पर भी किसी का व्यवसाय चलता है किसी का नहीं चलता |सामने बहुत बीद होती है पर उसके सामने कोई देखता तक नहीं या कम लोग आते हैं |इसका प्रभाव - [श्री विद्या यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-विद्या-यन्त्र-कवच/2025/03/श्री-विद्या-यन्त्र-कवच.html): षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी] यन्त्र और उसका प्रभाव =============================== षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दशा महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र और यम चारो इनके अधीन हैं ,ये अन्य - [विजय कवच [ Vijay Kavach ]](https://alaukikshaktiyan.com/विजय-कवच-vijay-kavach/2025/03/विजय-कवच-vijay-kavach.html): विजय कवच /ताबीज ==============- विजय कवच हर जगह ,हर समस्या में सबके लिए सामान रूप से लाभदायक है |विजय कवच में विभिन्न उच्च शक्तियों के यन्त्र प्रतिष्ठित किये जाते हैं जैसे बगलामुखी ,महाकाली ,मृत्युंजय महादेव ,श्यामा मातंगी ,मातंगी ,उच्छिष्ट गणपति ,छिन्नमस्तिका ,नील तारा ,काल भैरव ,नृसिंह ,पंचमुखी हनुमान ,भुवनेश्वरी ,त्रिपुरसुन्दरी श्री विद्या ,महालक्ष्मी ,कमला - [महालक्ष्मी सर्वतोभद्र यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महालक्ष्मी-सर्वतोभद्र-यन/2025/03/महालक्ष्मी-सर्वतोभद्र-यन.html): ::::::महालक्ष्मी सर्वतोभद्र यन्त्र :::::: ======================== यन्त्र रचना वर्ष में केवल एक बार दीवाली की रात्री में की जाती है ,इसे भोजपत्र पर अनार की कलम से अष्टगंध की स्याही से लिखा जाता है ,पश्चात पीले आसन पर प्रतिष्ठित कर प्राण प्रतिष्ठा और पूजन करें | पूजन-जप के बाद गुगुल का धुप और गुगुल से - [शेयर -सट्टा -लाटरी में सफलता कवच से](https://alaukikshaktiyan.com/शेयर-सट्टा-लाटरी-में-सफलत/2025/03/शेयर-सट्टा-लाटरी-में-सफलत.html): जुआ /सट्टा /लाटरी /शेयर/कमोडिटी में सफलता हेतु कवच ======================================= धरती पर हर जिव अधिकतम सुखी रहना चाहता है ,मनुष्य के पास बुद्धि है तो वह अधिक प्रयास करता है |सुख के लिए धन चाहिए होता है तथा लोग धन के लिए अनेकानेक प्रयास लगातार करते रहते हैं |अपने कर्म के साथ साथ लोग आकस्मिक - [नवग्रह कवच /ताबीज [Navagraha Kavach]](https://alaukikshaktiyan.com/नवग्रह-कवच-ताबीज-navagraha-kavach/2025/03/नवग्रह-कवच-ताबीज-navagraha-kavach.html): नवग्रह शांति कवच /ताबीज ================== व्यक्ति का जीवन ग्रहों से प्रभावित होता है |इनकी रश्मियों की प्रकृति और मात्रा जन्म समय व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण करती है जबकि इनकी प्रतिदिन की चाल उसी जन्मकालिक प्रभावों के अनुसार प्रतिदिन के क्रियाकलाप निश्चित करती है |इनके प्रभावानुसार व्यक्ति का शरीर और उसके अवयव बने होते - [कालसर्प कवच /ताबीज [kalsarp]](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-कवच-ताबीज-kalsarp/2025/03/कालसर्प-कवच-ताबीज-kalsarp.html): कालसर्प दोष निवारक कवच =================== कालसर्प योग अथवा दोष का नाम मूल शास्त्रीय ग्रंथों में उल्लिखित नहीं है और वहां इतना हौवा भी नहीं इस योग का |मूल ग्रंथों में राहू -केतु के बीच सभी ग्रहों के आ जाने को एक योग अवश्य माना जाता है और इसके भिन्न प्रभाव भी होते हैं |आज - [राहू कवच /ताबीज [Rahu Kavach]](https://alaukikshaktiyan.com/राहू-कवच-ताबीज-rahu-kavach/2025/03/राहू-कवच-ताबीज-rahu-kavach.html): :::::राहू दोष निवारक कवच ::::: ===================== राहू -केतु का नाम सुनते ही हर व्यक्ति को भय महसूस होता है |ऐसा इनके द्वारा उत्पन्न प्रभावों के कारण होता है |इससे अधिक आधुनिक ज्योतिषियों द्वारा इनके नाम पर भयादोहन भी है और इन्हें ही हर प्रकार की समस्या का कारण मानना भी है ,जबकि यह मात्र - [साढ़ेसाती अच्छी होगी या बुरी ?](https://alaukikshaktiyan.com/साढ़ेसाती-अच्छी-होगी-या-ब/2025/03/साढ़ेसाती-अच्छी-होगी-या-ब.html): कल्याणकारी भी है शनि साढ़े साती ======================= शनि कि साढ़े साती यानी शनि का आपकी राशि के आस पास भ्रमण आज इस शब्द से भी लोग डर जाते हैं और हर शनिवार शनि को तेल तिल और पता नहीं क्या क्या अर्पण करके लोग निश्चिन्त हो जाते हैं कि अब शनि कुछ नहीं करेगा |यह - [बेटी को मायके से स्टील बर्तन नहीं लेने चाहिए](https://alaukikshaktiyan.com/बेटी-को-मायके-से-स्टील-बर्/2025/03/बेटी-को-मायके-से-स्टील-बर्.html): साम -दाम -दंड भेद सिखाता है राहू ======================== राहु छुपे हुए रहस्यों, तंत्र, मंत्र, काला जादू व भूत प्रेत का कारक है।| राहु की तामसिक प्रवृत्ति के कारण वह चालाक है| और व्यक्ति को भौतिकता की ओर पूर्णतया अग्रसर करता है, ,बहुत महत्वाकांक्षी व लालची बनाता है,, जिसके लिए व्यक्ति साम-दाम-दंड-भेद की नीतियां अपनाकर - [राहू का जन्म कैसे हुआ था ?](https://alaukikshaktiyan.com/राहू-का-जन्म-कैसे-हुआ-था/2025/03/राहू-का-जन्म-कैसे-हुआ-था.html): राहू क्या -क्या कष्ट देता है ? =================== पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ,हिरन्यकश्यप की सिंहिका नामक पुत्री का विवाह विप्रचिति नामक दानव के साथ हुआ था |उसी के गर्भ से राहु ने जन्म लिया। विप्रचिति हमेशा दानवी शक्तियों, आसुरी शक्तियों से दूर रहे ,और साथ ही समुद्र मंथन के समय अमृतपान के कारण राहु - [हस्तरेखा से शनि प्रभाव जानें](https://alaukikshaktiyan.com/हस्तरेखा-से-शनि-प्रभाव-जा/2025/03/हस्तरेखा-से-शनि-प्रभाव-जा.html): हस्तरेखा में शनि रेखा का प्रभाव-दुष्प्रभाव ============================= आकाश में भ्रमण कर रहे शनि ग्रह की रेखा भी विशिष्ट है। यह बल्यधारी ग्रह अपने नीलाभवर्ण और चतुर्दिक मुद्रिका-कार आभायुक्त बलय के कारण बहुत ही शोभन प्रतीत होता है। यह ग्रह अपनी अशुभ स्थिति में मनुष्य को ढाई वर्ष, साढे सात वर्ष, अथवा उन्नीस वर्षों तक - [लाल किताब से राहू -केतु -शनि के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/लाल-किताब-से-राहू-केतु-शनि/2025/03/लाल-किताब-से-राहू-केतु-शनि.html): शनि, राहु और केतु के उपाय..[लाल किताब]. ============================== शनि के अनुचर हैं राहु और केतु। शरीर में इनके स्थान नियुक्त हैं। सिर राहु है तो केतु धड़। यदि आपके गले सहित ऊपर सिर तक किसी भी प्रकार की गंदगी या खार जमा है तो राहु का प्रकोप आपके ऊपर मँडरा रहा है और यदि - [वैवाहिक जीवन पर शनि प्रभाव](https://alaukikshaktiyan.com/वैवाहिक-जीवन-पर-शनि-प्रभा/2025/03/वैवाहिक-जीवन-पर-शनि-प्रभा.html): शनि ग्रह व वैवाहिक जीवन ================= शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहते हैं और दुख हो या सुख दीर्घ काल तक देते हैं। यही सच है विवाह के सुखद, -दुखद, संतोषजनक, दीर्घ या लघु होने के मामले में भी। शनि सबसे धीरे चलने वाला ग्रह हैं। जहां चंद्रमा एक राशि में सवा दो - [तंत्रोक्त नवग्रह स्नान](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्रोक्त-नवग्रह-स्नान/2025/03/तंत्रोक्त-नवग्रह-स्नान.html): नवग्रह शांति के अचूक उपाय ======================- निम्न सामग्री को लेकर लगभग 8-10 लीटर पानी में डालकर खूब उबाल लें (लगभग १ घंटा ) । फिर इस पानी को रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दे । अगले दिन जब आप स्नान करने जाएँ तो इस liquid को छान कर किसी बर्तन में लगभग 2 - [कालसर्प कष्ट निवारण के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-कष्ट-निवारण-के-उप/2025/03/कालसर्प-कष्ट-निवारण-के-उप.html): कालसर्प योग और निवारण के विविध उपाय ---------------------------------------------------- कालसर्पयोग निवारण के अनेक उपाय हैं । इस योग की शांति विधि विधान के साथ योग्य विद्धान एवं अनुभवी ज्योतिषी, कुल गुरू या पुरोहित के परामर्श के अनुसार किसी कर्मकांडी ब्राह्मण से यथा योग्य समयानुसार करा लेने से दोष का निवारण हो जाता हैं । कुछ साधारण - [भोजन द्वारा ग्रह शांति](https://alaukikshaktiyan.com/भोजन-द्वारा-ग्रह-शांति/2025/03/भोजन-द्वारा-ग्रह-शांति.html): आपका भोजन और ग्रहों का प्रभाव ========================= मनुष्य के जीवन और पोषण के लिए भोजन एक आवश्यक अवयव है ,इसके बिना जीना संभव नहीं है |जन्म से लेकर मृत्यु तक इसके लिए मनुष्य सदैव प्रयासरत रहता है |मनुष्य के साथ ही पूरी पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्रत्येक वस्तु पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता - [कालसर्प योग के लक्षण](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-योग-के-लक्षण/2025/03/कालसर्प-योग-के-लक्षण.html): कालसर्प योग [दोष ]के लक्षण ===================== कालसर्प योग या आधुनिक ज्योतिषियों के अनुसार दोष में उत्पन्न जातक यद्यपि राष्ट्रपति ,प्रधान मंत्री ,सेनापति ,बड़ा व्यवसायी कुछ भी हो सकता है किन्तु कुछ समस्याएं सबको जरुर मिलती हैं ,कुछ कमियां जीवन में स्थायी रूप से उत्पन्न हो ही जाती हैं अथवा कुछ स्वभावगत ,कर्मगत कमियां ही उत्पन्न - [गणेश उपासना से नवग्रह शांति](https://alaukikshaktiyan.com/गणेश-उपासना-से-नवग्रह-शां/2025/03/गणेश-उपासना-से-नवग्रह-शां.html): गणपति आराधना से नवग्रह शान्ति ======================= श्री गणेश की स्तुति मात्र से भक्तों के समस्त कष्ट मिट जाते हैं। वैसे तो पूरे साल और खासकर हर बुधवार को श्री गणेश की पूजा अर्चना करनी चाहिए किंतु श्री गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक राशि अनुसार गणेश आराधना करें अत्यंत फलदायक होता है।भगवान् गणेश एक - [कालसर्प योग कितने तरह का होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-योग-कितने-तरह-का-ह/2025/03/कालसर्प-योग-कितने-तरह-का-ह.html): कालसर्प दोष के प्रकार और अलग -अलग प्रभाव ------------------------------------------------- ज्योतिष के अनुसार जब राहू -केतु के अतिरिक्त अन्य सभी ग्रह राहू -केतु के मध्य होते हैं तो काल सर्प दोष होता है |यद्यपि मूल ज्योतिष शास्त्रों में इसे बहुत महत्त्व नहीं दिया गया है और दोष की जगह योग के रूप में ही परिभाषित - [कालसर्प योग और भ्रम](https://alaukikshaktiyan.com/कालसर्प-योग-और-भ्रम/2025/03/कालसर्प-योग-और-भ्रम.html): कालसर्प योग :: भ्रान्तियां और सामान्य प्रभाव ---------------------------------------------- कालसर्प योग आज के समय में ज्योतिष जगत और सामान्यजन में जाना-पहचाना नाम है |यह एक योग है जिसे आज दोष के रूप में परिभाषित किया जा रहा है और बहुत इसके नाम से डराया जाता है ,जबकि यह सभी अन्य ज्योतिषीय योगों की तरह एक - [राहू -केतु शान्ति](https://alaukikshaktiyan.com/राहू-केतु-शान्ति/2025/03/राहू-केतु-शान्ति.html): राहु-केतु: की शान्ति के उपाय ==================== राहू -केतु दोनों पापी ग्रह हैं जिनका स्वतंत्र भौतिक अस्तित्व तो नहीं है किन्तु यह सभी ग्रहों के प्रभावों को प्रभावित करते हैं |अधिकतर अशुभता व्यक्ति के जीवन में इनके ही कारण आती है यद्यपि कारण मूल ग्रहों से उत्पन्न होता है |यह छोटे से कारण को इतना - [शनि रक्षा कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-रक्षा-कवच-ताबीज/2025/03/शनि-रक्षा-कवच-ताबीज.html): ::::शनि दुष्प्रभाव निवारक कवच :::: =========================== इस दुनिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |शनि की पनौती ,ढईया ,अथवा साढ़ेसाती अक्सर सुनाई देते रहते हैं |इनके अतिरिक्त अक्सर महादशा ,अन्तर्दशा अथवा प्रत्यन्तरदशा अलग से परेशान करती रहती है |यही कारण है की शनि को - [कैसा भी शनि दोष हो दूर होगा](https://alaukikshaktiyan.com/कैसा-भी-शनि-दोष-हो-दूर-होगा/2025/03/कैसा-भी-शनि-दोष-हो-दूर-होगा.html): शनिदेव दुःख नहीं सुख देंगे ================== शनि ग्रह एक ऐसा ग्रह है जो सातो ग्रहों में सबसे क्रूर भी है और पापी भी |शनि से दुनिया के ४१.७ प्रतिशत लोग सदैव प्रभावित रहते हैं |१२ में से ३ राशियों पर तो शनि की हमेशा ही साधे साती रहती और दो राशियों पर इसकी ढईया रहती - [शनि जनित समस्याओं का निदान](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-जनित-समस्याओं-का-निदा/2025/03/शनि-जनित-समस्याओं-का-निदा.html): शनि ग्रह जनित समस्या और उपाय ========================= शनि को न्यायाधीश कहा जाता है |शनिदेव मनुष्य को उसके पाप और बुरे कार्यों आदि का दंड प्रदान करते हैं।ज्योतिष में शनि को पापी और क्रूर भी माना जाता है | शनिदेव के कारण गणेशजी का सिर छेदन हुआ।कहते हैं कि शनिदेव के कारण ही राम को वनवास - [राशि अनुसार आरोग्य औषधि](https://alaukikshaktiyan.com/राशि-अनुसार-आरोग्य-औषधि/2025/03/राशि-अनुसार-आरोग्य-औषधि.html): राशि के अनुसार रोगो का उपचार ===================== ब्रह्मांडीय ग्रहों ,नक्षत्रों का प्रभाव मनुष्य पर आजीवन पड़ता है |इन नक्षत्रों को १२ समूहों में बांटा गया है जिन्हें राशियाँ कहते हैं |प्रत्येक मनुष्य किसी एक राशि से मुख्य प्रभावित होता है और उसके गुण -अवगुण ,कमी -अधिकता ,दुर्गुण -विशेषता ,विशेष रोग और प्रतिरोधक क्षमता उस - [शनि कष्ट का तंत्रोक्त उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-कष्ट-का-तंत्रोक्त-उपा/2025/03/शनि-कष्ट-का-तंत्रोक्त-उपा.html): शनि जनित समस्या और तंत्रोक्त उपाय ========================== (1). शनि मुद्रिका शनिवार के दिन शनि मंत्र का जाप करते हुये धारण करें। काले घोडे की नाल प्राप्त कर घर के मुख्य दरवाजे परके ऊपर लगायें। (2). शनि यंत्र को शनिवार के दिन, शनि की होरा में अष्टगंध में भोजपत्र पर बनाकर उडद के आटे से दीपक - [शनि जनित कष्ट हेतु उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-जनित-कष्ट-हेतु-उपाय/2025/03/शनि-जनित-कष्ट-हेतु-उपाय.html): अशुभ शनि ::प्रभाव और उपाय ===================== जन्मकुंडली में शनि ग्रह अशुभ प्रभाव में होने पर व्यक्ति को निर्धन, आलसी, दुःखी, कम शक्तिवान, व्यापार में हानि उठाने वाला, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, अल्पायु निराशावादी, जुआरी, कान का रोगी, कब्ज का रोगी, जोड़ों के दर्द से पीड़ित, वहमी, उदासीन, नास्तिक, बेईमान, तिरस्कृत, कपटी, अधार्मिक - [चमत्कारी जमुनिया माला ](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-जमुनिया-माला/2025/03/चमत्कारी-जमुनिया-माला.html): चमत्कारी जमुनिया माला ================= हम सभी ने शनि ग्रह का नाम सूना हुआ है और इसके नाम से अधिकतर लोगों को डर भी लगता है |ग्रहों में सबसे अधिक उपाय इसी कि लोग करते हैं |कोई अमावश्या दान ,जल अर्पण ,दीप दान करता है तो कोई शनिवार को शनि पूजा और तेल आदि के - [शनि कैसे प्रसन्न हो ?](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-कैसे-प्रसन्न-हो/2025/03/शनि-कैसे-प्रसन्न-हो.html): शनि प्रसन्नता और शान्ति के उपाय ======================== हमने अक्सर सुना है कि पीपल के पेड़ पर प्रतिदिन जल चढ़ाने और दीपक लगाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। ऐसा है भी। लेकिन शनि को अकेला पीपल का पेड़ ही प्रसन्न नहीं करता अपितु कई ऐसे अन्य भी पेड़-पौधे हैं, जो शनि को प्रसन्न कर सकते - [अशुभ शनि क्या करता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अशुभ-शनि-क्या-करता-है/2025/03/अशुभ-शनि-क्या-करता-है.html): शनि के अशुभ होने को इन प्रमुख लक्षणों से जाना जा सकता है ============================================ * नशा करने का शौक लत बनने की ओर अग्रसर हो, व्यसन का रूप ग्रहण करे। * सट्टे/ जुए का शौक आदत बन जाए। * अनावश्यक झूठ बोलने का स्वभाव अशुभ शनि का प्रमुख लक्षण है। * अशुभ शनि अवैध एवं - [शनि स्तोत्र [Shani Stotra]](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-स्तोत्र-shani-stotra/2025/03/शनि-स्तोत्र-shani-stotra.html): दशरथ कृत शनि स्तोत्र =============== विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनि-स्तोत्र-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, सौरिर्देवता, शं बीजम्, निः शक्तिः, कृष्णवर्णेति कीलकम्, धर्मार्थ-काम-मोक्षात्मक-चतुर्विध-पुरुषार्थ-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। कर-न्यासः- शनैश्चराय अंगुष्ठाभ्यां नमः। मन्दगतये तर्जनीभ्यां नमः। अधोक्षजाय मध्यमाभ्यां नमः। कृष्णांगाय अनामिकाभ्यां नमः। शुष्कोदराय कनिष्ठिकाभ्यां नमः। छायात्मजाय करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः। हृदयादि-न्यासः- शनैश्चराय हृदयाय नमः। मन्दगतये शिरसे स्वाहा। अधोक्षजाय शिखायै वषट्। कृष्णांगाय कवचाय हुम्। शुष्कोदराय - [शनि का प्रभाव और निवारण के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-का-प्रभाव-और-निवारण-के/2025/03/शनि-का-प्रभाव-और-निवारण-के.html): शनि ग्रह ,उसका प्रभाव और कष्ट निवारण के कुछ उपाय ======================================= शनि ग्रह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है, शनि अध्यात्म का मुख्य कारक है। यह अनुकूल होने पर जातक को दीर्घायु देकर मालामाल कर देता है |यह नैसर्गिक ग्रहों में एकमात्र ऐसा ग्रह है जो क्रूर भी है और पापी भी है - [शनि का प्रभाव कहाँ -कब ?](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-का-प्रभाव-कहाँ-कब/2025/03/शनि-का-प्रभाव-कहाँ-कब.html): ज्योतिष में शनि ----------------- शनि ग्रह पृथ्वी से सबसे दूर का मूल ग्रह है जिसे सात मूल ग्रहों में स्थान दिया गया है |पौराणिक मान्यता के अनुसार शनि का जन्म सूर्य की द्वीतीय पत्नी छाया से हुआ है |ज्योतिषीय मतानुसार यह ग्रह पृथ्वी से ७९१०००००० मील की दूरी पर है |इसका व्यास ७१५०० मील - [शुक्र और दोषों का निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/शुक्र-और-दोषों-का-निवारण/2025/03/शुक्र-और-दोषों-का-निवारण.html): शुक्र ग्रह की शुभता-अशुभता और निवारण ================================== शुक्र ग्रह वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। यह संगीत, नृत्य, अभिनय, लेखन, गायन, चित्रकला आदि का मुख्य कारक है। यदि लग्नेश शुक्र भाग्य भवन में बैठ जायें तो जातक को उच्च धर्माधिकारी बनाता है और इसकी प्रतिकूलता तंबाखु, सिगरेट, शराब आदि व्यसनों के आधीन बनाती है। - [नाड़ी दोष और उपचार](https://alaukikshaktiyan.com/नाड़ी-दोष-और-उपचार/2025/03/नाड़ी-दोष-और-उपचार.html): नाड़ी दोष ======= आजकल लिव इन रिलेशन का ज़माना चल रहा भारत जैसे सनातन परंपरा और संस्कृति वाले देश में भी ,प्रेम विवाह हो रहे और इसी तरह रिश्ते भी टूट रहे |पहले कि अपेक्षा आज के समय में जीवन भर साथ रहने वाले दम्पतियों कि संख्या कम हो रही इसका एक कारण यह - [बृहस्पति और वैदिक -तांत्रिक उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/बृहस्पति-और-वैदिक-तांत्र/2025/03/बृहस्पति-और-वैदिक-तांत्र.html): वृहस्पति ग्रह की अशुभता अथवा इससे उत्पन्न कष्ट निवारण के उपाय =============================================== वैदिक- तांत्रिक -लाल किताब ----------------------------- ग्रहों में वृहस्पति सामान्यतया एक शुभ ग्रह माना जाता है ,किन्तु कुंडली में इसकी अशुभ भावों का स्वामी होना ,अथवा अशुभ प्रभाव में होना अथवा कमजोर होकर अशुभ स्थानों में स्थित होना अथवा अति प्रभावशीलता कष्ट कारक भी - [श्रापित तो नहीं है आप ?](https://alaukikshaktiyan.com/श्रापित-तो-नहीं-है-आप/2025/03/श्रापित-तो-नहीं-है-आप.html): कुंडली में श्राप योग /श्रापित कुंडली ====================== श्रापित दोष का मतलब हुआ किसी व्यक्ति को श्राप मिला हुआ होना। श्राप कई तरह का होता है |पित्र श्राप ,मातृ श्राप ,मातुल श्राप ,भ्रातृ श्राप ,ब्राह्मण श्राप ,सर्प श्राप ,प्रेत श्राप ,गुरु श्राप ,ऋषि श्राप ,गौ श्राप आदि |इनमे से कुछ श्रापों को ज्योतिषीय आधार पर - [बुध और शान्ति के ज्योतिषीय तथा तंत्रिकीय उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/बुध-और-शान्ति-के-ज्योतिषी/2025/03/बुध-और-शान्ति-के-ज्योतिषी.html): बुध ग्रह और उसकी शान्ति के ज्योतिषीय तथा तंत्रिकीय उपाय ================================================ नवग्रहों में बुध ग्रह सूर्य के सबसे समीप का ग्रह है |यह सदैव लगभग सूर्य से एक राशि आगे पीछे अथवा साथ में चक्रमण करता है |इसे नवग्रह में कुमार की संज्ञा प्राप्त है |बुध ग्रह मिथुन व कन्या राशि का स्वामी है - [मांगलिक दोष का निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/मांगलिक-दोष-का-निवारण/2025/03/मांगलिक-दोष-का-निवारण.html): मांगलिक/कुजा/मंगल दोष ================= भारतीय ज्योतिषियों के मुताबिक, मांगलिक दोष कुंडली में तब उत्पन्न होता है जब मंगल ग्रह 1, 4, 7, 8 या 12 घर में बैठा हो। इनमें से किसी भी घर में यदि मंगल मौजूद हो, तो मांगलिक या कुजा दोष कुंडली में आ जाता है। कुछ ज्योतिष इसके दूसरे घर में मौजूद - [मांगलिक दोष का स्वतः निराकरण](https://alaukikshaktiyan.com/मांगलिक-दोष-का-स्वतः-निरा/2025/03/मांगलिक-दोष-का-स्वतः-निरा.html): मांगलिक दोष विचार और उसका ग्रह स्थितियों द्वारा परिहार =============================================== मंगल एक उत्तेजक और उग्र ग्रह है यह अपनी स्थिति और दृष्टि से व्यक्ति को भावानुसार प्रभावित करता है ,,,जन्म कुंडली में मंगल की १,४,७,८,१२ भावो में उपस्थिति दाम्पत्य जीवन की स्थिरता ,समरसता ,आयु पर गहरा प्रभाव डालती है |माना जाता है की मंगलीक - [मंगल और शान्ति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/मंगल-और-शान्ति-के-उपाय/2025/03/मंगल-और-शान्ति-के-उपाय.html): मंगल और उसकी शान्ति के उपाय ======================= .मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है और ग्रहों में सेनापति है, दशम स्थान का कारक है। इसके शुभ होने पर उच्च राजयोग बनता है, जातक में नेतृत्व क्षमता आती है।पराक्रम-साहस आता है | इसकी प्रतिकूलता होने पर जीवन में पदोन्नति में बाधायें आती हैं और - [Mangalik yog/dosh](https://alaukikshaktiyan.com/mangalik-yog-dosh/2025/03/mangalik-yog-dosh.html): ::::::मांगलिक दोष :::::: ================ मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है.इसे पाप ग्रह माना जाता है. विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है. मंगल दोष जिसे मंगली के नाम से जाना जाता है इसके कारण कई स्त्री और पुरूष आजीवन अविवाहित ही रह जाते हैं. किन्तु विभिन्न स्थानों पर - [नवग्रह ध्यान मन्त्राः [साधुसङ्कुलि तन्त्रान्तर्गतम् ]](https://alaukikshaktiyan.com/नवग्रह-ध्यान-मन्त्राः-सा/2025/03/नवग्रह-ध्यान-मन्त्राः-सा.html): नवग्रह ध्यान मन्त्राः [साधुसङ्कुलि तन्त्रान्तर्गतम् ] ================================== ग्रहपुरश्चरण प्रयोगः --------------------- ॐ रक्तपद्मासनं देवं चतुर्बाहुसमन्वितम् । क्षत्रियं रक्तवर्ण गोत्रं काश्यपसम्भवम् ॥ सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं सर्वसिद्धिदम् । द्विभुजं रक्तपद्मैश्च संञ्चयुक्तं परमाद्भुतम् ॥ कलिङ्गदेशजं देवं मौलिमाणिक्यभूषणम् । त्रिनेत्रं तेजसा पूर्णमुदयाचलसंस्थितम् ॥ द्वादशाङ्गुल-विस्तीर्णं प्रवरं घृतकौशिकम् । शिवाधिदैवं पुर्वास्यं ब्रह्मप्रत्यधिदैवतम् ॥ क्लीं ऐं श्रीं ह्रीं सूर्याय नमः । ॐ शुक्लं शुक्लाम्बरधरं - [चन्द्रमा की अशुभता और निराकरण](https://alaukikshaktiyan.com/चन्द्रमा-की-अशुभता-और-निर/2025/03/चन्द्रमा-की-अशुभता-और-निर.html): चन्द्रमा की अशुभता और निराकरण ============================ चन्द्रमा सामान्यतया एक उपग्रह है ,किन्तु पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होने से सर्वाधिक प्रभावित भी यह पृथ्वीवासियों और पृथ्वी को करता है |तंत्र में इसका स्थान सूर्य से भी उपर है और कुछ ज्योतिष ग्रंथों में इसे सूर्य से अधिक महत्त्व भी प्राप्त है |इसके अपने गूढ़ कारण - [आदित्य ह्रदय स्तोत्र [Adityahridaya Stotram]](https://alaukikshaktiyan.com/आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र-adityahridaya-stotram/2025/03/आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र-adityahridaya-stotram.html): आदित्य ह्रदय स्तोत्र [Adityahridaya Stotram] ====================================== हिन्दूधर्म में भगवान सूर्यदेव की उपासना सेहत और ऊर्जा देने वाली मानी गई है। ये दोनों बातें सफलता, यश व प्रतिष्ठा बढ़ाती हैं। खासतौर पर पितृपक्ष में सूर्य पूजा तो पितृदोष की वजह बनने वाले सभी ग्रहों की शांति कर तमाम परेशानियों को दूर कर देती है। सूर्य उपासना - [सूर्य और अशुभता का निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/सूर्य-और-अशुभता-का-निवारण/2025/03/सूर्य-और-अशुभता-का-निवारण.html): सूर्य ग्रह की अशुभता और निराकरण ============================= सूर्य सिंह राशि का स्वामी है ,यह दशम स्थान में शुभ फलदायी ,आत्म कारक तथा पितृ कारक होता है |इसकी अशुभता से जातक आलसी ,भयालु ,पितृ वैरी होता है |नौकरी व् व्यवसाय में बार बार विघ्न आते हैं |व्यापारिक कार्यों में असफलता मिलती है |जातक राजकीय प्रकोप का - [Matangi kavach[मातंगी कवच]](https://alaukikshaktiyan.com/matangi-kavachमातंगी-कवच/2025/03/matangi-kavachमातंगी-कवच.html): मातंगी कवच ========= बौद्धिक क्षमता ,बुद्धि ,ज्ञान बढाने वाली दो देवियाँ हैं सरस्वती और मातंगी |सरस्वती जी त्रिदेवियों में आती है जबकि मातंगी देवी महाविद्या हैं |सरस्वती जी पूर्ण सात्विक ,कोमल और भावुक देवी हैं किन्तु मातंगी देवी में थोड़ी उग्रता और राजसिकता है |सामान्यतया सरस्वती जी आयुध ,शस्त्र धारण नहीं करती किन्तु मातंगी - [बच्चा पढता नहीं :मातंगी कवच धारण कराइए](https://alaukikshaktiyan.com/बच्चा-पढता-नहीं-मातंगी-कव/2025/03/बच्चा-पढता-नहीं-मातंगी-कव.html): बच्चा पढता नहीं :मातंगी कवच धारण कराइए ==================================== हमने अपने website पर बच्चे बिगड़ रहे बात नहीं मानते या बिगड़े बच्चों सुधारें आदि विषय पर तांत्रिक उपाय और कवच ताबीज के बारे में पहले बताया है ,हम आपको उन बच्चों ,किशोरों ,युवाओं के लिए tabij के विषय में बता रहे जिनका ध्यान पढ़ाई में - [कौड़ियों से धन लाभ](https://alaukikshaktiyan.com/कौड़ियों-से-धन-लाभ/2025/03/कौड़ियों-से-धन-लाभ.html): लक्ष्मी प्राप्ति में सहायक हैं कौड़ियाँ ========================= कौड़ियों का प्रयोग प्राचीन काल से विभिन्न कार्यों में होता आया है |तंत्र में तो इनका अत्यधिक महत्त्व रहा है ,जबकि जनमानस में भी पहले इनका बहुत प्रचालन था |आधुनिक लोग इसके प्रयोग को भूल गए हैं किन्तु व्यवसायी और धन का लें दें करने वाले - [शाम्भवी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/शाम्भवी-प्रयोग/2025/03/शाम्भवी-प्रयोग.html): कैसे पता करें अपने घर में नकारात्मक ऊर्जा अथवा तंत्र प्रयोग है की नहीं ================================================== (शाम्भवी प्रयोग) -------------------- बहुत से लोगो को शंका होती है उनके घरों में भुत प्रेत या फिर किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा है,जिन्हें अपने घर में किसी साये की मौजूदगी का एहसास होता है या अकेले होने पर लगता - [टोटके /भूत विद्या का विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/टोटके-भूत-विद्या-का-विज्ञ/2025/03/टोटके-भूत-विद्या-का-विज्ञ.html): टोटका /भूत विद्या का विज्ञान ====================== शास्त्रों में चिकित्सा के आठ अंग माने गए हैं, जिनमें एक भूत-विद्या भी है । ‘टोटका’ इस भूत-विद्या का ही एक सूक्ष्म अंग माना जाता है । कई विद्वान इसे पदार्थ-विज्ञान से भी जोड़ते हैं । जिस प्रकार प्राणियों के शरीर में एक अदृश्य-सी विशेष शक्ति विद्यमान रहती - [रुद्राक्ष से कैसे लाभ उठायें](https://alaukikshaktiyan.com/रुद्राक्ष-से-कैसे-लाभ-उठा/2025/03/रुद्राक्ष-से-कैसे-लाभ-उठा.html): रुद्राक्ष के लाभ ============ विवाह की अड़चने दूर करे रुद्राक्ष ====================== सोमवार के दिन अविवाहित कन्या एक रुद्राक्ष और पांच विल्व पत्र लेकर भगवान् शिव के मंदिर में जाए और विल्व पत्रों के साथ रुद्राक्ष शिव जी को अर्पित करे अर्थात चढ़ा दे तो विवाह में आ रही अड़चने दूर होती हैं | घर की - [किसे -कैसा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए](https://alaukikshaktiyan.com/किसे-कैसा-रुद्राक्ष-धारण/2025/03/किसे-कैसा-रुद्राक्ष-धारण.html): व्यवसाय या पद के अनुसार रुद्राक्ष धारण ============================ रुद्राक्ष पद और व्यवसाय के अनुसार धारण करना अधिक लाभप्रद रहता है ,आवश्यकता के अनुसार विभिन्न गुणों का प्रतिनिधित्व करने वाले रुद्राक्ष धारण से सफलता बढ़ सकती है ,जो इनके मुखो के अनुसार विशिष्ट होता है | सांसद ,विधायक ,नेता : एक मुखी ,चौदहमुखी प्रशासनिक अधिकारी - [रुद्राक्ष की अलौकिक शक्तियां](https://alaukikshaktiyan.com/रुद्राक्ष-की-अलौकिक-शक्त/2025/03/रुद्राक्ष-की-अलौकिक-शक्त.html): :::::रुद्राक्ष = पृथ्वी पर अलौकिक ऊर्जा का रूप :::::: ======================================= रुद्राक्ष में स्वयं शिव का अंश होता है,, रुद्राक्ष को,शिवाक्ष,.शर्वाक्ष,भावाक्ष,फलाक्ष,भूतनाशन,पावन,हराक्ष, नीलकंठ,तृणमेरु,शिवप्रिय, अमर और पुष्पचामर भी कहते हैं,यह शिव को अत्यंत प्रिय है |, आयुर्वेद के ग्रंथों में भी रुद्राक्ष की महामहिमा का वर्णन है,| आयुर्वेदिक ग्रंथों में रुद्राक्ष को महौषधि,दिव्य औषधि आदि कह कर - [होलिका में दहन करें अशुभ बाधायें](https://alaukikshaktiyan.com/होलिका-में-दहन-करें-अशुभ-ब/2025/03/होलिका-में-दहन-करें-अशुभ-ब.html): सुख सुरक्षा के लिए =========== होली का पर्व उपाय की दृष्टि से अत्यधिक फल देने वाला होता है इस दिन किए गए टोटके शीघ्र फल देते हैं, होली के दिन वास्तु यंत्र को पीले रंग के वस्त्र पर स्थापित कर लें। उसका पहले धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर पूजन करें और निम्न मंत्र को 75 - [होली के चमत्कारिक उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/होली-के-चमत्कारिक-उपाय/2025/03/होली-के-चमत्कारिक-उपाय.html): होली पर भर लें अपने भण्डार गृह ====================== जिस स्थान पर होली जलाई जाती रही हो, वहां पर होली जलने से एक दिन पहले की रात्री में एक मटकी में गाय का घी, तिल का तेल, गेहूं और ज्वार तथा एक ताम्बे का पैसा रखकर मटकी का मुंह बंद करके गाड़ आएं। रात्रि में जब - [धनवान बना सकता है अवचेतन मन](https://alaukikshaktiyan.com/धनवान-बना-सकता-है-अवचेतन-म/2025/03/धनवान-बना-सकता-है-अवचेतन-म.html): आप अपना उपचार खुद कर सकते हैं कैंसर ,एड्स ,डेंगू ठीक कर सकता है आपका ही अवचेतन मन ----------------------------------------------------------------------------- उपचार का नाम आते ही डाक्टर का चेहरा सामान्यतया उभरता है यादों में ,पर क्या वास्तव में डाक्टर ही उपचार करता है |अगर ध्यान से देखें तो उपचार हमारा खुद का शरीर ही करता है - [विश्वास से चमत्कार होता है](https://alaukikshaktiyan.com/विश्वास-से-चमत्कार-होता-ह/2025/03/विश्वास-से-चमत्कार-होता-ह.html): रोग ठीक कर सकता है ,और रोग दे भी सकता है आपका अवचेतन ---------------------------------------------------------------------------------- आपके मानसिक कार्यों का विभाजन करके एक कार्य चेतन मन को और दूसरा कार्य अवचेतन मन करता है |आपका अवचेतन मन सुझाव की शक्ति का हमेशा पालन करता है |आपके शरीर के सभी कार्यों ,स्थितियों और अनुभूतियों पर आपके अवचेतन - [धार्मिक चिकित्सा का विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/धार्मिक-चिकित्सा-का-विज्/2025/03/धार्मिक-चिकित्सा-का-विज्.html): धर्मस्थलों के चमत्कार अवचेतन मन पर निर्भर हैं ------------------------------------------------------------ दुनिया का हर धर्म अंतर्मन को ही सर्वाधिक महत्व देता है क्योकि सभी प्रवर्तक और ज्ञानी जानते हैं की सारा खेल इस अंतर्मन का ही है और सारे चमत्कार इसी के द्वारा होते हैं |भले ईश्वर सर्वत्र विद्यमान हो पर यदि अंतर्मन व्यक्ति का नहीं - [उन्नति का सूत्र आपके अंदर है](https://alaukikshaktiyan.com/उन्नति-का-सूत्र-आपके-अंदर/2025/03/उन्नति-का-सूत्र-आपके-अंदर.html): सफलता के लिए कुछ सुझाव ----------------------------------- १. आपका आतंरिक मन अर्थात अवचेतन मन आपके शरीर की सभी महत्वपूर्ण क्रियाओं का नियंत्रण करता है जबकि आपको इसका भान तक नहीं होता |क्या कभी सोचा है की यह सब कैसे अपने आप होता रहता है ,आप तो ईश्वर की रचना मान संतुष्ट हो लेते हैं पर क्या - [धर्मगुरुओं की उपचारक शक्ति का रहस्य](https://alaukikshaktiyan.com/धर्मगुरुओं-की-उपचारक-शक्/2025/03/धर्मगुरुओं-की-उपचारक-शक्.html): अवचेतन की शक्ति का उपयोग युगों युगों से है --------------------------------------------------------- विभिन्न धर्मों ,सम्प्रदायों ,संस्कृतियों ,महाद्वीपों में युगों युगों से अवचेतन मन की उपचारक शक्ति का उपयोग होता आया है ,भले उनको इसके तकनीक का वास्तविक ज्ञान न रहा हो अथवा वह यह न जानते रहे हों की यह अवचेतन के चमत्कार हैं अथवा वे - [आदत और स्वभाव कैसे बदलें ?](https://alaukikshaktiyan.com/आदत-और-स्वभाव-कैसे-बदलें/2025/03/आदत-और-स्वभाव-कैसे-बदलें.html): अवचेतन शरीर को नियंत्रित करता है ========================= चाहे आप जागे हो या सोये ,आपके अवचेतन मन की अथक शक्ति आपके शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है |इसमें आपके चेतन मन के किसी तरह के दखल की जरुरत नहीं होती है |जब आप सो जाते हैं तो भी आपका ह्रदय धड़कता रहता - [आपका शरीर खुद कैंसर समाप्त कर सकता है](https://alaukikshaktiyan.com/आपका-शरीर-खुद-कैंसर-समाप्/2025/03/आपका-शरीर-खुद-कैंसर-समाप्.html): आपका अवचेतन कैंसर और लकवा से भी मुक्ति दिला सकता है ----------------------------------------------------------------------------- एक धर्मगुरु से बहुत पहले मेरी मुलाक़ात हुई और उन्होंने बताया की वे बुरी तरह फ़ैल चुके फेफड़े के कैंसर से कैसे उबरे |उन्होंने पूर्ण स्वास्थ्य के विचार को अवचेतन तक पहुंचाकर यह चमत्कारी परिणाम पाया |मेरे आग्रह पर उन्होंने मुझे उस - [आपका शरीर कोई भी रोग ठीक कर सकता है](https://alaukikshaktiyan.com/आपका-शरीर-कोई-भी-रोग-ठीक-कर/2025/03/आपका-शरीर-कोई-भी-रोग-ठीक-कर.html): आपका अवचेतन आँखों की रौशनी लौटा सकता है ------------------------------------------------------------- हमने आपकी आतंरिक अलौकिक शक्तियों पर अनेक लेख लिखे हैं जिनमे हमने आपको आपकी क्षमताओं ,शक्तियों और अद्वितीय उर्जा के बारे में बताने का प्रयत्न किया है | हमने तंत्र ,अध्यात्म ,कुंडलिनी ,ज्योतिष ,अवचेतन की आतंरिक शक्तियों का गहन अध्ययन किया है ,समझा ,सोचा ,तर्क - [सदैव स्वस्थ रहेंगे विचार बदलिए](https://alaukikshaktiyan.com/सदैव-स्वस्थ-रहेंगे-विचार/2025/03/सदैव-स्वस्थ-रहेंगे-विचार.html): रोग -कष्ट का इलाज है अवचेतन में =========================== आपके अवचेतन मन की शक्ति अतुलनीय और असीमित है |आपका अवचेतन मन आपको प्रेरित करता है और मार्गदर्शन देता है |यह यादों के भण्डार से तस्वीरें और दृश्य निकालकर लाता है |आपका अवचेतन आपके दिल की धड़कन और रक्त संचार नियंत्रित करता है |यह पाचन और - [एक शब्द आपको बदल डालेगा](https://alaukikshaktiyan.com/एक-शब्द-आपको-बदल-डालेगा/2025/03/एक-शब्द-आपको-बदल-डालेगा.html): जीवन के लिए आधार वाक्य जरुर बनाएं ============================ किसी भी व्यक्ति की सफलता या असफलता में उसके अन्दर अवचेतन में बैठी हुई बातें ,भावनाएं सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं |आपके सामने कोई बड़ा काम आ गया या कम समय में कुछ कार्य आपको करना हो गया और सुनते ही आपके मन में विचार उठा - [किसी की सलाह मत मानो बिना समझे](https://alaukikshaktiyan.com/किसी-की-सलाह-मत-मानो-बिना-स/2025/03/किसी-की-सलाह-मत-मानो-बिना-स.html): एक सुझाव किसी का जीवन नष्ट अथवा समाप्त कर सकता है ========================================= सुझाव अथवा सलाह देना एक सार्वभौम हक़ लोगों को लगता है |जिसे देखो दुसरे को सलाह देता नजर आता है |भले दुसरे की परिस्थिति न जानता हो ,समस्या न समझता हो ,क्षमता न देखता हो कितु हर कोई सलाह बिन मागे दे - [अपनों की सलाह भी कभी खतरनाक हो सकती है](https://alaukikshaktiyan.com/अपनों-की-सलाह-भी-कभी-खतरना/2025/03/अपनों-की-सलाह-भी-कभी-खतरना.html): आपको मिल रहे सुझाव और सलाह आपको सफल-असफल बनाते हैं ============================================= सुझाव दो तरह के होते हैं ,आत्म सुझाव अर्थात जो सुझाव हम खुद से खुद को देते हैं और दूसरा दूसरों द्वारा दिया गया सुझाव या सलाह |हर साधन की तरह इसके भी गलत प्रयोग से नुक्सान हो सकता है ,लेकिन सही तरीके - [सफलता आपके अन्दर ही होती है](https://alaukikshaktiyan.com/सफलता-आपके-अन्दर-ही-होती-ह/2025/03/सफलता-आपके-अन्दर-ही-होती-ह.html): आपके सुझाव आपको सफल असफल बनाते हैं ---------------------------------------------------------- चेतन मन को कई बार यथार्थवादी मन कहा जाता है ,क्योकि उसका सम्बन्ध बाहरी वस्तुओं से होता है |यथार्थवादी मन बाहरी दुनिया के प्रति जागरूक रहता है |इसके अवलोकन के साधन आपकी पांच इन्द्रियां हैं |आपका यथार्थवादी मन आपके परिवेश से संपर्क का मार्गदर्शक और निर्देशक - [सफलता आपके कदम चूमेगी](https://alaukikshaktiyan.com/सफलता-आपके-कदम-चूमेगी/2025/03/सफलता-आपके-कदम-चूमेगी.html): आपकी सफलता आपके हाथ में है ------------------------------------ आपका मष्तिष्क आपकी सबसे कीमती संपत्ति है |यह हमेशा आपके साथ है |लेकिन इसकी अद्भुत शक्तियां तभी आपको मिल पाएंगी जब आप इसका उपयोग करना सीख लेंगे |हमारा कहने का तात्पर्य यह नहीं की आप अपनी मष्तिष्क या बुद्धि का उपयोग नहीं करते ,अपितु हम यह कहना - [सबकुछ पा सकते हैं आप](https://alaukikshaktiyan.com/सबकुछ-पा-सकते-हैं-आप/2025/03/सबकुछ-पा-सकते-हैं-आप.html): आप सबकुछ पा सकते हैं ,सोचें तो इस ओर -------------------------------------------------------- अगर आप किसी भी क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं तो इसके लिए एक अनिवार्य पहला कदम है |आपको एक शाश्वत कार्यकारी आधार का पता लगाना होगा |अपने अवचेतन मन की कार्यविधि में निपुण बनने के लिए आपको इसके सिद्धांतों को समझना होगा |तभी - [प्रार्थना से कैसे चमत्कार होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/प्रार्थना-से-कैसे-चमत्का/2025/03/प्रार्थना-से-कैसे-चमत्का.html): आपकी प्रार्थना से चमत्कार होते हैं ----------------------------------- प्रार्थना एक ऐसा शब्द है जो दुनिया के हर धर्म में ,हर सम्प्रदाय में ,हर जाती में ,हर वर्ग में यहाँ तक की हर व्यक्ति में पायी जाती है ,भले वह व्यक्ति नास्तिक हो ,वह वर्ग ,धर्म ईश्वर को न मानता हो ,अथवा साकार न मानता हो - [आपके अंदर खजाना छुपा हुआ है ?](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-अंदर-खजाना-छुपा-हुआ-ह/2025/03/आपके-अंदर-खजाना-छुपा-हुआ-ह.html): आपके पास बहुत बड़ा खजाना है ,निकालो उसे और सुखी हो जाओ ===================================================== आप जीवन में जन्म से संघर्ष कर रहे हैं ,करते जा रहे हैं ,दयनीयता ,दरिद्रता ,दुखों में जीते जा रहे हैं जबकि आप अथाह संपत्ति के मालिक हैं ,पर आपको खुद पता ही नहीं है |सामने कोई प्रापर्टी नही है ,बैंक - [पित्र दोष के सरल उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-दोष-के-सरल-उपाय/2025/03/पित्र-दोष-के-सरल-उपाय.html): पितृ दोष निवारण के सरल ज्योतिषीय उपाय : =============================== जन्म कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम व दशम भावों में से किसी एक भाव पर सूर्य-राहु अथवा सूर्य-शनि का योग हो तो जातक को पितृ दोष होता है। यह योग कुंडली के जिस भाव में होता है उसके ही अशुभ फल घटित - [पितृ दोष के ज्योतिषीय उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/पितृ-दोष-के-ज्योतिषीय-उपा/2025/03/पितृ-दोष-के-ज्योतिषीय-उपा.html): पितृ दोष निवारण के ज्योतिषीय उपाय : --------------------------------------------- जन्म कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम व दशम भावों में से किसी एक भाव पर सूर्य-राहु अथवा सूर्य-शनि का योग हो तो जातक को पितृ दोष होता है। यह योग कुंडली के जिस भाव में होता है उसके ही अशुभ फल घटित होते - [पित्र कवच और पितृ सूक्त](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-कवच-और-पितृ-सूक्त/2025/03/पित्र-कवच-और-पितृ-सूक्त.html): पितृ-सूक्त और पितृ कवच =================== आज के समय में ‘पितृ-दोष’ लगातार फैलता जा रहा है। किसी के घर में ‘पितृ-दोष’ है, तो कहीं किसी की ‘जन्म-कुण्ड़ली’ में ‘पितृ-दोष’ पाया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण तो यह है कि ‘कुल-पुरोहित’ का न होना। दो, तीन दशक पहले तक सभी घरों के अपने-अपने ‘कुल-पुरोहित’ होते - [पित्र दोष का प्रभाव और निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-दोष-का-प्रभाव-और-निव/2025/03/पित्र-दोष-का-प्रभाव-और-निव.html): पित्र दोष :: प्रभाव ,कारण ,निवारण ========================= घर में पितृ दोष होगा तो घर के बच्चे की शिक्षा , दिमाग , बाल , व्यवहार पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता । * जिन जातकों को पितृ दोष होता है उनके बहुत से कारण होते है की हमारे अपने पितरों से सम्बन्ध अच्छे नहीं हो पाते , - [पित्र शांति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-शांति-के-उपाय/2025/03/पित्र-शांति-के-उपाय.html): पितृ-दोष कि शांति के उपाय ===================== पित्र दोष की शान्ति के सामान्य उपायों में षोडश पिंड दान ,सर्प पूजा ,ब्राह्मण को गौ -दान ,कन्या -दान,कुआं ,बावड़ी ,तालाब आदि बनवाना ,मंदिर प्रांगण में पीपल ,बड़(बरगद) आदि देव वृक्ष लगवाना एवं विष्णु मन्त्रों का जाप आदि करना,प्रेत श्राप को दूर करने के लिए श्रीमद्द्भागवत का पाठ करना चाहिए | वेदों और पुराणों में पितरों की संतुष्टि के लिए मंत्र - [पितृ स्तोत्र [Pitra Stotra]](https://alaukikshaktiyan.com/पितृ-स्तोत्र-pitra-stotra/2025/03/पितृ-स्तोत्र-pitra-stotra.html): पुराणोक्त पितृ -स्तोत्र =============== अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्। नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।। इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा। तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि।। नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा। द्यावापृथिव्योश्च तथा नमस्यामि कृतांजलिः।। देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्। अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येऽहं कृतांजलिः।। प्रजापतं कश्यपाय सोमाय वरूणाय च। योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृतांजलिः।। नमो गणेभ्यः सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु। स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।। सोमाधारान् पितृगणान् - [श्राद्ध क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/श्राद्ध-क्या-है/2025/03/श्राद्ध-क्या-है.html): श्राद्ध का महत्त्व =========== मनुष्य के भौतिक जीवन की शुरुआत ही पितरों की कृपा से होती है |मनुष्यों के पास जो कुछ भी होता है उनके पूर्वजों अथवा पितरों की कृपा और देन है |पूर्वजों की कृपा से ही मनुष्यों को जीवन ,मान -सम्मान ,धन -दौलत आदि प्राप्त होता है |इसलिए धर्म शास्त्रों में - [पित्र दोष कब होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-दोष-कब-होता-है/2025/03/पित्र-दोष-कब-होता-है.html): कब-कब होता है पितृ दोष? ================= 1. पूर्वजों द्वारा उनकी जिंदगी में जान बूझकर या अनजाने में किए गए बुरे कर्म उनकी आत्माओं को परेशान करते हैं। 2. बच्चों द्वारा जान बूझकर या अनजाने में किए गए बुरे कर्म पूर्वजों की आत्माओं को तकलीफ पहुंचाते हैं। 3. पूर्वजों की अपने बच्चों के लिए कुछ करने - [Pitra dosh in Janmkundli](https://alaukikshaktiyan.com/pitra-dosh-in-janmkundli/2025/03/pitra-dosh-in-janmkundli.html): कुंडली में पित्र दोष [Pitra dosh in Janmkundli] ================================== मुख्य रूप से जन्म कुण्डली से ही पितृ दोष का निर्णय किया जाता है,सूर्य आत्मा एव पिता का कारक गृह है,पिता का विचार सूर्य से होता है,इसी प्रकार चन्द्रमा मन एव माता का कारक ग्रह है, सूर्य जब राहु की युति में हो तो ग्रहण - [ऋणों से पित्र दोष का सम्बन्ध](https://alaukikshaktiyan.com/ऋणों-से-पित्र-दोष-का-सम्बन/2025/03/ऋणों-से-पित्र-दोष-का-सम्बन.html): विभिन्न ऋण और पितृ दोष ==================== हमारे ऊपर मुख्य रूप से ५ ऋण होते हैं जिनका कर्म न करने(ऋण न चुकाने पर ) हमें निश्चित रूप से श्राप मिलता है ,ये ऋण हैं : मातृ ऋण ,पितृ ऋण ,मनुष्य ऋण ,देव ऋण और ऋषि ऋण | मातृ ऋण : --------------- माता एवं माता पक्ष के सभी लोग जिनमें मा,मामी ,नाना ,नानी - [पित्र दोष क्यों होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/पित्र-दोष-क्यों-होता-है/2025/03/पित्र-दोष-क्यों-होता-है.html): ::पितृ-दोष:: ======== पितृ गण हमारे वह पूर्वज हैं जो पहले हमारे कुलों में जन्मे थे और अब उनका देहांत हो चूका है |इनका ऋण भी हमारे ऊपर होता है ,क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया होता है , न भी किया हो तो वह हमारे कुलों और वंश में उत्पन्न होने से भावनाओं - [अंग देवता क्या हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/अंग-देवता-क्या-हैं/2025/03/अंग-देवता-क्या-हैं.html): अंग देवता कौन होते हैं ?,क्यों आवश्यक है इनकी पूजा ? अंग देवताओं की उपेक्षा कदापि न करें ========================== रोज पूजा -उपासना पर भी कष्टों का एक कारण यह भी ——————————————————————– हर मुख्य दवता के कुछ अंग देवता होते हैं जो उस देवता के साथ हमेशा होते हैं और यह मुख्य देवता के आह्वान पर - [काला स्वस्तिक कब बनाते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/काला-स्वस्तिक-कब-बनाते-है/2025/03/काला-स्वस्तिक-कब-बनाते-है.html): :::::काला स्वस्तिक ::::::: ==================== सामान्य रूप से स्वस्तिक लाल अथवा पीला बनाया जाता है और इससे अधिकतर लोग परिचित होते हैं ,किन्तु कभी काला स्वस्तिक भी उपयोगी हो जाता है |किसी भी व्यक्ति के जीवन में बुरा समय कब शुरू हो जाए, इसका पहले से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कोई भी नहीं चाहता - [भैरव गंडा कैसे बनाते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/भैरव-गंडा-कैसे-बनाते-हैं/2025/03/भैरव-गंडा-कैसे-बनाते-हैं.html): :::::::भैरव गंडा निर्माण विधि ::::::: ============================= श्री भैरव भगवान शिव का एक रुप माने जाते है. पुराणों तथा तंत्र शास्त्र में भैरव जी के अनेक रुपों का वर्णन प्राप्त होता है. इनके प्रमुख रुप इस प्रकार हैं:- असितांग भैरव, चण्ड भैरव, रुरु भैरव, क्रोध भैरव, कपालि भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव उन्मत्त भैरव इत्यादि - [पित्रों तक श्राद्ध कैसे पहुँचता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/पित्रों-तक-श्राद्ध-कैसे-प/2025/03/पित्रों-तक-श्राद्ध-कैसे-प.html): कैसे प्राप्त होता है पितरो को श्राद्ध का भोजन या देवताओं को दान [अन्न या खाद्य ] ========================================================== कहा जाता है की अन्न केवल इस शरीर का पोषण करता है ,पितरो के पास शरीर नहीं होता केवल आत्मा या वायवीय शरीर होता है तो यह जिज्ञासा स्वाभाविक है की आखिर उन्हें यहाँ दिया जाने - [भाग्य कैसे बदल सकते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/भाग्य-कैसे-बदल-सकते-हैं/2025/03/भाग्य-कैसे-बदल-सकते-हैं.html): :::::::कैसे बदलता है व्यक्ति का भाग्य ::::::: ============================== हमारा यह लेख अनेक मिथकों और सोचों के विरुद्ध लोगों को लगेगा ,कुछ लोगों को बहुत बुरा भी लगेगा ,जो भी यह सोचते हैं की सबकुछ भाग्य द्वारा निर्धारित होता है ,उससे अलग कुछ नहीं हो सकता ,कोई कुछ भी करे |अनेक ज्योतिष में अतिविश्वास करने - [स्त्रियाँ स्वस्थ -सुरक्षित रहेंगी](https://alaukikshaktiyan.com/स्त्रियाँ-स्वस्थ-सुरक्ष/2025/03/स्त्रियाँ-स्वस्थ-सुरक्ष.html): महिलाओ के लिए विशेष ================= [यदि बार-बार अनावश्यक डाक्टर के पास दौडने से बचना हो तो मैडम एक नजर इधर भी ] ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- यदि आप कमर दर्द ,रक्त विकार ,स्नायु विकार ,असमय बुढ़ापा ,झुर्रियो ,त्वचा के रूखापन ,मानसिक तनाव ,संतान हीनता ,गर्भाशय-योनी विकार ,मानसिक व्याधि ,भुत प्रेत भय वायव्य बाधा ,उत्साह हीनता ,ऊर्जा की - [तुलसी से जीवन सुखी बनायें](https://alaukikshaktiyan.com/तुलसी-से-जीवन-सुखी-बनायें/2025/03/तुलसी-से-जीवन-सुखी-बनायें.html): तुलसी के प्रयोगों से जीवन कैसे सुखी बनाएं ? ----------------------------------------------------- तुलसी -सकारात्मक उर्जा की अद्भुत स्रोत ============================ तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म और मान्यता में अति पवित्र माना जाता है प्राचीन काल से तुलसी की पूजा होती आई है ,क्यों, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा बढाने वाली और नकारात्मक ऊर्जा हटाने वाली हैं |हिन्दू धर्म - [सूर्य नीचस्थ हो तो क्या करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/सूर्य-नीचस्थ-हो-तो-क्या-कर/2025/03/सूर्य-नीचस्थ-हो-तो-क्या-कर.html): कार्तिक जन्म अथवा नीचस्थ सूर्य में जन्म ============================= हर साल अक्टूबर मध्य से नवम्बर मध्य के बीच सूर्य अपनी नीच राशि तुला में रहता है ,इस दौरान जन्म होने से कार्तिक जन्म का दोष बनता है |२६-२७ अक्टूबर को अपने परम नीच बिंदु तुला के दश अंश पर सूर्य होता है जिसके आस पास - [तंत्र कैसे प्रभावित करता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-कैसे-प्रभावित-करता/2025/03/तंत्र-कैसे-प्रभावित-करता.html): ::::::कैसे काम करता है तंत्र :::::: ============================ तंत्र एक पूर्ण विज्ञानं है ,समस्त क्रियाएं एक निश्चित वैज्ञानिक पद्धति से चलती हैं जिन्हें प्रकृति का विज्ञानं कहते है ,ब्रह्मांडीय ऊर्जा का विज्ञानं कहते हैं ,इसमें एक विशिष्ट लय, विशिष्ट अंतर्संबंध होता है जिस पर समस्त क्रियाएं संचालित होती है | व्यक्ति विशेष के स्तर - [कहाँ -कैसे -कब प्रयोग कर सकते हैं दिव्य गुटिका/चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/कहाँ-कैसे-कब-प्रयोग-कर-सकत/2025/03/कहाँ-कैसे-कब-प्रयोग-कर-सकत.html): चमत्कारी डिब्बी से कैसे लाभ उठायें ? ========================= क्या क्या काम करती है चमत्कारी दिव्य गुटिका =============================== हमारे वर्षों के शोध का परिणाम दिव्य गुटिका एक चमत्कारी शक्ति युक्त डिब्बी है जिसमे तंत्र में हजारों वर्षों से प्रयोग होती आ रही २५ प्रकार की विशिष्ट चमत्कारिक वस्तुओं का विशिष्ट संग्रह -संयोजन है |इस डिब्बी - [वन दुर्गा सिद्धि [Vana Durga Siddhi]](https://alaukikshaktiyan.com/वन-दुर्गा-सिद्धि-vana-durga-siddhi/2025/03/वन-दुर्गा-सिद्धि-vana-durga-siddhi.html): वन दुर्गा सिद्धि ========== तंत्र शास्त्रों की यह विशेषता है की आराध्य देवता की आराधना को सामान्य से अधिक तीव्र और तीव्रतर बनाने के लिए उसके साथ बीज मन्त्रों का संयोजन करने का आदेश करते हैं |आराधक गण भी उसी पद्धति से ईष्टदेव की कृपा प्राप्त कर मंत्र के वास्तविक स्वरुप को देख लेते - [अथर्ववेदोक्त आसुरी महाकल्प](https://alaukikshaktiyan.com/अथर्ववेदोक्त-आसुरी-महाकल/2025/03/अथर्ववेदोक्त-आसुरी-महाकल.html): आसुरी दुर्गा सिद्धि ============ भगवती दुर्गा की साधना के सौम्य और क्रूर दोनों ही प्रकार के मंत्र प्रयोग यामल ग्रंथों में मिलते हैं |सौम्य साधना एवं सौम्य कर्म में साधक को विशेष कामना नहीं रहती है |वह केवल यही चाहता है की मुझ पर माता की कृपा बनी रहे |माँ की कृपा की चाह - [अनेक उपाय असफल हों तब आजमायें चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/अनेक-उपाय-असफल-हों-तब-आजमा/2025/03/अनेक-उपाय-असफल-हों-तब-आजमा.html): जब सब उपाय करके थक जाएँ तब आजमायें दिव्य डिब्बी /गुटिका -------------------------------------------------------------------------------- समस्या कोई भी हो ,ग्रह बाधा हो ,भाग्यावरोध हो ,वास्तु दोष हो ,स्थान दोष हो ,किये -कराये की समस्या हो ,भूत -प्रेत की समस्या हो ,नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति की समस्या हो ,कुलदेवता -देवी का पता न हो ,कुलदेवता /देवी रुष्ट /क्रोधित - [लवण दुर्गा सिद्धि [Lavana Durga]](https://alaukikshaktiyan.com/लवण-दुर्गा-सिद्धि-lavana-durga/2025/03/लवण-दुर्गा-सिद्धि-lavana-durga.html): लवण दुर्गा सिद्धि =========== भगवती दुर्गा का एक रूप लवण दुर्गा का भी है |दुर्गा जी एक ब्रह्मांडीय शक्ति हैं जिनके उद्देश्य अनुसार भौतिक प्रयोग भी होते हैं |इन्ही भौतिक रूपों में लवण दुर्गा हैं जो क्रियात्मक स्वरुप है और वशीकरण में तो इनका विशिष्ट स्थान है |यद्यपि इस विद्या के मारण प्रयोग भी - [वशीकरण का अचूक अस्त्र चमत्कारी गुटिका/ डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-का-अचूक-अस्त्र-चमत/2025/03/वशीकरण-का-अचूक-अस्त्र-चमत.html): वशीकरण का अचूक अस्त्र -चमत्कारी दिव्य डिब्बी /गुटिका ======================================= आज के समय में तंत्र जगत में सबसे अधिक लूट वशीकरण के नाम पर हो रही है |लव -वशीकरण स्पेशलिस्टों की पूरी फ़ौज इंटरनेट -फेसबुक आदि पर देखने में आ रही है और बाकायदा प्रचार के साथ बड़े बड़े दावे भी किये जा रहे |कोई - [त्रिपुरा आकर्षण प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/त्रिपुरा-आकर्षण-प्रयोग/2025/03/त्रिपुरा-आकर्षण-प्रयोग.html): प्रबल आकर्षण प्रयोग ============== हम कभी -कभी अपने प्रियजन या पति अथवा पत्नी या प्रेमी अथवा प्रेमिका या किसी ख़ास रिश्तेदार या मित्र या सहकर्मी या अधिकारी की उपेक्षा से दुखी हो जाते हैं ,कभी कभी तो हमारे माता पिता में से ही कोई हमें उपेक्षित करता है ,कभी कभी हमारे माता पिता ,सास - [समस्या अनेक ,निदान एक चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/समस्या-अनेक-निदान-एक-चमत्/2025/03/समस्या-अनेक-निदान-एक-चमत्.html): पित्र दोष ,कुलदेवता दोष ,नकारात्मक ऊर्जा कष्ट और ग्रह दोष एक साथ समाप्त हो ------------------------------------------------------------------------------------------- वर्षों वर्ष लोगों की समस्याएं देखते हुए ,उनका पारंपरिक ज्योतिषीय और तांत्रिक निदान बताते हुए हमेशा से हमारे दिमाग में एक बात उभरती रही की ऐसा कुछ हो जो लोगों की सभी समस्याओं का निदान कर सके |भिन्न भिन्न - [पति वशीकरण यक्षिणी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/पति-वशीकरण-यक्षिणी-प्रयो-2/2025/03/पति-वशीकरण-यक्षिणी-प्रयो-2.html): दिव्य गुटिका पर पति वशीकरण प्रयोग ============================== हम अपने द्वारा भेजे गए दिव्य गुटिका [चमत्कारी डिब्बी ] के धारकों को विशिष्ट प्रयोग प्रदान करने के क्रम में आज एक और पति वशीकरण प्रयोग पोस्ट कर रहे हैं ताकि जिन महिलाओं ने हमसे दिव्य गुटिका मंगाई हो उन्हें यदि पति से सम्बंधित समस्या हो तो - [शेयर ,सेल्स ,मार्केटिंग में चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/शेयर-सेल्स-मार्केटिंग-मे/2025/03/शेयर-सेल्स-मार्केटिंग-मे.html): शेयर ,कमोडिटी ,सेल्स ,मार्केटिंग में अति उपयोगी है दिव्य गुटिका /डिब्बी ================================================== आज के समय में शेयर ,लाटरी ,कमोडिटी ,सट्टा ,कमीशन के कार्य आकस्मिक आय के स्रोत के रूप में विकसित हो चुके हैं |लोग इनके द्वारा आकस्मिक और अधिक आय प्राप्त कर धन प्राप्ति की कामना से इनमे इन्वेस्ट करते रहते हैं अथवा - [पति -पत्नी वशीकरण प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/पति-पत्नी-वशीकरण-प्रयोग/2025/03/पति-पत्नी-वशीकरण-प्रयोग.html): पति /पत्नी वशीकरण प्रयोग -चमत्कारी गुटिका /डिब्बी पर ============================================== यह एक तीव्र वशीकरण प्रयोग है जिसमे भगवती काली के मन्त्रों का प्रयोग कर उनसे पति अथवा पत्नी को अनुकूल ,वशीकृत करने का अनुरोध किया जाता है |काली की शक्ति के साथ दिव्य गुटिका /डिब्बी में समायोजित विशिष्ट दुर्लभ तांत्रिक पदार्थों की शक्तियों के मिल - [प्रचंडा चामुंडा साधना](https://alaukikshaktiyan.com/प्रचंडा-चामुंडा-साधना/2025/03/प्रचंडा-चामुंडा-साधना.html): नवरात्र में दुर्गा साधना दिव्य गुटिका [चमत्कारी डिब्बी ] पर ================================================= जैसा की हमने अपने दिव्य गुटिका अथवा चमत्कारी डिब्बी धारक पेज के पाठकों को सूचित किया था की जो गुटिका उन्होंने कभी भी हमसे किसी भी अन्य उद्देश्य से ली हो वे उस उद्देश्य के साथ -साथ उस दिव्य गुटिका पर अनेक प्रयोग - [चमत्कारी डिब्बी किस काम आती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-डिब्बी-किस-काम-आ/2025/03/चमत्कारी-डिब्बी-किस-काम-आ.html): कैसे चमत्कारी है दिव्य गुटिका [डिब्बी] ================================= हमने अपने ३० वर्षों के तंत्र जीवन के अनुभव के आधार पर और विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त लोगों के कष्टों को दृष्टिगत रखते हुए एक दिव्य गुटिका का निर्माण किया है ,जो लगभग अधिकतर सामान्य समस्याओं का निवारण करता है |इसका नाम हमने चमत्कारी दिव्य - [आकर्षण प्रयोग [Attraction Tantra]](https://alaukikshaktiyan.com/आकर्षण-प्रयोग-attraction-tantra/2025/03/आकर्षण-प्रयोग-attraction-tantra.html): आकर्षण प्रयोग ========== [किसी को आकर्षित /अनुकूल करने हेतु ] ------------------------------------------------- कभी -कभी कोई अपना रूठ जाता है ,दूर हो जाता है अथवा दूर चला जाता है |अपने व्यवहार ,बात या मनाने का प्रभाव नहीं पड़ता या ऐसी जगह चला जाता है जहाँ उसका पता नहीं चलता या वह नहीं चाहता की वह आपसे - [दैवीय शक्ति बढ़ाती है चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/दैवीय-शक्ति-बढ़ाती-है-चमत/2025/03/दैवीय-शक्ति-बढ़ाती-है-चमत.html): नकारात्मक उर्जा /भूत -प्रेत /टोना -टोटका दूर करती है दिव्य डिब्बी /गुटिका ================================================================ नेगेटिव इनर्जी अर्थात नकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों को किसी न किसी प्रकार प्रभावित करती है |कहीं किसी पर नकारात्मक ऊर्जा का कोई प्रभाव न हो ऐसा मात्र लाखों में किसी एक के साथ होता है |सकारात्मक - [होली पर महालक्ष्मी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/होली-पर-महालक्ष्मी-प्रयो/2025/03/होली-पर-महालक्ष्मी-प्रयो.html): शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी -सेल्स मार्केटिंग -व्यवसायी वर्ग के लिए विशेष लाभप्रद --------------------------------------------------------------------------------------------- होली का पर्व जीवन में नई उमंगें और खुशियाँ लाता है |इस दिन दुर्भाग्य ,कष्ट से मुक्ति के अनेक प्रयोग और उपाय किये जाते हैं |यह तंत्र और समृद्धिकारक प्रयोगों के लिए अति अनुकूल समय होता है | इस दिन इनकी - [अनेक उद्देश्य पूर्ण करती है चमत्कारी डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/अनेक-उद्देश्य-पूर्ण-करती/2025/03/अनेक-उद्देश्य-पूर्ण-करती.html): जैसा भी उद्देश्य हो वैसा उपयोग कर सकते हैं चमत्कारी डिब्बी का ======================================================== आज के समय में शेयर ,लाटरी ,कमोडिटी ,सट्टा ,कमीशन के कार्य आकस्मिक आय के स्रोत के रूप में विकसित हो चुके हैं |लोग इनके द्वारा आकस्मिक और अधिक आय प्राप्त कर धन प्राप्ति की कामना से इनमे इन्वेस्ट करते रहते हैं - [होली विशेष पति वशीकरण प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/होली-विशेष-पति-वशीकरण-प्र/2025/03/होली-विशेष-पति-वशीकरण-प्र.html): दिव्य गुटिका पर पति वशीकरण प्रयोग [[ होली विशेष प्रयोग ]] ================================================= हम अपने द्वारा भेजे गए दिव्य गुटिका [चमत्कारी डिब्बी ] के धारकों को होली के विशिष्ट प्रयोग प्रदान करने के क्रम में आज पति वशीकरण प्रयोग पोस्ट कर रहे हैं ताकि जिन महिलाओं ने हमसे दिव्य गुटिका मंगाई हो उन्हें यदि पति - [होली पर मनोकामनापूर्ति प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/होली-पर-मनोकामनापूर्ति-प/2025/03/होली-पर-मनोकामनापूर्ति-प.html): होली पर पर जाग्रत करें दिव्य गुटिका की शक्ति और पूर्ण करें मनोकामना =========================================================== होली -दीपावली का हिन्दू समाज में अत्यधिक महत्त्व है क्योकि यह दोनों ही समय में रात्री का महत्वपूर्ण संयोग होता है ,और अन्धकार ,दुःख ,दारिद्य ,कष्ट से मुक्ति के प्रयोग किये जाते हैं |दीपावली की रात्री और होलिका दहन की - [विजयदायक हनुमान साधना](https://alaukikshaktiyan.com/विजयदायक-हनुमान-साधना/2017/11/विजयदायक-हनुमान-साधना.html): विजयदायक हनुमान साधना ================= जीवन का अर्थ है समस्या ,परेशानी ,संघर्ष और साधक का अर्थ है उन समस्त समस्याओ से जूझ जाना |,प्रत्येक भय को समाप्त कर उस पर विजय प्राप्त करना ,यह सब लक्षण प्रकट होते है केवल हनुमान के साधक में क्योंकि हनुमान ही ऐसे देव है जिनमे - [घर में सुरक्षित हैं क्या पत्नी -बच्चे ?](https://alaukikshaktiyan.com/घर-में-सुरक्षित-हैं-क्या-प/2025/03/घर-में-सुरक्षित-हैं-क्या-प.html): ताकि आप और बच्चा सुरक्षित रहें ======================= हर माता -पिता की चाहत होती है की उनके बच्चे आगे बढ़ें ,उन्नति करें ,पढ़ें ,जीवन में सफल हो पर आजकल अधिकतर देखा जा रहा कि उतनी सफलता नहीं मिलती जितनी लोग चाहते हैं |इसके अनेक कारण हो सकते हैं जिनमे एक कारण यह भी होता है - [बच्चा बात नही मानता तो करें यह उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/बच्चा-बात-नही-मानता-तो-करे/2025/03/बच्चा-बात-नही-मानता-तो-करे.html): :::::बच्चा बिगड़ गया है ,आपकी बात नहीं मानता :::::: ===================================== आज के खुले वातावरण और समाज में जबकि मोबाइल ,इंटरनेट ,टी वि ,फिल्म की उपलब्धता अधिक है साथ ही नशा ,हिंसा भी दिखाई देता है खुले आम तो हमारे बच्चों पर भी इनका अधिक प्रभाव हो रहा ,बच्चे बिगड़ ,रहे बात नहीं मानते ,आपको - [बच्चे गलत रास्ते पर तो नहीं जा रहे ?](https://alaukikshaktiyan.com/बच्चे-गलत-रास्ते-पर-तो-नही/2025/03/बच्चे-गलत-रास्ते-पर-तो-नही.html): संतान बिगड़ रही है ,गलत रास्ते पर जा रही ============================== आज के समाज में अधिकतर माता -पिता किसी न किसी कारण अपने सन्तान से दुखी ,असंतुष्ट हैं |कुछ मामलों में तो संतानें अपने पैर पर खड़ी होते ही माता -पिता को किनारे कर देते हैं |कुछ विवाह बाद उन्हें वृद्धाश्रम तक छोड़ दे रहे - [पति -पत्नी की कोई हानि तो नहीं चाहता ?](https://alaukikshaktiyan.com/पति-पत्नी-की-कोई-हानि-तो-नह/2025/03/पति-पत्नी-की-कोई-हानि-तो-नह.html): पति /पत्नी पर कोई टोना -टोटका /प्रयोग तो नहीं हुआ ? ==================================== विश्व में हर स्थान पर ,हर सम्प्रदाय में टोने -टोटकों की प्रथा रही है |मनुष्य खुद को जहाँ अक्षम और कमजोर पाता है अक्सर इनका प्रयोग करता रहा है |इनके प्रयोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में होते रहे हैं पहले से ही - [पति या पत्नी दूसरे के वश में तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/पति-या-पत्नी-दूसरे-के-वश-मे/2025/03/पति-या-पत्नी-दूसरे-के-वश-मे.html): किसी ने आपके पति या पत्नी पर कुछ किया तो नहीं ==================================== कुछ लोगों को अपने बच्चे और दुसरे की बीबी अधिक अच्छी लगती है या किसी को अपने बच्चे और दुसरे का पति ज्यादा सक्षम नजर आता है |तुलना और तर्क करके देखिये आपके आसपास भी यह देखने को मिल सकता है |पुरुष - [अवचेतन की आवाज कैसे सुनें ?](https://alaukikshaktiyan.com/अवचेतन-की-आवाज-कैसे-सुनें/2025/03/अवचेतन-की-आवाज-कैसे-सुनें.html): अपनी आवाज सुनें ============= यदि आप उलझन में हैं ,अनिर्णय का शिकार हैं ,किसी चिंता से परेशान हैं और हल नहीं मिल रहा ,विचारों के झंझावात चल रहे ,खुद को फंसा और पस्त महसूस कर रहे ,उत्साहहीन हो गए हैं ,आलस्य हावी हो गया है ,कोई काम ढंग से नहीं कर पा रहे ,सब - [व्यवसाय पर तंत्र होने पर करें यह उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/व्यवसाय-पर-तंत्र-होने-पर-क/2017/08/व्यवसाय-पर-तंत्र-होने-पर-क.html): व्यवसाय पर तंत्र क्रिया होने पर ------------------------------ १. यदि कोई शत्रु आपसी जलन या द्वेष, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के कारण आप पर तंत्र-मंत्र का कोई प्रयोग करके आपके व्यवसाय में बाधा डाल रहा हो, तो ईसे में नीचे लिखे सरल शाबर मंत्र का प्रयोग करके आप अपनी तथा अपने व्यवसाय की रक्षा कर सकते हैं । - [व्यापार /व्यवसाय रोका तो नहीं जा रहा ?](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-रोका-तो-न/2017/08/व्यापार-व्यवसाय-रोका-तो-न.html): कहीं आपकी उन्नति रोकी तो नहीं जा रही ========================= आप यथासंभव पूरी मेहनत करते हैं ,पूरी योग्यता है आपमें की आप अच्छी स्थिति में पहुंचें ,आप अच्छी बुद्धि ,क्षमता रखते हैं फिर भी आप उन्नति नहीं कर पा रहे |आप अच्छे पृष्ठभूमि से हैं पर आप उसे भी बरकरार नहीं रख - [ललिता त्रिपुरसुन्दरी](https://alaukikshaktiyan.com/ललिता-त्रिपुरसुन्दरी/2025/03/ललिता-त्रिपुरसुन्दरी.html): ललिता त्रिपुर सुंदरी ============== ललिता त्रिपुर सुंदरी या त्रिपुर सुंदरी को श्री विद्या भी कहा जाता है ,जो दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या हैं और श्री कुल की अधिष्ठात्री |इन्हें ५१ शक्तिपीठों में भी स्थान प्राप्त है और कामाख्या को भी इनका स्वरुप कहा जाता है [यद्यपि कामाख्या को काली से भी - [त्रिपुरसुन्दरी -श्री यन्त्र की अधिष्ठात्री](https://alaukikshaktiyan.com/त्रिपुरसुन्दरी-श्री-यन्/2025/03/त्रिपुरसुन्दरी-श्री-यन्.html): महा त्रिपुरसुन्दरी ============== महाविद्याओं में तीसरी श्री विद्या महा त्रिपुर सुन्दरी, तीनो लोको में सर्व गुण सम्पन्न या सर्व प्रकार से पूर्ण। आद्या शक्ति माँ, अपने तीसरे महाविद्या के रूप में श्री विद्या, महा त्रिपुरसुन्दरी के नाम से जानी जाती हैं, देवी अत्यंत सुन्दर रूप वाली सोलह वर्षीय कन्या रूप में विद्यमान हैं। तीनो - [श्री विद्या [ Shri Vidya ]कौन हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-विद्या-shri-vidya-कौन-हैं/2025/03/श्री-विद्या-shri-vidya-कौन-हैं.html): षोडशी (श्रीविद्या) : ============= श्रीविद्या के ही नाम है षोडशी ,त्रिपुर सुंदरी , त्रिपुरा, ललिता, आदि । इनके भैरव हैं- त्रिपुर भैरव (देव शक्ति संगमतंत्र)। महाशक्ति के अनंत नाम और अनंत रूप हैं। इनका परमरूप एक तथा अभिन्न हैं। त्रिपुरा उपासकों के मतानुसार ब्रह्म आदि देवगण त्रिपुरा के उपासक हैं। उनका परमरूप इंद्रियों तथा - [बगलामुखी कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-कवच-ताबीज/2025/03/बगलामुखी-कवच-ताबीज.html): महाशक्तिशाली बगलामुखी यन्त्र /कवच ========================== सार्वभौम उन्नति ,लाभप्रद ऊर्जा प्रवाह और नकारात्मकता ,भूत -प्रेत के शमन हेतु ------------------------------------------------------------------------------------------------- भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति हैं ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है |यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूल सूत्र -प्राण सूत्र है |प्राण सूत्र - [बगलामुखी यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-यन्त्र/2025/03/बगलामुखी-यन्त्र.html): बगलामुखी यन्त्र =========== भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है |प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना से चैतन्य होता है ,इसकी - [बगलामुखी साधना -सिद्धि कैसे करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-साधना-सिद्धि-कै/2025/03/बगलामुखी-साधना-सिद्धि-कै.html): :::::::::बगलामुखी [ब्रह्मास्त्र विद्या ]महासाधना ::::::::: ======================================= महाविद्या श्री बगलामुखी दश महाविद्या के अंतर्गत श्री कुल की महाविद्या है ,जिनकी पूजा साधना से सर्वाभीष्ट की प्राप्ति होती है |,,ग्रह दोष ,शत्रु बाधा ,रोग-शोक-दुष्ट प्रभाव ,वायव्य बाधा से मुक्ति मिलती है |,सर्वत्र विजय ,सम्मान ,ऐश्वर्य प्राप्त होता है ,वाद-विवाद ,मुकदमे में विजय मिलती है |,अधिकारी वर्ग वशीभूत - [बगलामुखी के किस मंत्र से धन प्राप्ति होती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-के-किस-मंत्र-से-ध/2025/03/बगलामुखी-के-किस-मंत्र-से-ध.html): बगलामुखी मंत्र से धन प्राप्ति ==================== धन प्राप्ति का बगला विशेष मन्त्र --------------------------------------- हमारे पाठकों और श्रोताओं को जैसा की ज्ञात है हम शोधपरक और वास्तविक जानकारी देते हैं तथा प्रयास होता है की जानकारी सही और अनुभव पर सही उतरी हो |उस ज्ञान का कोई मतलब नहीं जो क्रियात्मक रूप से प्रतिफलित न - [बगला शाबर साधना](https://alaukikshaktiyan.com/बगला-शाबर-साधना/2025/03/बगला-शाबर-साधना.html): ::::::: बगलामुखी शाबर मंत्र साधना :::::: =========================== माता बगलामुखी के कई शाबर मंत्र मिलते है | ये मंत्र रक्षा कारक, विरोधियो का स्तम्भन , ग्रह बाधा स्तम्भन , वशीकरण , शत्रु बाधा ,विवाद -मुकदमों में विजय ,ग्रह बाधाओं का निवारण ,ग्रह दुष्प्रभाव स्तम्भन ,भूत -प्रेत वायव्य बाधाओं आदि प्रयोजन के लिए उत्तम है | - [ब्रह्मास्त्र विद्या किसे कहते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/ब्रह्मास्त्र-विद्या-किसे/2025/03/ब्रह्मास्त्र-विद्या-किसे.html): :::::::ब्रह्मास्त्र विद्या :::::::: ======================= सृष्टि के आदि काल से ही हंसना, रोना, इच्छायें और उनकी पूर्ती में आने वाली बाधायें मनुष्य के लिये चुनौती रहे हैं | कोई धन पाना चाहता है तो कोई मान - सम्मान पाने के लिये परेशान है | किसी को प्रेम चाहिये तो कोई व्यर्थ में ही ईर्ष्या की - [बगलामुखी कौन हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-कौन-हैं/2025/03/बगलामुखी-कौन-हैं.html): ::::::: वल्गामुखी [बगलामुखी ] महाविद्या ::::::: ================================== बगलामुखी देवी दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के नाम से उल्लेखित है । वैदिक शब्द ‘वल्गा’ कहा है, जिसका अर्थ कृत्या सम्बन्ध है, जो बाद में अपभ्रंश होकर बगला नाम से प्रचारित हो गया । बगलामुखी शत्रु-संहारक विशेष है अतः इसके दक्षिणाम्नायी, पश्चिमाम्नायी मंत्र अधिक मिलते हैं - [चामुंडा साधना](https://alaukikshaktiyan.com/चामुंडा-साधना/2025/02/चामुंडा-साधना.html): भूत -प्रेत ,नकारात्मक ऊर्जा हटाने का प्रयोग दिव्य गुटिका पर =============================================== जैसा की हमने अपने दिव्य गुटिका अथवा चमत्कारी डिब्बी धारक पाठकों को सूचित किया था की जो गुटिका उन्होंने कभी भी हमसे किसी भी अन्य उद्देश्य से ली हो वे उस उद्देश्य के साथ -साथ उस दिव्य गुटिका पर अनेक प्रयोग अपनी आवश्यकता - [महाकाली सिद्ध ताबीज /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-सिद्ध-ताबीज-कवच/2025/02/महाकाली-सिद्ध-ताबीज-कवच.html): महाकाली यंत्रयुक्त ताबीज ------------------------------ यदि आपको अपनी पूजा ,उपासना ,साधना के पूर्ण परिणाम पाने हैं तो आपको काली कवच धारण करना चाहिए |यदि आपको नकारात्मक शक्तियों ,भूत -प्रेत ,बाहरी बाधाओं ,घर परिवार में व्याप्त नेगेटिविटी से बचे रहते हुए पूर्ण उन्नति करनी है तो आपको काली जी का ताबीज धारण करना चाहिए |यदि आपको - [श्मशान काली साधना](https://alaukikshaktiyan.com/श्मशान-काली-साधना/2025/02/श्मशान-काली-साधना.html): शमशान काली सिद्धि ============== महाकाली के नौ रूपों में एक मुख्य स्वरुप शमशान काली का है |यद्यपि काली को ही श्मशान वासिनी कहा जाता है किन्तु श्मशान काली के मंदिर विग्रह आदि अधिकतर श्मशान में ही पाए जाते हैं |कुछ लोग मानते हैं की काली की मूर्ती और चित्र घर में नहीं लगाने चाहिए - [महाकाली महाविजय कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-महाविजय-कवच/2025/02/महाकाली-महाविजय-कवच.html): महाकाली महाविजय कवच भगवती महाकाली दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या शक्ति और काली कुल की अधिष्ठात्री है ,जिन्हें सृष्टि की मूल शक्ति कहा जाता है और इन्ही से समस्त महाविद्याओं की उत्पत्ति हुई है |समस्त महाविद्यायें ,समस्त शक्तियां इन्ही का विस्तार और स्वरुप हैं |यह वह मूल विद्या हैं जो इस ब्रह्माण्ड - [ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-6/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-6.html): कैसे करें ध्यान साधना ================= ध्यान का सीधा-सीधा संबंध मन से है। मनुष्य के अन्दर दो प्रकार का मन होता है एक बाह्यमन तथा दुसरा अंर्तमन। अंर्तमन की अपेक्षा बाह्यमन का स्वभाव अत्यंत चंचल तथा कुटिल है जीसमे काम क्रोध, लोभ, अहंकार, इष्र्या, राग, द्वेष, छल, कपट इत्यादि विकार उत्पन्न होते रहते हैं जो मुख्य - [महाकाली दीक्षा किससे और कैसे प्राप्त करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-दीक्षा-किससे-और-क/2025/02/महाकाली-दीक्षा-किससे-और-क.html): महाकाली दीक्षा कैसे प्राप्त करें ? ========================= साधनाओं की बात आते ही दस महाविद्या का नाम सबसे ऊपर आता है। प्रत्येक महाविद्या का अपने आप में अलग ही महत्त्व है। लाखों में कोई एक ही ऐसा होता है जिसे सदगुरू से महाविद्या दीक्षा प्राप्त हो पाती है। इस दीक्षा को प्राप्त करने के बाद - [काली शतनाम स्तोत्रम्](https://alaukikshaktiyan.com/काली-शतनाम-स्तोत्रम्/2025/02/काली-शतनाम-स्तोत्रम्.html): :::::::कालीशतनामस्तोत्रम्::::::: ======================= श्रीदेव्युवाच । ---------------- पुरा प्रतिश्रुतं देव क्रीडासक्तो यदा भवान्। नाम्नां शतं महाकाल्याः कथयस्व मयिप्रभो ॥ २३-१॥ श्रीभैरव उवाच । ------------------ साधु पृष्टं महादेवि अकथ्यं कथयामि ते। न प्रकाश्यं वरारोहे स्वयोनिरिव सुन्दरि ॥२३-२॥ प्राणाधिकप्रियतरा भवती मम मोहिनी । क्षणमात्रं न जीवामि त्वां बिना परमेश्वरि॥ २३-३॥ यथादर्शेऽमले बिम्बं घृतं दध्यादिसंयुतम् । तथाहं जगतामाद्ये त्वयि सर्वत्र गोचरः ॥ २३-४॥ शृणु देवि प्रवक्ष्यामि जपात् सार्वज्ञदायकम् । सदाशिव ऋषिः प्रोक्तोऽनुष्टुप् छन्दश्च ईरितः ॥ २३-५॥ देवता भैरवो देवि पुरुषार्थचतुष्टये । विनियोगः प्रयोक्तव्यः सर्वकर्मफलप्रदः ॥ २३-६॥ महाकाली जगद्धात्री जगन्माता जगन्मयी । जगदम्बा गजत्सारा जगदानन्दकारिणी ॥ २३-७॥ जगद्विध्वंसिनी गौरी दुःखदारिद्र्यनाशिनी । भैरवभाविनी भावानन्ता सारस्वतप्रदा ॥ २३-८॥ चतुर्वर्गप्रदा साध्वी सर्वमङ्गलमङ्गला । भद्रकाली विशालाक्षी कामदात्री कलात्मिका ॥ २३-९॥ नीलवाणी महागौरसर्वाङ्गा सुन्दरी परा । सर्वसम्पत्प्रदा भीमनादिनी वरवर्णिनी ॥ २३-१०॥ वरारोहा शिवरुहा महिषासुरघातिनी । शिवपूज्या शिवप्रीता दानवेन्द्रप्रपूजिता ॥ २३-११॥ सर्वविद्यामयी शर्वसर्वाभीष्टफलप्रदा । कोमलाङ्गी विधात्री च विधातृवरदायिनी ॥ २३-१२॥ पूर्णेन्दुवदना नीलमेघवर्णा कपालिनी । कुरुकुल्ला विप्रचित्ता कान्तचित्ता मदोन्मदा ॥ २३-१३॥ मत्ताङ्गी मदनप्रीता मदाघूर्णितलोचना । मदोत्तीर्णा खर्परासिनरमुण्डविलासिनी ॥ २३-१४॥ नरमुण्डस्रजा देवी खड्गहस्ता भयानका । अट्टहासयुता पद्मा पद्मरागोपशोभिता ॥ २३-१५॥ वराभयप्रदा काली कालरात्रिस्वरूपिणी । स्वधा स्वाहा वषट्कारा शरदिन्दुसमप्रभा ॥ २३-१६॥ शरत्ज्योत्स्ना च संह्लादा विपरीतरतातुरा । मुक्तकेशी छिन्नजटा जटाजूटविलासिनी ॥ २३-१७॥ सर्पराजयुताभीमा सर्पराजोपरि स्थिता । श्मशानस्था महानन्दिस्तुता सन्दीप्तलोचना ॥ २३-१८॥ शवासनरता नन्दा सिद्धचारणसेविता । बलिदानप्रिया गर्भा भूर्भुवःस्वःस्वरूपिणी ॥ २३-१९॥ गायत्री चैव सावित्री महानीलसरस्वती । लक्ष्मीर्लक्षणसंयुक्ता सर्वलक्षणलक्षिता ॥ २३-२०॥ व्याघ्रचर्मावृता मेध्या त्रिवलीवलयाञ्चिता । गन्धर्वैः संस्तुता सा हि तथा चेन्दा महापरा ॥ २३-२१॥ पवित्रा परमा माया महामाया महोदया । इति ते कथितं दिव्यं शतं नाम्नां महेश्वरि ॥ २३-२२॥ यः पठेत् प्रातरुत्थाय स तु विद्यानिधिर्भवेत् । इह लोके सुखं भुक्त्वा देवीसायुज्यमाप्नुयात् ॥ २३-२३॥ तस्य वश्या भवन्त्येते सिद्धौघाः सचराचराः । खेचरा भूचराश्चैव तथा स्वर्गचराश्च ये ॥ २३-२४॥ ते सर्वे वशमायान्ति साधकस्य हि नान्यथा । - [माँ काली कृपा प्राप्ति बिना गुरु बिना दीक्षा](https://alaukikshaktiyan.com/माँ-काली-कृपा-प्राप्ति-बि/2025/02/माँ-काली-कृपा-प्राप्ति-बि.html): महाकाली प्रकृति की आदि शक्ति ,प्रकृति और पुरुष की प्रकृति ,परम शक्ति और शिव की अर्धांगिनी ,महाविद्याओं में प्रथम महाविद्या ,सर्व मंगला ,सर्व ममतामयी माँ ,सर्व रक्षक और सर्व विनाशक ,जिनसे प्रकृति सृष्टि शुरू होती है और जिनमे ही उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है ,,उस परम शक्ति माँ काली की साधना सामान्यतया बिना - [दक्षिण काली स्तोत्र](https://alaukikshaktiyan.com/दक्षिण-काली-स्तोत्र/2025/02/दक्षिण-काली-स्तोत्र.html): दक्षिणकालीस्तोत्रम् ============= श्रीगणेशाय नम: ध्यायेत्काली महामायां त्रिनेत्रां बहुरूपिणिम् । चतुर्भुजां ललज्जिह्वा पूर्णचन्द्रनिभानननम् ॥१॥ नीलोत्पलदलप्रख्यां शत्रुसङ्घविदारिणीम् । नरमुण्डन्तथा खड्गङ्कमलं वरदन्तथा ॥२॥ विभ्राणं रक्तवदनां दंष्ट्राली घोररूपिणीम् । अट्टाट्टहासनिरता सर्वदा च दिगम्बराम् ॥३॥ शवासनस्थितां देवीं मुण्डमालाविभूषिताम् । इति ध्यात्वा महादेवी ततस्तु हृदयं पठेत् ॥४॥ काली दक्षिणकाली च कृष्णरूपा परात्मिका । मुण्डमाली विशालाक्षी सृष्टिसंहासकारिका ॥५॥ स्थितिरूपा महामाया योगनिरद्रा भवात्मिका । भगसर्पि: पानरता भगोद्योता भगाङ्गजा ॥६॥ आद्या सदा नवा घोरा महातेजा: करालिका । प्रेतवाहा सिद्धिलक्ष्मीरनिरुद्धा सरस्वती ॥७॥ एतानि नाममाल्यानि ये पठन्ति दिने दिने । तेषा दासस्य दासोsहं सत्यं सत्यं महेश्वरि ॥८॥ त्वं काली त्वञ्य तारा त्वमसि गिरिसुता सुन्दरी भैरबी त्वम् त्वं दुर्गा छिन्नमस्ता त्वमसि च भुवना त्वं हि लक्ष्मी: शिवा त्वम् । धूमा मताङगिनि त्वं त्वससी च बगलामङ्गलादिस्तवाख्या क्षन्तव्यो मेsपराध: पकटितवदने कामरूपे कराले ॥९॥ ब्रह्माणी कमलेन्दु सौम्यवदना माहेश्वरी लीलया कौमारी रिपुदर्पनाशनकरी चक्रायुधा वैष्णवी । वाराही घनघोरघर्घरमुखी चैन्द्री च वज्रायुधा चामुण्डा गणनाथभैरवगणा रक्षन्तु मे मातर: ॥१०॥ ॥ इति श्रीदक्षिणकालीस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ - [15 मिनट में महाकाली कृपा [बिना गुरु बिना दीक्षा ]](https://alaukikshaktiyan.com/15-मिनट-में-महाकाली-कृपा-बिन/2025/02/15-मिनट-में-महाकाली-कृपा-बिन.html): :::::महाकाली कृपा प्राप्ति साधना - २ ::::: ============================ सामान्य किन्तु साहसी लोगों के लिए -------------------------------------------- महाकाली इस ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्ति ,जिसका नाम सुनकर भी बहुत से लोगों में भय व्याप्त हो जाता है |इनकी साधना ,उपासना कम लोग करते हैं क्योकि डरते हैं इनसे और मानते हैं की यह केवल तांत्रिकों की देवी - [काली कवच](https://alaukikshaktiyan.com/काली-कवच/2025/02/काली-कवच.html): :::::::: कालिकाकवचम् ::::::: =================== श्रीगणेशाय नमः । कैलासशिखरासीनं देवदेवं जगद्गुरुम् । शङ्करं परिपप्रच्छ पार्वती परमेश्वरम् ॥ १॥ पार्वत्युवाच ------------ भगवन् देवदेवेश देवानां भोगद प्रभो । प्रब्रूहि मे महादेव गोप्यं चेद्यदि हे प्रभो ॥ २॥ शत्रूणां येन नाशः स्यादात्मनो रक्षणं भवेत् । परमैश्वर्यमतुलं लभेद्येन हि तद्वद ॥ ३॥ भैरव उवाच -------------- वक्ष्यामि ते महादेवि सर्वधर्मविदां वरे - [काली सहस्त्राक्षरी](https://alaukikshaktiyan.com/काली-सहस्त्राक्षरी/2025/02/काली-सहस्त्राक्षरी.html): ::::::: श्री काली सहस्त्राक्षरी :::::: ====================== ॐ क्रीं क्रीँ क्रीँ ह्रीँ ह्रीँ हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीँ क्रीँ क्रीँ ह्रीँ ह्रीँ हूं हूं स्वाहा शुचिजाया महापिशाचिनी दुष्टचित्तनिवारिणी क्रीँ कामेश्वरी वीँ हं वाराहिके ह्रीँ महामाये खं खः क्रोघाघिपे श्रीमहालक्ष्यै सर्वहृदय रञ्जनी वाग्वादिनीविधे त्रिपुरे हंस्त्रिँ हसकहलह्रीँ हस्त्रैँ ॐ ह्रीँ क्लीँ मे स्वाहा ॐ ॐ ह्रीँ ईं स्वाहा - [टोना -टोटका निरोधक कवच [ स्त्रियों के लिए ]](https://alaukikshaktiyan.com/टोना-टोटका-निरोधक-कवच-स्त/2025/02/टोना-टोटका-निरोधक-कवच-स्त.html): अभिचार /भूत -प्रेत /टोना -टोटका रोधक कवच [केवल स्त्रियों के लिए ] ======================================================= सामान्य रूप से भूत-प्रेत ,आत्माएं ,वायव्य बाधाएं ,तांत्रिक टोटके और अभिचार स्त्रियों को अधिक और शीघ्र प्रभावित करते हैं |इसका कारण स्त्रियों की शारीरिक और मानसिक बनावट भी होती है और स्त्रियों के प्रति कामुक पुरुष आत्माओं का आकर्षण भी होता - [काली सहस्त्रनाम :सौ समस्या एक उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/काली-सहस्त्रनाम-सौ-समस्य/2025/02/काली-सहस्त्रनाम-सौ-समस्य.html): काली सहस्त्रनाम :::::सौ समस्या का एक इलाज ================================= आज के समय में जबकि गुरु का मिलना मुश्किल है और साधना मार्ग ठीक से निर्देशित करने वालों की बहुत कमी सामान्य पाठकों को महसूस होती है ,जबकि उनकी समस्याए बहुत अधिक बढ़ चुकी हैं ,ऐसे काली सहस्त्रनाम का पाठ सामान्य जन के लिए अमृत स्वरुप - [महाकाली साधना: सबके लिए उपयुक्त](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-साधना-सबके-लिए-उप/2025/02/महाकाली-साधना-सबके-लिए-उप.html): :::::::::महाकाली साधना [जिन्हें गुरु न मिलें ]:::::::::: ====================================== महाकाली प्रकृति की आदि शक्ति ,प्रकृति और पुरुष की प्रकृति ,परम शक्ति और शिव की अर्धांगिनी ,महाविद्याओं में प्रथम महाविद्या ,सर्व मंगला ,सर्व ममतामयी माँ ,सर्व रक्षक और सर्व विनाशक ,जिनसे प्रकृति सृष्टि शुरू होती है और जिनमे ही उसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है ,,उस - [कामकला काली भुजंगप्रयात स्तोत्र](https://alaukikshaktiyan.com/कामकला-काली-भुजंगप्रयात/2025/02/कामकला-काली-भुजंगप्रयात.html): ::::::::: कामकलाकालीस्तोत्रम् :::::::: ======================== श्री गणेशाय नमः । महाकाल उवाच । अथ वक्ष्ये महेशानि देव्याः स्तोत्रमनुत्तमम् । यस्य स्मरणमात्रेण विघ्ना यान्ति पराङ्मुखाः ॥ १॥ विजेतुं प्रतस्थे यदा कालकस्या- सुरान् रावणो मुञ्जमालिप्रवर्हान् । तदा कामकालीं स तुष्टाव वाग्भिर्जिगीषुर्मृधे बाहुवीर्य्येण सर्वान् ॥ २॥ महावर्त्तभीमासृगब्ध्युत्थवीची- परिक्षालिता श्रान्तकन्थश्मशाने । चितिप्रज्वलद्वह्निकीलाजटाले शिवाकारशावासने सन्निषण्णाम् ॥ ३॥ महाभैरवीयोगिनीडाकिनीभिः करालाभिरापादलम्बत्कचाभिः । भ्रमन्तीभिरापीय मद्यामिषास्रान्यजस्रं - [महाकाली त्रैलोक्य विजय कवच](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-त्रैलोक्य-विजय-क/2025/02/महाकाली-त्रैलोक्य-विजय-क.html): ::::::: महाकाली त्रैलोक्य विजय कवच ::::::: ============================= ह्रीं आद्य मे शिरः पातु श्रीं काली वदन ममं, हृदयं क्रीं परा शक्तिः पायात कंठं परात्परा ||१ || नेत्रौ पातु जगद्धात्री करनौ रक्षतु शंकरी, घ्रान्नम पातु महा माया रसानां सर्व मंगला ||२ || दन्तान रक्षतु कौमारी कपोलो कमलालया, औष्ठांधारौं शामा रक्षेत चिबुकं चारु हासिनि ||३ || ग्रीवां पायात - [Mahakali Sadhana](https://alaukikshaktiyan.com/mahakali-sadhana/2025/02/mahakali-sadhana.html): :::::::::माँ महाकाली की साधना ::::::::: ========================== भगवती महाकाली दशा महाविद्या ,नवदुर्गा में से एक मुख्य शक्ति-आदि शक्ति हैं, यह सृष्टि और विनाश की मुख्य शक्ति है ,इन्ही की शक्ति से सृजन शुरू होता है और इन्ही में विलीन हो जाता है ,अन्य शक्तियां श्रृष्टि और सृजन के बीच कार्य करती हैं ,अर्थात यह मुख्य - [दक्षिण काली साधना](https://alaukikshaktiyan.com/दक्षिण-काली-साधना/2025/02/दक्षिण-काली-साधना.html): ::::::::महाकाली [दक्षिण काली ] साधना विवरण :::::::: ==================================== भगवती काली ही एकमात्र ऐसी शक्ति हैं जिन्हें आदि शक्ति कहा जाता है |सम्पूर्ण संसार की उत्पत्ति इन्ही द्वारा होती है और फिर वह इन्ही में विलीन होता रहता है |सभी देवी देवता मनुष्य के जीवन के जन्म से मृत्यु के बीच के भाग को प्रभावित - [काली जी का पूजन कैसे करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/काली-जी-का-पूजन-कैसे-करें/2025/02/काली-जी-का-पूजन-कैसे-करें.html): माता महाकाली और षोडशोपचार पूजन =============================== महाकाली के सभी रूपों का पूजन सामान्य गृहस्थ अथवा सामान्य व्यक्ति के लिए समान होता है |साधकों के लिए विशिष्ट रूपों के अनुसार और विशिष्ट लक्ष्य के अनुसार पूजन भिन्न हो सकता है |चूंकि हम सामान्य लोगों के लिए लिख रहे हैं ,अतः सामान्य पूजन क्रम दिया जा - [काली जी के भिन्न रूपों का रहस्य](https://alaukikshaktiyan.com/काली-जी-के-भिन्न-रूपों-का-र/2025/02/काली-जी-के-भिन्न-रूपों-का-र.html): भगवती महाकाली के विविध स्वरुप ========================= क्यों अलग अलग स्वरुप होते हैं चित्रों में काली के ? भगवती महाकाली हमारी ईष्ट देवी हैं |बचपन से ही इनके हर रूप ने ,हर गुण ने हमें आ कर्षित किया है और इस आकर्षण नें इनकी उपासना -साधना को प्रेरित किया |हाथ जोडकर मांगना हमें कभी पसंद - [अस्थमा मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/अस्थमा-मुद्रा/2025/02/अस्थमा-मुद्रा.html): दमा/अस्थमा मुद्रा [Asthama Mudra] =============================== दोनों हाथों की मध्यमा उंगलियों को मोड़ कर उनके नाखूनों को आपस में मिला दें। बाकी सभी उंगलियां और अंगूठा सीधा खोल कर रखें। दमा मुद्रा को दिन में पाँच बार पाँच मिनट के लिए करें। लाभ: परंतु दमा के रोगीयों को दोनों मुद्राएं प्रतिदिन सुबह/शाम 15-15 मिनट लगानी चाहिए। - [कालेश्वर मुद्रा :नशे से मुक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/कालेश्वर-मुद्रा-नशे-से-मु/2025/02/कालेश्वर-मुद्रा-नशे-से-मु.html): कालेश्वर मुद्रा [Kaleswara Mudra] ============================ नशे से मुक्ति दिला सकता है और आपको बदल सकता है --------------------------------------------------------------- इस लेख में हम आपको एक ऐसा उपाय बता रहे जिसकी मदद से आप बिना कोई खर्च किये ,बिना डाक्टर आदि को दिखाए ,बिना कहीं गए ,बिना किसी दवा के ,बिना अपनी दिनचर्या ,भोजन बदले अपनी कुछ - [योगी मुद्रा :तनावमुक्त आध्यात्मिक उन्नति](https://alaukikshaktiyan.com/योगी-मुद्रा-तनावमुक्त-आध/2025/02/योगी-मुद्रा-तनावमुक्त-आध.html): योगी मुद्रा [योनी मुद्रा ] ================ तनाव ,डिप्रेसन से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति बिना खर्च बिना श्रम ------------------------------------------------------------------------------------ इसके लिए सिद्धासन पर बैठकर दोनों अंगुठों से दोनों कान, दोनों तर्जनी उँगलियों से दोनों मध्यमा (बीच की उंगली) से दोनों नाक के छेद और दोनों अनामिका से मुंह बन्द करना चाहिए । फिर काकी मुद्रा - [विपरीत करणी मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/विपरीत-करणी-मुद्रा/2025/02/विपरीत-करणी-मुद्रा.html): विपरीत करणी मुद्रा [Vipareetkarani Mudra] ====================================== योगियों ने मनुष्य के शरीर में दो मुख्य नाड़ियाँ बतलाई हैं । एक सूर्यनाड़ी और दूसरी चन्द्र नाड़ी । सूर्य नाड़ी नाभि के पास है और चन्द्रनाड़ी तालु के मध्य में है । मस्तक में रहने वाले सहस्रदल कमल से जो अमृत झरता है वह सूर्य नाड़ी के - [खेचरी मुद्रा :सिद्धि और समाधि](https://alaukikshaktiyan.com/खेचरी-मुद्रा-सिद्धि-और-सम/2025/02/खेचरी-मुद्रा-सिद्धि-और-सम.html): खेचरी मुद्रा से मिलती है सिद्धि और समाधि ================================ मनुष्य की जीभ (जिह्वा) दो तरह की होती हैं- लंबी और छोटी। कुछ लोगों की जीभ लंबी होने से वे उसे आसानी से नासिकाग्र पर लगा सकते हैं और खेचरी-मुद्रा कर सकते हैं। मगर जिसकी जीभ छोटी होती है उसे तकलीफों का सामना करना पड़ता है। - [कुण्डलिनी मुद्रा [kundalini mudra]](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-मुद्रा-kundalini-mudra/2025/02/कुण्डलिनी-मुद्रा-kundalini-mudra.html): कुंड़लनी मुद्रा ========= बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली को बाहर कर मुट्ठी बन्द कर लें और दाएं हाथ में बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली को लेकर मुट्ठी बन्द कर लें और अंगूठे के टिप को बाएं हाथ की तर्जनी अंगुले के टिप पर रखें। इन मुट्ठीयों को नाभि के निचले हिस्से में रखें। कुंड़लिनी मुद्रा - [सोऽहं मुद्रा :दुःख -चिंता दूर करे](https://alaukikshaktiyan.com/सोऽहं-मुद्रा-दुःख-चिंता-द/2025/02/सोऽहं-मुद्रा-दुःख-चिंता-द.html): सोहम मुद्रा दोनों हाथों को अपनी जंघाओं पर रखकर अंगूठे को सबसे छोटी अंगुली की जड़ में लगाकर धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी चारों अंगलियों से अंगूठे को ढ़क लें अर्थात मुट्ठी बन्द कर लें। फिर ओम का लम्बा उच्चारण करें तथा उस उच्चारण को दाएं कान से सुनने की कोशिश करें। ये उच्चारण सात - [श्वसनी मुद्रा [bronchial mudra]](https://alaukikshaktiyan.com/श्वसनी-मुद्रा-bronchial-mudra/2025/02/श्वसनी-मुद्रा-bronchial-mudra.html): श्वसनी मुद्रा [bronchial mudra] ====================== सबसे छोटी अंगुली को अंगूठे की जड़ में लगाएं। अनामिका अंगुली के शीर्ष को अंगूठे के बीच वाले भाग में लगाएं। मध्यमा अंगूले को अंगूठे के शीर्ष भाग से मिलाएं और तर्जनी अंगुली को सीधा रखें। श्वसनी मुद्रा दिन में पाँच बार पाँच मिनट के लिए करें। लाभ : श्वसनी - [`शिवलिंग मुद्रा :नव शक्ति का विकास](https://alaukikshaktiyan.com/शिवलिंग-मुद्रा-नव-शक्ति-क/2025/02/शिवलिंग-मुद्रा-नव-शक्ति-क.html): ::::::::शिवलिंग मुद्रा:::::::: ================= बाएं हाथ को पेट के पास लाकर सीधा रखें। दाएं हाथ की मुठ्ठी बना कर बाईं हथेली पर रखें और दाएं हाथ का अंगूठा सीधा ऊपर की ओर रखें। नीचे वाले बाएं हाथ की अंगुलियाँ और अंगूठा मिला कर रखें। दोनों बाजुओं की कोहनियाँ सीधी रखें। इस मुद्रा को शिवलिंग मुद्रा कहते हैं। - [नाग मुद्रा से बल और बुद्धि](https://alaukikshaktiyan.com/नाग-मुद्रा-से-बल-और-बुद्धि/2025/02/नाग-मुद्रा-से-बल-और-बुद्धि.html): ::::::नाग मुद्रा :::::: ============= नाग मुद्रा को लगाने के लिए दोनों हाथों को छाती के सामने लाएं। हथेली पर हथेली रखते हुए दाएं हाथ की उंगलियाँ बाएं ओर तथा दाएं हाथ की उंगलियों को ऊपर की ओर रखें। दोनों अंगूठे आपस में तिरछे रखें। नाग मुद्रा लगाते हुए लम्बे व गहरे सांस लें। नाग मुद्रा - [मुद्राएँ और बंध :जीवन बदल सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/मुद्राएँ-और-बंध-जीवन-बदल-स/2025/02/मुद्राएँ-और-बंध-जीवन-बदल-स.html): मुद्राएँ और बंध :: जीवन बदल सकती हैं ,सब कुछ दे सकती हैं =========== ================================ घेरंड ने 25 मुद्राओं एवं बंध का उपदेश दिया है और भी अनेक मुद्राओं का उल्लेख अन्य ग्रंथों में मिलता है। मुद्राओं के अभ्यास से गंभीर से गंभीर रोग भी समाप्त हो सकता है। मुद्राओं से सभी तरह के रोग और शोक मिटकर जीवन में शांति - [व्यापार /व्यवसाय में उन्नति क्यों नहीं हो रही ?](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-में-उन्न-2/2017/08/व्यापार-व्यवसाय-में-उन्न-2.html): क्यों नहीं उन्नति कर पा रहे आप ----------------------------- आज का समय बेहद संघर्षमय हो चूका है |व्यक्ति को जीने के लिए अनेक तरह के संघर्ष करने पड़ते हैं |बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें आसान जीवन और सुख सुविधाएं मिल पाती हैं |शुरूआती जीवन माता -पिता पर आश्रित होता है - [डिप्रेसन /अवसाद से बचाव और चिकित्सा](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेसन-अवसाद-से-बचाव-और/2017/11/डिप्रेसन-अवसाद-से-बचाव-और.html): डिप्रेसन [Depression]/अवसाद से बचाव और चिकित्सा ===================================== क्या अचानक आपको ऐसा महसूस होने लगा है जैसे आपकी दुनिया ख़त्म हो गई है! तो आप अकेले नहीं हैं — डिप्रेशन एक बहुत गंभीर और आम बीमारी है, जिससे दुनिया की लगभग 10% आबादी प्रभावित हैं।डिप्रेशन एक बहुत गंभीर बीमारी - [डिप्रेशन [Depression] /अवसाद के लक्षण](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेशन-depression-अवसाद-के-लक्षण/2017/11/डिप्रेशन-depression-अवसाद-के-लक्षण.html): डिप्रेशन [Depression] /अवसाद के लक्षण ============================= अवसाद के लक्षणों की गंभीरता, आवृत्ति तथा सीमा, व्यक्तियों तथा उनकी बीमारियों के अनुसार अलग-अलग रहती है| यद्यपि अवसाद के विकारों से पीड़ित कोई दो व्यक्ति एक जैसे लक्षण अनुभव नहीं करते, लेकिन निम्न संकेतों से इसका जल्दी पता लगाने में मदद - [डिप्रेशन [Depression] के प्रकार](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेशन-depression-के-प्रकार/2017/11/डिप्रेशन-depression-के-प्रकार.html): डिप्रेशन [Depression] के प्रकार ======================= डिप्रेसन /अवसाद अथवा मानसिक दबाव कई तरह का होता है |कुछ गंभीर तो कुछ कम गंभीर |कुछ के प्रभाव दीर्घकालिक होते हैं तो कुछ के अल्पकालिक | मेजर डिप्रेशन ----------------जब भी किसी का साथ अचानक छुट जाता है, तो आप इसे इमोशनल डिसऑर्डर कह सकते हैं। जब भी आप मेजर - [शक्ति मुद्रा :शक्ति दे](https://alaukikshaktiyan.com/शक्ति-मुद्रा-शक्ति-दे/2025/02/शक्ति-मुद्रा-शक्ति-दे.html): शक्ति मुद्रा [Shakti Mudra]::शांति दे ,शक्ति बढ़ाये ,पीड़ा घटाए =================================================== शक्ति मुद्रा दो प्रकार से लगाई जा सकती है। पहली विधि: पहली विधि में दोनों हाथों के अंगूठे को अन्दर कर मुट्ठियां बन्द करने से शक्ति मुद्रा बनती हैं। दूसरी विधि: दूसरी विधि में भी मुट्ठियों को बन्द करना है परंतु अंगूठे को अन्दर कर - [अग्नि शक्ति मुद्रा :सरदर्द से राहत](https://alaukikshaktiyan.com/अग्नि-शक्ति-मुद्रा-सरदर्/2025/02/अग्नि-शक्ति-मुद्रा-सरदर्.html): अग्नि शक्ति मुद्रा ------------------ दोनों हाथों के अंगूठे को बाहर कर अंगूलियों की मुट्ठी बना लें। दोनों हाथों के अंगूठे के शीर्ष आपस में मिला लें। हथेलियाँ नीचे की ओर रखें। अग्नि शक्ति मुद्रा 15 से 45 मिनट तक लगाई जा सकती है। लाभ : अग्नि शक्ति मुद्रा सिर दर्द व माईग्रेन में लाभदायक है। - [पुषाण मुद्रा :याददास्त बढ़ाएं](https://alaukikshaktiyan.com/पुषाण-मुद्रा-याददास्त-बढ/2025/02/पुषाण-मुद्रा-याददास्त-बढ.html): पुषाण मुद्रा [Pushan Mudra]:: गैस ,ह्रदय रोग से बचाए ,याददास्त बढाए ========================================================= पुषाण मुद्रा सूर्य देवता को समर्पित है। पुषाण मुद्रा बनाने के लिए तीन अलग-अलग मुद्राओं का प्रयोग किया जाता है। पुषाण मुद्रा लगाने की दो विधियां हैं। पहली विधि—दाएं हाथ से व्यान मुद्रा बनाएं अर्थात तर्जनी और मध्यमा अंगुली के अग्र भाग को - [गरुड़ मुद्रा :उर्जा संतुलन बनाए](https://alaukikshaktiyan.com/गरुड़-मुद्रा-उर्जा-संतुल/2025/02/गरुड़-मुद्रा-उर्जा-संतुल.html): प्राण शक्ति संतुलन बनाए ,मासिक और पेट की समस्या घटाए ::गरुड़ मुद्रा ========================================================== ‘गरुड़’ जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है ‘पक्षियों का राजा’ गरुड़ जो भगवान विष्णु का वाहन, सांपों का दुश्मन होता है और तेज दृश्टि वाला होता है। गरुड़ मुद्रा दोनों हाथों के अंगुठे को आपस में जकड़ लें और दाएं हाथ को बाएं - [मातंगी मुद्रा :आतंरिक तंत्र स्वस्थ](https://alaukikshaktiyan.com/मातंगी-मुद्रा-आतंरिक-तंत/2025/02/मातंगी-मुद्रा-आतंरिक-तंत.html): मातंगी मुद्रा ========= मातंगी मुद्रा बनाने के लिए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें और दोनों हाथों की मध्यमा उंगलियों को सीधा रखकर आपस में मिला दें। हाथों को पेट पर रखें। अपना ध्यान मणिपुर चक्र पर लगाकर श्वासों को देखें। मातंगी मुद्रा दिन में तीन बार 4-4 मिनटों के लिए करें। - [संधि मुद्रा :जोड़ों के दर्द से मुक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/संधि-मुद्रा-जोड़ों-के-दर्/2025/02/संधि-मुद्रा-जोड़ों-के-दर्.html): जोड़ों के दर्द से मुक्ति :: संधि मुद्रा द्वारा ============================== योग केवल योगियों के लिए नहीं है |यह सामान्य लोगों के लिए ही बनाया गया है ,जिससे लोग अधिकतम स्वस्थ रह सकें और जब तक जिए स्वस्थ रहें |इनमे मुद्राओं का प्रयोग विशेष रूप से सामान्यजन के लिए आसान और उपयोगी होता है |पाँचों उँगलियों - [अग्नि मुद्रा :सर्दी -जुकाम से राहत](https://alaukikshaktiyan.com/अग्नि-मुद्रा-सर्दी-जुकाम/2025/02/अग्नि-मुद्रा-सर्दी-जुकाम.html): अग्नि मुद्रा ======== विधि: अग्नि मुद्रा बहुत ही आसान मुद्रा है। इसे बनाने के लिए अंगूठों के आगे के भाग (अग्र भाग) को मिलाएं और बाकी की सभी अंगुलियाँ सीधी रखें। हथेलियां नीचे की ओर रहें। अग्नि मुद्रा को दिन में 3-4 बार 15-15 मिनटों के लिए कर सकते हैं। लाभ:---अंगूठा अग्नि का प्रतीक है इस - [क्षेपण मुद्रा :नकारात्मकता हटाये](https://alaukikshaktiyan.com/क्षेपण-मुद्रा-नकारात्मक/2025/02/क्षेपण-मुद्रा-नकारात्मक.html): नकारात्मक ऊर्जा दूर करे क्षेपण मुद्रा ========================= दोनों हाथों की अंगुलियां और अंगूठे को आपस में फंसा कर ग्रिप बना लें और तर्जनी अंगुलियों को सीधा नीचे की ओर रखें। यदि बैठ कर लगाएं तब तर्जनी अंगुली सीधा नीचे की ओर, यदि लेटकर कर रहे हैं तब तर्जनी अंगुलियां पैरों की ओर रखें। - [योनि मुद्रा योग :शक्तियों का उदय](https://alaukikshaktiyan.com/योनि-मुद्रा-योग-शक्तियों/2025/02/योनि-मुद्रा-योग-शक्तियों.html): :::::::::::::योनि मुद्रा योग:::::::::::: ====================== हस्त मुद्राएं कई प्रकार की होती है और उन सबके अलग अलग स्वास्थ्‍य लाभ हैं किन्तु समग्र उच्च लाभ की दृष्टि से ,तांत्रिक दृष्टि से और यौगिक दृष्टि से हस्त योग मुद्राओं में योनि मुद्रा को अत्यधिक महत्व मिला हुआ है। हालांकि तंत्रशास्त्र में इसका अलग महत्व है लेकिन यहां यह - [शक्तिचालिनी मुद्रा :कुण्डलिनी जगाये](https://alaukikshaktiyan.com/शक्तिचालिनी-मुद्रा-कुण्/2025/02/शक्तिचालिनी-मुद्रा-कुण्.html): शक्तिचालिनी मुद्रा ============ आठ अंगुल लंबा और चार अंगुल चौड़ा मुलायम वस्त्र लेकर नाभि पर लगाएं और कटिसूत्र में बांध लें| फिर शरीर में भस्म रमाकर सिद्धासन में बैठें और प्राण को अपान से युक्त करें| जब तक गुह्य द्वार से चलती हुई वायु प्रकाशित न हो, इस समय तक गुह्य द्वार को संकुचित - [भुजंगिनी मुद्रा :शक्ति बढ़ाये](https://alaukikshaktiyan.com/भुजंगिनी-मुद्रा-शक्ति-बढ/2025/02/भुजंगिनी-मुद्रा-शक्ति-बढ.html): भुजंगिनी मुद्रा ========== इसमें मुख को फैलाकर कंठ से बाहरी वायु खींची जाती है| तालु और जिह्वा के मध्य वायु के घूमने से शरीर में अद्भुत शक्ति का आविर्भाव होता है| यह मुद्रा अजीर्ण आदि उदर रोगों को नष्ट करने में भी बहुत उपयोगी है| Relax on the ground with the chest facing the floor.Lift - [मातंगिनी मुद्रा :बुढ़ापा रोके](https://alaukikshaktiyan.com/मातंगिनी-मुद्रा-बुढ़ापा/2025/02/मातंगिनी-मुद्रा-बुढ़ापा.html): मातंगिनी मुद्रा ========== यह मुद्रा जल में कंठ पर्यन्त खड़े होकर की जाती है| इसमें नासिका से जल खींचकर मुख-द्वार से बाहर निकाल दिया जाता है| यह क्रिया बार-बार दोहराई जाती है| इस प्रकार विपरीत क्रम से बार- बार अभ्यास करें| इस मुद्रा के अभ्यास से शरीर में बल की वृद्धि होती है, वृद्धावस्था का - [काकी मुद्रा :युवा बनाये](https://alaukikshaktiyan.com/काकी-मुद्रा-युवा-बनाये/2025/02/काकी-मुद्रा-युवा-बनाये.html): काकी मुद्रा ======= काक मुद्रा में प्राणों का आयाम न करके प्राण वायु का पान किया जाता है |उस समय जीभ को कौवे की चोंच के समान अर्ध गोलाकार या नालीदार बना लिया जाता है ,अतः इसे काकी मुद्रा कहा जाता है |वृद्धावस्था को रोकने के लिए यह अत्यंत उपयोगी कहा गया है |इसके छः - [पंचधारणा मुद्रा [Panchadharana mudra]](https://alaukikshaktiyan.com/पंचधारणा-मुद्रा-panchadharana-mudra/2025/02/पंचधारणा-मुद्रा-panchadharana-mudra.html): पंचधारणा मुद्रा और उसके लाभ ====================== धारणा का अभिप्राय है, ध्यान के द्वारा ग्रहण करने की शक्ति| पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश- इन पंच महाभूतों से यथार्थ का ज्ञान होना ही पंचधारणा मुद्रा का वास्तविक उद्देश्य है| यह मुद्रा पंच तत्वों से संबंधित होने के कारण उसको पृथक-पृथक धारणा में परिपक्व करती है, इसलिए - [पाशिनी मुद्रा [Pashini Mudra]](https://alaukikshaktiyan.com/पाशिनी-मुद्रा-pashini-mudra/2025/02/पाशिनी-मुद्रा-pashini-mudra.html): पाशिनी मुद्रा तथा उसके लाभ ==================== दोनों पांवों को कंठ के पीछे की ओर ले जाकर उन्हें परस्पर मिलाएं और पाश के समान दृढ़ता से बांध लें| इसके अभ्यास से भी कुण्डलिनी शक्ति के जागरण में बहुत सुगमता हो जाती है तथा साधक के शरीर में बल और पुष्टि का आविर्भाव होता है| मानसिक बलवर्द्धन - [शाम्भवी मुद्रा :शिव की मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/शाम्भवी-मुद्रा-शिव-की-मुद/2025/02/शाम्भवी-मुद्रा-शिव-की-मुद.html): शाम्भवी मुद्रा और उसके लाभ ===================== शाम्भवी मुद्रा को भगवान शिव की मुद्रा भी कहा जाता है| जब इस साधना को लम्बे समय तक किया जाता है तो बहुत ज्यादा नींद आने लगती है| इस मुद्रा को करने के बाद साधक घण्टो तक एक आसन पर चेतन अवस्था मे रहकर साधना कर सकते है। - [यौवन दे -माण्डुकी मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/यौवन-दे-माण्डुकी-मुद्रा/2025/02/यौवन-दे-माण्डुकी-मुद्रा.html): माण्डुकी मुद्रा ::यौवन दे ,बुढापा दूर रखे ============================== मुख को बंद करके जुबान को तालु में घुमाएं और सहस्रार से टपकते हुए सुधारस को जुबान से धीरे-धीरे पीने का यत्न करें| यही माण्डवी (या माण्डुकी) मुद्रा है| इसके द्वारा बालों की सफेदी, उनका झड़ना, शरीर पर झुर्रियों, मुंहासों आदि का पड़ना तथा निर्बलता आदि दूर - [वृद्धावस्था दूर तड़ागी मुद्रा से](https://alaukikshaktiyan.com/वृद्धावस्था-दूर-तड़ागी-म/2025/02/वृद्धावस्था-दूर-तड़ागी-म.html): तड़ागी मुद्रा और उसके लाभ ==================== दोनों पांवों को दण्ड के समान धरती पर पसार लें और हाथों से उनके अंगूठों को पकड़ने तथा दोनों जांघों पर सिर को स्थापित करें, साथ ही उदर को तड़ाग (सरोवर) के समान कर लें| यह मुद्रा अनेक रोगों और वृद्धावस्था को भी दूर करने में सहायक सिद्ध होती - [वज्रोली मुद्रा :चक्र जाग्रत करता है](https://alaukikshaktiyan.com/वज्रोली-मुद्रा-चक्र-जाग्/2025/02/वज्रोली-मुद्रा-चक्र-जाग्.html): बज्रौली मुद्रा :: तेजस्वी बनाए ==================== बज्रौली मुद्रा भी मूलबंध का अच्छा अभ्यास किए बिना किसी प्रकार संभव नहीं है| यह मुद्रा केवल योगी के लिए ही नहीं, भोगी के लिए भी अत्यंत लाभकारी है| इस मुद्रा में पहले दोनों पांवों को भूमि पर दृढ़तापूर्वक टिकाकर, दोनों पांवों को धीरे-धीरे दृढ़तापूर्वक ऊपर आकाश में - [अश्वनी मुद्रा :अकालमृत्यु भय हटाये](https://alaukikshaktiyan.com/अश्वनी-मुद्रा-अकालमृत्य/2025/02/अश्वनी-मुद्रा-अकालमृत्य.html): अश्‍विनी मुद्रा :; गुदा ,उदर रोग दूर करे =========================== इस मुद्रा से साधक में घोड़ों जैसी शक्ति आ जाती है, जिसे ‘हॉर्स पॉवर’ कहते हैं| इस मुद्रा में गुदा-द्वार का बार-बार संकोचन और प्रसार किया जाता है| इसी से मुद्रा की सिद्धि हो जाती है| इसके द्वारा कुण्डलिनी जागरण में सुगमता रहती है और अनेक - [Meditation सफल बनाए ध्यान मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/meditation-सफल-बनाए-ध्यान-मुद्रा/2025/02/meditation-सफल-बनाए-ध्यान-मुद्रा.html): ध्यान मुद्रा और उसके लाभ =================== मेडिटेशन को कैसे अधिक सफल बनायें ?ध्यान मुद्रा क्या है ? ------------------------------------------------------------------- ध्यान करना ,ध्यान साधना ,मेडिटेशन एक जाना पहचाना नाम है |लाखों -करोड़ों लोग इस विधा का उपयोग सीधे या साधना के रूप में करते हैं |इसके कई तरीके बताये जाते हैं ,कई तकनीकियाँ और नियम होते - [दो ऊँगली जोड़ लो ,सारे रोग समाप्त](https://alaukikshaktiyan.com/दो-ऊँगली-जोड़-लो-सारे-रोग-स/2025/02/दो-ऊँगली-जोड़-लो-सारे-रोग-स.html): केवल दो उँगलियाँ मिला दें सारे रोग समाप्त =============================== वीडियो का शीर्षक है मात्र दो उंगलियाँ आपस में मिला दें रोग समाप्त होगा |यह अतिशयोक्ति नहीं और न ही आश्चर्यजनक है |यह सच है बस आप इसे नहीं जानते |तंत्र और योग में हजारों वर्षों से इसका उपयोग होता आया है और साधक इनसे - [What is Depression ?](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेसन-depression-क्या-है/2017/11/डिप्रेसन-depression-क्या-है.html): अवसाद [Depression] /डिप्रेसन क्या है =========================== अवसाद या डिप्रेशन का तात्पर्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में मनोभावों संबंधी दुख से होता है। इसे रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है। आयुर्विज्ञान में कोई भी व्यक्ति डिप्रेस्ड की अवस्था में स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। उस व्यक्ति-विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, - [डिप्रेसन [Depression] /अवसाद और ज्योतिषीय /तांत्रिक उपचार](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेसन-depression-अवसाद-और-ज्योत/2017/11/डिप्रेसन-depression-अवसाद-और-ज्योत.html): डिप्रेसन [Depression] /अवसाद और ज्योतिषीय /तांत्रिक उपचार =========================================== डिप्रेसन अथवा अवसाद में मन की भूमिका सर्वोपरि होती है जबकि इसके प्रभाव से शारीरिक रूप से व्यक्ति खुद को पंगु समझने लगता है |मन जब अशांत हो ,दब गया हो तो शरीर की सुध जाती रहती है |न कुछ अच्छा लगता है - [डिप्रेसन [Depression]/अवसाद की समग्र चिकित्सा और उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/डिप्रेसन-depression-अवसाद-की-समग्र/2017/11/डिप्रेसन-depression-अवसाद-की-समग्र.html): डिप्रेसन [Depression]/अवसाद की समग्र चिकित्सा और उपाय ========================================= डिप्रेसन अथवा अवसाद आज के समय में बूढ़े से लेकर बच्चों तक को प्रभावित कर रहा और अधिकतर आत्महत्या में आज इसकी भूमिका दिखती है |यह हर दस में से एक व्यक्ति में दिख रहा है अतः इसने - [सुख-समृद्धिकारक हनुमान साधना](https://alaukikshaktiyan.com/सुख-समृद्धिकारक-हनुमान-स/2017/11/सुख-समृद्धिकारक-हनुमान-स.html): सुख-समृद्धिकारक हनुमान साधना ======================= श्री हनुमान साधना एवं मंत्रों के संदर्भ में मंत्र महार्णव, मंत्र महोदधि, हनुमदोपासना, श्री विद्यार्णव आदि ग्रंथों में कई प्रयोग वर्णित हैं। कलि युग में हनुमान साधना समस्त बाधाओं, कष्टों और अड़चनों को तुरंत मिटाने में पूर्णतः सहायक है। हनुमान शक्तिशाली, पराक्रमी, संकटों का नाश करने वाले - [अर्पणा अप्सरा साधना](https://alaukikshaktiyan.com/अर्पणा-अप्सरा-साधना/2017/11/अर्पणा-अप्सरा-साधना.html): अर्पणा अप्सरा साधना ============== अप्सरा साधना स्पष्ट शब्दो मेँ काम भावना की साधना है। अप्सरा का अर्थ ऐसी देवी वर्ग से है जो सौंदर्य की द्रष्टि से अनुपमेय हो। मुख की सुन्दरता के साथ साथ देह व वाणी सौँन्दर्य न्रत्य संगीतकाव्य-हास्य-विनोद सभी प्रकार के सौंदर्योँ से भरपूर हो।जिसे देख - [Urvashi Sadhana [उर्वशी साधना ]](https://alaukikshaktiyan.com/उर्वशी-साधना-सौन्दर्य-सु/2017/11/उर्वशी-साधना-सौन्दर्य-सु.html): उर्वशी साधना - सौन्दर्य, सुख प्रेम की पूर्णता हेतु ============================ रम्भा, उर्वशी और मेनका तो देवताओं की अप्सराएं रही हैं, और प्रत्येक देवता इन्हे प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहा है। यदि इन अप्सराओं को देवता प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहे हैं, तो मनुष्य भी इन्हे प्रेमिका रूप - [शत्रु स्तम्भन कालरात्रि शाबर प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/शत्रु-स्तम्भन-कालरात्रि/2017/11/शत्रु-स्तम्भन-कालरात्रि.html): शत्रु स्तम्भन कालरात्रि शाबर प्रयोग ======================== आज का समय एक ऐसा समय है जब व्यक्ति स्वार्थ के वशीभूत हो कर किसी का भी अहित करने के लिए तैयार हो जाता है.| कई बार यह देखने में आया है की परिवार के निकट सबंधी व्यक्ति या रिश्तेदार ही अपने स्वार्थ के - [गृह बाधा शान्ति कारक शाबर मन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/गृह-बाधा-शान्ति-कारक-शाबर/2017/11/गृह-बाधा-शान्ति-कारक-शाबर.html): गृह बाधा शान्ति कारक शाबर मन्त्र ======================= यह मंत्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में साधक की रक्षा करता है । कोई भी व्यक्ति इसे सिद्ध करके स्वयं को सुरक्षित कर सकता है । जिसने इसे सिद्ध कर लिया हो, ऐसा व्यक्ति कहीं भी जाए, उसको किसी प्रकार की शारीरिक हानि की आशंका नहीं रहेगी । - [कुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यन्त्र’ का अनुष्ठान](https://alaukikshaktiyan.com/कुंजिका-स्तोत्र-और-बीस/2017/11/कुंजिका-स्तोत्र-और-बीस.html): कुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यन्त्र’ का अनुष्ठान ========================== प्राण-प्रतिष्ठा करने के पर्व ------------------------------ चन्द्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, दीपावली के तीन दिन (धन तेरस, चर्तुदशी, अमावस्या), रवि-पुष्य योग, रवि-मूल योग तथा महानवमी के दिन ‘रजत-यन्त्र’ की प्राण प्रतिष्ठा, पूजादि विधान करें। इनमे से जो समय आपको मिले, साधना प्रारम्भ करें। 41 दिन तक विधि-पूर्वक पूजादि करने - [भूत -प्रेत प्रकोप ::लक्षण ,बचाव और सावधानी](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-प्रकोप-लक्षण-बच/2017/08/भूत-प्रेत-प्रकोप-लक्षण-बच.html): भूत-प्रेत और उपरी हवा ::लक्षण ,बचाव ============================== अस्वाभाविक व अकस्मात होने वाली मृत्यु से मरने वाले प्राणियों की आत्मा भटकती रहती हैं, जब तक कि वह सृष्टि के चक्र में प्रवेश न कर जाए, तब तक ये भटकती आत्माएं ही भूत व प्रेत होते हैं। - [भूत -प्रेत ,तांत्रिक अभिचार से कैसे बचें ?](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-तांत्रिक-अभिचा/2017/08/भूत-प्रेत-तांत्रिक-अभिचा.html): भूत -प्रेत ,वायव्य बाधाओं और तांत्रिक अभिचार से बचाव के उपाय ============================================= भूत-प्रेत ,वायव्य बाधाएं अथवा तांत्रिक अभिचार व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के साथ ही आर्थिक क्षमता पर भी प्रभाव डालते हैं ,इनके कारण पारिवारिक ,दाम्पत्य सम्बन्धी और संतान सम्बन्धी समस्याएं भी हो सकती हैं ,कभी कभी ये गंभीर रोग भी उत्पन्न करते है - [प्रेत -भूत ,किये -कराये से मुक्ति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेत-भूत-किये-कराये-से-मु/2017/08/प्रेत-भूत-किये-कराये-से-मु.html): भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा और तांत्रिक अभिचार से मुक्ति के उपाय ========================================== भूत-प्रेत-चुड़ैल जैसी समस्याओं से व्यक्ति अथवा परिवार के सहयोग से मुक्ति पायी जा सकती है ,किन्तु उच्च स्तर की शक्तियां सक्षम व्यक्ति ही हटा सकता है ,कुछ शक्तियां ऐसी होती हैं की अच्छे अच्छे साधक के छक्के छुडा देती हैं और उनके तक - [बगलामुखी यन्त्र ::प्रेत बाधा रोकती और हटाती है](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-यन्त्र-प्रेत-बा/2017/08/बगलामुखी-यन्त्र-प्रेत-बा.html): बगलामुखी यन्त्र से रोके/हटाये भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा ================================== भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो - [उपरी बाधा ,हवा ,भूत दूर करने के टोटके](https://alaukikshaktiyan.com/उपरी-बाधा-हवा-भूत-दूर-करने/2017/08/उपरी-बाधा-हवा-भूत-दूर-करने.html): भूत -प्रेत -ऊपरी बाधा या हवा दूर करने का प्रयोग और टोटके ========================================== १. भूत–प्रेत, ऊपरी बाधा या हवा। यह शब्द अक्सर हमारे सुनने में आते हैं। ऐसा मानाजाता है जिन लोगों पर इनका असर होता है उनमें कुछ शारीरिक व मानसिक परिवर्तन होजाता है। उत्तेजना में आकर ऐसे लोग किसी पर भी वार कर सकते हैं। भूत बाधा से पीडि़तव्यक्ति को नीचे लिखे टोटके से इस परेशानी से मुक्ति मिल सकती है। सामग्री——— लौंग का जोड़ा, फूल का जोड़ा, इलाइची, पान और पेड़ा। टोटका-एक दोना लेकर उसमें सबसे पहले पान रखें,, उसके ऊपर फूल व अन्य वस्तुएं रखकरभूतबाधा से पीडि़त व्यक्ति के नाम राशि के ग्रह का मंत्र 108 बार पढ़ें,, यह कार्य पवित्रहोकर व दोना सामने रखकर करें,,इसके पश्चात सात बार मंत्र पढ़ते हुए उस दोने को रोगीके सिर से पांव तक उतार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से प्रेत बाधा शांतहो जाती है ( यह टोटका अनटोका किया जाना चाहिए।२.प्रेत बाधा दूर करने के लिए पुष्य नक्षत्र में चिड़चिटे अथवा धतूरे का पौधा जड़सहितउखाड़ कर उसे धरती में ऐसा दबाएं कि जड़ वाला भाग ऊपर रहे और पूरा पौधा धरती मेंसमा जाएं। इस उपाय से घर में प्रेतबाधा नहीं रहती और व्यक्ति सुख–शांति का अनुभवकरता है।३.भूत, पिशाच जहाँ रहते हैं, वहां गाय खड़ी कर दो, गाय की सुगंध से भूत अपने आपभागेंगे l किसी के घर में भूत, प्रेत का वास हो, तो गाय का गोबर अथवा गाय का झरणछिटका करो l गाय का कंडा जलाओ, उस पे थोड़ा गाय का घी डाल दो, अपने आप भागेंगे, भागना नहीं पड़ेगा l अगर किसी व्यक्ति के अंदर भूत घुसे हैं तो उसे उसी धूप वाले कमरे मेंबिठाओ, भाग जायेंगे l ४.यदि बच्चा बाहर से खेलकर, पढ़कर, घूमकर आए और थका, घबराया या परेशान सालगे तो यह उसे नजर या हाय लगने की पहचान है, ऐसे में उसके सर से ७ लाल मिर्च औरएक चम्मच राई के दाने ७ बार घूमाकर उतारा कर लें और फिर आग में जला दें।५.यदि बेवजह डर लगता हो, डरावने सपने आते हों, तो हनुमान चालीसा और गजेंद्र मोक्षका पाठ करें और हनुमान मंदिर में हनुमान जी का श्रृंगार करें व चोला चढ़ाएं।६.व्यक्ति के बीमार होने की स्थिति में दवा काम नहीं कर रही हो, तो सिरहाने कुछ सिक्केरखे और सबेरे उन सिक्कों को श्मशान में डाल आए।७.व्यवसाय बाधित हो, वांछित उन्नति नहीं हो रही हो, तो ७ शनिवार को सिंदूर, चांदी कावर्क, मोतीचूर के पांच लड्डू, चमेली का तेल, मीठा पान, सूखा नारियलऔर लौंग हनुमानजी को अर्पित करें।८.किसी काम में मन न लगता हो, उचाट सा रहता हो, तो रविवार को प्रातः भैरव मंदिर मेंमदिरा अर्पित करें और खाली बोतल को सात बार अपने सरसे उतारकर पीपल के पेड़ केनीचे रख दें। ९. शनिवार को नारियल और बादाम जल में प्रवाहित करें।१०.अशोक वृक्ष के सात पत्ते मंदिर में रख कर पूजा करें, उनके सूखने पर नए पत्ते रखेंऔर पुराने पत्ते पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। यह क्रिया नियमित रूप से करें, घर भूत–प्रेतबाधा, नजर दोष आदि से मुक्त रहेगा। ११.एक कटोरी चावल दान करें और गणेश भगवान को एक पूरी सुपारी रोज चढ़ाएं,,यहक्रिया एक वर्ष तक करें, नजर दोष व भूत–प्रेत बाधा आदि के कारण बाधित कार्य पूरे होंगे।………………………………………………हर–हर महादेव विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें -मो. 07408987716 ,समय -सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच . - [भूत -प्रेत ,बाधाएं ,नकारात्मक शक्तियाँ हटायें दिव्य गुटिका /डिब्बी से](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-बाधाएं-नकारात्/2017/08/भूत-प्रेत-बाधाएं-नकारात्.html): भूत -प्रेत /नकारात्मक ऊर्जा पर प्रतिक्रिया करती और हटाती है दिव्य गुटिका ================================================================ वर्षों के तंत्र जीवन और शोधों के क्रम में हमें यह उत्कंठा उत्पन्न हुई की क्या कुछ ऐसा बनाया जा सकता है जिससे एक साथ ही धन ,सुख -समृद्धि -शान्ति की भी प्राप्ति हो सके और किये -कराये -नकारात्मक ऊर्जा ,भूत -प्रेत जैसे - [प्रेत बाधा निवारण के कुछ मंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेत-बाधा-निवारण-के-कुछ-म/2017/08/प्रेत-बाधा-निवारण-के-कुछ-म.html): मान्त्रिक प्रयोग —————– भूत–प्रेत बाधाओं, जादू–टोनों आदि के प्रभाव से भले–चंगे लोगों का जीवन भी दुखमय होजाता है। ज्योतिष तथा शाबर ग्रंथों में इन बाधाओं से मुक्ति के अनेकानेक उपाय उपायबताए गए हैं।इस प्रकार की बाधा निवारण करने से पूर्व स्वयं की रक्षा भी आवश्यकहें.इसलिए इन मन्त्रों द्वारा अपनी तथा अपने आसन की सुरक्षा कर व्यवस्थित हो जाएँ…1. जब भी हम पूजन आदि धार्मिक कार्य करते हैं वहां आसुरी शक्तियां अवश्य अपना प्रभावदिखाने का प्रयास करती हैं, उन आसुरी शक्तियों को दूर भगाने के लिए हम मंत्रों का प्रयोगकर सकते हैं। इसे रक्षा विधान कहते हैं। नीचे रक्षा विधान के बारे में संक्षिप्त में लिखा गयाहै। रक्षा विधान का प्रयोग करने से बुरी शक्तियां धार्मिक कार्य में बाधा नहीं पहुंचाती तथादूर से ही निकल जाती हैं। रक्षा विधान– रक्षा विधान का अर्थ है जहाँ हम पूजा कर रहे है वहाँ यदि कोई आसुरीशक्तियाँ, मानसिक विकार आदि हो तो चले जाएं, जिससे पूजा में कोई बाधा उपस्थित नहो। बाएं हाथ में पीली सरसों अथवा चावल लेकर दाहिने हाथ से ढंक दें तथा निम्न मंत्रउच्चारण के पश्चात सभी दिशाओं में उछाल दें। मंत्र—–ओम अपसर्पन्तु ते भूता: ये भूता:भूमि संस्थिता:।ये भूता: बिघ्नकर्तारस्तेनश्यन्तु शिवाज्ञया॥अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचा: सर्वतो दिशम।सर्वेषामविरोधेन पूजा कर्मसमारभ्भे॥ 2. देह रक्षा मंत्र:—- ऊँ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिंड हमारा बैठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धामका यती हनुमन्त रखवाला।इस मंत्र को किसी भी ग्रहण काल में पूरे समय तक लगातार जप करके सिद्ध कर लें।. किसीदुष्ट व्यक्ति से अहित का डर हो, ग्यारह बार मंत्र पढ़कर शरीर पर फूंक मारे तो आपकाशरीर दुश्मन के आक्रमण से हर प्रकार सुरक्षित रहेगा। 3. उल्टी खोपड़ी मरघटिया मसान बांध दें, बाबा भैरो की आन।इस मंत्र को श्मशान में भैरोजी की पूजा, बलि का भोग देकर सवा लाख मंत्र जपे तथाआवश्यकता के समय चाकू से अपने चारों तरफ घेरा खींचे तो अचूक चैकी बनती है।4. इससे किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति साधना में विघ्न नहीं डाल सकती, होली,दीपावली या ग्रहण काल में इस मंत्र को सिद्ध कर लें 11 माला जपकर। ऊँ नमः श्मशानवासिने भूतादिनां पलायन कुरू–कुरू स्वाहा।इस मंत्र से 108 बार अभिमंत्रित करके लहसुन, हींग को पीसकर इसके अर्क को बाधाग्रस्तरोगी के नाक व आंख में लगायें, भूत तुरंत शरीर छोड़कर चला जाएगा।5. बहेड़े के पत्ते या जड़ को घर लाकर धूप, दीप, नैवेद्य और पंचोपचार पूजा के बाद 1माला यानि 108 बार इस मंत्र से 21 दिन अभिमंत्रित करने से सिद्ध हो जाएगा।ऊँ नमः सर्वभूताधिपतये ग्रसग्रस शोषय भैरवी चाजायति स्वाहा।’ इस पत्ते को जहां स्थापित किया जाता है, वहां किसी भी प्रकार से भूत प्रेतबाधा व जादू टोनेका प्रभाव नहीं पड़ता तथा सिद्ध जड़ को बच्चे या बड़े के गले में ताबीज बनाकर पहनाया जासकता है।6. प्रेतबाधा निवारण भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी तथा पिशाच, मशान आदि तामसीशक्तियों से रक्षा के लिए यह साधना सर्वोत्तम तथा सरल उपाय वाली है। .इसके लिएसाधक को चाहिए कि किसी शुभ घड़ी में रविपुष्य योग अथवा शनिवार को) उल्लू लेकर,उसके दाएं डैने के कुछ पंख निकाल लें तथा उल्लू को उड़ा दें। इसके बाद उस पंख कोगंगाजल से धोकर स्नानादि करके पूर्वाभिमुख होकर लाल कंबल के आसन पर बैठकर2100 बार मंत्र पढकर प्रत्येक पंख पर फूंक मारे। इस प्रकार से अभिमंत्रित करके, जलाकरउन पंखों की राख बना लें ।मंत्र: ऊँ नमः रूद्राय, नमः कालिकायै, नमः चंचलायै नमः कामाक्ष्यै नमः पक्षिराजाय, नमःलक्ष्मीवाहनाय, भूत–प्रेतादीनां निवारणं कुरू–कुरू ठं ठं ठं स्वाहा।इस मंत्र से सिद्ध भभूति को कांच के चैड़े पात्र में सुरक्षित रख लें। जब भी किसी स्त्री या पुरुषको ऊपरी बाधा हो, इसे निकालकर चुटकी भर विभूति से 108 बार मंत्र पढ़कर झाड़ देने सेजो अला बला हो, वह भाग जाती है।अधिक शक्तिशाली आत्मा हो तो इसे ताबीज में रखकर पुरुष की दाहिनी भुजा पर, स्त्री कीबाई भुजा पर बांधने से दुबारा किसी आत्मा या दुरात्मा का प्रकोप नहीं होता।…………………………………………हर -हर महादेव विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें -मो. 07408987716 ,समय -सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच . - [भूत -प्रेत निवारण और तंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-निवारण-और-तंत्र/2017/08/भूत-प्रेत-निवारण-और-तंत्र.html): तांत्रिक प्रयोग —————- यहां कुछ प्रमुख शाबर मंत्रों का विवरणप्रस्तुत है। ये मंत्र सहज और सरल हैं,जिनके जप अनुष्ठान से उक्त बाधाओंतथा जादू–टोनों के प्रभाव से बचाव होसकता है। १. निम्नलिखित मंत्र को सिद्ध करने के लिए उसका २१ दिनों तक एक माला जप नियमितरूप से करें। हनुमान मंदिर में अगरबत्ती जलाएं। २१ वें दिन मंदिर में एक नारियल औरलाल वस्त्र की ध्वजा चढ़ाएं। यह मंत्र भूत, प्रेत, डाकिनी, शाकिनी नजर दोष, जादू–टोनेआदि से बचाव एवं शरीर की रक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी है। मंत्र : ॐ हनुमान पहलवान, बरस–बारह का जवान, हाथ में लड्डू, मुंह में पान। खेल–खेलकर लंका के चौगान। अंजनी का पूत, राम का दूत। छिण में कीलौं, नौ खंड का भूत। जाग–जाग हनुमान हुङ्काला, ताती लोहा लङ्काला। शीश जटा डग डेंरू उमर गाजे, वृज की कोटडीवृज का ताला। आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चम्पे न सीव। अजरा, झरे, भरमा भरे।ईंघट पिंड की रक्षा, राजा रामचंद्र जी, लक्ष्मण, कुंवर हनुमान करें। २. किसी बुरी आत्मा के प्रभाव अथवा किसी ग्रह के अशुभ प्रभाव के फलस्वरूप संतान सुखमें बाधा से मुक्ति हेतु श्री बटुक का उतारा करना चाहिए,,यह क्रिया निम्नलिखित विधि से रविवार, सोमवार, मंगलवार तीन दिन लगातार करें।विधि : उतारे के स्थान पर एक पात्र में सरसों के तेल में बने उड़द के ११ बड़े, उड़द की दालभरी ११ कचौड़ियां, ७ प्रकार की मिठाइयां, लाल फूल, सिंदूर, ४ बत्तियों का दीपक, 1 नींबूऔर 1 कुल्हड जल रखें। सिंदूर को चार बत्तियों वाले दीपक के तेल में डालें। फिर फूल,कचौड़ी, बड़े, मिठाइयां सभी सामग्री एक पत्तल पर रखें तथा मन ही मन यह कहें कि ”यहभोग हम श्री बटुक भैरव जी को दे रहे हैं, वे अपने भूत– प्रेतादिकों को खिला दें और संकटग्रस्त व्यक्ति के ऊपर जो बुरी आत्मा या ग्रहों की कुदृष्टि है, उसका शमन कर दें।” समस्तसामग्री को पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर ७ बार उतारा करके किसी चौराहे पर रखवा दें।सामग्री रखवाकर लौट आएं। ध्यान रहे, लौटते समय पीछे न देखें। उतारा परिवार के सदस्यकरें। यह क्रिया यदि अपने लिए करनी हो, तो स्वयं करें। ३. कृत्या निवारण के लिए एक नींबू को चार टुकड़ों में चीरें। चारों टुकड़ों पर ४–४ बारनिम्नलिखित मंत्र पढ़कर उन्हें चारों कोनों में फेंक दें।मंत्र : आई की, माई की, आकाश की, परेवा पाताल की। परेवा तेरे पग कुनकुन। सेवा समसेरजादू गीर समसेर की भेजी। ताके पद को बढ़ कर, कुरु–कुरु स्वाहा। ४. राई, लाल चंदन, राल, जटामंसी, कपूर, खांड, गुग्गुल और सफेद चंदन का चूराक्रमानुसार दो गुना लें और सबको मिलाकर अच्छी तरह कूट लें। फिर उस मिश्रण में इतनागोघृत मिलाएं कि पूरी सामग्री अच्छी तरह मिश्रित हो जाए। इस सामग्री से प्रेत बाधा सेग्रस्त घर में धूनी दें, प्रेत बाधा, क्लेशादि दूर होंगे और परिवार में शांति और सुख कावातावरण उत्पन्न होगा। व्यापार स्थल पर यह सामग्री धूनी के रूप में प्रयोग करें, व्यापारमें उन्नति होगी। ५. भूत छुड़ाने का मंत्र : भूत छुड़ाने के भी अनेकानेक शाबर मंत्र हैं, जिनमें एक इस प्रकारहै।तेल नीर, तेल पसार चौरासी सहस्र डाकिनीर छेल, एते लरेभार मुइ तेल पडियादेय अमुकार(नाम) अंगे अमुकार (नाम) भार आडदन शूले यक्ष्या–यक्षिणी, दैत्या–दैत्यानी, भूता–भूतिनी, दानव–दानिवी, नीशा चौरा शुचि–मुखा गारुड तलनम वार भाषइ, लाडि भोजाइआमि पिशाचि अमुकार (नाम) अंगेया, काल जटार माथा खा ह्रीं फट स्वाहा। सिद्धि गुरुरचरण राडिर कालिकार आज्ञा।विधि : ऊपर वर्णित मंत्र को पहले किसी सिद्ध मुहूर्त में १०,००० बार जप कर सिद्ध कर लें।फिर सरसों तेल को २१ बार अभिमंत्रित कर भूत बाधाग्रस्त व्यक्ति पर छिड़कें, तो भूत उतरजाता है।………………………………………………हर-हर महादेव विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें -मो. 07408987716 ,समय -सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच . - [अदृश्य शक्ति का वास घर में तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/घर-में-अदृश्य-शक्ति-का-भी-व/2017/08/घर-में-अदृश्य-शक्ति-का-भी-व.html): कोई और भी है आपके घर /कमरे में ======================= क्या आपके साथ ऐसा होता है ——————————— कभी कभी कुछ लोगों को अहसास होता है कि उनके आस पास कोई और भी है ,पर नजरें घुमाने पर कोई दिखाई नहीं देता ।कभी अकेले कमरे या एकांत में महसूस होता है कि कमरे - [प्रेतों -भूतों से रक्षा के लिए शक्तिशाली कवच](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेतों-भूतों-से-रक्षा-के/2017/08/प्रेतों-भूतों-से-रक्षा-के.html): कवच -ताबीज ========== भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [केवल स्त्रियों के लिए ] =================================सामान्य रूप से भूत–प्रेत ,आत्माएं ,वायव्य बाधाएं ,तांत्रिक टोटके और अभिचार स्त्रियों को अधिक और शीघ्र प्रभावित करते हैं |इसका कारण स्त्रियों की शारीरिक और मानसिक बनावट भी होती है और स्त्रियों के प्रति कामुक पुरुष आत्माओं का आकर्षण भी होता है - [आप किये कराये से पीड़ित तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/आप-किसी-बाधा-किये-कराये-से/2017/08/आप-किसी-बाधा-किये-कराये-से.html): कष्टकारक शक्तियों से प्रभावित तो नहीं हैं आप ====================================== प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा या शक्ति हमारे लिए लाभदायक और नकारात्मक उर्जा याशक्तिया नुक्सान करने वाली या परेशानी उत्पन्न करने वाली होती है ,,,यह समस्त प्रकृतिदो प्रकार की शक्तियों या उर्जाओं से बनता है ,धनात्मक और रिनात्मक ,सूर्य और अपनीऊर्जा से प्रकाशित ग्रह नक्षत्रों से उत्पन्न होने वाली या प्राप्त होने वाली ऊर्जा धनात्मकमानी जाती है ,जबकि पृथ्वी और ग्रहों से उत्पन्न ऊर्जा या शक्ति प्रकृति के परिप्रेक्ष्य मेंऋणात्मक होती है ,,यह दोनों ही उर्जाये हमारे लिए सकारात्मक ही होती हैं ,इन दोनों केसंतुलन और प्राप्ति से ही समस्त प्राणी और जीव वनस्पतियों की उत्पत्ति और स्थितिहोती है ,,,इन प्राकृतिक शक्तियों के अतिरिक्त दो अन्य पारलौकिक शक्तिया व्यक्तियों कोप्रभावित करती है ,सकारात्मक और नकारात्मक ,,सकारात्मक वह है जिनकी शक्ति आपकेलिए लाभदायक है जैसे आपके ईष्ट ,आपके कुल देवता ,महाविद्यायें,देवीदेवता आदि औरनकारात्मक वह है जो आपके लिए समस्या ही उत्पन्न करते है जैसे भूत–प्रेत–पिशाच–ब्रह्मराक्षस–जिन्न–शाकिनी–डाकिनी आदि , आज के समय में नकारात्मक ऊर्जा शक्तियों का प्रभाव सामान्यतया घरों परिवारों पर बहुतदिखने लगा है ,जबकि उन्हें पता ही नहीं होता की वे इनसे प्रभावित है ,उनके द्वारा बतायेजाने वालो लक्षणों से प्रथम दृष्टया अकसर इनकी समस्या घरों में मिलती है ,इनके कारणवास्तु दोष ,घरों में सूर्य के प्रकाश की कमी ,गलत जगह गलत हिस्सों का बना होना ,पित्रदोष ,कुल देवता का दोष ,ईष्ट प्रबलता की कमी ,रहनसहन की स्थिति ,विजातीयता,धार्मिक श्रद्धा की कमी ,खुद की गलतियाँ ,प्रतिद्वंदिता ,अभिचार आदि हो सकते हैं ,यदि घर से बाहर से घर पहुचने पर सर भारी हो जाए ,घर में अशांति का वातावरण हो ,कलहहोता हो,पति–पत्नी में अनावश्यक अत्यधिक कलह हो ,पूजापाठ में मन न लगे ,पूजा पाठसे सदैव मन भागे ,पूजा पाठ करते समय सर भारी हो,लगे कोई आसपास है ,जम्हाई अधिकआये ,पूजा पाठ करने से दुर्घटनाएं या परेशानियां बढ़ जाएँ ,पूजा पाठ आदि धार्मिक क्रियाओंमें अवरोध उत्पन्न हो ,बीमारियाँ अधिक होती हों ,आयव्यय का संतुलन बिगड़ा हो,आकस्मिक दुर्घटनाएं अधिक होती हों ,रोग हो किन्तु कारण पता न चले ,सदस्यों मेंमतभेद रहते हों ,मन हमेशा अशांत रहता हो ,खुशहाली न दिखे ,प्रगति रुकी लगे अथवाअवनति होने लगे ,संताने विरुद्ध जाने लगें ,संतान बिगड़ने लगे ,उनके भविष्य असुरक्षितहोने लगे ,संतान हीनता की स्थिति हो ,अधिक त्वचा रोग आदि हों ,अपने ही घर में भय लगे,लगे कोई और है आसपास ,अपशकुन हो ,अनावश्यक आग आदि लगे ,मांगलिक कार्यों मेंअवरोध उत्पन्न हो तो समझना चाहिए की घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश है, इस स्थितिमें इनका पता लगाने का प्रयास करके इन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए | जब आपके कुल देवता देवी को ठीक से पूजा न मिले तो वे नाराज हो सकते हैं अथवानिर्लिप्त हो सकते हैं ,कमजोर भी हो सकते हैं ,ऐसे में नकारात्मक ऊर्जा को रोकने वालीमुख्य शक्ति हट जाती है और वह परिवार पर प्रभावी हो सकती है,कभी कभी कुलदेवता कीनाराजगी या निर्लिप्तता से या नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रबल होने से वह कुलदेवता याईष्ट को दी जाने वाली पूजा खुद लेने लगती है जिससे उसकी शक्ति बढने लगती है औरकुलदेवतादेवी कमजोर या रुष्ट होते जाते हैं और ईष्ट को भी पूजा नहीं मिलती है ,आपकेईष्ट कमजोर हों या कोई ईष्ट ही न हों या आप पूजा पाठ ठीक से न करते हों तो भीनकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घर में हो सकता है ,,किसी से दुश्मनी हो तो वह भीआभिचारिक क्रिया करके किसी नकारात्मक ऊर्जा को आप पर भेज सकता है ,,आपके घर मेंपित्र दोष है तो पितरों के साथ अन्य शक्तियां भी जुड़ जाती हैं जिन्हें आपके परिवार से कोईलगाव नहीं होता है ,पित्र भले नुक्सान कभी कभी न करें किन्तु साथ जुडी शक्तिया अवश्य अपनी अतृप्त इच्छाएं आपके परिवार या आप से पूर्ण करने का प्रयास करती हैं |ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष तो लगता है की ४ लोग घर में हैं किन्तु खर्च १० लोगों के बराबर होता है और कोई न कोई समस्या - [प्राण मुद्रा से प्रतिरोधक और प्राण शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/प्राण-मुद्रा-से-प्रतिरोध/2025/02/प्राण-मुद्रा-से-प्रतिरोध.html): प्राण मुद्रा :: प्राण शक्ति ,प्रतिरोधक शक्ति बढाये ,नवस्फूर्ति लाये ================================================== इतनी इम्युनिटी कोई दवा नहीं बढ़ा सकती ----------------------------------------------- आज दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है ,हर कोई अपनी शक्ति ,प्रतिरोधक क्षमता और जीवनी उर्जा बढ़ाना चाहता है ,ताकि वह संक्रामक रोगों ,मृत्यु कारक व्याधियों से बच सके |लोग लाखों खर्च कर रहे और यह - [लिंग मुद्रा -जुकाम -दमा दूर करे](https://alaukikshaktiyan.com/लिंग-मुद्रा-जुकाम-दमा-दूर/2025/02/लिंग-मुद्रा-जुकाम-दमा-दूर.html): लिंग मुद्रा ::जुकाम ,दमा ,खांसी दूर करे =========================== दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर अंगूठे (बायां या दायां कोई एक) को सीधा रखने से लिंग मुद्रा बन जाती है| इस मुद्रा से शरीर में गर्मी की वृद्धि होती है, अतः इसे सर्दी में करना विशेष उपयोगी है| इस मुद्रा को करने के दौरान - [आवाज मधुर करती है सहज शंख मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/आवाज-मधुर-करती-है-सहज-शंख-म/2025/02/आवाज-मधुर-करती-है-सहज-शंख-म.html): सहज शंख मुद्रा =========== यह एक दूसरे प्रकार की शंख है जो दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर, हथेलियां दबाकर तथा दोनों अंगूठों को बराबर में सटाकर रखने से बनती है| इसे वज्रासन या सुखासन में ५ से १० मिनट तक करना चाहिए| द्विगुणित लाभ प्राप्त करने की दृष्टि से इसे मूलबन्ध (गुदा - [शंख मुद्रा वाणी दोष दूर करती है](https://alaukikshaktiyan.com/शंख-मुद्रा-वाणी-दोष-दूर-कर/2025/02/शंख-मुद्रा-वाणी-दोष-दूर-कर.html): शंख मुद्रा ::थायरायड ,वाणी सम्बन्धी दोष दूर करे ====================================== बाएं हाथ के अंगूठे को दोनों हाथ की मुट्ठी में बंद करके बाएं हाथ की तर्जनी उंगली को दाहिने हाथ के अंगूठे से मिलाने से शंख मुद्रा बनती है| इस मुद्रा में बाएं हाथ की बाकी तीन उंगलियों के पास में सटाकर दाएं हाथ की बंद - [दिल मजबूत करे अपानवायु मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/दिल-मजबूत-करे-अपानवायु-मु/2025/02/दिल-मजबूत-करे-अपानवायु-मु.html): अपानवायु मुद्रा ::दिल मजबूत करे ,गैस रिलीज करे ======================================== अक्सर जब दिल का दौरा पड़ता है तब डाक्टर आसपास नहीं होता और डाक्टर तक जाते जाते स्थिति गंभीर होने लगती है ,किन्तु यदि आपको पता हो तो प्राथमिक डाक्टर आप खुद हो सकते हैं ,दवाइयाँ भी आपके पास होती हैं ,डाक्टर होता है आपका ज्ञान - [किडनी -हृदय स्वस्थ रखे अपान मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/किडनी-हृदय-स्वस्थ-रखे-अपा/2025/02/किडनी-हृदय-स्वस्थ-रखे-अपा.html): अपान मुद्रा :: किडनी ,ह्रदय स्वस्थ्र रखे ,बबासीर ,सुगर ,दन्त रोग में राहत दे =========================================================== मध्यमा तथा अनामिका, दोनों उंगलियों के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिला देने से अपान मुद्रा बनती है| इस मुद्रा में कनिष्ठिका और तर्जनी उंगलियां सहज एवं सीधी रहती हैं| मानव स्वास्थ्य-रक्षा के लिए अपान मुद्रा बहुत महत्वपूर्ण क्रिया - [चेहरा खिलता है वरुण मुद्रा से](https://alaukikshaktiyan.com/चेहरा-खिलता-है-वरुण-मुद्र/2025/02/चेहरा-खिलता-है-वरुण-मुद्र.html): वरुण मुद्रा :: चेहरा खिलाये ,झुर्रियां ,चर्म रोग -रक्त विकार मिटाए ============================================= सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठिका) को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाने पर वरुण मुद्रा बनती है| इस तत्व की कमी से जहां त्वच में रूखापन आता है, वहीं स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन बन जाता है| एक अजीब-सा तनाव हमेशा तन-मन में बना रहता है| - [मोटापा कम करे सूर्य मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/मोटापा-कम-करे-सूर्य-मुद्र/2025/02/मोटापा-कम-करे-सूर्य-मुद्र.html): सूर्य मुद्रा :: तनाव ,मोटापा कम करे =========================== अनामिका (सबसे छोटी उंगली के पास वाली) अंगुली को अंगूठे की जड़ में लगाकर अंगूठे से हल्का-सा दबाने पर सूर्य मुद्रा बनती है| इस मुद्रा को पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों से करना अच्छा रहता है| इस मुद्रा से अनामिका द्वारा हथेली में थाइरॉइड ग्रंथि का केंद्र - [तेजस्वी बनाती है पृथ्वी मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/तेजस्वी-बनाती-है-पृथ्वी-म/2025/02/तेजस्वी-बनाती-है-पृथ्वी-म.html): पृथ्वी मुद्रा :: तेजस्विता लाये ,कमजोरी दूर करे ==================================== अनामिका (छोटी उंगली के पास वाली) उंगली तथा अंगूठे के सिरे को परस्पर मिलाने से पृथ्वी मुद्रा बनती है| इस मुद्रा को करने से शरीर में पृथ्वी तत्व बढ़कर सम होता है जिससे सभी प्रकार की शारीरिक कमजोरियां दूर होती हैं|त्वचा की सुन्दरता और कांटी - [शून्य मुद्रा -कान के रोग ठीक करे](https://alaukikshaktiyan.com/शून्य-मुद्रा-कान-के-रोग-ठी/2025/02/शून्य-मुद्रा-कान-के-रोग-ठी.html): कान के रोग दूर करे -शून्य मुद्रा ====================== अंगूठे से दूसरी अंगुली (मध्यमा,सबसे लम्बी वाली अंगुली) को मोड़कर अंगूठे के मूल भाग (जड़ में) स्पर्श करें और अंगूठे को मोड़कर मध्यमा के ऊपर से ऐसे दबायें कि मध्यमा उंगली का निरंतर स्पर्श अंगूठे के मूल भाग से बना रहे..बाकी की तीनो अँगुलियों को अपनी - [शनि दोष दूर करे आकाश मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-दोष-दूर-करे-आकाश-मुद्र/2025/02/शनि-दोष-दूर-करे-आकाश-मुद्र.html): ह्रदय स्वस्थ रखे ,शनि दोष दूर करे -आकाश मुद्रा ======================================= मध्यमा (सबसे बड़ी उंगली) को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाने पर आकाश मुद्रा बन जाती है| बाकी अंगुलियां सहज-सीधी रखनी चाहिए| इस मुद्रा को करने से शरीर में आकाश तत्व में वृद्धि होती है| मध्यमा उगली का हृदय के साथ खास संबंध है, अतः यह - [गैस -दर्द से मुक्ति वायु मुद्रा से](https://alaukikshaktiyan.com/गैस-दर्द-से-मुक्ति-वायु-मु/2025/02/गैस-दर्द-से-मुक्ति-वायु-मु.html): वायु मुद्रा :: दर्द ,गैस ,ऐंठन से मुक्ति =========================== तर्जनी (अंगूठे के साथ वाली) अंगुली को मोड़कर अंगूठी की जड़ में लगाकर उसे अंगूठे से हल्का-सा दबाने पर वायु मुद्रा बनता है| इस मुद्रा से रोगी के शरीर में वायु तत्व शीघ्रता से घटने लगता है| अतः वायु के प्रकुपित होने से उत्पन्न होनेवाले सभी - [बुद्धि बढ़ाए ज्ञान मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/बुद्धि-बढ़ाए-ज्ञान-मुद्र/2025/02/बुद्धि-बढ़ाए-ज्ञान-मुद्र.html): :::::: ज्ञान मुद्रा ::::: ============== अनिद्रा-क्रोध-मानसिक विचलन का नाश ,बुद्धि -स्मरणशक्ति का विकास --------------------------------------------------------------------------------------- हाथ की तर्जनी (अंगूठे के साथ वाली) अंगुली के अग्रभाग (सिरे) को अंगूठे के अग्रभाग के साथ मिलाकर रखने और हल्का-सा दबाव देने से ज्ञान मुद्रा बनती है| इस मुद्रा में दबाना जरूरी नहीं है| बाकी उंगलियां सहज रूप से सीधी - [कुण्डलिनी जगाये महामुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-जगाये-महामुद्र/2025/02/कुण्डलिनी-जगाये-महामुद्र.html): ::::::::::::::::::महामुद्रा :: [Mahamudra]::::::::::::::::: ====================================== म्रत्यु को जीते ,विष को अमृत करे ,कुंडलिनी जगाये -------------------------------------------------------- यह मुद्रा समस्त प्रकार के रोगों का नाश करती है और कुंडलिनी जागरण में अत्यंत सहयोगी है |विशेष रूप से पाचन तंत्र को सुव्यवस्थित करती है |प्रायः समस्त योग ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है |इस मुद्रा के साथ विधिपूर्वक किया - [Spirituality and Mudra](https://alaukikshaktiyan.com/spirituality-and-mudra/2025/02/spirituality-and-mudra.html): Spiritual science and Mudra Vigyan ========================== Man only has that supreme power in his soul, that when scientifically endowed with Yoga, can help him achieve all the three sublime powers - the physical, mental and spiritual. All that is needed is the guidance and the rules of Dhyana (meditation) and Practice (sadhana) There are various - [Where Mudras originated ?](https://alaukikshaktiyan.com/where-mudras-originated/2025/02/where-mudras-originated.html): Where and how Mudras originated ============================ No one knows for sure where and how mudras originated. They have been in use for millenniums. They have not ben known to adhere to any barriers . They have been found in all continents, practiced by people of all religions and those professing none. They are as natural - [What are Mudras ?](https://alaukikshaktiyan.com/what-are-mudras/2025/02/what-are-mudras.html): What are Mudras ============== As per Eastern philosophies and culture and Yogic practices, 'Mudras' are systematic hand gestures. Literally, Mudra in Sanskrit means a posture/seal. More deeply, "closed electrical circuits" of the subtle channels in physical and etheric bodies are also known as 'Mudras'. Some Western writers have defined 'Mudra' as mystic hand gestures used - [तंत्र और योग साधना में मुद्रा](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-और-योग-साधना-में-मुद/2025/02/तंत्र-और-योग-साधना-में-मुद.html): मुद्रा प्रदर्शन ::साधना-उपासना में आवश्यक है ====================================== तंत्र-शास्त्र भारतवर्ष की बहुत प्राचीन साधना -प्रणाली है । इसकी विशेषता यह बतलाई गई है कि इसमें आरम्भ ही से कठिन साधनाओं और कठोर तपस्याओं का विधान नहीं है, वरन् वह मनुष्य के भोग की तरह झुके हुए मन को उसी मार्ग पर चलाते हुए धीरे-धीरे त्याग - [हस्त मुद्रा से सिद्धि](https://alaukikshaktiyan.com/हस्त-मुद्रा-से-सिद्धि/2025/02/हस्त-मुद्रा-से-सिद्धि.html): हस्त मुद्रा से चिकित्सा भी और सिद्धि भी ============================== मानव शरीर पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश तथा वायु, पंचतत्व से निर्मित है और हाथों की पांचों उंगलियों में अलग-अलग तत्व मौजूद है जैसे अंगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी उंगली में वायु तत्व, मध्यमा उंगली में आकाश तत्व और अनामिका उंगली में पृथ्वी और कनिष्का उंगली में जल तत्व मौजूद - [मुद्राएँ और चिकित्सा](https://alaukikshaktiyan.com/मुद्राएँ-और-चिकित्सा/2025/02/मुद्राएँ-और-चिकित्सा.html): मानव शरीर के लिए मुद्राएं क्यों ? मुद्रा का अर्थ है स्थिति| साधना में इसका तात्पर्य हाथओं और उंगलियों की विशेष स्थिति से होता है| योग व तंत्र ग्रंथों के अनुसार मुद्राओं से साधक की आंतरिक स्थिति का ज्ञान होता है| आंतरिक स्थिति की सहज अभिव्यक्ति हुआ करती हैं ये मुद्राएं| साधक जब मुद्राओं - [तारापीठ में क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/तारापीठ-में-क्या-है/2025/02/तारापीठ-में-क्या-है.html): ::::::::::::::::::तारा पीठ ::::::::::::::::: =================== काली ,तारा ,षोडशी ,भुवनेश्वरी ,भैरवी ,छिन्नमस्ता ,बगलामुखी ,धूमावती ,मातंगी और कमला ,ये दस महाविद्यायें कही गयी हैं |इन महाविद्याओं का मूल सम्बन्ध शक्तिपीठों से भी हैं यद्यपि शक्तिपीठ ५१ अथवा १०८ कहे जाते हैं किन्तु सभी से किसी न किसी महाविद्या का ही स्वरुप जुड़ा है |इन शक्तिपीठों की उपासना - [श्री विद्या दीक्षा](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-विद्या-दीक्षा/2025/02/श्री-विद्या-दीक्षा.html): षोडशी त्रिपुर सुंदरी दीक्षा ================= त्रिपुर सुंदरी ,श्री विद्या ,षोडशी त्रिपुर सुंदरी ,ललिता त्रिपुरसुन्दरी ,बाला त्रिपुरसुन्दरी ,एक ही महाविद्या के नाम हैं |यह दस महाविद्या के अंतर्गत प्रमुख महाविद्या और सृष्टि की उत्पत्तिकर्ता हैं |त्रिपुरा या श्री विद्या सृष्टि उत्पन्न करती हैं ,काली उसका सम्पूर्ण विनाश करती हैं ,तारा क्रमिक संहार करती हैं ,भुवनेश्वरी - [कुंडलिनी जागरण से आपके जीवन में क्या बदलता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुंडलिनी-जागरण-से-आपके-जी/2025/02/कुंडलिनी-जागरण-से-आपके-जी.html): कुंडलिनी जागरण से क्या शक्तियाँ प्राप्त होती हैं ? ----------------------------------------------------- अध्यात्म जगत के साथ ही सामान्य लोग भी कुंडलिनी का नाम अक्सर सुनते हैं और इसे जाग्रत कर अलौकिक शक्तियां पाना चाहते हैं |कुछ लोग इसे मात्र साधकों -सन्यासियों ,योगियों -तांत्रिकों के मतलब का मानते हैं तो कुछ यह समझते हैं की कुंडलिनी वैराग्य - [भैरवी विद्या के सूत्र](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-विद्या-के-सूत्र/2025/02/भैरवी-विद्या-के-सूत्र.html): कुंडलिनी तंत्र में नारी -पुरुष और मूल भूत सिद्धांत ======================================= कुंडलिनी की धारा में नारी और पुरुष में कोई अंतर नहीं है |चूंकि जनन tantra [स्तन ,लिंग ,योनी ,गर्भाशय ,शुक्राशय ,वीर्य ,रज आदि ]के अंतर के आलावा नारी पुरुष तात्विक रूप से एक जैसे हैं |सप्त धातुओं के निर्माण में भी रस ,रक्त ,मांस - [पारिवारिक जीवन में कुण्डलिनी साधना](https://alaukikshaktiyan.com/पारिवारिक-जीवन-में-कुण्ड/2025/02/पारिवारिक-जीवन-में-कुण्ड.html): कुंडलिनी तंत्र और गृहस्थ जीवन =======================[[ भाग - २]] कुंडलिनी tantra अत्यंत सरल ,स्पष्ट ,प्रत्येक गृहस्थ के उपयुक्त क्रियात्मक विषय है ,जिसे हमारे दार्शनिक व्याख्याकारों ने अत्यंत जटिल और उलझा हुआ बनाकर इस स्थिति तक पहुंचा दिया है की जन साधारण उसे अगम्य ,अपार और मुक्त पुरुषों के मतलब का समझ कर उससे अलग - [गृहस्थ जीवन में कुण्डलिनी साधना](https://alaukikshaktiyan.com/गृहस्थ-जीवन-में-कुण्डलिन/2025/02/गृहस्थ-जीवन-में-कुण्डलिन.html): कुंडलिनी तंत्र और गृहस्थ जीवन =======================[[ भा-१]] कुंडलिनी साधना विश्व की एकमात्र साधना है जो मोक्ष देती है ,इसलिए यही साधना सभी योगियों तांत्रिकों ,मनीषियों ,ऋषियों की मूल साधना रही है |यह साधना शुरू में योग आधारित रही |बाद में कुछ इस तरह की परिस्थितियां बनी की सामान्य जन के लिए यह साधना कठिन - [भैरवी विद्या में नारी](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-विद्या-में-नारी/2025/02/भैरवी-विद्या-में-नारी.html): भैरवी विद्या के सूत्र और भैरवी विद्या में नारी ================================= भैरवी विद्या में स्त्री या नारी महामाया का प्रतिरूप है |उस महामाया का जो प्रकृति के रूप में अपने आँचल में प्रत्येक चर अचर को समेटे उसका पालन कर रही है |इस महामाया के अन्दर ही समस्त देवी-देवता ,भूत-पिशाच ,राक्षस -किन्नर और सभी प्रकार - [भैरवी तंत्र में योनि -लिंग का रहस्य](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-तंत्र-में-योनि-लिंग/2025/02/भैरवी-तंत्र-में-योनि-लिंग.html): :::::::भैरवी विद्या में योनी एवं लिंग का रहस्य :::::::: ====================================== भैरवी विद्या एक अति प्राचीन विद्या है |ज्ञात तथ्यों के अनुसार यह त्रेता युग से अस्तित्व में है |शास्त्र के अनुसार यह सृष्टि के उत्पन्न होते ही अस्तित्व में आ गयी |भैरवी चक्र की आकृति यंत्रों में देखने से यह सही भी लगता है - [महाकाली कवच कब अधिक लाभप्रद है ?](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-कवच-कब-अधिक-लाभप्/2025/02/महाकाली-कवच-कब-अधिक-लाभप्.html): महाकाली कवच कब धारण करते हैं ? क्या लाभ होते हैं ? ====================================== भगवती महाकाली प्रकृति की मूल और आदि शक्ति हैं ,जिनसे ही समस्त शक्तियाँ और महाविद्यायें उत्पन्न हुई हैं, किन्तु इनकी एक विशेष प्रकृति और विशेष स्वरुप है जिससे इनका भौतिक उपयोग विशेष स्थितियों में अधिक लाभप्रद होता है ,यद्यपि यह सभी - [नेगेटिविटी निवारक उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-नकारात्मक-शक्त/2017/08/भूत-प्रेत-नकारात्मक-शक्त.html): कैसे हटाये भूत प्रेत /नकारात्मक उर्जा घर-परिवार-व्यक्ति पर से =================================================== आपके घर में ,आप पर ,परिवार पर नकारात्मक उर्जा अर्थात नुक्सान और क्षति देने वाली ऊर्जा का प्रभाव हो तो उन्हें अपने अन्दर ,परिवार में ,घर में सकारात्मक ऊर्जा बढाकर हटाया जा सकता है ,,नकारात्मक ऊर्जा - [नकारात्मक शक्ति [Negative Energy]](https://alaukikshaktiyan.com/नकारात्मक-ऊर्जा-शक्ति-क्/2017/08/नकारात्मक-ऊर्जा-शक्ति-क्.html): नकारात्मक ऊर्जा और उसका प्रभाव ======================== नकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी के सतह के आसपास सृष्टि अथवा जीवन की उत्पत्ति पर क्रिया प्रतिक्रया के फलस्वरूप उत्पन्न ऊर्जा का रूप है जो जीवन को प्रभावित करती है ,,जो ऊर्जा जीवन को लाभ दे ,उन्नति दे ,विकास और खुशहाली दे वह उस - [नया मकान तो नहीं आपकी बर्बादी का कारण ?](https://alaukikshaktiyan.com/नयी-जमीन-मकान-दूकान-आपको-त/2017/08/नयी-जमीन-मकान-दूकान-आपको-त.html): नया स्थान /मकान बर्बाद कर सकता है आपका जीवन ================================== यह सुनकर थोडा अजीब भी लग रहा होगा ,थोडा बुरा भी लग सकता है ,पर ऐसा होता है और यह बिलकुल सत्य है की नया स्थान या मकान आपको बर्बाद ,तबाह कर सकता है ,घोर कष्ट में डाल सकता है ,ऐसी समस्याओं - [छठी इन्द्रिय [ Sixth Sense ] जगा देती है स्फटिक मूर्ति](https://alaukikshaktiyan.com/छठी-इन्द्रिय-sixth-sense-जगा-देती-है/2025/02/छठी-इन्द्रिय-sixth-sense-जगा-देती-है.html): छठी इन्द्रिय [ Sixth Sense ] जगा देती है स्फटिक मूर्ति ======================================= आज्ञा चक्र साधना हो ,तृतीय नेत्र जागरण साधना हो या सम्मोहन साधना या टेलीपैथी साधना इन सबमें त्राटक साधना होती ही होती है ,चाहे आतंरिक त्राटक हो या वाह्य त्राटक |इनमे कई चरण होते हैं और जब आप त्राटक के विभिन्न चरण - [भैरवी दीक्षा](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-दीक्षा/2025/02/भैरवी-दीक्षा.html): त्रिपुर भैरवी दीक्षा ============== भूत-प्रेत एवं इतर योनियों द्वारा बाधा आने पर जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीण अंचलों में तथा पिछडे क्षेत्रों के साथ ही सभ्य समाज में भी इस प्रकार के कई हादसे सामने आते है, जब की पूरा का पूरा घर ही इन बाधाओं के कारण बर्बादी के कगार पर आकर - [काली शाबर मंत्र से काली सिद्धि](https://alaukikshaktiyan.com/काली-शाबर-मंत्र-से-काली-सि/2025/02/काली-शाबर-मंत्र-से-काली-सि.html): कालिका सिद्धि मंत्र ============== क्रीं कालिका ,षोडश वर्षीय जवान हाथ में खड्ग ,खप्पड़ तीर कमान गले नरमुंड माला ,रहे श्मशान आओ आओ माँ कालिके ,मेरा कहना मान नहीं आये कालिका तो ,कालभैरव की दुहाई शब्द साँचा ,फुरे मंत्र खुदाई काली जी की सिद्धि हेतु अनेक प्रकार के मंत्र होते हैं जिनमे से शाबर मंत्र - [महाकाली दीक्षा की विशेषता](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाली-दीक्षा-की-विशेषत/2025/02/महाकाली-दीक्षा-की-विशेषत.html): महाविद्या महाकाली दीक्षा ================== दीक्षा एक संस्कार है, जिसके माध्यम से कुसंस्कारों का क्षय होता है,| अज्ञान, पाप और दारिद्र्य का नाश होता है,| ज्ञान शक्ति व् सिद्धि प्राप्त होती है और मन में उमंग व् प्रसन्नता आ पाती है। दीक्षा के द्वारा साधक की पशुवृत्तियों का शमन होता है और जब उसके चित्त - [उर्जाओं की रति और God Particle](https://alaukikshaktiyan.com/उर्जाओं-की-रति-और-god-particle/2025/02/उर्जाओं-की-रति-और-god-particle.html): ::::::::बिना रति के कोई सृष्टि नहीं होती :::::::: =============================== रति का नाम सुनते ही सामान्यतया हर किसी के मष्तिष्क में मानव या जंतु रति की बात सोच में आती है |किन्तु यह केवल इन्ही में नहीं होती यह समस्त सृष्टि के प्रत्येक उत्पत्ति के पूर्व होती है |अध्यात्म-धर्म के क्षेत्र में तो इसका नाम - [परमात्मा ,सदाशिव और विष्णु](https://alaukikshaktiyan.com/परमात्मा-सदाशिव-और-विष्ण/2025/02/परमात्मा-सदाशिव-और-विष्ण.html): परमात्मा / सदाशिव और विष्णु /राज राजेश्वर शिव में अंतर ======================================== शिव और सदाशिव ,परमात्मा और विष्णु --इन दोनों में गुणात्मक अंतर है |सदाशिव अर्थात परमात्मा निर्गुण ,निराकार ,तत्व रूप है और शिव या राज राजेश्वर शिव या विष्णु एक सगुण रूप अर्ध नारीश्वर हैं |सदाशिव का स्थान हमारे शीर्ष के चन्द्रमा के मध्य - [भैरवी चक्र और महायोनि](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-चक्र-और-महायोनि/2025/02/भैरवी-चक्र-और-महायोनि.html): भैरवी चक्र की उत्पत्ति ================ तंत्र और कुंडलिनी जगत में चक्र का नाम अक्सर आता है |इन चक्रों में कुंडलिनी के चक्र ,पूजन चक्र ,सुदर्शन चक्र ,चक्र पूजा ,भैरवी चक्र आदि अनेक नाम आते हैं |यहाँ हम भैरवी चक्र को जानने की कोशिश करते हैं की यह क्या होता है | हमने देवी देवताओं - [दश महाविद्या :: वेद ,तंत्र और विज्ञान की दृष्टि में](https://alaukikshaktiyan.com/दश-महाविद्या-वेद-तंत्र-और/2017/11/दश-महाविद्या-वेद-तंत्र-और.html): दश महाविद्या :: वेद ,तंत्र और विज्ञान की दृष्टि में ============================== जब से इंसान सोचने समझने लायक हुआ है उसके मष्तिष्क में विचारों की तरंगें उठती रही है ,सवाल उठते रहे हैं |वह कारण ,निवारण ढूंढता रहा है |क्या ,क्यों ,कौन ,कैसे ,कहाँ उसके दिमाग में उठते रहे हैं |जब वह अपनी भौतिक आवश्यकताओं से - [श्रीबगला(वल्गा)मुखीस्तोत्रम्](https://alaukikshaktiyan.com/श्रीबगलावल्गामुखीस्तोत/2017/12/श्रीबगलावल्गामुखीस्तोत.html): ::::::::::: श्रीबगला(वल्गा)मुखीस्तोत्रम् ::::::::::: ============================== श्रीगणेशाय नमः । चलत्कनककुण्डलोल्लसितचारुगण्डस्थलीं लसत्कनकचम्पकद्युतिमदिन्दुबिम्बाननाम् । गदाहतविपक्षकां कलितलोलजिह्वाञ्चलां स्मरामि बगलामुखीं विमुखवाङ्मनस्स्तम्भिनीम् ॥ १॥ पीयूषोदधिमध्यचारुविलद्रक्तोत्पले मण्डपे सत्सिंहासनमौलिपातितरिपुं प्रेतासनाध्यासिनीम् । स्वर्णाभां करपीडितारिरसनां भ्राम्यद्गदां विभ्रतीमित्थं ध्यायति यान्ति तस्य सहसा सद्योऽथ सर्वापदः ॥ २॥ देवि त्वच्चरणाम्बुजार्चनकृते यः पीतपुष्पाञ्जलीन्भक्त्या वामकरे निधाय च मनुं मन्त्री मनोज्ञाक्षरम् । पीठध्यानपरोऽथ कुम्भकवशाद्बीजं स्मरेत्पार्थिवं तस्यामित्रमुखस्य वाचि हृदये जाड्यं भवेत्तत्क्षणात् ॥ ३॥ - [कर्ण पिशाचिनी [karn Pishachini ]](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-karn-pishachini/2017/10/कर्ण-पिशाचिनी-karn-pishachini.html): कर्ण पिशाचिनी [karn Pishachini ] ===================== भारतीय तंत्र में भूत -भविष्य और वर्तमान का हाल सटीक बताने वाली शक्ति में कर्ण पिशाचिनी का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है |कहा जाता है की इस पिशाचिनी को सिद्ध करने पर साधक किसी भी व्यक्ति का भूत ,वर्तमान और भविष्य ठीक ठीक बता - [व्यावसायिक उन्नति के लिए महालक्ष्मी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/व्यावसायिक-उन्नति-के-लिए/2017/08/व्यावसायिक-उन्नति-के-लिए.html): दीपावली पर महालक्ष्मी प्रयोग ------------------------------ दीपावली पर महालक्ष्मी का विशेष महत्त्व है |इस दिन इनकी पूजा से माना जाता है की वर्ष भर सुख समृद्धि प्राप्त होती है |इस दिन अनेक मन्त्र सिद्ध किये जाते हैं ,यन्त्र बनाये जाते हैं ,तांत्रिक सिद्धियाँ की जाती हैं |यह महानिशा तांत्रिक प्रयोगों और - [स्त्री [ पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/स्त्री-पत्नी-प्रेमिका-आक/2017/11/स्त्री-पत्नी-प्रेमिका-आक.html): कामराज स्त्री [ पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यन्त्र =============================== यदि किसी की स्त्री अथवा प्रेमिका उससे रूठकर दूर हो जाए या चली जाए तो इस स्थिति में आकर्षण की क्रिया की जाती है |आकर्षण में पुतली विद्या का प्रयोग बहुत कारगर होता है क्योकि इच्छित व्यक्ति दूर होता है या सामने नहीं होता |इसलिए वशीकरण - [अधिकारी वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/अधिकारी-वशीकरण-यन्त्र/2017/11/अधिकारी-वशीकरण-यन्त्र.html): अधिकारी वशीकरण यन्त्र ================= यह यन्त्र उन कर्मचारियों के अधिक लाभप्रद है जिनका अपने उच्चधिकारियों से रोज सामना होता है अथवा जिन पर कोई अधिकारी विशेष रुष्ट चल रहा हो |यन्त्र प्रभाव से सम्बंधित उच्चाधिकारी अनुकूल हो जाता है और कर्मचारी की समस्या ,भावना ,आशय समझने लगता है |यह यन्त्र गोरोचन की स्याही से भोजपत्र - [मृत्युंजय [रुष्ट व्यक्ति अधिकारी ] वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/मृत्युंजय-रुष्ट-व्यक्ति/2017/11/मृत्युंजय-रुष्ट-व्यक्ति.html): मृत्युंजय [रुष्ट व्यक्ति अधिकारी ] वशीकरण यन्त्र ============================= दो भोजपत्र के टुकड़ों पर लोहे की कील से दो यन्त्र लिखकर इन्हें परस्पर संपुटित [ जोड़ ]कर दें |धरती पर इसी अवस्था में रखकर उस पर कोई भारी पत्थर रखकर साधक ४ -5 कदम चले |यन्त्र के प्रभाव से रुष्ट व्यक्ति या - [पत्नी /प्रेमिका आकर्षण /वशीकरण यन्त्र [ पुतली विद्या ]](https://alaukikshaktiyan.com/पत्नी-प्रेमिका-आकर्षण-वश/2017/11/पत्नी-प्रेमिका-आकर्षण-वश.html): राकेश्वरी स्त्री [पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यंत्र ============================== आधुनिक समय में जबकि सामाजिक -पारिवारिक बंधन ढीले हो रहे हैं ,स्त्री स्वाभिमान की भावना बढ़ रही है तो स्त्री स्वाभिमान अभिमान में भी बदल रहा है |मर्यादाएं टूट रही हैं |स्वतंत्रता की भावना बढ़ रही है और अपनी करने की धुन सवार हो रही |इन स्थितियों - [सास -ससुर वशीकरण यन्त्र /ताबीज और प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/सास-ससुर-वशीकरण-यन्त्र-ता/2017/11/सास-ससुर-वशीकरण-यन्त्र-ता.html): सास -ससुर वशीकरण यन्त्र /ताबीज और प्रयोग ============================ नव विवाहित स्त्री के लिए सास -ससुर हमेशा से भय और समस्या के कारण लगते रहे हैं |अक्सर ऐसा भिन्न माहौल से किसी कन्या के नए घर में आने से होता है |हर सास -ससुर अपनी बहू से खराब व्यवहार नहीं करते और कुछ तो उसे अपनी - [सकल जन वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/सकल-जन-वशीकरण-यन्त्र/2017/11/सकल-जन-वशीकरण-यन्त्र.html): सकल जन वशीकरण यन्त्र ================== आज के संघर्ष ,द्वेष ,शत्रुता ,कटुता के युग में जीवन जीने की ही जद्दोजहद मुश्किल होती है उस पर अगर अच्छे पडोसी ,सहयोगी ,घर -परिवार वाले लोग न हों तो यह और भी मुश्किल हो जाता है |नौकरी में ,व्यवसाय में ,घर में ,बाहर में ,समाज में सब जगह लोगों - [पति वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/पति-वशीकरण-यन्त्र/2017/11/पति-वशीकरण-यन्त्र.html): पति वशीकरण यन्त्र ============== भारतीय संस्कारों में कन्या का विवाह लगभग ऐसे व्यक्ति से होता है जो उसके लिए अनजान होता है |यहाँ पहले से संपर्क किसी कन्या का किसी पुरुष से कम ही होता है यद्यपि अब कुछ बदलाव हो रहे और कन्या और युवक एक दुसरे को समझने लगे हैं पहले से भी - [नकारात्मक उर्जा दूर करे बगलामुखी यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/नकारात्मक-उर्जा-दूर-करे-ब/2017/12/नकारात्मक-उर्जा-दूर-करे-ब.html): बगलामुखी यन्त्र से रोके/हटाये भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा ====================================== भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो - [बगलामुखी शाबर मंत्र साधना](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-शाबर-मंत्र-साधन/2017/12/बगलामुखी-शाबर-मंत्र-साधन.html): :::::::::: बगलामुखी शाबर मंत्र साधना ::::::::::: =========================== माता बगलामुखी के कई शाबर मंत्र मिलते है | ये मंत्र रक्षा कारक, विरोधियो का स्तम्भन , ग्रह बाधा स्तम्भन , वशीकरण आदि प्रयोजन के लिए उत्तम है | शाबर मंत्र की शक्ति गुरु कृपा और व्यक्ति के आत्मबल के साथ उसकी - [भैरवी साधना और भैरवी विद्या क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-साधना-और-भैरवी-विद्/2025/02/भैरवी-साधना-और-भैरवी-विद्.html): :::::::भैरवी साधना और भैरवी ::::::: ========================== तंत्र साधना शक्ति साधना है |शक्ति प्राप्त करके उससे मोक्ष की अवधारणा तंत्र की मूल अवधारणा है |स्त्रियों को शक्ति का रूप माना जाता है ,कारण प्रकृति की ऋणात्मक ऊर्जा जिसे शक्ति कहते हैं स्त्रियों में शीघ्रता से अवतरित होती है ,और तंत्र शक्ति को शीघ्र और अत्यधिक - [शरीर में कुण्डलिनी चक्र कहाँ होते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/शरीर-में-कुण्डलिनी-चक्र-क/2025/02/शरीर-में-कुण्डलिनी-चक्र-क.html): कुंडलीनी योग :: चक्र -नाड़ियाँ और विधियाँ ============================== कुंडलिनी शक्ति समस्त ब्रह्मांड में परिव्याप्त सार्वभौमिक शक्ति है जो प्रसुप्तावस्था में प्रत्येक जीव में विद्यमान रहती है। इसको प्रतीक रूप से साढ़े तीन कुंडल लगाए सर्प जो मूलाधार चक्र में सो रहा है के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। तीन कुंडल प्रकृति के तीन - [परमब्रह्म /परमात्मा /परमतत्व क्या हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/परमब्रह्म-परमात्मा-परमत/2025/02/परमब्रह्म-परमात्मा-परमत.html): ::::::::परमब्रह्म /परमात्मा /सदाशिव /परमतत्व ::::::::: ==================================== कुंडलिनी जागरण द्वारा योगी हों या तांत्रिक सभी परम ब्रह्म को पाना चाहते हैं |अर्थात कुंडलिनी जागरण का अंतिम लक्ष्य परम ब्रह्म की प्राप्ति है |इस परम ब्रह्म के बारे में भारतीय शास्त्रों में हर जगह लिखा गया है |हर बड़े और उच्च साधक का अंतिम लक्ष्य यही - [भैरवी तंत्र और कुण्डलिनी योग](https://alaukikshaktiyan.com/भैरवी-तंत्र-और-कुण्डलिनी/2025/02/भैरवी-तंत्र-और-कुण्डलिनी.html): कुंडलिनी योग और कुंडलिनी तंत्र [भैरवी तंत्र ] ============================== कुंडलिनी जागरण अथवा कुंडलिनी साधन के दो मुख्य मार्ग हैं |योग द्वारा कुंडलिनी जागरण और तंत्र द्वारा कुंडलिनी जागरण |योग द्वारा कुंडलिनी साधना को कुंडलिनी योग कहते हैं और तंत्र द्वारा कुंडलिनी साधना को कुंडलिनी तंत्र साधना कहते हैं ,कुण्डलिनी तंत्र साधना को ही वास्तविक - [ब्रह्मरंध्र का रहस्य](https://alaukikshaktiyan.com/ब्रह्मरंध्र-का-रहस्य/2025/02/ब्रह्मरंध्र-का-रहस्य.html): कुंडलिनी और ब्रह्मरंध्र [सहस्त्रार ] ======================== शिर के मध्य से (ब्रह्मरंध्र) में 1 हजार पंखुड़ियों का कमल है उसे ही सहस्रार चक्र कहते हैं |उसी में ब्राह्मी शक्ति या शिव का वास बताया गया है |यहीं आकर कुण्डलिनी शिव से मिल गई है। इसे आत्मा का स्थान, सूत्रात्मा धाम आदि कहते हैं। यहीं से - [कुण्डलिनी जाग्रत करने के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-जाग्रत-करने-के/2025/02/कुण्डलिनी-जाग्रत-करने-के.html): कुंडलिनी जागरण के नियम ----------------------------- कुंडलिनी जागरण के नियम मार्ग की दृष्टि से भिन्न होते हैं |tantra मार्ग में इसकी पद्धति भिन्न है और योग मार्ग में भिन्न है |दोनों में ही बिना गुरु के इसका जागरण संभव नहीं |tantra में भी योग के कुछ सूत्र उपयोग में लाये जाते हैं और योग में भी - [कुण्डलिनी जागरण कैसे होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-जागरण-कैसे-होत/2025/02/कुण्डलिनी-जागरण-कैसे-होत.html): कुण्डलिनी जागरण ================ कुण्डलिनी शक्ति परमपिता का अर्द्धनारीश्वर भाग या शक्ति कहलाता है यह ईश्वर की पराशक्ति है (प्रबल लौकिक ऊर्जा शक्ति)। जिसे हम राधा, सीता, दुर्गा या काली आदि के नाम से पूजते हैं। इसे ही भारतीय योगदर्शन में कुण्डलिनी कहा गयाहै। यह दिव्य शक्ति मानव शरीर में मूलाधार में (रीढ की हड्डी - [कुण्डलिनी क्या कार्य करती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-क्या-कार्य-करत/2025/02/कुण्डलिनी-क्या-कार्य-करत.html): कुंडलिनी का कार्य ============ कुंडलिनी से ही सभी नाड़ियों का सञ्चालन होता है |योग में मानव शरीर के भीतर ७ चक्रों का वर्णन किया गया है |कुंडलिनी को जब ध्यान अथवा तंत्र के द्वारा जाग्रत किया जाता है तब यही शक्ति जागृत होकर मष्तिष्क की और बढ़ते हुए शरीर के सभी चक्रों को क्रियाशील करती - [योग और तंत्र में कुण्डलिनी](https://alaukikshaktiyan.com/योग-और-तंत्र-में-कुण्डलिन/2025/02/योग-और-तंत्र-में-कुण्डलिन.html): कुंडलिनी शक्ति :योगिक और तांत्रिक दृष्टि ================================= कुंडलिनी एक दिव्य शक्ति है जो सर्प की तरह साढ़े तीन फेरे लेकर शरीर के सबसे नीचे के चक्र मूलाधार में स्थित है |जब तक यह इस प्रकार नीचे रहती है तब तक व्यक्ति सांसारिक विषयों की और भागता रहता है |परन्तु जब यह जाग्रत होती है - [कुण्डलिनी जागरण के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-जागरण-के-नियम/2025/02/कुण्डलिनी-जागरण-के-नियम.html): कुंडलिनी जागरण के सामान्य नियम :: स्वयं को शुद्ध और पवित्र रखें । शुद्धता और पवित्रता आहार और व्यवहार से आती है। आहार अर्थात सात्विक और सुपाच्चय भोजन तथा उपवास और व्यवहार अर्थात अपने आचरण को शुद्ध रखते हुए सत्य बोलना और सभी से विनम्रतापूर्वक मिलना। स्वयं की दिनचर्या में सुधार करते हुए जल्दी - [कुण्डलिनी शक्ति :मानव में अलौकिक शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-शक्ति-मानव-में/2025/02/कुण्डलिनी-शक्ति-मानव-में.html): कुंडलिनी ::कुंडलिनी जागरण और उसकी शक्ति ================================ क्या आप कुंडलिनी जागरण और शारीरिक ऊर्जा चक्र से ब्रह्मांडीय ऊर्जा चक्र का सम्बन्ध जानते हैं |नहीं जानते तो ध्यान दें |कुंडलिनी जागरण ,शारीरिक ऊर्जा चक्र का ब्रह्मांडीय ऊर्जा संरचना से सम्बन्ध का ज्ञान ,सूक्ष्म शरीर की क्रियाविधि और उसका स्थूल शरीर से सम्बन्ध भारतीय मनीषियों का - [आतंरिक शक्तियां](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-2/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-2.html): आपके भीतर ही छिपी है सारी क्षमताएं ------------------------------------------------ वर्तमान युग वैज्ञानिक युग है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह मान लिया गया है कि मनुष्य के प्रत्येक व्यवहार के पीछे एक रसायन होता है। कहीं-कहीं न्यूरोट्रांसमीटर होता है, कहीं-कहीं केमिकल होता है और वह हमारे व्यवहार को नियंत्रित करता - [ध्यान की शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-3/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-3.html): ध्यान से उपजती है—अतीन्द्रिय संवेदना ------------------------------------ योग साधक की दृष्टि, उसकी संवेदना और अनुभूतियों का संसार सबसे अलग विशेष व विलक्षण होता है। वह सामान्य इन्द्रियों से पार व परे देखता है, जानता है, अनुभव करता है। उसके सामने सत्य के व्यापक रूप प्रकट होते हैं। उसकी अन्तर्चेतना में अस्तित्व की इन्द्रधनुषी छटा - [फिल्मो सा दिखता है भविष्य](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-4/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-4.html): चलचित्र की तरह दिखाई देती हैं भविष्य की घटनाएं ---------------------------------------------------- आपने अगर स्टीवेन स्पिलबर्ग की चर्चित फिल्म मॉइनॉरिटी रिपोर्ट देखी हो तो आपको याद होगा कि कैसे उस फिल्म में एक विशेष सेल के सदस्य भविष्य में होने वाले अपराध को पता करके उसे घटित होने से पहले ही - [भविष्य अपनी शक्तियों से देख सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-5/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-5.html): आप भविष्य को दर्पण की तरह देख सकते हैं --------------------------------------------- हम सभी की चाहत रहती है कि जीवन में आने वाली घटनाओं को जान सकें। इसके लिए ज्योतिषी एवं भविष्यवक्ता से संपर्क करते हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि हम सभी भविष्य और भूत की घटनाओं को दर्पण की तरह - [अगिया बेताल वाम मार्ग साधना](https://alaukikshaktiyan.com/अगिया-बेताल-वाम-मार्ग-साध/2025/02/अगिया-बेताल-वाम-मार्ग-साध.html): अगिया बेताल साधना ==============[ तृतीय पद्धति ] अगिया बेताल वस्तुतः उग्र मानसिक शक्ति और काली की संहारक या आक्रामक शक्ति का एक संयोग है जो काली की शक्ति के अंतर्गत आता है |वामतंत्र के अनुसार इसे रुद्रकाली कहा जाता है ||इस भाव की सिद्धि होने पर आक्रामक भाव की शक्ति अत्यंत प्रबल हो जाती - [अग्नि बेताल तंत्र साधना [Agni Betal]](https://alaukikshaktiyan.com/अग्नि-बेताल-तंत्र-साधना-agni-betal/2025/02/अग्नि-बेताल-तंत्र-साधना-agni-betal.html): अगिया बेताल साधना ==============[ द्वितीय पद्धति ] बेताल के बारे में हम सबने बहुत कुछ सुना है |विक्रम-बेताल की कहानियां बच्चे बच्चे तक ने सुने हैं |इन्ही बेताल में एक सबसे उग्र शक्ति अगिया बेताल की होती है |यह पुरुषात्मक शक्ति है जो खुद कहीं हस्तक्षेप नहीं करती |इसके सिद्ध होने पर यह बहुत - [अगिया बेताल शाबर साधना](https://alaukikshaktiyan.com/अगिया-बेताल-शाबर-साधना/2025/02/अगिया-बेताल-शाबर-साधना.html): अगिया बेताल साधना ==============[ प्रथम पद्धति ] यह पद्धति बेताल के एक प्रकार अगिया बेताल की है ,जो शाबर मंत्र अर्थात नाथ सम्प्रदाय द्वारा बनाई गयी है |अगिया बेताल की साधना नाथ और सिद्ध परंपरा में अधिक विकसित हुई थी और इसके अनेक मंत्र तथा पद्धति इस परंपरा में विकसित किये गए |वाम मार्गीय - [ताल -बेताल साधना [Tal-Betal]](https://alaukikshaktiyan.com/ताल-बेताल-साधना-tal-betal/2025/02/ताल-बेताल-साधना-tal-betal.html): ताल -बेताल साधना ============= यह प्रयोग एक वेताल साधना और सिद्धि है किन्तु यह साधना स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकती |न ही इस साधना को सामान्य व्यक्ति कर सकता है |इसके लिए शव की आवश्यकता होती है और पहले साधक को कामकला काली की साधना करनी होती है अर्थात कामकला काली का साधक - [बेताल [ Betal ]कौन होते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/बेताल-betal-कौन-होते-हैं/2025/02/बेताल-betal-कौन-होते-हैं.html): बेताल और बेताल साधना ================= प्राचीन कथा साहित्य में बेताल का अनेकों प्रकार का उल्लेख आता है |वास्तव में बेताल कोई कथा जनित काल्पनिक पात्र न होकर वास्तविक शक्ति होता है |कई तांत्रिक ग्रंथों में भी बेताल का उल्लेख होता है |बेताल शक्ति के प्रतीक माने गए हैं और यह अनेकों प्रकार के कार्यों - [पुतला तंत्र कैसे किया जाता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/पुतला-तंत्र-कैसे-किया-जात/2025/02/पुतला-तंत्र-कैसे-किया-जात.html): पुतली विद्या अथवा वुडू कैसे कार्य करता है ============================== वुडू प्रयोग [vudoo spell ],पुतली विद्या या प्रयोग एक तरंगों पर आधारित क्रिया है जिसमे सूक्ष्म वातावरणीय तरंगों के माध्यम से लक्ष्य को प्रभावित किया जाता है और एक तरफ व्यक्ति का शरीर तथा दूसरी तरफ उसका पुतला होता है |प्रबल मानसिक शक्तियों से इन - [Vudoo spell,[ पुतली तंत्र ]-काला जादू](https://alaukikshaktiyan.com/vudoo-spell-पुतली-तंत्र-काला-जादू/2025/02/vudoo-spell-पुतली-तंत्र-काला-जादू.html): वुडू प्रयोग ,पुतली विद्या और काला जादू [Vudoo spell ,Putli Vidya and Black Magic] ================================== [[ भाग -१ ]] आप बचपन में गुड्डे गुडिया से खेले होंगे खिलौने के रूप में या आपके बच्चे गुड्डे गुडिया से खेलते होंगे |कुछ लोग और बच्चे कपडे ,मिटटी से भी गुड्डे गुडिया बनाते हैं |अक्सर जब कोई - [Black Magic से कैसे बचें ?](https://alaukikshaktiyan.com/black-magic-से-कैसे-बचें/2025/02/black-magic-से-कैसे-बचें.html): काले जादू से बचाव और वापसी ------------------------------------- काले जादू से बचाव आसान है किन्तु एक बार काले जादू का किसी पर प्रक्षेपण हो जाए तो फिर उसकी समाप्ति या वापसी मुश्किल होती है |इसके लिए सम्बंधित शक्ति अथवा साधक से अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है ,जिससे उस शक्ति अथवा साधक को मजबूर कर सके - [ब्लैक मैजिक का प्रभाव और लक्षण](https://alaukikshaktiyan.com/ब्लैक-मैजिक-का-प्रभाव-और-ल/2025/02/ब्लैक-मैजिक-का-प्रभाव-और-ल.html): कौन लोग काला जादू कर सकते हैं ,कौन प्रभावित हो सकता है ------------------------------------------------------------------ काला जादू मुख्य रूप से कर्ता की मानसिक शक्ति से जुड़ा हुआ है इसलिए काला जादू या Black-Magic से कर्ता जितना ज्यादा जुड़ा होता है उसका असर उतना ही मजबूत होता है। अगर आपको किसी की सच्चाई जाननी है तो उससे बात - [काला जादू कैसे किया जाता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/काला-जादू-कैसे-किया-जाता-ह/2025/02/काला-जादू-कैसे-किया-जाता-ह.html): काले जादू के सूत्र --------------------- काला जादू मुख्य रूप से नकारात्मक ऊर्जा का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरण है जो की मानसिक एकाग्रता और बुरे विचारो पर काम करता है। काले जादू के लिए कर्ता को खुद ऊर्जा को धारण करना होता है। इसलिए काला जादू जितना दुसरो के लिए हानिकारक है उतना - [ब्लैक मैजिक क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/ब्लैक-मैजिक-क्या-है/2025/02/ब्लैक-मैजिक-क्या-है.html): काला जादू [Black Magic] ================== काला जादू यानि Black Magic हमेशा से एक कोतुहल का विषय रहा है जिसकी वजह रही है इसके मार्ग पर चलने वाले लोगो का जीवन ,जो की रहस्यात्मक और भयात्म्क रहा है । काला जादू, नकारात्मक ऊर्जा को स्थानांतरित करने का माध्यम है। जिसकी वजह से हम किसी में - [अतीन्द्रिय ज्ञान कहाँ से आता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-6/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-6.html): हमारा शरीर अतीन्द्रिय ज्ञान का स्रोत है --------------------------------------------- जब मन में तरंग उठती है तो आदमी बेभान हो जाता है। उसे भान ही नहीं रहता कि वह क्या कर रहा है, क्या करना है? विचार की तरंग का प्रभाव विचित्र होता है। एकाग्रता बहुत बड़ी शक्ति है। जिस - [अतीन्द्रिय शक्तियां क्या हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-7/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-7.html): अतीन्द्रिय ज्ञान रहस्य [[ भाग-३ ]] ======================== आमतौर पर हमें वर्तमान की, अपने आसपास की घटनाओं की जानकारी होती है। भविष्य अथवा पूर्वजन्मों की घटनाओं का हमें ज्ञान नहीं होता है। परंतु यह भी एक वास्तविकता है कि यदा-कदा हरेक के जीवन में एक न एक ऐसी घटना घट जाती - [अतीन्द्रिय ज्ञान क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-8/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-8.html): अतीन्द्रिय शक्ति और उसकी पृष्ठभूमि [भाग-२] ----------------------------------------- अतीन्द्रिय क्षमता विकसित करने का एक क्रमबद्ध विज्ञान है-योग। आज तो हर क्षेत्र में नकली ही नकली की भरमार है। नकली योग भी इतना बढ़ गया है कि उस घटाटोप में से असली को ढूंढ़ निकलना कठिन पड़ रहा है। - [अतीन्द्रिय ज्ञान का इतिहास](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-9/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ-9.html): अतीन्द्रिय शक्ति और उसकी पृष्ठभूमि [भाग-१] ------------------------------------------ अतीन्द्रिय ज्ञान-एक्स्ट्रा सेंसरी पर्सेप्शन-अब एक वैज्ञानिक तथ्य है। सामान्यतया पाँच ज्ञानेन्द्रियों की सहायता से ज्ञान सम्पादन होता है, पर अब विश्लेषण का एक विषम छठी इन्द्रिय-सिक्सथ सेन्स-भी बन गया है। मनुष्य कई बार ऐसी जानकारियाँ प्राप्त करता है जो इन्द्रिय ज्ञान की - [ज्योति त्राटक](https://alaukikshaktiyan.com/ज्योति-त्राटक/2017/09/ज्योति-त्राटक.html): :::::::::::ज्योति त्राटक ::::::::::: ===================== एकाग्रता प्राप्त करने हेतु त्राटक एक आसान और उत्तम माध्यम है |त्राटक के द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण, दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, सम्मोहन, आकर्षण, अदृश्य - [कैसे करें टेलीपैथी [विचार सम्प्रेषण ] की क्षमता का विकास](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-करें-टेलीपैथी-विचार/2017/09/कैसे-करें-टेलीपैथी-विचार.html): ::::::: कैसे करें टेलीपैथी [विचार सम्प्रेषण ] की क्षमता का विकास ::::::: ================================================= टेलीपैथी वास्तव में एक संज्ञान है जो देश -काल -वातावरण के दबाव में उभर जाता है और मनुष्य को भविष्य की घटनाओं का बोध हो जाता है |इस रहस्यपूर्ण विद्या के विकास के लिए निरंतर अभ्यास - [टेलीपैथी [Telepathy]](https://alaukikshaktiyan.com/टेलीपैथी/2017/09/टेलीपैथी.html): ::::::::::::टेलीपैथी ::::::::::: इंसान हर समय हर जगह उपलब्ध नहीं हो सकता। इसी कारण उसे सदा से ही एसी तकनीकी की आवश्यकता रही है जो दूरियों के बावजूद उसके कामों को रुकने न दे। टेलीपैथी ऐसी ही एक मानसिक तकनीक है जो दूरियों के बावजूद - [टेलीपैथी [विचार सम्प्रेषण ]](https://alaukikshaktiyan.com/टेलीपैथी-विचार-सम्प्रेष/2017/09/टेलीपैथी-विचार-सम्प्रेष.html): ::::::::::टेलीपैथी [विचार सम्प्रेषण ]:::::::::: ================================ प्रकृति ने प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक ऐसी शक्ति प्रछन्न कर दी है की उसके द्वारा वह कोई भी विलक्षण कृत्य कर सकता है |यह शक्ति जाने-अनजाने सभी को प्रभावित करती है और अपने अस्तित्व का बोध कराती रहती है |किसी अनजाने - [क्रिस्टल बाल ::क्रिस्टल बाल गेजिंग](https://alaukikshaktiyan.com/क्रिस्टल-बाल-क्रिस्टल-बा/2017/09/क्रिस्टल-बाल-क्रिस्टल-बा.html): जादुई गोला या शीशे के बाल में भविष्य दर्शन ============================== हम अपने पेज और वेबसाईट अलौकिक शक्तियां पर भविष्य देखने की अनेक विधियाँ प्रस्तुत कर चुके हैं |आज एक और विधि हम प्रस्तुत कर रहे हैं जो भविष्य दर्शन की बहुत ही प्राचीन पद्धति है ,यह क्रिस्टल बाल है जिसे - [श्यामा मातंगी महावशीकरण यन्त्र /मंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/श्यामा-मातंगी-महावशीकरण/2025/02/श्यामा-मातंगी-महावशीकरण.html): श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र =================================== सभी के लिए उपयोगी --------------------------- मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और मातंगी - [वशीकरण का ब्रह्मास्त्र :: श्यामा मातंगी कवच](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-का-ब्रह्मास्त्र-श/2025/02/वशीकरण-का-ब्रह्मास्त्र-श.html): वशीकरण का ब्रह्मास्त्र :: श्यामा मातंगी कवच =============================== सभी के लिए उपयोगी --------------------------- यदि आपको लोगों को अपने अनुकूल रखना है ,वशीभूत रखना है ,लोगों पर अपना आकर्षक प्रभाव डालना है तो आपको श्यामा मातंगी कवच धारण करना चाहिए |यदि आपका कोई भी अपना ,सगा -सम्बन्धी ,घर -परिवार से सम्बन्धित व्यक्ति आपसे रूखा व्यवहार - [कामाक्षी वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/कामाक्षी-वशीकरण-यन्त्र/2025/02/कामाक्षी-वशीकरण-यन्त्र.html): कामाक्षी यन्त्र - [पत्नी -प्रेमिका वशीकरण हेतु] =================================== इस यंत्र को दीवाली या अमावश्या की रात्री अथवा रवि पुष्य योग ,गुरु पुष्य योग या अक्षय तृतीया में निर्मित करें |इसे चमेली की कलम से भोजपत्र पर गोरोचन ,कुंकुम और कपूर की स्याही बनाकर लिखें |इसके बाद इस यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा करें |प्राण प्रतिष्ठा - [मानिनी आकर्षण [पुतली क्रिया ]](https://alaukikshaktiyan.com/मानिनी-आकर्षण-पुतली-क्रि/2025/02/मानिनी-आकर्षण-पुतली-क्रि.html): मानिनी आकर्षण यन्त्र [पुतली आकर्षण क्रिया ] ================================ अहंकार के कारण कभी कभी कोई स्त्री इतना अधिक मान कर बैठती है की व्यक्ति की मानसिक पीड़ा असह्य हो जाती है |ऐसी स्त्री को अपनी ओर आकृष्ट करने एवं अनुकूल बनाने में यह यन्त्र सफल होता है | शुभ मुहूर्त में रात्री समय भोजपत्र - [पत्नी /प्रेमिका वशीकरण वसुधा यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/पत्नी-प्रेमिका-वशीकरण-वस-2/2025/02/पत्नी-प्रेमिका-वशीकरण-वस-2.html): पत्नी /प्रेमिका वशीकरण ,वसुधा यन्त्र ========================= वसुधा यन्त्र का प्रयोग अधिकार संपन्न पत्नी ,प्रेमिका अथवा महिला के लिए किया जाता है ,जो स्वतंत्र निर्णय की क्षमता रखती हो |अभिजात्य वर्गीय अथवा सभ्रांत परिवार की महिला .पत्नी की अनुकूलता ,कृपा ,समर्थन पाने के लिए यह यन्त्र अच्छा कार्य करता है |अपनी नौकरी ,व्यवसाय पेशा पत्नी - [कामराज स्त्री आकर्षण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/कामराज-स्त्री-आकर्षण-यन्/2025/02/कामराज-स्त्री-आकर्षण-यन्.html): कामराज स्त्री [ पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यन्त्र =============================== यदि किसी की स्त्री अथवा प्रेमिका उससे रूठकर दूर हो जाए या चली जाए तो इस स्थिति में आकर्षण की क्रिया की जाती है |आकर्षण में पुतली विद्या का प्रयोग बहुत कारगर होता है क्योकि इच्छित व्यक्ति दूर होता है या सामने नहीं होता |इसलिए - [राकेश्वरी स्त्री [पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/राकेश्वरी-स्त्री-पत्नी-प/2025/02/राकेश्वरी-स्त्री-पत्नी-प.html): राकेश्वरी स्त्री [पत्नी -प्रेमिका ] आकर्षण यंत्र ============================== आधुनिक समय में जबकि सामाजिक -पारिवारिक बंधन ढीले हो रहे हैं ,स्त्री स्वाभिमान की भावना बढ़ रही है तो स्त्री स्वाभिमान अभिमान में भी बदल रहा है |मर्यादाएं टूट रही हैं |स्वतंत्रता की भावना बढ़ रही है और अपनी करने की धुन सवार हो रही |इन - [सकलजन वशीकरण यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/सकलजन-वशीकरण-यन्त्र-कवच/2025/02/सकलजन-वशीकरण-यन्त्र-कवच.html): सकल जन वशीकरण यन्त्र ==================== आज के संघर्ष ,द्वेष ,शत्रुता ,कटुता के युग में जीवन जीने की ही जद्दोजहद मुश्किल होती है उस पर अगर अच्छे पडोसी ,सहयोगी ,घर -परिवार वाले लोग न हों तो यह और भी मुश्किल हो जाता है |नौकरी में ,व्यवसाय में ,घर में ,बाहर में ,समाज में सब जगह - [पति वशीकरण यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/पति-वशीकरण-यन्त्र-कवच/2025/02/पति-वशीकरण-यन्त्र-कवच.html): पति वशीकरण यन्त्र ============== भारतीय संस्कारों में कन्या का विवाह लगभग ऐसे व्यक्ति से होता है जो उसके लिए अनजान होता है |यहाँ पहले से संपर्क किसी कन्या का किसी पुरुष से कम ही होता है यद्यपि अब कुछ बदलाव हो रहे और कन्या और युवक एक दुसरे को समझने लगे हैं पहले से - [सास -ससुर वशीकरण यन्त्र /कवच](https://alaukikshaktiyan.com/सास-ससुर-वशीकरण-यन्त्र-कव/2025/02/सास-ससुर-वशीकरण-यन्त्र-कव.html): सास -ससुर वशीकरण यन्त्र /ताबीज और प्रयोग ====================================== नव विवाहित स्त्री के लिए सास -ससुर हमेशा से भय और समस्या के कारण लगते रहे हैं |अक्सर ऐसा भिन्न माहौल से किसी कन्या के नए घर में आने से होता है |हर सास -ससुर अपनी बहू से खराब व्यवहार नहीं करते और कुछ तो उसे - [चितबदला ताबीज :प्रवृत्ति परिवर्तन कवच](https://alaukikshaktiyan.com/चितबदला-ताबीज-प्रवृत्ति/2025/02/चितबदला-ताबीज-प्रवृत्ति.html): बिगड़े को सुधारने अथवा तांत्रिक क्रिया से बचाव का चमत्कारी कवच ======================================================= अक्सर सुनने में आता है की संतान अथवा बच्चा बिगड़ गया है या बिगड़ रहा है |बात नहीं मानता ,गलत आदतों का शिकार हो गया है या गलत संगत में पड़ गया है ,गलत या अनुचित कार्य ही उसे पसंद आते हैं - [चमत्कारी डिब्बी पर शक्तिशाली वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-डिब्बी-पर-शक्ति/2025/02/चमत्कारी-डिब्बी-पर-शक्ति.html): दिव्य गुटिका पर शक्तिशाली वशीकरण प्रयोग --------------------------------------------------- आज के लेख में हम एक अति शक्तिशाली शाबर मंत्र आधारित वशीकरण प्रयोग बता रहे जो शीघ्र प्रभाव तो देता ही है ,जिस पर इसका प्रयोग किया जाता है वह व्यक्ति मोहित भी हो जाता है प्रयोग कर्ता पर |इस मंत्र प्रयोग को किसी ऐसे सम्बन्धी पर - [चमत्कारी डिब्बी से सर्वजन वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-डिब्बी-से-सर्वज/2025/02/चमत्कारी-डिब्बी-से-सर्वज.html): दिव्य गुटिका पर सर्वजन वशीकरण प्रयोग -------------------------------------------------- आज के वीडियो में हम एक विशेष वशीकरण और मोहन प्रयोग दे रहे ,जिसको सिद्ध करके कोई व्यक्ति किन्ही दो लोगों के बीच वशीकरण ,मोहन और आकर्षण उत्पन्न करवा सकता है |कोई व्यक्ति खुद से किसी को जोड़ सकता है ,खुद के प्रति तो किसी को वशीभूत - [सर्व वशीकरण प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/सर्व-वशीकरण-प्रयोग/2025/02/सर्व-वशीकरण-प्रयोग.html): दिव्य गुटिका पर सर्व वशीकरण प्रयोग ----------------------------------------- सामग्री ---------- मंत्रसिद्ध चैतन्य दिव्य गुटिका ,तेल का दीपक ,धी का दीपक ,असली सिन्दूर ,लोबान ,मूंगे की माला ,लाल रंग की धोती ,लाल रंग का आसन ,लाल कपडा ,धुप ,दीप ,नैवेद्य [गुड],कपूर | दिन ------- शनिवार ,रात्री काल दिशा -संख्या -अवधि ------------------------- पश्चिम दिशा ,जप संख्या २१०० अर्थात - [वशीकरण प्रभाव कैसे हटायें ?](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-प्रभाव-कैसे-हटाये/2025/02/वशीकरण-प्रभाव-कैसे-हटाये.html): कैसे निष्क्रिय करें वशीकरण की क्रिया ========================= आज के समय में सबसे अधिक दुरुपयोग अगर किसी तांत्रिक विधा का हुआ है तो वह वशीकरण का है |दुसरे स्थान पर कष्ट देने अथवा अपनी समस्या दुसरे को देने के प्रयोग आते हैं |लोग बिना किसी गंभीर कारण के ,शारीरक आकर्षण ,क्षणिक लगाव ,एकतरफा प्यार आदि - [गधे की छान से स्तम्भन /वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/गधे-की-छान-से-स्तम्भन-वशीक/2025/02/गधे-की-छान-से-स्तम्भन-वशीक.html): गधे की छान से स्तम्भन ,वशीकरण ============================ हम आपको आज एक ऐसी रस्सी के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी सामान्य प्रवृत्तियों को ,मन को ,तन की क्रियाओं को ,इच्छाओं को ,चाहत को बदल देती है ,रोक देती है ,दूसरी दिशा में घुमा देती है |यह रस्सी है गधे की रस्सी |गधा - [चितबदला से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/चितबदला-से-वशीकरण/2025/02/चितबदला-से-वशीकरण.html): ग्रामीण अंचलों में विशेषकर उत्तर प्रदेश ,बिहार ,बंगाल ,छत्तीसगढ़ ,मध्यप्रदेश आदि उत्तरी -पूर्वी भारत के गावों में अथवा परम्परागत तांत्रिक किसी का स्वभाव बदलने के लिए एक जड़ी -बूटी का प्रयोग करते हैं जिसे चितबदला कहते हैं |भारत के दुसरे हिस्सों में भी इसे अलग नामों से हो सकता है प्रयोग किया जाता हो - [वशीकरण पागल बना सकता है](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-पागल-बना-सकता-है/2025/02/वशीकरण-पागल-बना-सकता-है.html): तांत्रिक क्रिया मानसिक संतुलन बिगाड़ सकता है ================================ वशीकरण ,आकर्षण ,मोहित करना यानी मोहन इन्ही तीन तांत्रिक षट्कर्मों के प्रति आज के समय में लोगों में भारी रूचि देखि जा रही है |जब व्यक्ति खुद की क्षमता ,योग्यता ,कर्म ,आकर्षण शक्ति ,व्यक्तित्व से किसी को आकर्षित या अनुकूल नहीं कर पाता तो वह चाहता - [शूकरदंत वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/शूकरदंत-वशीकरण/2025/02/शूकरदंत-वशीकरण.html): शूकर दन्त और वशीकरण ================= जंगली सूकर या सूअर एक भयानक ,खूंखार और खतरनाक वन्य पशु है |इसके मुंह के पास सामने की ओर एक तेज धार ,अति कठोर ,नुकीले करीब चार से लेकर छः इंच तक की लम्बाई लिए हुए दो दांत होते हैं |इसी तेज धारदार दांतों के जरिये सूअर अपने से - [गुड़मार वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/गुडमार-वशीकरण/2025/02/गुडमार-वशीकरण.html): वशीकरण और गुडमार =================== गुडमार एक बहुत प्रसिद्द वनस्पति है जिसका प्रयोग असाध्य बीमारी को दूर करने में किया जाता है |बहुत कम लोग जानते हैं की इसका प्रयोग तंत्र में भी होता है और वह भी बेहद प्रभावकारी रूप से |गुडमार से मधुमेह अर्थात डायबिटीज समूल नष्ट हो जाती है |इसका प्रयोग धन प्राप्ति - [स्वयं वशीकरण सफल होता है](https://alaukikshaktiyan.com/स्वयं-वशीकरण-सफल-होता-है/2025/02/स्वयं-वशीकरण-सफल-होता-है.html): वशीकरण शक्ति संतुलन पर निर्भर करता है ============================ वशीकरण एक तांत्रिक षट्कर्म विद्या है जहाँ एक निश्चित दिशा में ऊर्जा प्रक्षेपण कर लक्ष्य के सोच ,स्वभाव ,पसंद -नापसंद में परिवर्तन करते हुए व्यक्ति विशेष के वशीभूत और अपने नियंत्रण में किया जाता है |यह बहुत से मामलों में सफल होता है किन्तु अधिकतर असफल - [पौधों द्वारा वशीकरण /आकर्षण](https://alaukikshaktiyan.com/पौधों-द्वारा-वशीकरण-आकर्/2025/02/पौधों-द्वारा-वशीकरण-आकर्.html): पौधों द्वारा किसी को भी वश में करें ========================= तंत्र में पेड़ -पौधों -वनस्पतियों का बहुत उपयोग होता है ,इसके कई कारण है ,यह सुपर सोनिक तरंगे छोड़ते हैं ,इनके तरंगों की प्रकृति दिन-रात अथवा पृथ्वी-सूर्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है ,इनमे अपने गुण तो होते ही है साथ ही जड़ों में - [वशीकरण में खिलाने -पिलाने की क्रिया](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-में-खिलाने-पिलाने/2025/02/वशीकरण-में-खिलाने-पिलाने.html): वशीकरण में खिलाने -पिलाने के प्रयोगों का प्रभाव ======================================== तांत्रिक षट्कर्म के अंतर्गत आने वाले आकर्षण ,मोहन और वशीकरण में ही अधिकतर खिलाने -पिलाने की वस्तुओं का प्रयोग होता है |आकर्षण अधिकतर दूर के व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है अथवा ऐसे व्यक्ति के लिए जिससे संपर्क ही पहले मुश्किल हो या वार्तालाप - [स्त्री -पुरुष वशीकरण के तंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/स्त्री-पुरुष-वशीकरण-के-तं/2025/02/स्त्री-पुरुष-वशीकरण-के-तं.html): स्त्री -पुरुष वशीकरण के तंत्र प्रयोग ======================= पति वशीकरण के तंत्र प्रयोग --------------------------------- स्त्री द्वारा पुरुष को वशीकृत करने का प्रयोग करने के लिए सर्वप्रथम निम्न मंत्र का निश्चित समय में निश्चित संख्या में जप करते हुए सवा लाख जप संख्या पूर्ण करनी चाहिए |उसके बाद कम से कम १२५० आहुति से हवन करना चाहिए - [वशीकरण /आकर्षण से हानि](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-आकर्षण-से-हानि/2025/02/वशीकरण-आकर्षण-से-हानि.html): वशीकरण /आकर्षण के दुष्प्रभाव /नुकसान ============================ वशीकरण ,आकर्षण ,मोहित करना यानी मोहन इन्ही तीन तांत्रिक षट्कर्मों के प्रति आज के समय में लोगों में भारी रूचि देखि जा रही है |जब व्यक्ति खुद की क्षमता ,योग्यता ,कर्म ,आकर्षण शक्ति ,व्यक्तित्व से किसी को आकर्षित या अनुकूल नहीं कर पाता तो वह चाहता है की - [वनस्पतियों से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/वनस्पतियों-से-वशीकरण/2025/02/वनस्पतियों-से-वशीकरण.html): वनस्पतियों द्वारा वशीकरण मंत्र प्रयोग ========================== जब परिस्थितियां विपरीत हो जाएँ और वशीकरण आवश्यक हो जाए ,गृहस्थ जीवन नरक तुल्य होने लगे ,आपसी वैमनस्य होने लगे तो वशीकरण के निम्न प्रयोग किये जा सकते हैं |इसके लिए सर्वप्रथम निम्न दोनों मन्त्रों में से किसी एक को विधि विधानानुसार सिद्ध कर लेना चाहिए | ॐ क्लीं - [दाम्पत्य में वशीकरण की आवश्यकता](https://alaukikshaktiyan.com/दाम्पत्य-में-वशीकरण-की-आव/2025/02/दाम्पत्य-में-वशीकरण-की-आव.html): दाम्पत्य जीवन और वशीकरण ==================== दाम्पत्य जीवन में तंत्र के षटकर्मों में से वशीकरण का प्रयोग ही हमेशा से सबसे अधिक होता रहा है |कारण मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है |मनुष्य की प्रवृत्ति और सामाजिक /पारिवारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही प्राचीन ऋषियों -मुनियों ने षट्कर्म की अवधारणा विकसित की थी |इनमे - [मोहिनी वटी से मोहित करते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/मोहिनी-वटी-से-मोहित-करते-ह/2025/02/मोहिनी-वटी-से-मोहित-करते-ह.html): मोहिनी वटी से मोहन क्रिया ================ तांत्रिक षट्कर्म में एक कर्म मोहन भी है जिसका अर्थ होता है किसी को मोहित कर लेना |यह आकर्षण और वशीकरण से थोडा भिन्न होता है |आकर्षण में व्यक्ति आकर्षित होता है और वशीकरण में सबकुछ जानते -समझते हुए भी व्यक्ति के प्रभाव में आया हुआ होता है - [कब वशीकरण सफल नहीं होता ?](https://alaukikshaktiyan.com/कब-वशीकरण-सफल-नहीं-होता/2025/02/कब-वशीकरण-सफल-नहीं-होता.html): क्यों और कब काम नहीं करता वशीकरण प्रयोग ================================ बहुत से लोग कहते मिलते हैं वशीकरण काम नहीं किया |कुछ कहते हैं वशीकरण जैसा कुछ नहीं होता या पूछते मिलते हैं क्या सचमुच वशीकरण होता है |इनके कारण हैं |वशीकरण हमेशा हो ही जाए या वशीकरण क्रिया सफल ही हो जाए जरुरी नहीं होता - [हत्थाजोड़ी से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/हत्थाजोड़ी-से-वशीकरण/2025/02/हत्थाजोड़ी-से-वशीकरण.html): हत्था जोड़ी और वशीकरण ===================== यह एक प्रकार की जड़ी [पौधे की जड़ ]है ,परन्तु अपनी अद्भुत रूपाकृति और विचित्र संरचना के कारण किसी पक्षी के पैरों जैसा आभास देता है |यह जड़ अद्भुत चमत्कारों की कारक होती है यदि इसे शुभ मुहूर्त में लाकर विधिवत पूजन -प्राण प्रतिष्ठा करके सिद्ध कर लिया जाए - [अलग व्यक्तित्व अलग वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/अलग-व्यक्तित्व-अलग-वशीकर/2025/02/अलग-व्यक्तित्व-अलग-वशीकर.html): किस व्यक्ति के लिए कैसा वशीकरण प्रयोग हो ? ================================= वशीकरण एक तांत्रिक षट्कर्म विद्या है जहाँ एक निश्चित दिशा में ऊर्जा प्रक्षेपण कर लक्ष्य के सोच ,स्वभाव ,पसंद -नापसंद में परिवर्तन करते हुए व्यक्ति विशेष के वशीभूत किया जाता है |यह बहुत से मामलों में सफल होता है किन्तु अधिकतर असफल ही होता - [श्वेतार्क गणपति से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/श्वेतार्क-गणपति-से-वशीकर/2025/02/श्वेतार्क-गणपति-से-वशीकर.html): वशीकरण में श्वेतार्क गणपति का प्रयोग ======================= श्वेतार्क अर्थात सफ़ेद फूल वाला आक [मदार ]का पौधा एक ऐसा वनस्पति है जो कम देखने में आता है जबकि नीली आभा वाले फूलो वाका आक का पौधा सर्वत्र दीखता है |,श्वेतार्क की जडो का तंत्र जगत में बहुत महत्व है ,|ऐसा मन जाता है की २५ वर्ष - [अतीन्द्रिय ज्ञान रहस्य [[ भाग-९ ]]](https://alaukikshaktiyan.com/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ/2017/09/अतीन्द्रिय-ज्ञान-रहस्य-भ.html): ध्यान साधना से संभव है टेलीपैथी -------------------------------- परामनोविज्ञान के वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क में छुपे हुए रहस्यमयी शक्तियों पर शोध करते हुये पता लगाया कि मनुष्य के अवचेतन मन मे अलौकिक, अविश्वसनीय और अकल्पनीय शक्तियां विद्यमान है। यदि अवचेतन मन की उन शक्तियों को योग आदि क्रियाओं के - [छठी इन्द्रिय [सिक्स्थ सेन्स ] या अतीन्द्रिय ज्ञान ::::[भाग एक ]](https://alaukikshaktiyan.com/छठी-इन्द्रिय-सिक्स्थ-सेन-2/2017/09/छठी-इन्द्रिय-सिक्स्थ-सेन-2.html): ::::::::छठी इन्द्रिय [सिक्स्थ सेन्स ] या अतीन्द्रिय ज्ञान ::::[भाग एक ]::::::::: ====================================================== हम सभी की चाहत रहती है कि जीवन में आने वाली घटनाओं को जान सकें। इसके लिए ज्योतिषी एवं भविष्यवक्ता से संपर्क करते हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि हम सभी भविष्य और भूत की घटनाओं को दर्पण की - [छठी इन्द्रिय [सिक्स्थ सेन्स ]या अतीन्द्रिय ज्ञान ::[भाग दो ]](https://alaukikshaktiyan.com/छठी-इन्द्रिय-सिक्स्थ-सेन/2017/09/छठी-इन्द्रिय-सिक्स्थ-सेन.html): छठी इन्द्रिय अर्थात अतीन्द्रिय ज्ञान से घटनाओं का पूर्वाभास ------------------------------------------------------ क्या मनुष्य की छठी इंद्रिय होती है? कुछ लोग इसे हकीकत मानते हैं और कुछ कोरी कल्पना। अब वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में स्पष्ट किया है कि छठी इंद्रिय की बात सिर्फ कल्पना नहीं, वास्तविकता है, जो हमें किसी घटित होने - [वनस्पतियों -जड़ी बूटियों से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/वनस्पतियों-जड़ी-बूटियों/2025/02/वनस्पतियों-जड़ी-बूटियों.html): वनस्पतियाँ ,जड़ें और वशीकरण /मोहन ========================== १.हरसिंगार को छाया में सुखाकर शुद्ध गोरोचन में मिलाकर माथे पर तिलक करने से वशीकरण होता है |इस तिलक को यक्षिणी साधना में भी प्रयोग में लाया जाता है | २.पति -पत्नी में मन मुटाव रहने पर हर सिंगार की एक इंच की टहनी को चाँदी के ताबीज में - [सियारसिंगी से वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/सियारसिंगी-से-वशीकरण/2025/02/सियारसिंगी-से-वशीकरण.html): यह एक तांत्रिक वस्तु है,जिसका उपयोग आकर्षण,वशीकरण,सम्मोहन,सुरक्षा,यश सम्मान बृद्धि ,धन -सम्पदा , ,के लिए किया जा सकता है. |सियार सिंगी का उपयोग शत्रु पराभव,सामाजिक सम्मान ,शरीररक्षा ,और श्री संमृद्धि के लिए,आकर्षण-वशीकरण -सम्मोहन ,धन संपदा वृद्धि ,सुख-शान्ति प्राप्ति केलिए किया जा सकता है |,किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियार्सिंगी वाद -विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा से बचाने वाला भी सिद्ध होता है |इसके साथ सबसे बड़ी समस्या इसका अधिकतर नकली मिलना है |असली मिलना मुश्किल होता है |असली की पहचान है की इसे सिन्दूर में जब रख दिया - [वशीकरण का सच](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-का-सच/2025/02/वशीकरण-का-सच.html): क्या सचमुच वशीकरण होता है ? ===================== हमने अपने पहले के लेखों में वशीकरण पर बहुत कुछ लिखा है ,जैसे वशीकरण क्या है ,,कैसे कार्य करता है वशीकरण ,, वशीकरण की तकनीक कैसी होती है ,वशीकरण के सूत्र -सिद्धांत -कार्यप्रणाली क्या हैं ,क्यों असफल होती है वशीकरण की क्रिया ,,आदि आदि |आज के अंक - [पति वशीकरण यक्षिणी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/पति-वशीकरण-यक्षिणी-प्रयो/2025/02/पति-वशीकरण-यक्षिणी-प्रयो.html): :::::::::::पति वशीकरण प्रयोग :::::::::::: ================== ============= जिन स्त्रियों के पति उनके अनुकूल नहीं हैं ,दूरी रखते हैं ,घर में अनावश्यक कलह रखते हैं उनके लिए यह मंत्र बहुत प्रभाव शाली है |इसे विधिपूर्वक जप करने से पति पर प्रभाव पड़ता है और वह अनुकूल और वशीभूत होता है | मंत्र :- ‘ऊँ नमो महायक्षिण्ये - [वशीकरण संभव है](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-संभव-है/2025/02/वशीकरण-संभव-है.html): :::::::वशीकरण संभव है ::::::: ===================== वशीकरण अर्थात किसी को वश में कर लेना संभव है ,बशर्ते वशीकरण की तकनीकी का ज्ञान हो ,विषय की समझ हो ,ऊर्जा प्रक्षेपण की कार्य प्रणाली और पद्धति का ज्ञान हो |समय -स्थान-सूत्र-पदार्थ और मानसिक तरंगों की कार्यपद्धति का ज्ञान हो ,अपने आप पर विश्वास ही ,अपने कार्य पर - [कामकला वशीकरण प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/कामकला-वशीकरण-प्रयोग/2025/02/कामकला-वशीकरण-प्रयोग.html): ::::::::कामकला काली वशीकरण प्रयोग ::::::: ================================== यह प्रयोग कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि अथवा चतुर्दशी को शनिवार अथवा रविवार अथवा मंगलवार के दिन किया जाता है |यद्यपि प्रयोग के लिए महाकाल संहिता में दिनों की संख्या निर्धारित नहीं की गयी है किन्तु सामान्य लोगों के लिए अलग विद्वानों की अलग दिनों तक की मान्यता है - [वशीकरण चिटि मंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-चिटि-मंत्र-प्रयोग/2025/02/वशीकरण-चिटि-मंत्र-प्रयोग.html): ::::::::::लवण दुर्गा वशीकरण चिटि प्रयोग :::::::::: =================================== षट्कर्म प्रयोगों की अपनी ही एक उपयोगिता हैं और उनका निर्माण भी मानव जीवन को सुखमय और उन्नति युक्त बनाये रखने के लिए हुआ हैं,| यह जरुर हैं की किस भावना और उदेश्य को लेकर इन प्रयोगों को किया जाए, उस पर व्यक्ति की अपनी ही एक सोच - [मंत्र से मोहन -सम्मोहन](https://alaukikshaktiyan.com/मंत्र-से-मोहन-सम्मोहन/2025/02/मंत्र-से-मोहन-सम्मोहन.html): :::::::::::मोहन मंत्र और उसके प्रयोग :::::::::::: ================================= तंत्र में मोहन अथवा सम्मोहन के अनेक प्रयोग हैं ,जिनका प्रयोग साधक विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार करते रहे हैं |मोहन अथवा सम्मोहन प्रयोग से साधक को देखने वाला उसके प्रभाव से सम्मोहित हो जाता है | सम्मोहन का तांत्रिक प्रयोग हर किसी को करने की अनुमति नहीं - [वशीकरण कब असफल होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-कब-असफल-होता-है/2025/02/वशीकरण-कब-असफल-होता-है.html): ::::::::क्यों असफल हो जाती है वशीकरण की क्रिया ?::::::::: ======================================== वशीकरण मानव मन की सूक्ष्म तरंगों पर आधारित विलक्षण कर्म है |यह कभी सफल होता है कभी असफल होता है ,या यूँ कहें अकसर असफल भी होता है |क्यों ,क्योकि इसकी तकनिकी का ज्ञान नहीं होता ,सूत्र पता नहीं होता ,उद्देश्य पवित्र नहीं होते - [पेड़ -पौधों द्वारा वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/पेड़-पौधों-द्वारा-वशीकरण/2025/02/पेड़-पौधों-द्वारा-वशीकरण.html): :::::::::पेड़ - पौधों द्वारा वशीकरण ::::::::: ============================= तंत्र में पेड़ -पौधों -वनस्पतियों का बहुत उपयोग होता है ,इसके कई कारन है ,यह सुपर सोनिक तरंगे छोड़ते हैं ,इनके तरंगों की प्रकृति दिन-रात अथवा पृथ्वी-सूर्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है ,इनमे अपने गुण तो होते ही है साथ ही जड़ों में जिस प्रकार - [वशीकरण का विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-का-विज्ञान/2025/02/वशीकरण-का-विज्ञान.html): ::::::::::::वशीकरण ::सूत्र-सिद्धांत-कार्यप्रणाली::::::::::::: ========================================== वशीकरण की कार्यप्रणाली तरंगों पर आधारित है ,|,,वस्तुगत ,भावगत तरंगों के साथ मानसिक तरंगों का एक निश्चित लक्ष्य पर प्रक्षेपण कर उसे अपने प्रति वशीभूत कर लेना ही वशीकरण है ,|वशीकरण तो देवताओं का भी होता है पर ,देवोपासना में इसकी प्रक्रिया थोड़ी भिन्न होती है ,वहा सम्बंधित बिखरी उर्जा का - [वशीकरण कैसे होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-कैसे-होता-है-2/2025/02/वशीकरण-कैसे-होता-है-2.html): वशीकरण और इसकी क्रिया विधि =========================== तंत्र में सबसे अधिक जिस विद्या का प्रयोग होता है वह है वशीकरण |सामान्य व्यक्ति तंत्र को भले न जानता हो पर वशीकरण का नाम जरुर सुना होता है |लोग वशीकरण करने अथवा कराने को पागल हुए पड़े रहते हैं अतः सबसे अधिक लूट इसी विद्या के नाम - [अप्सरा /परी साधना से क्या होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-परी-साधना-से-क्या-ह/2025/02/अप्सरा-परी-साधना-से-क्या-ह.html): अप्सरा साधना से क्या लाभ होते हैं ? ========================= अक्सर हम अप्सरा /यक्षिणी ,बेताल ,भैरव ,पिशाच ,किन्नर ,गन्धर्व जैसी पारलौकिक शक्तियों का नाम कथाओं कहानियों में सुनते हैं |तंत्र में इनकी साधना करके सिद्ध भी किया जाता है और इनकी सहायता से अलौकिक कार्य किये जाते हैं ,भौतिक जीवन सुखी किया जाता है |वैसे - [सात्विक कर्णपिशाचिनी साधना पद्धति](https://alaukikshaktiyan.com/सात्विक-कर्णपिशाचिनी-साध/2025/02/सात्विक-कर्णपिशाचिनी-साध.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] ===============[[ चतुर्थ मंत्र - सात्विक पद्धति ]] कर्ण पिशाचिनी मूलतः वाम मार्ग द्वारा साधित होने वाली एक अति उग्र तामसिक शक्ति है जो वाम मार्ग से शीघ्र सिद्ध होती है ,तथापि इसके सात्विक रूप भी हैं और यह सिद्ध भी होती है इन पद्धतियों से यद्यपि इनमे - [कर्ण पिशाचिनी की वाम मार्गीय साधना](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-की-वाम-मार्/2025/02/कर्ण-पिशाचिनी-की-वाम-मार्.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] =============== [तृतीय मंत्र - वाम मार्ग ] कर्ण पिशाचिनी का नाम तंत्र जगत में जाना पहचाना है |सामान्य जन भी भूत -भविष्य बताने वाली सिद्धि के रूप में इसे जानते हैं ,यद्यपि यह भविष्य नहीं बता सकती |भविष्य के कथन साधक के पूर्वानुमान और तुक्के होते हैं - [कर्ण पिशाचिनी की सात्विक साधना](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-की-सात्विक/2025/02/कर्ण-पिशाचिनी-की-सात्विक.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] ================[ द्वितीय मंत्र - सात्विक क्रियागत ] भारतीय तंत्र में भूत -भविष्य और वर्तमान का हाल सटीक बताने वाली शक्ति में कर्ण पिशाचिनी का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है |कहा जाता है की इस पिशाचिनी को सिद्ध करने पर साधक किसी भी व्यक्ति का भूत - [कर्ण पिशाचिनी की अघोर साधना](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-की-अघोर-साध/2025/02/कर्ण-पिशाचिनी-की-अघोर-साध.html): कर्ण पिशाचिनी साधना ===============[प्रथम मंत्र -अघोर क्रियागत ] कर्ण पिशाचिनी का नाम तंत्र जगत में जाना पहचाना है |सामान्य जन भी भूत -भविष्य बताने वाली सिद्धि के रूप में इसे जानते हैं ,यद्यपि यह भविष्य नहीं बता सकती |भविष्य के कथन साधक के पूर्वानुमान और तुक्के होते हैं जो कभी सही ,कभी गलत हो सकते - [कर्ण पिशाचिनी कौन है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-कौन-है/2025/02/कर्ण-पिशाचिनी-कौन-है.html): कर्ण पिशाचिनी [karn Pishachini ] ======================== शक्ति = प्रकृति = भ्रम और सच ---------------------------------- भारतीय तंत्र में भूत -भविष्य और वर्तमान का हाल सटीक बताने वाली शक्ति में कर्ण पिशाचिनी का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है |कहा जाता है की इस पिशाचिनी को सिद्ध करने पर साधक किसी भी व्यक्ति का भूत - [एकाग्रता की शक्ति : त्राटक](https://alaukikshaktiyan.com/एकाग्रता-की-शक्ति-त्राटक/2017/09/एकाग्रता-की-शक्ति-त्राटक.html): एकाग्रता की शक्ति :;त्राटक ::असंभव कुछ भी नहीं ================================ एकाग्रता में बहुत शक्ति है ,मन अगर एकाग्र होने लगे तो बहुत कुछ संभव है ,यहाँ तक की ईश्वर प्राप्ति भी |इसी शक्ति को बढाने के लिए ध्यान किया जाता है ,जिसका आध्यात्मिक जगत में अत्यधिक महत्व है |किन्तु ध्यान - [त्राटक से भूत-भविष्य ज्ञान और वशीकरण भी संभव है](https://alaukikshaktiyan.com/त्राटक-से-भूत-भविष्य-ज्ञा/2017/09/त्राटक-से-भूत-भविष्य-ज्ञा.html): ::::::::::बिंदु त्राटक ::::::::;; ==================== बिंदु त्राटक ,त्राटक साधना में बाह्य साधना का प्रथम चरण है ,जिसके द्वारा त्राटक की शुरुआत की जाती है ,यद्यपि किसी भी फूल,वास्तु पर आँखों को एकाग्र कर सामान क्रिया की जा सकती है ,पर यह एक सुनियोजित साधना है जिसमे तीन चरण होते हैं |बिंदु त्राटक - [त्राटक ::ध्यान केन्द्रीकरण की विशिष्ट तकनीक](https://alaukikshaktiyan.com/त्राटक-ध्यान-केन्द्रीकर/2017/09/त्राटक-ध्यान-केन्द्रीकर.html): त्राटक ::ध्यान केन्द्रीकरण और उसके अद्भुत लाभ ================================= संसार में अनेक प्रकार की अद्भुत -अलौकिक साधनाएं हैं ,उन सबके मूल में है मन ,मन की शक्ति असीम है -अगाध है ,कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसे मन की शक्ति विक्सित कर संपन्न न कर सके |मन की शक्ति बढाने का साधन है उसकी - [सम्मोहन विद्या के लाभ](https://alaukikshaktiyan.com/सम्मोहन-विद्या-के-लाभ/2017/09/सम्मोहन-विद्या-के-लाभ.html): ::::::::::::::::सम्मोहन विद्या के लाभ ::::::::::::::::::: ====================================== [१] इससे सहज ही अपनी बुरी आदतें छोड़ी जा सकती हैं |चारित्रिक दोष तथा रोगों को दूर किया जा सकता है | [२] माता-पिता बिना कुछ कहे या बताये अपने शरारती लड़के -लड़की को आसानी से नियंत्रित एवं आज्ञाकारी बना सकते हैं | [३] इसके द्वारा छोटे कर्मचारी भी - [सम्मोहन](https://alaukikshaktiyan.com/सम्मोहन/2017/09/सम्मोहन.html): :::::::::::सम्मोहन:::::::::::: =================== सम्मोहन को अंग्रेजी में हिप्नोटिज्मकहा जाता है ,जिसका शाब्दिक अर्थ है निद्रा ,,किन्तु यह निद्रा प्राकृतिक एवंस्वाभाविक निद्रा नहीं होती है ,,इसे एक एक विशेष प्रकार की तंत्रिका की निद्रा या प्रेरित निद्रा भी कह सकते हैं |प्राकृतिक निद्रा में व्यक्ति बेखबर होकर सोता है जबकि सम्मोहित निद्रा या अवस्था में व्यक्ति - [तांत्रिक और तंत्र से भय क्यों](https://alaukikshaktiyan.com/तांत्रिक-और-तंत्र-से-भय-क्/2017/11/तांत्रिक-और-तंत्र-से-भय-क्.html): तांत्रिक और तंत्र से भय क्यों ================== क्यों डरते हैं लोग तंत्र के नाम से ---------------------------------------- समाज में तांत्रिक या तंत्र का नाम सुनते ही लोगों के मन में एक डरावना ,वीभत्स विचार उठता है |उनके मन में एक दाढ़ी -मूछें बढाए ,काले अथवा लाल कपडे पहने ,डरावने क्रिया कलाप करता ,लाल लाल आंखे ,नशे - [आपके साथ ऐसा तो नहीं हो रहा ?](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा-3/2017/12/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा-3.html): क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है -१ ======================== १. आप घर में घुसते हैं और अनायास तनावग्रस्त हो जाते हैं ,सर भारी हो जाता है जबकि आप बाहर बिलकुल ठीक थे |अनायास थकान भी महसूस होने लगी और शान्ति की भी चाह होने लगी जबकि बीबी बच्चे आपके आने से खुश हुए |आप चाहकर - [क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है -२](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-आपके-साथ-ऐसा-हो-रहा-है/2017/12/क्या-आपके-साथ-ऐसा-हो-रहा-है.html): क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है -२ =====================[[ गतांक से आगे ]] क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है के प्रथम भाग में हमने व्यक्ति और लोगों को उनके घर परिवार में महसूस होने वाले असामान्य प्रभावों के बारे में लिखा है |इस अंक में हम लोगों को महसूस होने वाले गंभीर प्रकृति के - [आपके साथ ऐसा तो नहीं हो रहा है ? -३](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा-2/2017/12/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा-2.html): क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है - भाग -३ ============================[[गतांक से आगे ]] हमने अपने पूर्व के लेखों में व्यक्ति ,परिवार ,लोगों को महसूस होने वाले विभिन्न प्रकार के उर्जाओं /शक्तियों के प्रभाव के बारे में लिखा है |एक लेख में विभिन्न अनुभवों को समेटना मुश्किल है अतः हम इस क्रम को इस लेख - [आपके साथ ऐसा तो नहीं हो रहा है -४](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा/2017/12/आपके-साथ-ऐसा-तो-नहीं-हो-रहा.html): क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है -४ =======================[[जमीन /मकान /दूकान /रियल एस्टेट ]] हमने अपने पूर्व के तीन लेखों में "क्या आपके साथ ऐसा हो रहा है " सीरिज के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की समस्याओं का उल्लेख किया है जो की लोगों के जीवन से सम्बंधित हैं और जो लोगों को अनुभव होते हैं - [बगलामुखी दीक्षा [Baglamukhi Deeksha ]](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-दीक्षा-baglamukhi-deeksha/2017/12/बगलामुखी-दीक्षा-baglamukhi-deeksha.html): बगलामुखी दीक्षा =========== दस महाविद्याओं में शत्रु का स्तम्भन करने, शत्रु का नाश करने में बगलामुखी का नाम सबसे ऊपर है | इस देवी का दूसरा नाम पीताम्बरा भी है | इसी विद्या को ब्रह्मास्त्र विद्या कहा जाता है | यही है प्राचीन भारत का वह ब्रह्मास्त्र जो पल भर में सारे विश्व को नष्ट - [ब्रह्मास्त्र विद्या [Brahmastra Vidya ]](https://alaukikshaktiyan.com/ब्रह्मास्त्र-विद्या-brahmastra-vidya/2017/12/ब्रह्मास्त्र-विद्या-brahmastra-vidya.html): :::::::::::::ब्रह्मास्त्र विद्या ::::::::::::::: ============================= सृष्टि के आदि काल से ही हंसना, रोना, इच्छायें और उनकी पूर्ती में आने वाली बाधायें मनुष्य के लिये चुनौती रहे हैं | कोई धन पाना चाहता है तो कोई मान - सम्मान पाने के लिये परेशान है | किसी को प्रेम चाहिये तो कोई व्यर्थ में ही ईर्ष्या की अग्नि - [बगलामुखी महाविद्या [Mahavidya Baglamukhi ]](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-महाविद्या-mahavidya-baglamukhi/2017/12/बगलामुखी-महाविद्या-mahavidya-baglamukhi.html): ::::::::::::::: वल्गामुखी [बगलामुखी ] महाविद्या ::::::::::::::::: ======================================== बगलामुखी देवी दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या का नाम से उल्लेखित है । वैदिक शब्द ‘वल्गा’ कहा है, जिसका अर्थ कृत्या सम्बन्ध है, जो बाद में अपभ्रंश होकर बगला नाम से प्रचारित हो गया । बगलामुखी शत्रु-संहारक विशेष है अतः इसके दक्षिणाम्नायी, पश्चिमाम्नायी मंत्र अधिक मिलते हैं । - [गुरु किसे बनायें ?](https://alaukikshaktiyan.com/गुरु-किसे-बनायें/2025/02/गुरु-किसे-बनायें.html): गुरु किसे और कैसे बनाएं ? ================== आज बहुत से लोग पूछते रहते हैं की हमें किसी गुरु के बारे में बताएं ,जो हमें दीक्षा दे सकें ,हमारा मार्गदर्शन कर सकें |तंत्र क्षेत्र के जिज्ञासुओं की संख्या इनमे अधिक होती है चूंकि तंत्र साधना बिना गुरु के संभव ही नहीं और शक्ति की प्राप्ति - [दीक्षा किससे और कैसे लें ?](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-किससे-और-कैसे-लें/2025/02/दीक्षा-किससे-और-कैसे-लें.html): दीक्षा किससे और कैसे लें ? ==================== आज के समय में बहुत से लोगों की यह समस्या है की वह दीक्षा लेना चाहते हैं ,मंत्र धारण करना चाहते हैं ,साधना करना चाहते हैं ,शक्ति -भुक्ति और मुक्ति चाहते हैं किन्तु उन्हें उपयुक्त ऐसा गुरु नहीं दिखता जैसा वह चाहते हैं |कहने को तो देश - [शक्तिपात के लाभ और लक्षण](https://alaukikshaktiyan.com/शक्तिपात-के-लाभ-और-लक्षण/2025/02/शक्तिपात-के-लाभ-और-लक्षण.html): शक्तिपात के लाभ ============== शक्तिपात से व्यक्ति की शक्ति जाग उठती है |इसमें विशेषता यह होती है की बिना परिश्रम के ही शिष्य में गुरु कृपा से शक्ति का जागरण हो जाता है |शक्तिपात होने पर यौगिक क्रियाओं की अपेक्षा नहीं रहती है ,वह साधक की प्रकृति के अनुरूप रूप लेने लगती हैं |प्रबुद्ध - [शक्तिपात से क्या होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/शक्तिपात-से-क्या-होता-है/2025/02/शक्तिपात-से-क्या-होता-है.html): :::::::::शक्ति पात ::गुरु की अद्भुत कृपा:::::::::: =============================== जीवमात्र का परम उद्देश्य है ,जीवन से मुक्त होकर शिवत्व में प्रवेश करना ,और शिवत्व में प्रवेश करना तभी संभव है जब जीव अपनी आत्मस्थिति का अनुसंधान करते हुए उसमे अवलंबित हो जाता है |स्वरुप स्थिति में स्थायित्व प्राप्त कर लेना ही मुक्ति के द्वार तक पहुचने - [दीक्षा कब लिया जाता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-कब-लिया-जाता-है/2025/02/दीक्षा-कब-लिया-जाता-है.html): गुरु दीक्षा की महत्ता और समय ===================== ब्राह्मन, क्षत्रिये, वैश्य और शूद्र ये चारो वर्ण ही गुरु-दीक्षा ग्रहन करने के अधिकारी है | दीक्षा के अभाव में सभी कर्म निष्फल होते है | तथा किसी भी प्रकार का जप, तप तथा पूजा आदि गुरु दीक्षा बिना कोई फल नहीं देता | ठीक उसी प्रकार - [साधना में ईष्ट की शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/साधना-में-ईष्ट-की-शक्ति/2025/02/साधना-में-ईष्ट-की-शक्ति.html): ::::::::साधना में गुरु या ईष्ट प्रबलता की भूमिका :::::::: ======================================= साधना के मार्ग पर बिना गुरु के चल पाना संभव नहीं है |साधन के दौरान होने वाले अनुभव का विशेषण गुरु ही कर पाता है और आगे का मार्गदर्शन तदनुरूप करते हैं ,|साधना में आने वाले विघ्न बाधाओं का निवारण गुरु द्वारा ही संभव - [गुरु क्यों आवश्यक है ?](https://alaukikshaktiyan.com/गुरु-क्यों-आवश्यक-है/2025/02/गुरु-क्यों-आवश्यक-है.html): गुरू दीक्षा का महत्व ================ गुरु द्वारा दीक्षित करना अर्थात गुरु द्वारा दक्ष बनाना दीक्षा है |गुरु के पास जो श्रेष्ठ ज्ञान होता है वह अपने शिष्य को प्रदान करने और उस ज्ञान में उसे पूरी तरह से पारंगत करने की प्रक्रिया ही गुरु दीक्षा कहलाती है |गुरु दीक्षा गुरु की असीम कृपा और - [गुरु में हजारों वर्ष का ज्ञान कैसे ?](https://alaukikshaktiyan.com/गुरु-में-हजारों-वर्ष-का-ज्/2025/02/गुरु-में-हजारों-वर्ष-का-ज्.html): क्यों आवश्यक है गुरु =============== अध्यात्म और साधना के क्षेत्र में गुरु का महत्त्व इसलिए नहीं है कि वह मंत्र बताता है ,अथवा शुद्ध उच्चारण बताता है या देवी देवता का चुनाव करता है या शक्तिपात करता है या पूजा पद्धति बताता है |वह अपनी अर्जित शक्ति शक्तिपात आदि से अथवा अपना अर्जित ज्ञान - [दीक्षा कितने प्रकार की होती है](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-कितने-प्रकार-की-हो/2025/02/दीक्षा-कितने-प्रकार-की-हो.html): ।।दीक्षा के प्रकार (शक्तिपात करने की विधियॉं)।। ====================================== उपास्य देवता, उपासक 'शिष्य' की रूचि, गुरू-शिष्य की पात्रता, उपासना पद्धति की भिन्नता, अधिकारभेद, साधना विधियों की प्रथकता तथा देश-काल कीपरिस्थितियों की अनुरूपता के कारण दीक्षा की विभिन्न विधियों का नामकरण हुआ है। दीक्षा विशेष के नाम से ही दीक्षा की विधि का आभास मिल जाता है। - [शिष्य का कर्तब्य](https://alaukikshaktiyan.com/शिष्य-का-कर्तब्य/2025/02/शिष्य-का-कर्तब्य.html): दीक्षा और शिष्य ============ दीक्षा गुरु द्वारा शिष्य को दी जाती है |गुरु शिष्य की योग्यतानुसार उसे दीक्षा देता है |दीक्षा हेतु शिष्य में पात्रता और योग्यता के साथ ही उसका व्यवहार एक अहम् कारक होता है |शास्त्रानुसार शिष्य का व्यवहार इस प्रकार होना चाहिए -- जो प्रणाम करके आज्ञा लेकर पास बैठे - [सात गुरु कौन कौन से होते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/सात-गुरु-कौन-कौन-से-होते-है/2025/02/सात-गुरु-कौन-कौन-से-होते-है.html): सबसे बड़ा गुरु कौन होता है ?सात गुरु कौन कौन से होते हैं ? ========================================== किस किस गुरु को आप जानते हैं ? ------------------------------------- अक्सर हम जब गुरु के बारे में सोचते हैं या हमसे पूछा जाता है तो हम या तो मंत्र देने वाले गुरु के बारे में सोचते हैं या प्रथम शिक्षा - [शिष्य मिलना कैसे मुश्किल है ?](https://alaukikshaktiyan.com/शिष्य-मिलना-कैसे-मुश्किल/2025/02/शिष्य-मिलना-कैसे-मुश्किल.html): गुरु नहीं शिष्य मिलना मुश्किल है ======================= अक्सर लोग कहते मिलते हैं गुरु कहाँ खोजें ,वास्तविक सच्चा गुरु आज के समय में कहाँ मिलता है ,सब स्वार्थी और लालची ही मिलते हैं ,पैसे माँगते हैं ,शोषण करने की कोशिश करते हैं ,कुछ बताना नहीं चाहते ,मन्त्र देने को पैसे लेते हैं ,व्यवसाय बनाया हुआ - [दीक्षा के लिए क्या करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-के-लिए-क्या-करें/2025/02/दीक्षा-के-लिए-क्या-करें.html): गुरु दीक्षा :: मुक्ति का मार्ग ===================[[भाग -४ ]] 'दीक्षा' व्यापक अर्थों वाला शब्द है. किन्तु गुरु से जुड़ जाने पर उनसे शिक्षा प्राप्त होने को प्रधानत: 'दीक्षा' कहते हैं.| 'दीक्षा' कई प्रकार की होती है.| 'दीक्षा' का सूक्ष्म अर्थ ये भी होता है की यदि गुरु तपस्वी हो और सम्पूर्ण हो तो - [दीक्षा और दीक्षित](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-और-दीक्षित/2025/02/दीक्षा-और-दीक्षित.html): गुरु दीक्षा :: मुक्ति का मार्ग ===================[[भाग -३ ]] तांत्रिक ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है की गुरु मुख से दीक्षा लिए बिना कोई भी मंत्र सफल व् सिद्ध नहीं होता |गुरु मुख द्वारा दीक्षित मंत्र -जाप ग्रहण करने से जहाँ ज्ञान-विज्ञानं में वृद्धि होती है वहीँ सब प्रकार से पाप राशि का - [दीक्षा से क्या होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/दीक्षा-से-क्या-होता-है/2025/02/दीक्षा-से-क्या-होता-है.html): गुरु दीक्षा :: मुक्ति का मार्ग ===================[[भाग -२ ]] प्रत्येक मनुष्य, जिसने जन्म लिया हैं उसके लिए सर्वथा उपयोगी हैं दीक्षा, क्योंकि दीक्षा शिष्य के जीवन को पावन बनाने की दुर्लभ क्रिया हैं. हमारे कई - कई जन्मों के दोष, पाप एवं कुसंस्कारों के रूप में संकलित रहते हैं. इन्हीं दुःसंस्कारों से साधक - [गुरु दीक्षा क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/गुरु-दीक्षा-क्या-है/2025/02/गुरु-दीक्षा-क्या-है.html): गुरु दीक्षा :: मुक्ति का मार्ग =================== आज जबकि दीक्षा और गुरु मंत्र लेना देना एक व्यापार बन चूका है अधिकतर लोग दीक्षा के वास्तविक अर्थ को ही नहीं जानते |मात्र मंत्र लेना ही दीक्षा समझते हैं |99 प्रतिशत लोग अपने भौतिक उद्देश्यों से मंत्र दीक्षा ले रहे ,यहाँ तक की साधक सम्प्रदायों में - [चमत्कारी हनुमान साधना](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-हनुमान-साधना/2025/02/चमत्कारी-हनुमान-साधना.html): :::::::::हनुमान साधना :::::::: ===================== हनुमान की अवधारणा या उत्पत्ति त्रेता में भगवान् राम के समय में मानी जाती है और इन्हें परम सात्विक देवता माना जाता है |इन्हें सामान्यतया वैदिक देवताओं में सम्मिलित किया जाता है यद्यपि इन्हें रुद्रावतार भी माना जाता है और शिव से सम्बद्ध भी माना जाता है | हनुमान जी - [हनुमान कवच](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-कवच/2025/02/हनुमान-कवच.html): ::::::::: श्री हनुमत्कवचम् ::::::::: ========================== ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॥ विनियोग ----------- ॐ अस्य श्री हनुमत्कवच स्तोत्र महामन्त्रस्य, श्री रामचन्द्र ऋषिः श्री हनुमान् परमात्मा देवता अनुष्टुप् छन्दः मारुतात्मजेति बीजं अञ्जनीसूनुरिति शक्तिः लक्ष्मणप्राणदातेति कीलकं रामदूतायेत्यस्त्रं हनुमान् देवता इति कवचं पिङ्गाक्षोमित विक्रम इति मन्त्रः श्रीरामचन्द्र प्रेरणया रामचन्द्र प्रीत्यर्थं मम सकल कामना सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ करन्यासः - [हनुमान की किस पूजा से क्या लाभ होते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-की-किस-पूजा-से-क्या/2025/02/हनुमान-की-किस-पूजा-से-क्या.html): हनुमान उपासना :: सर्वकार्य सिद्धिकारक उपासना ================================ हनुमान जी कलियुग में भी साक्षात भगवान बताए गए हैं। इसीलिए कहा जाता है कि उनकी पूजा, उपासना, मंत्र और पाठ करने से अलग-अलग फल मिलते हैं और कष्ट दूर होते हैं। - 1. हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का पाठ। - [हनुमान उपासना कैसे प्रभावशाली हो ?](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-उपासना-कैसे-प्रभा/2025/02/हनुमान-उपासना-कैसे-प्रभा.html): हनुमान उपासना के कुछ प्रभावशाली नियम व् तरीके ===================================== 1. श्री हनुमानजी अखण्ड ब्रह्मचारी व महायोगी भी हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि उनकी किसी भी तरह की उपासना में वस्त्र से लेकर विचारों तक पावनता, ब्रह्मचर्य व इंद्रिय संयम को अपनाएं। 2. इसी पवित्रता का ध्यान रखते हुए पूर्णिमा तिथि हो या मंगलवार-शनिवार हनुमानजी - [सुन्दरकाण्ड का पाठ कैसे अधिक लाभप्रद हो ?](https://alaukikshaktiyan.com/सुन्दरकाण्ड-का-पाठ-कैसे-अ/2025/02/सुन्दरकाण्ड-का-पाठ-कैसे-अ.html): सुन्दरकाण्ड का पाठ कैसे अधिक लाभप्रद हो ? ============================== हनुमान जी और उनके सुन्दरकाण्ड ,हनुमान चालीसा ,बाहुक ,अष्टक आदि का पाठ बहुधा हिन्दू घरों में होता है या अक्सर सूना जाता है |हनुमान जी कलयुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता माने जाते हैं और यह अमर और चिरंजीवी हैं |इनकी आराधना यदि नियमानुसार और श्रद्धा भक्ति - [मंगलवार के उपाय से सुख -समृद्धि](https://alaukikshaktiyan.com/मंगलवार-के-उपाय-से-सुख-समृ/2025/02/मंगलवार-के-उपाय-से-सुख-समृ.html): ::::::::मंगलवार को करें कुछ उपाय और रहें सुखी-संपन्न ::::::::: ========================================================= मंगलवार का दिन हनुमान जी का माना जाता है। लेकिन इस दिन को गणेश जी के लिए भी शुभ माना गया है। यह दिन कर्ज से मुक्ति के लिए सबसे उत्तम है। मंगलवार के दिन किए जाने वाले आसान उपाय जो धन संपदा के - [विशिष्ट हनुमान](https://alaukikshaktiyan.com/विशिष्ट-हनुमान/2025/02/विशिष्ट-हनुमान.html): ::::::पंचमुखी हनुमान :::::: ===================== श्री हनुमान रूद्र के अवतार माने जाते हैं। आशुतोष यानि भगवान शिव का अवतार होने से उनके समान ही श्री हनुमान थोड़ी ही भक्ति से जल्दी ही हर कलह, दु:ख व पीड़ा को दूर कर मनोवांछित फल देने वाले माने जाते हैं। श्री हनुमान चरित्र गुण, शील, शक्ति, बुद्धि कर्म, - [हनुमान चालीसा के किस चौपाई से क्या लाभ ?](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-चालीसा-के-किस-चौपा/2025/02/हनुमान-चालीसा-के-किस-चौपा.html): हनुमान चालीसा की किस चौपाई से क्या-क्या लाभ प्राप्त हो सकते हैं ? ====================================================== आज काफी लोग क्लेश-विकार के शिकार हैं। क्लेश यानी कष्ट, मानसिक तनाव, चिंता और विकार यानी दोष, बुराई। तेज बुद्धि के साथ ही क्लेश और विकार दूर करने के लिए सबसे सरल उपाय है नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ - [बजरंग बाण क्यों तीव्र प्रभाव देता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/बजरंग-बाण-क्यों-तीव्र-प्र/2025/02/बजरंग-बाण-क्यों-तीव्र-प्र.html): बजरंग बाण और उसके तीव्र प्रभाव का कारण ==================================== हनुमान जी कलयुग में सर्वाधिक जाग्रत देवता माने जाते हैं जो सप्त चिरंजीवी में से एक हैं ,अर्थात जिनकी कभी मृत्यु नहीं हो सकती |इनके सम्बन्ध में अनेक किवदंतियां हैं और आधुनिक युग में भी इन्हें कहीं कहीं उपस्थित रूप से माना जाता है अथवा - [क्यों हनुमान भक्त को शनि पीड़ा नहीं होती ?](https://alaukikshaktiyan.com/क्यों-हनुमान-भक्त-को-शनि-प/2025/02/क्यों-हनुमान-भक्त-को-शनि-प.html): हनुमान भक्त को शनि पीड़ा न होने के कारण की कथा =========================================== बहुत कम लोगों को यह बात मालूम होगी कि जब महावीर हनुमान लंका मर्दन को पहुंचे थे तो वह एकबार में जलकर खाक नहीं हो पार्इ थी। बाद में शनिदेव के नजर से रावण का गढ तबाह हुआ था। इतना ही नहीं - [श्री पंचमुखहनुमत्कवचम](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-पंचमुखहनुमत्कवचम/2025/02/श्री-पंचमुखहनुमत्कवचम.html): :::::::श्री पंचमुखहनुमत्कवचम ::::::: ========================== ॐ श्री पंचवदनायांजनेयाय नमः। ॐ अस्य श्री पंचमुखहनुमत्कवचमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, गायत्रीछन्दः ,पंचमुखविराट्हनुमान् देवता, ह्रीं बीजं, श्रीं शक्ति, क्रौं कीलकं, क्रूं कवचं, क्रैं अस्राय फट् इति दिग्बन्धः ॥ श्री गरुड उवाच: अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि श्रृणुसर्वांगसुन्दरि । यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम् ॥1॥ पंचवक्त्रं महाभीमं त्रिपंचनयनैर्युतम् । बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥2॥ पूर्वंतु वानरं वक्त्रं - [सर्व ग्रह बाधा निवारक उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/सर्व-ग्रह-बाधा-निवारक-उपा/2025/02/सर्व-ग्रह-बाधा-निवारक-उपा.html): सर्व ग्रह -बाधा निवारक तंत्र [टोटका ] ============================= यदि कोई ग्रह बाधा -कष्ट से पीड़ित है और ग्रहों के उपद्रव ,रोग-शोक ,असफलताए ,कष्ट शांत ,समाप्त करना चाहता है तो यह वनस्पति तंत्र का प्रयोग करने से उसकी समस्या दूर होती है |इसे करने में किसी तरह का भय भी नहीं है | आक [मदार - [संतान प्राप्ति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/संतान-प्राप्ति-के-उपाय/2025/02/संतान-प्राप्ति-के-उपाय.html): ::::: संतान प्राप्ति के उपाय ::::: ======================== सभी चाहते है की संतान हो और स्वस्थ हो ,संतान हो और अस्वस्थ हो या रहे तो माता-पिता को भरी कष्ट और समस्या होती है ,,संतान के स्वास्थय का काफी कुछ सम्बन्ध दम्पति के स्वयं के शुक्राणुओं अथवा अंडाणुओं के गुणों और शक्ति पर निर्भर करता है - [संतानहीनता :कारण -निवारण](https://alaukikshaktiyan.com/संतानहीनता-कारण-निवारण/2025/02/संतानहीनता-कारण-निवारण.html): :::संतानहीनता ::ज्योतिषीय और तंत्रिकीय विश्लेषण ::: ====================================== संतान न होना या होकर न रहना सदैव से दम्पतियो के लिए कष्ट देने वाला रहा है ,हर दंपत्ति संतान चाहता है जिससे उसकी वंश वृद्धि हो सके ,किन्तु बहुतो को यह सौभाग्य नहीं मिल पाता ,,इसके कई कारण होते है ,ज्योतिषीय कारण अर्थात ग्रह स्थितिया ,पारिवारिक स्थितिया - [महाशिवरात्रि पर विशेष पुष्प शिवलिंग पर चढ़ाएं](https://alaukikshaktiyan.com/महाशिवरात्रि-पर-विशेष-पु/2025/02/महाशिवरात्रि-पर-विशेष-पु.html): शिवलिंग पर एक बार यह फूल चढ़ाएं और देखें चमत्कार ============================================= महाशिवरात्रि या त्रयोदशी ,प्रदोष आदि भगवान शिव से सम्बन्धित होता है |इस दिन अनेक उपाय और प्रयोग लोग अपनी सुख ,समृद्धि ,शान्ति ,सुख ,सुरक्षा ,धन वृद्धि ,दरिद्रता निवारण के लिए करते हैं |इन उपायों में कुछ उपाय अत्यंत अचूक होते हैं जो विशेष समय - [संतान कब नहीं होती ?](https://alaukikshaktiyan.com/संतान-कब-नहीं-होती/2025/02/संतान-कब-नहीं-होती.html): संतान हीनता ::::::ज्योतिष की दृष्टि में ============================ संतान न होना या होकर न रहना सदैव से दम्पतियो के लिए कष्ट देने वाला रहा है ,हर दंपत्ति संतान चाहता है जिससे उसकी वंश वृद्धि हो सके ,किन्तु बहुतो को यह सौभाग्य नहीं मिल पाता ,,इसके कई कारण होते है ,ज्योतिषीय कारण अर्थात ग्रह स्थितिया ,पारिवारिक - [स्वयं की तंत्र क्रिया के खतरे](https://alaukikshaktiyan.com/स्वयं-की-तंत्र-क्रिया-के-ख/2025/02/स्वयं-की-तंत्र-क्रिया-के-ख.html): बिना सोचे -समझे तांत्रिक -मान्त्रिक उपाय खुद न करें ========================================== तंत्र में सभी प्रकार की जीवन से जुडी समस्याओं का समाधान है ,किन्तु अधिकतर विद्वान् अपनी पुस्तकों में एवं फेसबुक जैसे माध्यमो पर सम्पूर्ण प्रक्रिया नहीं देते हैं ,हम भी ऐसा ही करते हैं ,जबकि इनके पीछे के सिद्धांत -कार्यप्रणाली -वस्तुएं-स्थान-समय आदि अलग-अलग दे - [उच्चाटन क्रिया कैसे की जाती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/उच्चाटन-क्रिया-कैसे-की-जा/2025/02/उच्चाटन-क्रिया-कैसे-की-जा.html): :::::उच्चाटन प्रयोग --एक बहुउपयोगी तंत्र प्रयोग :::::: ====================================== शायद आपने कभी महसूस किया हो की कभी जो कार्य ,जो वस्तु ,जो लोग आपको बहुत पसंद रहे हों ,जिनके प्रति आपमें आकर्षण रहा हो आज उस कार्य ,उस वस्तु या उन लोगों से आपका मन हट गया हो |इसे मन का उचटना कहते हैं जो - [कर्ण पिशाचिनी साधना - १](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-१/2017/10/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-१.html): कर्ण पिशाचिनी साधना ===============[प्रथम मंत्र -अघोर क्रियागत ] कर्ण पिशाचिनी का नाम तंत्र जगत में जाना पहचाना है |सामान्य जन भी भूत -भविष्य बताने वाली सिद्धि के रूप में इसे जानते हैं ,यद्यपि यह भविष्य नहीं बता सकती |भविष्य के कथन साधक के पूर्वानुमान और तुक्के होते हैं जो कभी सही - [अट्रेक्शन कैसे किया जाता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/अट्रेक्शन-कैसे-किया-जाता/2025/02/अट्रेक्शन-कैसे-किया-जाता.html): आकर्षण तंत्र प्रयोग -कैसे काम करता है ? ================================== तंत्र के षट्कर्म के अंतर्गत आने वाले प्रयोगों में आकर्षण भी एक प्रयोग है ,जिसका उपयोग किसी व्यक्ति ,ईष्ट ,चराचर को अपनी और आकर्षित करने के लिए किया जाता है |इस तरह के तीन प्रयोग तंत्र में आते है आकर्षण -आकर्षित करना ,वशीकरण-वश में करना - [स्वयं को जानकार पूजा करो](https://alaukikshaktiyan.com/स्वयं-को-जानकार-पूजा-करो/2025/02/स्वयं-को-जानकार-पूजा-करो.html): स्वयं को पहचानो ,देखो कहाँ कमी है क्या जरूरत है ======================================== यदि आपकी जल्द रोने की आदत है ,निराशा ,टेंसन में हो जल्दी जाते हैं ,घबरा जाते हैं ,हीन भावना से ग्रस्त हो | वह भी नहीं ले पा रहे जो आपके भाग्य में है ,किसी के सामने जाने में घबराहट होती है ,सोचते - [बगलामुखी यन्त्र वायव्य बाधा हटाती है](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-यन्त्र-वायव्य-ब/2025/02/बगलामुखी-यन्त्र-वायव्य-ब.html): बगलामुखी यन्त्र से रोके/हटाये भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा ========================================================= भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो - [भूत -प्रेत हटाने के तरीके](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-हटाने-के-तरीके/2025/02/भूत-प्रेत-हटाने-के-तरीके.html): कैसे हटाये भूत प्रेत /नकारात्मक उर्जा घर-परिवार-व्यक्ति पर से ? =================================================== आपके घर में ,आप पर ,परिवार पर नकारात्मक उर्जा अर्थात नुक्सान और क्षति देने वाली ऊर्जा का प्रभाव हो तो उन्हें अपने अन्दर ,परिवार में ,घर में सकारात्मक ऊर्जा बढाकर हटाया जा सकता है ,,नकारात्मक ऊर्जा घर के अँधेरे हिस्सों में हो सकती - [तंत्र क्रिया से मुक्ति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-क्रिया-से-मुक्ति-के/2025/02/तंत्र-क्रिया-से-मुक्ति-के.html): भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा और तांत्रिक अभिचार से मुक्ति के उपाय ================================================= भूत-प्रेत-चुड़ैल जैसी समस्याओं से व्यक्ति अथवा परिवार के सहयोग से मुक्ति पायी जा सकती है ,किन्तु उच्च स्तर की शक्तियां सक्षम व्यक्ति ही हटा सकता है ,कुछ शक्तियां ऐसी होती हैं की अच्छे अच्छे साधक के छक्के छुडा देती हैं और उनके तक - [कुलदेवता रुष्ट /क्रोधित तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुलदेवता-रुष्ट-क्रोधित-त/2025/02/कुलदेवता-रुष्ट-क्रोधित-त.html): :::::कहीं आपके कुलदेवता /कुलदेवी नाराज या निर्लिप्त तो नहीं ::::: ========================================================== हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के - [श्री सरस्वती साधना](https://alaukikshaktiyan.com/श्री-सरस्वती-साधना/2017/10/श्री-सरस्वती-साधना.html): :::::::::::::::::::::विद्या -बुद्धि की देवी श्री सरस्वती साधना ::::::::::::::::::::: ================================================== आधुनिक समय में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संघर्ष अति कठिन हो गया है |शिक्षा के साथ साथ सफलता सभी को नहीं मिल पाती | शिक्षा एवं प्रतियोगिता क्षेत्र में प्रत्येक छात्र मर-मिटने को तैयार मालूम होता है !सफलता पाने के लिए केवल मानसिक बल ही - [वशीकरण /आकर्षण के दुष्प्रभाव /नुकसान](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-आकर्षण-के-दुष्प्र/2017/11/वशीकरण-आकर्षण-के-दुष्प्र.html): वशीकरण /आकर्षण के दुष्प्रभाव /नुकसान ==================== वशीकरण ,आकर्षण ,मोहित करना यानी मोहन इन्ही तीन तांत्रिक षट्कर्मों के प्रति आज के समय में लोगों में भारी रूचि देखि जा रही है |जब व्यक्ति खुद की क्षमता ,योग्यता ,कर्म ,आकर्षण शक्ति ,व्यक्तित्व से किसी को आकर्षित या अनुकूल नहीं कर पाता तो वह चाहता है की कोई - [भैरव गंडा निर्माण विधि](https://alaukikshaktiyan.com/भैरव-गंडा-निर्माण-विधि/2017/11/भैरव-गंडा-निर्माण-विधि.html): ::::::::::::::भैरव गंडा निर्माण विधि ::::::::::::::: ================================== श्री भैरव भगवान शिव का एक रुप माने जाते है. पुराणों तथा तंत्र शास्त्र में भैरव जी के अनेक रुपों का वर्णन प्राप्त होता है. इनके प्रमुख रुप इस प्रकार हैं:- असितांग भैरव, चण्ड भैरव, रुरु भैरव, क्रोध भैरव, कपालि भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव उन्मत्त भैरव इत्यादि ! - [भूत -प्रेत ,तंत्र क्रिया से कैसे बचें ?](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-तंत्र-क्रिया-से/2025/02/भूत-प्रेत-तंत्र-क्रिया-से.html): भूत -प्रेत ,वायव्य बाधाओं और तांत्रिक अभिचार से बचाव के उपाय ============================================= भूत-प्रेत ,वायव्य बाधाएं अथवा तांत्रिक अभिचार व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के साथ ही आर्थिक क्षमता पर भी प्रभाव डालते हैं ,इनके कारण पारिवारिक ,दाम्पत्य सम्बन्धी और संतान सम्बन्धी समस्याएं भी हो सकती हैं ,कभी कभी ये गंभीर रोग भी उत्पन्न करते है - [ईष्ट देवता का चुनाव कैसे करें ?](https://alaukikshaktiyan.com/ईष्ट-देवता-का-चुनाव-कैसे-क/2025/02/ईष्ट-देवता-का-चुनाव-कैसे-क.html): कैसे करे ईष्ट या आराध्य देवता का चुनाव [व्यक्तिगत पूजा के सन्दर्भ में ] ===================================================================== प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक ,मानसिक संरचना ,उर्जा परिपथ और उसकी कार्य प्रणाली भिन्न होती है ,सभी में एक दूसरे के सापेक्ष सूक्ष्म अंतर अवश्य होता है ,ऐसे में किसी एक के ईष्ट ही दूसरे के भी ईष्ट कैसे हो - [ज्योतिष के उपाय भाग्य बदल सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/ज्योतिष-के-उपाय-भाग्य-बदल/2025/02/ज्योतिष-के-उपाय-भाग्य-बदल.html): ज्योतिषीय उपाय भाग्य बदल सकते है =========================== अक्सर यह प्रश्न सामान्यजन में यहाँ तक की ज्योतिषियों में भी उठता रहता है की क्या वास्तव में ज्योतिषीय उपाय भाग्य बदल सकते हैं अथवा क्या वास्तव में इनसे ग्रह प्रभावों पर कोई अंतर पड़ता है |इस सम्बन्ध में सबके अनुभव अलग अलग रहे हैं ,सबके अलग - [त्वचा रोग कब होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/त्वचा-रोग-कब-होता-है/2025/02/त्वचा-रोग-कब-होता-है.html): ज्योतिष योग :::::त्वचा रोग कारक योग ============================= ज्योतिष में त्वचा रोग के सम्बन्ध में कुछ विशिष्ट योग है जो जीवन में कभी त्वचा रोग होने का निश्चित संकेत करते है |ज्योतिष में त्वचा रोग का कारक बुध माना जाता है ,चंद्र और शुक्र प्रभाव वृद्धि करने वाले माने जाते है क्योकि ये जलीय ग्रह - [काम भाव से सिद्धियाँ कैसे ?](https://alaukikshaktiyan.com/काम-भाव-से-सिद्धियाँ-कैसे/2025/02/काम-भाव-से-सिद्धियाँ-कैसे.html): काम भाव और सिद्धि के सूत्र [[तंत्र में काम भाव का प्रयोग ]]. ========================================== काम भावना ,रति की भावना ,संसर्ग की भावना और इसके साथ अथवा इसमें रत रहते हए भी साधना और सिद्धि की बात लोगों को अजूबा लगती हैं ,आश्चर्यजनक लगती है ,क्योंकि सामान्य धारणा है की बिना भोग छोड़े ,बिना ब्रह्मचर्य - [रोज की शांति -सुरक्षा बढ़ जाएगी](https://alaukikshaktiyan.com/रोज-की-शांति-सुरक्षा-बढ़-ज/2025/02/रोज-की-शांति-सुरक्षा-बढ़-ज.html): उत्तम सफलता हेतु सरल तांत्रिक प्रयोग =============================== यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते हैं ,कम से कम विघ्न बाधाओं का सामना करना चाहते हैं ,चाहते हैं की आपका दिन शुभ और शान्ति लिए हो ,अनावश्यक कलह ०विवाद न हो और सुरक्षा भी रहे तो हमारे द्वारा - [त्वचा रोग देते हैं भूत -प्रेत](https://alaukikshaktiyan.com/त्वचा-रोग-देते-हैं-भूत-प्र/2025/02/त्वचा-रोग-देते-हैं-भूत-प्र.html): ::::::::::त्वचा रोग ::वायव्य बाधा तो नहीं:::::::::: ================================== सामान्यतया त्वचा रोग संक्रमण ,ग्रह स्थितियों आदि के कारण होते हैं |रोगकारक ग्रहों की दशा -अन्तर्दशा जब आती है तब यह रोग होने की सम्भावना अधिक होती है |कुछ निश्चित राशि और लग्न वालों अथवा निश्चित ग्रह स्थितियों वालों को त्वचा रोग से संक्रमित होने की संभावना - [वशीकरण कैसे होता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-कैसे-होता-है/2025/02/वशीकरण-कैसे-होता-है.html): वशीकरण :;;;सूत्र-सिद्धांत-कार्यप्रणाली ------------------------------------ वशीकरण की कार्यप्रणाली ब्रह्मांडीय ऊर्जा विज्ञान पर आधारित है |यह तरंगों पर आधारित क्रिया है जिसमे एक रिसीवर होता है और दूसरा प्रक्षेपक |वस्तुगत ,भावगत तरंगों के साथ मानसिक तरंगों का एक निश्चित लक्ष्य पर प्रक्षेपण कर उसे अपने प्रति वशीभूत कर लेना ही वशीकरण है |देवोपासना में इसकी प्रक्रिया थोड़ी - [वशीकरण क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-क्या-है/2025/02/वशीकरण-क्या-है.html): क्या है वशीकरण ? ------------------- वशीकरण अर्थात वश में करना ,षट्कर्म के अंतर्गत एक विद्या है |किसी क अपने या किसी अन्य के प्रति वशीभूत कर देना वशीकरण है ,चाहे वह देवता हो ,पशु -पक्षी हो या अगोचर जगत हो | वशीकरण व्यक्तिगत भी होता है और समूहगत भी |जब किसी एक व्यक्ति के - [कामाख्या देवी कौन हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-देवी-कौन-हैं/2025/02/कामाख्या-देवी-कौन-हैं.html): किस देवी का स्वरुप हैं कामाख्या माता ? ============================ कामाख्या शक्तिपीठ ,विश्व के सभी शक्तिपीठों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली माना जाता है |कामाख्या देवी की इतनी महिमा है कि इन्हें महाविद्याओं के समकक्ष रखा जाता है जबकि यह शक्तिपीठ की शक्ति हैं |बहुत से लोग नहीं जानते की कामाख्या देवी कौन हैं - [Maa Kamakhya](https://alaukikshaktiyan.com/maa-kamakhya/2025/02/maa-kamakhya.html): MAA KAMAKHYA ================ Maa Kamakhya is a shakti of Shiva and she is a goddess of tantra. All tantrik in this world devotee her. She gave him power of tanatra n meditation. She is Adhi Vidhya and Mahashakti. Her temple is situated in Assam.Maa Kamakhya, temple is situated on Nilachal Hill in Guwahati, which - [Secrets of Kamakhya Temple](https://alaukikshaktiyan.com/secrets-of-kamakhya-temple/2025/02/secrets-of-kamakhya-temple.html): 16 Secrets of Kamakhya Temple : ============================= The Kamakhya Temple is a Hindu temple dedicated to the mother Goddess Kamakhya, one of the oldest shakti peeths. While there are many unheard stories about this temple, today we are going to tell you 16 secrets of this temple you would have never heard of. Kamakhya Temple, - [माँ कामाख्या और कुमारी पूजा](https://alaukikshaktiyan.com/माँ-कामाख्या-और-कुमारी-पू/2025/02/माँ-कामाख्या-और-कुमारी-पू.html): आद्य-शक्ति माँ कामाख्या और कुमारी पूजा ===================================== सती स्वरूपिणी आद्यशक्ति महाभैरवी कामाख्या तीर्थ विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है। इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यन्त महत्व है। यद्यपि आद्य-शक्ति की प्रतीक सभी कुल व वर्ण की कौमारियाँ होती हैं। किसी जाति का भेद नहीं होता है। इस क्षेत्र - [अम्बुवाची और कामाख्या देवी](https://alaukikshaktiyan.com/अम्बुवाची-और-कामाख्या-दे/2025/02/अम्बुवाची-और-कामाख्या-दे.html): महामाता कामाख्या देवी और अम्बुवाची पर्व ================================== कामाख्या मंदिर गुवाहाटी(असम) से 8 किलोमीटर दूर जनपद कामरूप में नीलाचल पव॑त पर स्थित हॅ । यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र - [कामाख्या मंदिर की महिमा](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-मंदिर-की-महिमा/2025/02/कामाख्या-मंदिर-की-महिमा.html): ::::::::कामाख्या मंदिर की महिमा :::::::: ============================ कामाख्या शक्तिपीठ जिस स्थान पर स्थित है, उस स्थान को कामरुप भी कहा जाता है. 51 पीठों में कामाख्या पीठ को महापीठ के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है. इस मंदिर में एक गुफा है. इस गुफा तक जाने का मार्ग बेहद पथरीला है. जिसे नरकासुर पथ - [कामाख्या शक्तिपीठ विशेष क्यों ?](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-शक्तिपीठ-विशेष/2025/02/कामाख्या-शक्तिपीठ-विशेष.html): माँ कामाख्या शक्तिपीठ की विशेषता और तंत्र =============================== माँ कामाख्या के मंदिर के तंत्र को जानने के लिये पहले शिवलिंग को सकारात्मक और माता के मंदिर की बनावट को नकारात्मक रूप से देखना पडेगा। माता के मंदिर के अन्दर जाने पर जो द्रश्य सामने होता है वह इस प्रकार का होता है जैसे हम - [कामाख्या शक्तिपीठ [Maa Kamakhya]](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-शक्तिपीठ-maa-kamakhya/2025/02/कामाख्या-शक्तिपीठ-maa-kamakhya.html): ::::::::::महामाता कामाख्या देवी शक्तिपीठ ::::::::: ===================================== कामाख्या मंदिर गुवाहाटी(असम) से 8 किलोमीटर दूर जनपद कामरूप में नीलाचल पव॑त पर स्थित हॅ । यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि - [ज्योतिष के उपाय कब नहीं काम करते ?](https://alaukikshaktiyan.com/ज्योतिष-के-उपाय-कब-नहीं-का/2025/02/ज्योतिष-के-उपाय-कब-नहीं-का.html): ::::::::::::::क्यों नहीं काम करते है ज्योतिषीय उपाय [व्यक्तिगत विचार ]:::::::::::::::: ============================================================= .....अक्सर यह सुनने को मिलता है है की उपाय काम नहीं करते या बहुत से उपाय किये किन्तु कोई परिणाम या परिवर्तन नहीं हुआ और परेशानी यथावत है ,बहुत से लोग इसलिए यह भी कहते मिलते है की भाग्य में लिखा कोई नहीं - [प्रेत बाधा कब हो जाती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेत-बाधा-कब-हो-जाती-है/2025/02/प्रेत-बाधा-कब-हो-जाती-है.html): कुंडली में पिशाच बाधा योग ====================== ..[१] किसी कुंडली में राहू या केतु सप्तम भाव में होने पर जीवन में पिशाच बाधा होने की कभी संभावना बन सकती है , .[२] किसी जातक की जन्म कुंडली में लग्न में राहू ग्रस्त चन्द्रमा होने और पंचम और नवंम में पापग्रस्त शनि और मंगल होने पर पिशाच - [दस महाविद्या क्या और कौन हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/दस-महाविद्या-क्या-और-कौन-ह/2025/02/दस-महाविद्या-क्या-और-कौन-ह.html): ब्रह्माण्ड [प्रकृति ]की शक्ति के दश रूप ,दश महाविद्या =========================================== शक्ति का निरूपण भिन्न भिन्न मतों -सम्प्रदायों के अनुसार भिन्न भिन्न रहा है |एक ही आद्य शक्ति के विभिन्न रूपों का विस्तार दस महाविद्याओं का स्वरुप है |दस महाविद्याओं का अंक गणित वेद शास्त्र के दस के अंक की प्रधानता की ओर ही संकेत - [दुर्गा जी और नवरात्र का विज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/दुर्गा-जी-और-नवरात्र-का-वि/2025/02/दुर्गा-जी-और-नवरात्र-का-वि.html): दुर्गा :: संहार के साथ सृष्टि की शक्ति ========================= नवरात्र ,शक्ति आराधना का पर्व ,शक्ति आराधना का समय ,शक्ति को आत्मसात करने का समय ,भगवती दुर्गा की आराधना का समय ,भगवती के विविध रूपों की आराधना का समय ,अर्थात प्रकृति की विभिन्न शक्तियों की आराधना का समय ,प्रकृति की विभिन्न शक्तियों को सम्मान देने - [अश्विनी मुद्रा और मूलबंध](https://alaukikshaktiyan.com/अश्विनी-मुद्रा-और-मूलबंध/2025/02/अश्विनी-मुद्रा-और-मूलबंध.html): :::::::साधना में अश्विनी मुद्रा और मूल बंध की भूमिका ::::::: ========================================== श्वास सामान्य चलना और गुदा द्वार को बार-बार संकुचित करके बंद करना व फिर छोड़ देना. या श्वास भीतर भरकर रोक लेना और गुदा द्वार को बंद कर लेना, जितनी देर सांस भीतर रुक सके रोकना और उतनी देर तक गुदा द्वार बंद - [मूलबंध कैसे लगाते हैं ?](https://alaukikshaktiyan.com/मूलबंध-कैसे-लगाते-हैं/2025/02/मूलबंध-कैसे-लगाते-हैं.html): :::::::::::::मूल बंध ::::::::::::: =================== मूल बंध को योनी बंध भी कहते हैं |गुदा तथा उपस्थ के प्रदेश को उपर संकुचित करके रखना तथा प्राण और अपान को मिलाना मूल बंध है |योगतत्वोपनिषद के अनुसार एडी से योनी स्थान को दबाकर भीतर खींचे |इस प्रकार अपांन वायु को उपर की ओर उठाकर प्राणवायु से मिलाने - [महाशंख क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/महाशंख-क्या-है/2025/02/महाशंख-क्या-है.html): महाशंख ====== महाशंख के विषय में समस्त प्रभावशाली तथ्य केवल कुछ शाक्त ही जानते हैं |इसके अलावा सभी लोग tantra में शंख का प्रयोग इसी महाशंख के कारण करते हैं |लेखक लोग शंख को ही तांत्रिक सामग्री मानकर ग्रन्थ पूर्ण कर देते हैं |में आपसे यह स्पष्ट करना चाहता हूँ की शंख और महाशंख - [आपके अन्दर ईश्वर का संकेत है](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-अन्दर-ईश्वर-का-संकेत/2025/02/आपके-अन्दर-ईश्वर-का-संकेत.html): अपनी आवाज सुनें ============= यदि आप उलझन में हैं ,अनिर्णय का शिकार हैं ,किसी चिंता से परेशान हैं और हल नहीं मिल रहा ,विचारों के झंझावात चल रहे ,खुद को फंसा और पस्त महसूस कर रहे ,उत्साहहीन हो गए हैं ,आलस्य हावी हो गया है ,कोई काम ढंग से नहीं कर पा रहे ,सब - [सूर्य अरिष्ट शांति के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/सूर्य-अरिष्ट-शांति-के-उपा/2025/02/सूर्य-अरिष्ट-शांति-के-उपा.html): सूर्य ग्रह की अशुभता और निराकरण ========================== सूर्य सिंह राशि का स्वामी है ,यह दशम स्थान में शुभ फलदायी ,आत्म कारक तथा पितृ कारक होता है |इसकी अशुभता से जातक आलसी ,भयालु ,पितृ वैरी होता है |नौकरी व् व्यवसाय में बार बार विघ्न आते हैं |व्यापारिक कार्यों में असफलता मिलती है |जातक राजकीय प्रकोप का - [गोमती चक्र के लाभ और प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/गोमती-चक्र-के-लाभ-और-प्रयो/2025/02/गोमती-चक्र-के-लाभ-और-प्रयो.html): संतान बाधा हेतु गोमतिचक्र प्रयोग ======================== 1 . महानिशा में माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए एक गोमती चक्र एंव दो कौडी एक लाल कपड़े में बाँधकर गर्भवती महिला की कमर में बाँध दें। ऐसा करने से गर्भ गिरने की आशंका नहीं रहती है। 2 . अगर संतान कि प्राप्ति में किसी तरह की कोई - [तंत्र रक्षा कवच](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-रक्षा-कवच/2025/02/तंत्र-रक्षा-कवच.html): तंत्र / अभिचार रक्षा कवच ================== मनुष्य के स्वभाव के कुछ गुण दूसरों को कष्ट देते हैं ,जैसे ईर्ष्या ,द्वेष ,दुश्मनी ,टांग खीचने की आदत आदि मनुष्यगत दुर्गुण हैं |यह गुण या दुर्गुण बहुतों में पाए जाते हैं |लोग अपनी क्षमता से आगे बढने की बजाय दूसरों की टांग खींचते हैं जिससे उसकी वृद्धि - [चमत्कारी पत्थर गोमती चक्र](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-पत्थर-गोमती-चक्/2025/02/चमत्कारी-पत्थर-गोमती-चक्.html): अद्भुत गोमती चक्र ============= गोमती चक्र एक पत्थर होता है छोटे आकार का जिसमे बीच वाले चिकने सतह पर चक्र की आकृति प्राकृतिक रूप से बन जाती है |इसका दूसरा सतह गोल अथवा कुछ झुकाव लिए होता है जैसे की सीप का पिछला सतह होता है |माना जाता है की यह पत्थर गोमती नदी में - [विदेश यात्रा कवच](https://alaukikshaktiyan.com/विदेश-यात्रा-कवच/2025/02/विदेश-यात्रा-कवच.html): :::::::::::::विदेश यात्रा कवच :::::::::::::: ========================= आज के समय में पाश्चात्य देशों का आकर्षण युवाओं में बहुत अधिक बढ़ा है ,यद्यपि यह पहले से है और इसके कारण भी हैं |पाश्चात्य देश भौतिकता की दृष्टि से अधिक विकसित हैं और आज का युवा भौतिकता ही चाहता है ,उसे अपने कल्पना की दुनिया पाश्चात्य देशों में दिखती - [गुंजा/रत्ती के तंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/गुंजा-रत्ती-के-तंत्र-प्रय/2025/02/गुंजा-रत्ती-के-तंत्र-प्रय.html): गुंजा से पुरुषत्व वर्धन =============== भैंस का घी लेकर ,उसमे गुंजा को चन्दन की भांति घिसकर लेप तैयार करें | इस लेप की पुरुषेन्द्रिय पर मालिश करने से काम शक्ति बढती है | मन में उत्तेजना आती है और वीर्य स्तम्भन होता है |ध्यान रहे की यह लेप बहुत धीरे धीरे पुरुषेन्द्रिय पर करना चाहिए - [चमत्कारी भोजपत्र यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-भोजपत्र-यन्त्र/2025/02/चमत्कारी-भोजपत्र-यन्त्र.html): क्यों अधिक प्रभावी होता है भोजपत्र निर्मित यन्त्र धारण करना ? ================================================ विभिन्न धर्मो ,समुदायों में यन्त्र रचना और धारण प्राचीन काल से चला आ रहा है ,यन्त्र विभिन्न आकृतियों अथवा अंको के एक विशिष्ट संयोजन होते है ,जिनसे एक विशिष्ट उर्जा विकिरित होती है अथवा जिनमे एक विशिष्ट उर्जा संग्रहीत होती है ,जो - [अद्भुत गुंजा /घुंघुची](https://alaukikshaktiyan.com/अद्भुत-गुंजा-घुंघुची/2025/02/अद्भुत-गुंजा-घुंघुची.html): अद्भुत तांत्रिक वनस्पति घुंघुची -रत्ती -गुंजा ============================= घुंघुची या गुंजा या रत्ती एक लता जाती का पौधा होता है |प्रायः छोटे छोटे पौधों के तनो से लिपटकर उर्ध्वमुखी होता है | आदिवासी और वनांचलों में रहने वाले ग्रामीण लोग अक्सर रंगबिरंगे बीजों या दानों से बनी ज्वैलरी पहने देखे जा सकते हैं। अक्सर ये लाल-काले, - [अपना ईष्ट देव किसे बनायें ?](https://alaukikshaktiyan.com/अपना-ईष्ट-देव-किसे-बनायें/2025/02/अपना-ईष्ट-देव-किसे-बनायें.html): ::::::::::::::::::किसको ईष्ट बनाए::::::::::::::::: [[ पारिवारिक व् व्यक्तिगत पूजा-अनुष्ठान के सन्दर्भ में ]] ======================================== . .सिद्धि-साधना भिन्न पथ है ,,किन्तु सामान्य पूजा -अनुष्ठान में सर्वत्र सामान्य लोग अपने कल्याण -सुख -संमृद्धि के लिए देवी-देवता की पूजा करते है ,किन्तु फिर भी उन्हें कभी -कभी अपेक्षित लाभ नहीं मिलता ,कल्याण नहीं होता ,,कभी-कभी तो कष्ट -परेशानिया बढ़ - [विवाह बाधा निवारण के उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-बाधा-निवारण-के-उपाय/2025/02/विवाह-बाधा-निवारण-के-उपाय.html): ::::::::::::::::::::: विवाह बाधा निवारक तंत्र और ज्योतिषीय उपाय ::::::::::::::::::::: .ज्योतिषीय उपाय ============= [१] पीला पुखराज ४ रत्ती और ओपल ४ रत्ती एक ही त्रिधातु मुद्रिका में बनवाकर ,प्राण प्रतिष्ठा ,अभिषेक करवाकर कन्या को धारण करवाए , ,[२]विवाह योग्य कन्या को गुरूवार का व्रत करना शीघ्र वर प्राप्ति में सहायक होता है , ,[३]वृहस्पतिवार के दिन - [किसकी पूजा अधिक लाभ देगी ?](https://alaukikshaktiyan.com/किसकी-पूजा-अधिक-लाभ-देगी/2025/02/किसकी-पूजा-अधिक-लाभ-देगी.html): :::::::::::::::::::आपका ईष्ट चयन और आप:::::::::::::::::::::: ======================================== सभी आस्तिक लोगो के अपने ईष्ट होते है ,,श्रद्धा के अनुसार लोग ईष्ट की आराधना करते है ,,यदि इसमें अपनी आवश्यकता और फायदे नुक्सान का भी ईष्ट के चयन में ध्यान दिया जाए तो ईष्ट अधिक लाभप्रद हो सकता है ,,जैसे आप मोटे है ,चर्बी बढ़ रही है - [अलौकिक बगलामुखी कवच](https://alaukikshaktiyan.com/अलौकिक-बगलामुखी-कवच/2025/02/अलौकिक-बगलामुखी-कवच.html): :::::::::::::::::::::बगलामुखी यन्त्र /कवच ::::::::::::::::::: भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना से चैतन्य होता है - [बगलामुखी साधना](https://alaukikshaktiyan.com/बगलामुखी-साधना/2025/02/बगलामुखी-साधना.html): ::::::::::::::::::बगलामुखी [ब्रह्मास्त्र विद्या ]महासाधना और प्रभाव ::::::::::::::::::::: ====================================================== ...................महाविद्या श्री बगलामुखी दश महाविद्या के अंतर्गत श्री कुल की महाविद्या है ,जिनकी पूजा साधना से सर्वाभीष्ट की प्राप्ति होती है ,,ग्रह दोष ,शत्रु बाधा ,रोग-शोक-दुष्ट प्रभाव ,वायव्य बाधा से मुक्ति मिलती है ,सर्वत्र विजय ,सम्मान ,ऐश्वर्य प्राप्त होता है ,वाद-विवाद ,मुकदमे में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग - [अलौकिक गणेश](https://alaukikshaktiyan.com/अलौकिक-गणेश/2025/02/अलौकिक-गणेश.html): श्वेतार्क गणपति =========== श्वेतार्क अर्थात सफ़ेद फूल वाला आक [मदार ]का पौधा एक ऐसा वनस्पति है जो कम देखने में आता है जबकि नीली आभा वाले फूलो वाका आक का पौधा सर्वत्र दीखता है ,श्वेतार्क की जडो का तंत्र जगत में बहुत महत्व है ,ऐसा मन जाता है की २५ वर्ष पुराने आक के - [विवाह में बाधा कब आती है ?](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-में-बाधा-कब-आती-है/2025/02/विवाह-में-बाधा-कब-आती-है.html): विवाह-बाधा और ज्योतिष योग ====================== ......विवाह वह समय है ,जब दो अपरिचित युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधकर एक नए जीवन का प्रारंभ करते है ,,ज्योतिष में योग ,दशा और गोचरीय ग्रह स्थिति के आधार पर विवाह समय का निर्धारण होता है ,परन्तु कभी-कभी विवाह के योग ,दशा और अनुकूल गोचरीय परिभ्रमण के द्वारा विवाह काल - [पूजा -उपासना निष्फल क्यों हो रही ?](https://alaukikshaktiyan.com/पूजा-उपासना-निष्फल-क्यों/2025/02/पूजा-उपासना-निष्फल-क्यों.html): आपकी पूजा -आराधना निष्फल तो नहीं हो रही ================================= .हर आस्थावान ,धार्मिक व्यक्ति लगभग पूजा -आराधना करता है ,कुछ लोग मात्र अगरबत्ती जलाकर अपनी आस्था व्यक्त कर लेते है और कुछ पूरी पूजा -आराधना भी करते है ,इनमे कुछ लोग कई-कई घंटो पूजा करते हुए भी पाए जाते है ,किन्तु सभी आराधको में से - [टोना -टोटका ,यन्त्र -ताबीज कैसे प्रभावित करता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/टोना-टोटका-यन्त्र-ताबीज-क/2025/02/टोना-टोटका-यन्त्र-ताबीज-क.html): ::::::::::::::::कैसे काम करते हैं टोने -टोटके -गंडे और ताबीज :::::::::::::::::: =============================== ========================= . यह ब्रह्माण्ड अपने विशिष्ट और शाश्वत नियमों से संचालित होता है जिसे प्रकृति के नियम कहते है |इन्ही नियमों के अन्वेषण के आधार पर आधुनिक भौतिक विज्ञानं के चमत्कारिक समझे जाने वाले आविष्कारो का संसार खड़ा है |इन्ही नियमों को जानकर वैज्ञानिक - [कब ईश्वर आपकी पुकार अनसुना कर देता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कब-ईश्वर-आपकी-पुकार-अनसुन/2025/02/कब-ईश्वर-आपकी-पुकार-अनसुन.html): क्यों सुने ईश्वर आपकी =================== दुनियां में अधिकतर लोग आस्तिक होते हैं और इनमे से अधिकतर लोग पूजा-पाठ करते हैं ,कुछ बहुत अधिक पूजा करते हैं तो कुछ लोग कम करते हैं |कुछ बस हाथ जोड़कर ही काम चला लेते हैं |किन्तु कुछ को कृपा इश्वर की मिल पाती है और अधिकतर को नहीं - [कुण्डलिनी क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कुण्डलिनी-क्या-है-2/2025/02/कुण्डलिनी-क्या-है-2.html): कुंडलिनी शक्ति =========== संसार के सभी धर्मों और संस्कृतियों में किसी न किसी प्रकार एक शक्ति का विवरण जरुर मिलता है ,वह है कुंडलिनी शक्ति |इसका स्वरुप और विवरण हर समुदाय -धर्म -संस्कृति के अनुसार भिन्न होता है किन्तु सभी इसका अस्तित्व मानते जरुर हैं किसी न किसी रूप में और कहते हैं की - [शनि कवच](https://alaukikshaktiyan.com/शनि-कवच/2025/01/शनि-कवच.html): ::::::::::::::::शनि दोष निवारक कवच :::::::::::::::: ================================= इस दुनिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |शनि की पनौती ,ढईया ,अथवा साढ़ेसाती अक्सर सुनाई देते रहते हैं |इनके अतिरिक्त अक्सर महादशा ,अन्तर्दशा अथवा प्रत्यन्तरदशा अलग से परेशान करती रहती है |यही कारण है की शनि को - [चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी](https://alaukikshaktiyan.com/चमत्कारी-दिव्य-गुटिका-डि/2025/01/चमत्कारी-दिव्य-गुटिका-डि.html): स्वयं अपनी समस्या दूर करने का एक अलौकिक अस्त्र ------------------------------------------ आज के समय में हर घर -परिवार में किसी न किसी रूप में नकारात्मक शक्तियों /उर्जाओं का प्रभाव है जिसके कारण जो समस्याएं होती हैं वह तो होती ही हैं किन्तु जो भाग्य में होता है वह भी नहीं मिलता |भाग्य का प्रभाव भी - [एक ताबीज आपकी किस्मत पलट सकता है:](https://alaukikshaktiyan.com/एक-ताबीज-आपकी-किस्मत-पलट-स/2025/01/एक-ताबीज-आपकी-किस्मत-पलट-स.html): ज्योतिष और तंत्र में यन्त्र -ताबीज -कवच ============================= यन्त्र -मंत्र ,कवच ,ताबीज ,विभिन्न आकृतियाँ ,धार्मिक चिन्ह ,लाकेट ,प्रतीक विश्व के हर धर्म में किसी न किसी रूप में मान्य हैं और बहुतायत में इनका प्रयोग होता है |इनकी शक्ति से मनुष्य हमेशा से लाभान्वित होता रहा है |भारतीय परंपरा में इनके विलक्ष्ण प्रयोग और - [काली जी की उर्जा की किसे अधिक आवश्यकता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/काली-जी-की-उर्जा-की-किसे-अध/2025/01/काली-जी-की-उर्जा-की-किसे-अध.html): क्षीणता ,दीनता ,हीनता क्यों आ जाती है ? यदि आप संतान हीनता ,शारीरिक कमजोरी ,काम शक्ति में कमी ,उमंग -उत्साह -उर्जा की कमी ,महसूस करते है,कमर के कष्ट ,स्नायु कष्ट ,रक्त की कमी से परेशान है ,हीन भावना से ग्रस्त है ,किसी व्यक्ति या व्यक्ति विशेष का सामना करने से घबराते है ,लोग आपको दबाते - [मंत्र कैसे प्रभावित करते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/मंत्र-कैसे-प्रभावित-करते/2025/01/मंत्र-कैसे-प्रभावित-करते.html): :::::::::::::::::::.मंत्रो की शक्ति और प्रभाव ::::::::::::::::: .. मन्त्र एक विशिष्ट उर्जा उत्पन्न करने वाला ध्वनि है जिसमे पराशक्ति का समावेश होता है |यह एक अक्षर भी हो सकता है और शब्द समूह भी |मन्त्र की शक्ति सामान्यतया उनके नादों और उत्पन्न ध्वनि तरंगों में होती है ,किन्तु कुछ मन्त्र जैसे शाबर मन्त्र भावनाओं और - [Mastering the First Impression: Your intriguing post title goes here](https://alaukikshaktiyan.com/post-3/2025/01/post-3.html): Engaging Introductions: Capturing Your Audience's Interest The initial impression your blog post makes is crucial, and that's where your introduction comes into play. Hook your readers with a captivating opening that sparks curiosity or emotion. Address their pain points or questions to establish a connection. Outline the purpose of your post and give a sneak - [Hello world!](https://alaukikshaktiyan.com/hello-world/2025/01/hello-world.html): Welcome to WordPress. This is your first post. Edit or delete it, then start writing! - [साधनाओं के प्रकार और उनकी विशिष्टता](https://alaukikshaktiyan.com/साधनाओं-के-प्रकार-और-उनकी/2017/11/साधनाओं-के-प्रकार-और-उनकी.html): साधनाओं के प्रकार और उनकी विशिष्टता ========================== शास्त्रों में हजारों तरह की साधनाओं का वर्णन मिलता है. साधना से सिद्धियां प्राप्त होती हैं. व्यक्ति सिद्धियां इसलिए प्राप्त करना चाहता है, क्योंकि या तो वह उनसे सांसारिक लाभ प्राप्त करना चाहता है या फिर आध्यात्मिक लाभ. मूलत: साधना के चार प्रकार माने जा सकते - [माता भद्रकाली और षोडशोपचार पूजन](https://alaukikshaktiyan.com/माता-भद्रकाली-और-षोडशोपच/2017/11/माता-भद्रकाली-और-षोडशोपच.html): माता भद्रकाली और षोडशोपचार पूजन ============================= माता भद्रकाली ,आद्या शक्ति महाकाली की एक रूप हैं जिनकी आराधना /साधना गृहस्थ के लिए बहुत लाभदायक होती है |इनकी विशिष्ट पूजा /अनुष्ठान हेतु तो एक लम्बी पूजन-स्थापन-प्राण प्रतिष्ठा प्रक्रिया करनी होती है जो बिना योग्य जानकार के सामान्य साधकों अथवा गृहस्थों के लिए मुश्किल होती है ,किन्तु प्रतिदिन - [बीज मन्त्र और शरीर पर प्रभाव](https://alaukikshaktiyan.com/बीज-मन्त्र-और-शरीर-पर-प्रभ/2017/11/बीज-मन्त्र-और-शरीर-पर-प्रभ.html): बीज मन्त्र और शरीर पर प्रभाव ======================= बीज मन्त्रों से अनेकों रोगों का निदान सफल होता है |आवश्यकता केवल अपने अनुकूल प्रभावशाली मन्त्र चुनने और उसका शुद्ध उच्चारण से मनन -गुंजन करने की होती है |बीज के अर्थ से अधिक आवश्यक उसका शुद्ध उच्चारण ही है |जब एक निश्चित लय और ताल से मंत्र का - [वृद्ध माता -पिता और अपनों की उपेक्षा - २](https://alaukikshaktiyan.com/वृद्ध-माता-पिता-और-अपनों-क/2017/11/वृद्ध-माता-पिता-और-अपनों-क.html): बुजुर्ग माता -पिता और अपनों की उपेक्षा - २ ===========================[[ गतांक से आगे ]] ईश्वरीय शक्ति से समाधान के उपाय निकालने की कोशिश ---------------------------------------------------------------------- हम शक्ति साधक हैं और उस उम्र की ओर बढ़ रहे जिस विषय पर यह लेख लिख रहे |ऐसे अनेक बुजुर्गों को देखते हैं और मिलते हैं जो इन समस्याओं से - [वृद्ध /बुजुर्ग माता -पिता और अपनों की उपेक्षा -१](https://alaukikshaktiyan.com/वृद्ध-बुजुर्ग-माता-पिता-औ/2017/11/वृद्ध-बुजुर्ग-माता-पिता-औ.html): बुजुर्ग माता -पिता और अपनों की उपेक्षा =========================== ईश्वरीय शक्ति से समाधान के उपाय निकालने की कोशिश ---------------------------------------------------------------------- जितनी तेजी से आधुनिक युग में भौतिक और वैज्ञानिक जीवन में विकास हुआ है ,उतनी ही तेजी से व्यक्ति का नैतिक और सांस्कारिक पतन भी हुआ है |दूसरों ,गुरुओं ,बड़ों ,बुजुर्गों की तो बात ही क्या अब - [भाग्य कैसे बदलें अपना ? -२](https://alaukikshaktiyan.com/भाग्य-कैसे-बदलें-अपना-२/2017/11/भाग्य-कैसे-बदलें-अपना-२.html): कैसे बदलें अपने भाग्य को -२ ====================[[ प्रथम भाग का शेष ]] यदि आप सचमुच भाग्य बदलना चाहते हैं |भाग्य के उतार चढ़ाव से तंग आ चुके हैं |संघर्ष करते करते थक चुके हैं |भाग्य ,किस्मत ,तकदीर के नाम पर रो रोकर अपने जीवन में दुःख ही दुःख पा रहे हैं ,तो भाग्य बदलने ,उसमे - [भाग्य कैसे बदलें अपना ? -१](https://alaukikshaktiyan.com/भाग्य-कैसे-बदलें-अपना-१/2017/11/भाग्य-कैसे-बदलें-अपना-१.html): कैसे बदलें अपने भाग्य को -१ ==================== जीवन संघर्ष में ही जा रहा ,रोज की चिंता रोज है ,भविष्य उज्वल नहीं दिख रहा ,निराशा घेर रही ,सभी प्रयास असफल हो रहे ,योग्यता होने पर भी उपयुक्त स्थान नहीं मिल रहा ,उन्नति रुकी हुई है अथवा पहले से भी विषम स्थिति होती जा रही |कितने भी - [महाकाल भैरव माला मंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/महाकाल-भैरव-माला-मंत्र/2017/11/महाकाल-भैरव-माला-मंत्र.html): महाकाल भैरव महा मंत्र =================.. साधक मित्रो ये एक ऐसा मंत्र है इसे सिद्ध करने के बाद कुछ भी नहीं शेष रहता ....बस आवशकता है तो कठिन अभ्यास और एकाग्रता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साधना की ....इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए आप का दैनिक व्यवहार सात्विक न किसी को गलत बोलना न गलत - [शाबर धूमावती साधना :](https://alaukikshaktiyan.com/शाबर-धूमावती-साधना/2017/11/शाबर-धूमावती-साधना.html): शाबर धूमावती साधना : ================= दस महाविद्याओं में माँ धूमावती का स्थान सातवां है और माँ के इस स्वरुप को बहुत ही उग्र माना जाता है ! माँ का यह स्वरुप अलक्ष्मी स्वरूपा कहलाता है किन्तु माँ अलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एक मान्यता के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया तो - [हनुमान शाबर मंत्र साधना](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-शाबर-मंत्र-साधना/2017/11/हनुमान-शाबर-मंत्र-साधना.html): हनुमान शाबर मंत्र साधना ================= मनुष्य शारीरिक, मानसिक और बाहरी (भू‍त-प्रेत) नजर इत्यादि बीमारियों से परेशान रहता है। शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर या वैद्य के पास जाकर मनुष्य ठ‍ीक हो जाता है। मानसिक बीमारी का सरलत‍म उपाय हो जाता है। परंतु मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर, हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में - [अगिया बेताल साधना -3](https://alaukikshaktiyan.com/अगिया-बेताल-साधना-3/2017/11/अगिया-बेताल-साधना-3.html): अगिया बेताल साधना ==============[ तृतीय पद्धति ] अगिया बेताल वस्तुतः उग्र मानसिक शक्ति और काली की संहारक या आक्रामक शक्ति का एक संयोग है जो काली की शक्ति के अंतर्गत आता है |वामतंत्र के अनुसार इसे रुद्रकाली कहा जाता है ||इस भाव की सिद्धि होने पर आक्रामक भाव की शक्ति अत्यंत प्रबल हो जाती है - [अगिया बेताल साधना -2](https://alaukikshaktiyan.com/अगिया-बेताल-साधना-2/2017/11/अगिया-बेताल-साधना-2.html): अगिया बेताल साधना ==============[ द्वितीय पद्धति ] बेताल के बारे में हम सबने बहुत कुछ सुना है |विक्रम-बेताल की कहानियां बच्चे बच्चे तक ने सुने हैं |इन्ही बेताल में एक सबसे उग्र शक्ति अगिया बेताल की होती है |यह पुरुषात्मक शक्ति है जो खुद कहीं हस्तक्षेप नहीं करती |इसके सिद्ध होने पर यह बहुत उच्च - [अगिया बेताल साधना -1](https://alaukikshaktiyan.com/अगिया-बेताल-साधना-1/2017/11/अगिया-बेताल-साधना-1.html): अगिया बेताल साधना ==============[ प्रथम पद्धति ] यह पद्धति बेताल के एक प्रकार अगिया बेताल की है ,जो शाबर मंत्र अर्थात नाथ सम्प्रदाय द्वारा बनाई गयी है |अगिया बेताल की साधना नाथ और सिद्ध परंपरा में अधिक विकसित हुई थी और इसके अनेक मंत्र तथा पद्धति इस परंपरा में विकसित किये गए |वाम मार्गीय साधना - [ताल बेताल साधना](https://alaukikshaktiyan.com/ताल-बेताल-साधना/2017/11/ताल-बेताल-साधना.html): ताल बेताल साधना ============= यह प्रयोग एक वेताल साधना और सिद्धि है किन्तु यह साधना स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकती |न ही इस साधना को सामान्य व्यक्ति कर सकता है |इसके लिए शव की आवश्यकता होती है और पहले साधक को कामकला काली की साधना करनी होती है अर्थात कामकला काली का साधक ही - [बेताल और बेताल साधना](https://alaukikshaktiyan.com/बेताल-और-बेताल-साधना/2017/11/बेताल-और-बेताल-साधना.html): बेताल और बेताल साधना ================= प्राचीन कथा साहित्य में बेताल का अनेकों प्रकार का उल्लेख आता है |वास्तव में बेताल कोई कथा जनित काल्पनिक पात्र न होकर वास्तविक शक्ति होता है |कई तांत्रिक ग्रंथों में भी बेताल का उल्लेख होता है |बेताल शक्ति के प्रतीक माने गए हैं और यह अनेकों प्रकार के कार्यों ,मनोरथों - [वशीकरण और गुडमार](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-और-गुडमार/2017/11/वशीकरण-और-गुडमार.html): वशीकरण और गुडमार =============== गुडमार एक बहुत प्रसिद्द वनस्पति है जिसका प्रयोग असाध्य बीमारी को दूर करने में किया जाता है |बहुत कम लोग जानते हैं की इसका प्रयोग तंत्र में भी होता है और वह भी बेहद प्रभावकारी रूप से |गुडमार से मधुमेह अर्थात डायबिटीज समूल नष्ट हो जाती है |इसका प्रयोग धन प्राप्ति - [पत्नी /प्रेमिका वशीकरण ,वसुधा यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/पत्नी-प्रेमिका-वशीकरण-वस/2017/11/पत्नी-प्रेमिका-वशीकरण-वस.html): पत्नी /प्रेमिका वशीकरण ,वसुधा यन्त्र ========================= वसुधा यन्त्र का प्रयोग अधिकार संपन्न पत्नी ,प्रेमिका अथवा महिला के लिए किया जाता है ,जो स्वतंत्र निर्णय की क्षमता रखती हो |अभिजात्य वर्गीय अथवा सभ्रांत परिवार की महिला .पत्नी की अनुकूलता ,कृपा ,समर्थन पाने के लिए यह यन्त्र अच्छा कार्य करता है |अपनी नौकरी ,व्यवसाय पेशा पत्नी अथवा - [मानिनी आकर्षण यन्त्र [पुतली आकर्षण क्रिया ]](https://alaukikshaktiyan.com/मानिनी-आकर्षण-यन्त्र-पुत/2017/11/मानिनी-आकर्षण-यन्त्र-पुत.html): मानिनी आकर्षण यन्त्र [पुतली आकर्षण क्रिया ] ================================ अहंकार के कारण कभी कभी कोई स्त्री इतना अधिक मान कर बैठती है की व्यक्ति की मानसिक पीड़ा असह्य हो जाती है |ऐसी स्त्री को अपनी ओर आकृष्ट करने एवं अनुकूल बनाने में यह यन्त्र सफल होता है | शुभ मुहूर्त में रात्री समय भोजपत्र पर इस - [प्रेमिका /पत्नी वशीकरण :: कामाक्षी यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेमिका-पत्नी-वशीकरण-का/2017/11/प्रेमिका-पत्नी-वशीकरण-का.html): कामाक्षी यन्त्र - प्रेमिका वशीकरण हेतु ========================= इस यंत्र को दीवाली या अमावश्या की रात्री अथवा रवि पुष्य योग ,गुरु पुष्य योग या अक्षय तृतीया में निर्मित करें |इसे चमेली की कलम से भोजपत्र पर गोरोचन ,कुंकुम और कपूर की स्याही बनाकर लिखें |इसके बाद इस यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा करें |प्राण प्रतिष्ठा के बाद - [सर्वजन वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/सर्वजन-वशीकरण-यन्त्र/2017/11/सर्वजन-वशीकरण-यन्त्र.html): सर्व वशीकरण यन्त्र ============== इस यन्त्र को वृहस्पतिवार से केसर की स्याही से एक सौ आठ यन्त्र प्रतिदिन लिखना चाहिए |लगातार २१ दिन यह करता जाए ,| पूरे यंत्रों को एक -एक करके चलते पानी में छोड़ता जाए ,| बाइसवें दिन अनार की कलम व केसर की स्याही से जो यन्त्र लिखा जाएगा वह ताबीज - [सर्व वशीकरण यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/सर्व-वशीकरण-यन्त्र/2017/11/सर्व-वशीकरण-यन्त्र.html): सर्व वशीकरण यन्त्र ============= यह सर्व वशीकरण यन्त्र किसी व्यक्ति विशेष के लिए निर्मित किया जाता है जिसको अनुकूल अथवा वशीकृत करना हो |यन्त्र को कुमकुम और गोरोचन के मिश्रण की स्याही से अनार की कलम से दीपावली , अमावश्य ,नवरात्र ,होली अथवा अमृत सिद्धि योग की रात्री में निर्मित करे |जहाँ नाम लिखना है - [चितबदला और वशीकरण](https://alaukikshaktiyan.com/चितबदला-और-वशीकरण/2017/11/चितबदला-और-वशीकरण.html): वशीकरण और चितबदला ================= चित बदला एक पौधे और उसके फल का नाम तंत्र जगत में जाना जाता है |इसका वानस्पतिक नाम और भातीय नाम तो हमें भी नहीं पता पर इसके प्रयोग के किस्से हम बचपन से ही अपने गाँव के जीवन से सुनते आ रहे हैं |यह पारंपरिक गाँव आदि के तांत्रिकों द्वारा - [प्यार -वैवाहिक जीवन -धोखा और तंत्र प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/प्यार-वैवाहिक-जीवन-धोखा-औ/2017/10/प्यार-वैवाहिक-जीवन-धोखा-औ.html): प्यार में धोखा और तंत्र प्रयोग ================== आज के समय में युवा वर्ग खुले समाज और तकनिकी युग में जी रहा है ,वह पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावत हो रहा |भारतीय संस्कार उसे पुरातन लग रहे ,परम्पराओं और मर्यादाओं को वह पिछडापन मान रहा |माता -पिता ,बुजुर्गों द्वारा शादी विवाह करना उसे नहीं भा रहा |खुद - [क्या हैं बंधन ,कैसे बचें इससे](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-हैं-बंधन-कैसे-बचें-इस/2017/10/क्या-हैं-बंधन-कैसे-बचें-इस.html): क्या हैं बंधन ,कैसे बचें इससे ================== बंधन अर्थात्‌ बांधना। जिस प्रकार रस्सी से बांध देने से व्यक्ति असहाय हो कर कुछ कर नहीं पाता, उसी प्रकार किसी व्यक्ति, घर, परिवार, व्यापार आदि को तंत्र-मंत्र आदि द्वारा अदृश्य रूप से बांध दिया जाए तो उसकी प्रगति रुक जाती है और घर परिवार की सुख शांति - [अभिचार और संतान बाधा](https://alaukikshaktiyan.com/अभिचार-और-संतान-बाधा/2017/10/अभिचार-और-संतान-बाधा.html): अभिचार और संतान बाधा ==================== अगर आप दोनों की अर्थात स्त्री और पुरुष की सभी डॉक्टरी जाँचे सही है तो हो सकता है की आप इन तांत्रिक क्रियाओ के शिकार हो गए हो और संतान सुख नहीं मिल रहा हो। किसी भी जोड़े के अगर सब कुछ सामान्य न होने पर भी संतान न हो - [आद्य-शक्ति माँ कामाख्या और कुमारी पूजा](https://alaukikshaktiyan.com/आद्य-शक्ति-माँ-कामाख्या-औ/2017/10/आद्य-शक्ति-माँ-कामाख्या-औ.html): आद्य-शक्ति माँ कामाख्या और कुमारी पूजा =========================== सती स्वरूपिणी आद्यशक्ति महाभैरवी कामाख्या तीर्थ विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है। इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यन्त महत्व है। यद्यपि आद्य-शक्ति की प्रतीक सभी कुल व वर्ण की कौमारियाँ होती हैं। किसी जाति का भेद नहीं होता है। इस क्षेत्र में - [कामाख्या देवी और अम्बुवाची पर्व](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-देवी-और-अम्बुवा/2017/10/कामाख्या-देवी-और-अम्बुवा.html): महामाता कामाख्या देवी और अम्बुवाची पर्व ============================ कामाख्या मंदिर गुवाहाटी(असम) से 8 किलोमीटर दूर जनपद कामरूप में नीलाचल पव॑त पर स्थित हॅ । यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि - [माँ कामाख्या शक्तिपीठ की विशेषता और तंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/माँ-कामाख्या-शक्तिपीठ-की/2017/10/माँ-कामाख्या-शक्तिपीठ-की.html): माँ कामाख्या शक्तिपीठ की विशेषता और तंत्र ============================= माँ कामाख्या के मंदिर के तंत्र को जानने के लिये पहले शिवलिंग को सकारात्मक और माता के मंदिर की बनावट को नकारात्मक रूप से देखना पडेगा। माता के मंदिर के अन्दर जाने पर जो द्रश्य सामने होता है वह इस प्रकार का होता है जैसे हम शिवलिंग - [कामाख्या मंदिर की महिमा](https://alaukikshaktiyan.com/कामाख्या-मंदिर-की-महिमा-2/2017/10/कामाख्या-मंदिर-की-महिमा-2.html): ::::::::::::::::कामाख्या मंदिर की महिमा ::::::::::::::: =================================== कामाख्या शक्तिपीठ जिस स्थान पर स्थित है, उस स्थान को कामरुप भी कहा जाता है. 51 पीठों में कामाख्या पीठ को महापीठ के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है. इस मंदिर में एक गुफा है. इस गुफा तक जाने का मार्ग बेहद पथरीला है. जिसे नरकासुर पथ कहते - [महामाता कामाख्या देवी शक्तिपीठ](https://alaukikshaktiyan.com/महामाता-कामाख्या-देवी-शक/2017/10/महामाता-कामाख्या-देवी-शक.html): ::::::::::::::महामाता कामाख्या देवी शक्तिपीठ ::::::::::::: ====================================== कामाख्या मंदिर गुवाहाटी(असम) से 8 किलोमीटर दूर जनपद कामरूप में नीलाचल पव॑त पर स्थित हॅ । यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है व इसका महत् तांत्रिक महत्व है। प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का - [क्या आपको अनुमान है !!!!! इनसे आप किसी बाधा से पीड़ित हो सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/क्या-आपको-अनुमान-है-इनसे-आ/2017/10/क्या-आपको-अनुमान-है-इनसे-आ.html): सावधान :इनसे आप पर तांत्रिक क्रिया या अभिचार हो सकता है =========================================== इनसे आप किसी बाधा से पीड़ित हो सकते हैं --------------------------------------------- अक्सर हमारे पास तांत्रिक अभिचार से ग्रस्त समस्याएं आती है |लोग पूछते हैं की इनसे बचाव के उपाय क्या है |आज हम इनसे बचाव के उपाय लिखते हैं |यद्यपि तीब्र अभिचार या उच्च - [दीपावली पर दिव्य गुटिका पर मंत्र जप करें और सर्वविध सुखी हों](https://alaukikshaktiyan.com/दीपावली-पर-दिव्य-गुटिका-प/2017/10/दीपावली-पर-दिव्य-गुटिका-प.html): दीपावली पर दिव्य गुटिका पर मंत्र जप करें और सर्वविध सुखी हों ============================================ दीपावली को महानिशा कहा जाता है ,इसे tantra जगत में अत्यधिक महत्व प्राप्त है |क्योकि इस दिन किये गए तांत्रिक प्रयोग बहुत प्रभावकारी होते हैं |यह अँधेरे पर प्रकाश का विजय भी दर्शाता है |इस रात्री प्रकाश करने का अपना महत्व है - [दीपावली पर महालक्ष्मी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/दीपावली-पर-महालक्ष्मी-प्/2017/10/दीपावली-पर-महालक्ष्मी-प्.html): दीपावली पर महालक्ष्मी प्रयोग ------------------------------------ दीपावली पर महालक्ष्मी का विशेष महत्त्व है |इस दिन इनकी पूजा से माना जाता है की वर्ष भर सुख समृद्धि प्राप्त होती है |इस दिन अनेक मन्त्र सिद्ध किये जाते हैं ,यन्त्र बनाये जाते हैं ,तांत्रिक सिद्धियाँ की जाती हैं |यह महानिशा तांत्रिक प्रयोगों और नकारात्मकता हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका - [नवरात्र , दीपावली में धन की लालसा](https://alaukikshaktiyan.com/नवरात्र-दीपावली-में-धन-की/2017/10/नवरात्र-दीपावली-में-धन-की.html): नवरात्र दीपावली और धन की लालसा ============================ दीपावली ,नवरात्रि की पूजा सामान्य जन में सुख -समृद्धि और धन के लिए होती है ।सभी पूजा करके सीधे धन चाहते हैं ,सभी चाहते हैं लक्ष्मी उनके घर आ जाएं और बैठ जाएं ।दुनियाभर के सुख और समृद्धि उन्हें मिल जाए ।इसके लिए नवरात्र दुर्गा पूजा तो दीपावली - [लक्ष्मी बुलाने से नहीं आती](https://alaukikshaktiyan.com/लक्ष्मी-बुलाने-से-नहीं-आत/2017/10/लक्ष्मी-बुलाने-से-नहीं-आत.html): लक्ष्मी बुलाने से नहीं आती ==================== दीपावली की पूजा सामान्य जन में सुख -समृद्धि और धन के लिए होती है ।सभी पूजा करके सीधे धन चाहते हैं ,सभी चाहते हैं लक्ष्मी उनके घर आ जाएं और बैठ जाएं ।दुनियाभर के सुख और समृद्धि उन्हें मिल जाए ।इसके लिए दीपावली पर गणेश लक्ष्मी लाकर पूजा करते - [लक्ष्मी बुलाने से नहीं आती](https://alaukikshaktiyan.com/लक्ष्मी-बुलाने-से-नहीं-आत-2/2017/10/लक्ष्मी-बुलाने-से-नहीं-आत-2.html): लक्ष्मी बुलाने से नहीं आती ==================== दीपावली की पूजा सामान्य जन में सुख -समृद्धि और धन के लिए होती है ।सभी पूजा करके सीधे धन चाहते हैं ,सभी चाहते हैं लक्ष्मी उनके घर आ जाएं और बैठ जाएं ।दुनियाभर के सुख और समृद्धि उन्हें मिल जाए ।इसके लिए दीपावली पर गणेश लक्ष्मी लाकर पूजा करते - [लक्ष्मी-श्री लक्ष्मी और महालक्ष्मी](https://alaukikshaktiyan.com/लक्ष्मी-श्री-लक्ष्मी-और-म/2017/10/लक्ष्मी-श्री-लक्ष्मी-और-म.html): ::::::::::::लक्ष्मी-लक्ष्मी और लक्ष्मी :: कौन हैं ये लक्ष्मी और महालक्ष्मी ::::::::::::: ===================================================== हिन्दू धर्म में लक्ष्मी जी की बड़ी महत्ता है |आधुनिक युग में इनके बिना तो अब काम ही नहीं चलने वाला |हर जगह बस लक्ष्मी जी का ही बोलबाला है ,हर कोई बस लक्ष्मी ही पाना चाहता है |पर वास्तव में यह लक्ष्मी - [कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] - ४](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-४/2017/10/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-४.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] ===============[[ चतुर्थ मंत्र - सात्विक पद्धति ]] कर्ण पिशाचिनी मूलतः वाम मार्ग द्वारा साधित होने वाली एक अति उग्र तामसिक शक्ति है जो वाम मार्ग से शीघ्र सिद्ध होती है ,तथापि इसके सात्विक रूप भी हैं और यह सिद्ध भी होती है इन पद्धतियों से यद्यपि इनमे समय - [कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] - ३](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-३/2017/10/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-३.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] =============== [तृतीय मंत्र - वाम मार्ग ] हमने अपने ब्लॉग के पूर्व के लेखों में कर्ण पिशाचिनी है क्या यह बता रखा है और इसकी दो प्रकार की साधनाएं सात्विक तथा अघोर क्रियागत ,दो भिन्न लेखों में प्रकाशित की हैं |अघोर क्रियागत साधना भी वाम मार्गीय साधना ही - [कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] - २](https://alaukikshaktiyan.com/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-२/2017/10/कर्ण-पिशाचिनी-साधना-karn-pishachini-sadhna-२.html): कर्ण पिशाचिनी साधना [Karn Pishachini Sadhna ] ================[ द्वितीय मंत्र - सात्विक क्रियागत ] कर्ण पिशाचिनी मूलतः वाम मार्ग द्वारा साधित होने वाली एक अति उग्र तामसिक शक्ति है जो वाम मार्ग से शीघ्र सिद्ध होती है ,तथापि इसके सात्विक रूप भी हैं और यह सिद्ध भी होती है इन पद्धतियों से यद्यपि इनमे समय - [लीलावती अप्सरा साधना [[ Lilavati Apsara Sadhna ]]](https://alaukikshaktiyan.com/लीलावती-अप्सरा-साधना-lilavati-apsara-sadhna/2017/10/लीलावती-अप्सरा-साधना-lilavati-apsara-sadhna.html): लीलावती अप्सरा साधना [[ Lilavati Apsara Sadhna ]] ======================================= अप्सराएं प्रकृति की ऊर्जा शक्तियाँ हैं जिनके गुणों के आधार पर इनके नाम और प्रसिद्धि हैं |यह देवताओं की सहायक शक्तियाँ हैं जो योगिनियों ,भैरवों के स्तर के नीचे की शक्तियाँ हैं और पृथ्वी तथा स्वर्ग के देवताओं के बीच समान सम्बन्ध रख सकती हैं |मुख्य - [तिलोत्तमा अप्सरा साधना [[Tilottama Apsara Sadhna ]]](https://alaukikshaktiyan.com/तिलोत्तमा-अप्सरा-साधना-tilottama-apsar/2017/10/तिलोत्तमा-अप्सरा-साधना-tilottama-apsar.html): तिलोत्तमा अप्सरा साधना [[Tilottama Apsara Sadhna ]] ========================================= प्रकृति के ऊर्जा स्तर में त्रिदेवों और त्रिशक्तियों के बाद देवताओं की उपस्थिति मानी जाती है जिनके मनोरंजन और कार्य पूर्ती हेतु कुछ सहायिकाएं हैं |इन्हें अप्सरा अथवा पारी के नाम से जाना जाता है |इनका ऊर्जा स्तर देवताओं ,योगिनियों ,भैरवों आदि के बाद का होता है - [अप्सरा साधना के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-साधना-के-नियम/2017/10/अप्सरा-साधना-के-नियम.html): अप्सरा साधना के नियम ================== अप्सराये अत्यंत सुंदर और जवान होती हैं. उनको सुंदरता और शक्ति विरासत में मिली है. वह गुलाब का इत्र और चमेली आदि की गंध पसंद करती हैं। तुमको उसके शरीर से बहुत प्रकार की खुशबू आती महसूस कर सकते हैं. यह गन्ध किसी भी पुरुष को आकर्षित कर सकती हैं। - [अप्सरा तिलोत्तमा [Tilottama ]](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-तिलोत्तमा-tilottama/2017/10/अप्सरा-तिलोत्तमा-tilottama.html): अप्सरा तिलोत्तमा : ============== तिलोत्तमा स्वर्ग की परम सुंदर अप्सरा थीं। पुराणों अनुसार इसकी सृष्टि करने के लिए ब्रह्माजी ने संसार भर की सुन्दर वस्तुओं में से तिल-तिल भर लिया था। कहा यह भी जाता है कि ब्रह्मा के हवनकुंड से इसका जन्म हुआ था। दुर्वासा ऋषि के शाप से यही तिलोत्तमा बाण की पुत्री - [अप्सरा मेनका [ Menka ]](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-मेनका-menka/2017/10/अप्सरा-मेनका-menka.html): अप्सरा मेनका : =========== मेनका स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा थी। महान तपस्वी ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्ग के निर्माण के लिए जब तपस्या शुरू की तो उनके तप से देवराज इन्द्र ने घबराकर उनकी तपस्या भंग करने के लिए मेनका को भेजा। मेनका ने अपने रूप और सौंदर्य से तपस्या में लीन विश्वामित्र का - [अप्सरा उर्वशी [ Urvashi ]](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-उर्वशी-urvashi/2017/10/अप्सरा-उर्वशी-urvashi.html): अप्सरा उर्वशी : =========== श्रीमद्भागवत के अनुसार यह उर्वशी स्वर्ग (हिमालय के उत्तर का भाग) की सर्वसुन्दर अप्सरा थी। एक बार इन्द्र की सभा में उर्वशी के नृत्य के समय राजा पुरुरवा (चंद्रवंशियों के मूल पिता) उसके प्रति आकृष्ट हो गए थे जिसके चलते उसकी ताल बिगड़ गई थी। इस अपराध के कारण इन्द्र ने - [अप्सरा रम्भा [ Rambha ]](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-रम्भा-rambha/2017/10/अप्सरा-रम्भा-rambha.html): अप्सरा रम्भा : =========== रम्भा का नाम कथाओं कहानियों में विशेष सुंदरी के तौर पर आता है |यह एक अप्सरा थी ,जिसे समुद्र मंथन से प्राप्त चदः रत्नों में से एक रत्न बताया जाता है |कथाओं में कई रम्भाओं का उल्लेख मिलता है ,एक रम्भा समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थी और दूसरी कश्यप - [अप्सरा [ Apsara ]](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-apsara/2017/10/अप्सरा-apsara.html): :::::::::::::::::::अप्सरा :::::::::::::::::::: ========================= भारतीय संस्कृति में अप्सरा एक जाना -पहचाना नाम है ,यह नाम वैदिक युग से ही विभिन्न कारणों से जाना जाता है ,,तंत्र जगत में कई धर्मो -सम्प्रदायों में अप्सरा की साधना की जाती है विभिन्न नामों से |अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम, अति सुंदर, अनेक कलाओं में दक्ष, तेजस्वी और अलौकिक - [आगम तंत्र शास्त्र -२ [Aagam Tantra-२ ]](https://alaukikshaktiyan.com/आगम-तंत्र-शास्त्र-२-aagam-tantra-२/2017/10/आगम-तंत्र-शास्त्र-२-aagam-tantra-२.html): ::::::::::::::::आगम तंत्र शास्त्र :::::::::::::: [पिछले भाग का शेष ] ‘ब्रह्मयामल’ के अनुसार नि:श्वास आदि तंत्र शिव के मध्य स्रोत से उद्भूत हुए थे और ऊर्ध्व वक्ष से निकले हैं। ब्रह्मयामल के मतानुसार नयोत्तर संमोह अथवा शिरश्छेद वामस्रोत से उद्भूत हैं। जयद्रथयामल में भी है कि शिरच्छेद से नयोत्तर और महासंमोहन – ये तीन तंत्र शिव के बाम स्रोत से उद्भूत हैं। द्वैत और द्वैताद्वैत शैव आगम अति प्राचीन है, इसमें संदेह नहीं। परंतु जिस सरूप में वे मिलते हैं और मध्य युग में भी जिस प्रकार उनका वर्णन मिलता है, उससे ज्ञात होता है कि उसका यह रूप अति प्राचीन नहीं है। काल भेद से विभिन्न ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण ऐसा परिवर्तन हो गया है। फिर भी ऐसा माना जा सकता है कि मध्य युग में प्रचलित पंचरात्र आगम का अति प्राचीन रूप जैसा महाभारत शांति पर्व में दिखाई देता है उसी प्रकार शैवागम के विषय मे भी संभावित है। महाभारत के मोक्ष पर्व के अनुसार स्वयं श्रीकृष्ण ने द्वैत और द्वैताद्वैत शैवागम का अध्ययन उपमन्यु से किया था। ‘कामिक आगम’ में है कि सदाशिव के पंचमुखों में से पांचरात्र स्रोतों का संबंध है। इसीलिये कुल स्रोत 25 हैं। पाँच मुखों के पाँच स्रोतों के नाम हैं- 1. लौकिक, 2. वैदिक 3. आध्यात्मिक, 4. अतिमार्ग, 5. मंत्र। पाँच मुख इस प्रकार हैं- 1 सद्योजात, 2 बामदेव, 3 अघोर 4 तत्पुरूष, 5 ईशान। ‘सोम सिद्धांत’ के अनुसार लौकिक तंत्र पाँच प्रकार के हैं और वैदिक भी पाँच प्रकार के हैं। इन सब तंत्रों में परस्पर उत्कर्ष या अपकर्ष का विचार पाया जाता है। तदनुसार ऊर्ध्वादि पांच दिशाओं के भेद के कारण तंत्रों के विषय में तारतम्य होता है। इसका तात्पर्य यह है कि ऊध्र्व दिशा से निकले हुए तंत्र सर्वश्रेष्ठ हैं। उसके बाद पूर्व, फिर उत्तर, पश्चिम, फिर दक्षिण। इस क्रम के अनुसार सिद्धांतविद् पंडित लोग कहा करते हैं कि सिद्धांतज्ञान मुक्तिप्रद होने के कारण सर्वश्रेष्ठ है। उसके अनंतर क्रमानुसार सर्पविष नाशक गरूड़ज्ञान, सर्ववशीकरण प्रतिपादक कामज्ञान, भूतों का निवारक फ़ भूततंत्रफ़ और शत्रुदमन के लिये उपयोगी फ़ भैरव तंत्र फ़ का स्थान जानना चाहिए। इस प्रसंग में और भी एक बात जानना आवश्यक है कि वैदिक दृष्टि से जैसे स्थूलत: ज्ञान के दो प्रकार दिखाई देते हैं- प्रथम ‘बोध रूप’ और द्वितीय ‘शब्द रूप’ । उसी प्रकार तंत्र साहित्य में भी ज्ञान के दो रूप पाए जाते हैं। यह कहना अनावश्यक है कि बोधात्मक ज्ञान शब्दात्मक ज्ञान से श्रेष्ठ है, इस बोध रूप ज्ञान के विभिन्न प्रकार हैं क्योंकि प्रतिपाद्य विषय के भेद के अनुसार ज्ञान का भेदाभेद होता है। जो ज्ञान शिव का प्रतिपादक है उससे पशु और माया का प्रतिपादक ज्ञान निकृष्ट है। इसी लिये शुद्ध मार्ग, अशुद्ध मार्ग, मिश्र मार्ग आदि भेदों से ज्ञान भेदों की कल्पना की गई है। शब्दात्मक ज्ञान को फ़ शास्त्र फ़ कहते हैं। इसमें भी परापर भेद हैं। सिद्धांतियों के मतानुसार वेदादिक ज्ञान से सिद्धांत ज्ञान विशुद्ध है, इसलिये श्रेष्ठ है परंतु सिद्धांत ज्ञान में भी परापर भेद हैं। इसी प्रकार दीक्षारूप ज्ञान के भी कई अवांतर भेद पाए जाते हैं- नैष्ठिक, भौतिक, निर्बीज, सबीज, लौकिक इत्यादि। इससे प्रतीत होता है कि मूल में ज्ञान एक होने पर भी प्रतिपाद्य विषय के कारण परापर भेद रूपों में प्रकट होता है। ‘स्वायंभुव आगम’ में कहा गया है- तदेकमप्यनेकम्त्वं शिव वक्ताम्बु जोम्हवंल। परापरेणा भेदेन गच्त्यर्थ प्रतिश्रयात् । ‘कामिक आगम’ में भी हैं कि परापर भेद से ज्ञान केअधिकारी भेद होते हैं । इसमें प्रतिपाय विषय के अनुसार मतिज्ञान परज्ञान और पशुज्ञान अथवा अपर ज्ञान हैं । शिव प्रकाशन ज्ञान श्रेष्ठ हैं । पशुपाशादि अर्थ प्रकाशन अपर ज्ञान हैं। इसी प्रकार विविध कल्पनाएँ हैं परंतु शिव और रूद्र दोनों सिद्धांत ज्ञाप हैं। पाशुपत संप्रदाय के आचार्य अष्टादश रूद्रागमों का प्रामाणाश्य मानते थे, परंतु दश शिव ज्ञान का प्रामाणाय नहीं मानते थे । इसका कारणा यह है कि रूद्रागम में द्वैत दष्टि और अद्वत दष्टि का मिश्रण पाया जाता हैं। परंतु शिवागम में अद्वैत दृष्टि मानी जाती इसलिये आचार्य अभिनय गुप्त ने कहा है कि पाशुपत दर्शन सर्वथा हेय नहीं हैं। किसी किसी ग्रंथ में स्पष्ट रूप से दिखया गया है कि शिव के किन मुखों से किन आगमों का निर्गम हुआ हैं। उससे यह प्रतित होता हैं कि कामिक, योगज, चित्य, कारणा और अजित ये पाँच शिवागम शिव के सधोजात मुख से निर्गत हुए थे। दीत्प, सूक्ष्म, सहरूत्र, अंशुमत या अंशमान संप्रभेद ये पाँच शिवागम शिव के बामदेव नामक मुख से निर्गत हुए हैं। विजय, नि:श्वास, स्वाभुव, आग्नेय और वीर ये पाँच रूद्रागम शिव के अघोर मुख से निर्गत हुए थे। रौरव, मुकुट, विमल ज्ञान, चंद्रकांत और बिब, ये पाँच रूद्रागम शिव के ईशान मुख से निसृत हुए थे। प्रोद्गीत, ललित, सिद्ध, संतान, वातुल, किरणा, सर्वोच्च और परमेश्वर ये आठ रूद्रागम शिव के तत्पुरूष मुख से निर्गत हुए थे। इस प्रकार अष्टाविंशति आगम के 198 विभागों में आगमों की चर्चा दिखाई देती हैं। भैरवागम श्रीकंठी संहिता में 64 भैरवागमों का निर्देश मिलता है। ये सब आगम अद्धैत सिद्धांत के प्रतिपादक हैं। इनके नाम इस प्रकार है: 1. भैरवाष्टक (स्वच्छंद भैरव, चंड भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, असितांग भैरव, महोछ्वास भैरव, कपालीश भैरव। अष्टम भैरव का नाम नहीं मिलता)। 2. यामलाष्टक (इसमें आठ यामलों का नाम है यथा – ब्रह्म यामल, विष्णु यामल, स्वच्छंद यामल, रुरुयामल, अथर्वन् यामल, रुद्र यामल और वेताल यामल। अष्टम यामल अज्ञात है)। 3. मत्ताष्टक (रक्त, लंपट, लक्ष्मी, चालिका, पिंगला, उत्फुल्लक, बिंबाद्यमत, ये सात मत हैं। अष्टम का पता नहीं)। 4. मंगलाष्टक (इसमें आठ मंगल नामक ग्रंथ निविष्ट हैं, यथ-पीचु भैरवी, तंत्र भैरवी, ब्राह्मी कला, विजया, चंद्रा, मंगला तथा सर्वमंगला) 5. शक्राष्टक (इसमें मंत्रचक्र, वर्णचक्र, शक्ति चक्र, कलाचक्र, बिंदुचक्र, नादचक्र, गुह्मचक्र और पूर्णचक्र ये आठ चक्र हैं।) 6. बहुरूपाष्टक (इसमें भी आठ ग्रंथ हैं: अंधक, रुरुभेद, अज, वर्णभेद, यम, विडंग, मातृरोदन, जालिम) 7. वाणीशष्टक (भैरवी, चित्रिका, हिंसा, कदंबिका, ह्रल्लेखा, चंद्रलेखा, विद्युल्लेखा, विद्वत्मत ये आठ हैं) 8. शिखाष्टक (भैरवी शिखा; विनाशिखा, विनामनि, संमोह, डामर, आथवक, कबंध, शिरच्छेद)..........................................................हर-हर महादेव विशेष - किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि - [आगम तंत्र शास्त्र [Aagam Tantra ]](https://alaukikshaktiyan.com/आगम-तंत्र-शास्त्र-aagam-tantra/2017/10/आगम-तंत्र-शास्त्र-aagam-tantra.html): :::::::::::::::::::आगम तंत्र शास्त्र :::::::::::::::::: =============================== आगम ग्रंथ में साधारणतया चार पाद होते है – ज्ञान, योग, चर्या और क्रिया। इन पादों में इस समय कोई-कोई पाद लुप्त हो गया है, ऐसा प्रतीत होता है और मूल आगम भी सर्वांश में पूर्णतया उपलब्ध नहीं होता, परंतु जितना भी उपलब्ध होता है वही अत्यंत विशाल है, इसमें संदेह नहीं। प्राचीन आगमों का विभाग इस प्रकार हो सकता है: शैवागम ( संख्या में दस ), रूद्रागम ( संख्या में अष्टादश ) ये अष्टाविंशति आगम (१० + ८ = १८) ‘सिद्धांत आगम’ के रूप में विख्यात हैं। ‘भैरव आगम’ संख्या में चौंसठ सभी मूलत: शैवागम हैं। इन ग्रंथों में शाक्त आगम आंशिक रूप में मिले हुए हैं। इनमें द्वैत भाव से लेकर परम अद्वैत भाव तक की चर्चा है। शैवागम किरणागम, में लिखा है कि, विश्वसृष्टि के अनंतर परमेश्वर ने सबसे पहले महाज्ञान का संचार करने के लिये दस शिवों का प्रकट करके उनमें से प्रत्येक को उनके अविभक्त महाज्ञान का एक एक अंश प्रदान किया। इस अविभक्त महाज्ञान को ही शैवागम कहा जाता है। वेद जैसे वास्तव में एक है और अखंड महाज्ञान स्वरूप है, परंतु विभक्त होकर तीन अथवा चार रूपों में प्रकट हुआ है, उसी प्रकार मूल शिवागम भी वस्तुत: एक होने पर भी विभक्त होकर दस आगमों के रूप में प्रसिद्व हुआ है। इन समस्त आगमधाराओं में प्रत्येक की परंपरा है। दस शिवों में पहले प्रणव शिव हैं। उन्होंने साक्षात् परमेंश्वर से जिस आगम को प्राप्त किया था उसका नाम ‘कामिक’ आगम है। प्रसिद्वि है कि उसकी श्लोकसंख्या एक परार्ध थी। प्रणव शिव से त्रिकाल को और त्रिकाल से हर को क्रमश: यह आगम प्राप्त हुआ। इस कामिक आगम का नामांतर है, कामज, त्रिलोक, की जयरथकृत टीका में कही नाम मिलता है। द्वितीय शिवागम का नाम है – योग । इसकी श्लोक संख्या एक लक्ष है, ऐसी प्रसिद्वि है। इस आगम के पाँच अवांतर भेद हैं। पहले सुधा नामक शिव ने इसे प्राप्त किया था। उनसे इसका संचार भस्म में; फिर भस्म से प्रभु में हुआ। तृतीय आगम चित्य है। इसका भी परिमाण एक लक्ष श्लोक था। इसके छ: अवांतर भेद हैं। इसे प्राप्त करनेवाले शिव का नाम है दीप्त। दीप्त से गोपति ने, फिर गोपति से अंबिका ने प्राप्त किया। चौथा शिवागम कारण है। इसका परिमाण एक कोटि श्लोक हे। इसमें सात भेद हैं। इसे प्राप्त करनेवाले क्रमश: कारण, कारण से शर्व, शर्व से प्रजापति हैं। पाँचवाँ आगम अजित है। इसका परिमाण एक लक्ष श्लोक है। इसके चार अवांतर भेद हें। इसे प्राप्त करनेवालों के नाम हैं सुशिव, सुशिव से उमेश, उमेश से अच्युत। षष्ठ आगम का नाम सुदीप्तक (परिमाण में एक लक्ष एवं अवांतर भेद नौ ) हैं। इसे प्राप्त करनेवालों के नाम क्रमश: ईश, ईश से त्रिमूर्ति, त्रिमूर्ति से हुताशन। सप्तम आगम का नाम सूक्ष्म (परिमाण में एक पद्म) है। इसके कोई अवांतर भेद नहीं हैं। इसे प्राप्त करनेवालों के नाम क्रमश: सूक्ष्म, भव और प्रभंजन हैं। अष्टम आगम का नाम सहस्र है। अवांतर भेद दस हैं। इसे प्राप्त करनेवालों में काल, भीम, और खग हैं। नवम आगम सुप्रभेद है। इसे पहले धनेश ने प्राप्त किया, धनेश से विघनेश और विघनेश से शशि ने। दशम आगम अंशुमान है जिसके अबांतर भेद 12 हैं। इसे प्राप्त करनेवालों के नाम क्रमश: अंशु अब्र और रवि हैं। दस अगमों की उपर्युक्त सूची किरणागम के आधार पर है। श्रीकंठी संहिता में दी गई सूची में सुप्रभेद का नाम नहीं है। उसके स्थान में कुकुट या मुकुटागम का उल्लेख है। रूद्रागम इन आगमों के नाम और प्रत्येक आगम के पहले और दूसरे श्रोता के नाम दिए जा रहे हैं: 1. विजय (पहले श्रोता अनादि रूद्र, दूसरे स्रोता परमेश्वर), 2. नि:श्वास (पहले श्रोता दशार्ण, दूसरे श्रोता शैलजा), 3. पारमेश्वर (पहले श्रोता रूप, दूसरे श्रोता उशना:), 4. प्रोद्गीत (पहले श्रोता शूली , दूसरे श्रोता कच), 5. मुखबिंब (पहले श्रोता प्रशांत, दूसरे श्रोता दघीचि), 6. सिद्ध (पहले बिंदु, दूसरे श्रोता चंडेश्वर), 7. संतान (पहले श्रोता शिवलिंग, दूसरे श्रोता हंसवाहन), 8. नारसिंह (पहले श्रोता सौम्य, दूसरे नृसिंह), 9. चंद्रांशु या चंद्रहास (पहले श्रोता अनंत दूसरे श्रोता वृहस्पति), 10. वीरभद्र (पहले श्रोता सर्वात्मा, दूसरे श्रोता वीरभद्र महागण), 11. स्वायंभुव (पहले श्रोता निधन, दूसरे पद्यजा), 12. विरक्त (पहले तेज, दूसरे प्रजापति), 13. कौरव्य (पहले ब्राह्मणेश, दूसरे नंदिकेश्चर), 14. मामुट या मुकुट (पहले शिवाख्य या ईशान, दूसरे महादेव ध्वजाश्रय), 15. किरण (पहले देवपिता, दूसरे रूद्रभैरव), 16. गलित (पहले आलय, दूसरे हुताशन), 17. अग्नेय (पहले श्रोता व्योम शिव, दूसरे श्रोता ?) 18. ? श्रीकंठी संहिता में रूद्रागमों की जो सूची है उसमें रौरव, विमल, विसर, और सौरभेद ये चार नाम अधिक हैं। और उसमें विरक्त, कौरव्य, माकुट एवं आग्नेय ये चार नाम नहीं है। कोई-कोई ऐसा अनुमान करते हैं कि ये कौरव्य ही रौरव हैं। बाकी तीन इनसे भिन्न हैं। अष्टादश अगम का नाम कहीं नहीं मिलता। इसमें किरण, पारमेश्वर और रौरव का नाम है। नेपाल में आठवीं शताब्दी का गुप्त लिपि में लिखा हुआ नि:श्वास तंत्र संहिता नामक ग्रंथ है। इसमें लौकिक धर्म, मूल सूत्र, उत्तर सूत्र, नय सूत्र, गुह्य सूत्र ये पाँच विभाग हैं। लौकिक सूत्र प्राय: उपेक्षित हो गया है। बाकी चारों के भीतर उत्तरसूत्र कहा जाता है। इस उत्तर सूत्र में 18 प्राचीन शिव सूत्रों का नामोल्लेख है। ये सब नाम वास्तव में उसी नाम से प्रसिद्ध शिवागम के ही नाम हैं, यथा नि:ष्श्वास ज्ञान स्वायंभुव मुखबिंब मुकुट या माकुट प्रोद्गीत वातुल ललित वीरभद्र सिद्ध विरस (वीरेश?) संतान रौरव सर्वोद्गीत चंद्रहास किरण पारमेश्वर इसमें 10 शिवतंत्रों के नाम है यथा – कार्मिक, योगज, दिव्य (अथवा चिंत्य), कारण, अजित, दीप्त सूक्ष्म, साहस्र अंशुमान और सुप्रभेद। - [मंत्र साधना करते समय सावधानियां](https://alaukikshaktiyan.com/मंत्र-साधना-करते-समय-सावध/2017/10/मंत्र-साधना-करते-समय-सावध.html): मंत्र साधना करते समय सावधानियां ========================= मंत्रों की शक्ति असीम है। किन्तु यदि साधनाकाल में नियमों का पालन न किया जाए तो कभी-कभी बड़े घातक परिणाम सामने आ जाते हैं। प्रयोग करते समय तो विशेष सावधानी‍ बरतनी चाहिए। मंत्र उच्चारण की तनिक सी त्रुटि सारे करे-कराए पर पानी फेर सकता है |कभी कभी - [हवन -आहुति के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/हवन-आहुति-के-नियम/2017/10/हवन-आहुति-के-नियम.html): हवन -आहुति के नियम ================= कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति – आवश्यक है , अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन ‘अग्नि के - [मंत्र-शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/मंत्र-शक्ति/2017/10/मंत्र-शक्ति.html): ::::::::::::::::::::मंत्र-शक्ति::::::::::::::::: ========================== मनन करने से जो त्राण करता हैं , रक्षा करता हैं उसे ही मंत्र कहते हैं। मंत्र शब्दात्मक होते हैं | मंत्र सात्त्विक, शुद्ध और आलोकिक होते हैं । अंत-आवरण हटाकर बुद्धि और मन को निर्मल करतें हैं , मन्त्रों द्वारा शक्ति का संचार होता हैं और उर्जा उत्पन्न होती हैं। आधुनिक विज्ञान - [तंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र/2017/10/तंत्र.html): ::::::::::::::::::::तंत्र :::::::::::::::::::: ====================== तंत्र शास्त्र भारत की एक प्राचीन विद्या है। तंत्र ग्रंथ भगवान शिव के मुख से आविर्भूत हुए हैं। उनको पवित्र और प्रामाणिक माना गया है। भारतीय साहित्य में 'तंत्र' की एक विशिष्ट स्थिति है, पर कुछ साधक इस शक्ति का दुरुपयोग करने लग गए, जिसके कारण यह विद्या बदनाम हो गई| गुरु - [पंचान्गुली साधना](https://alaukikshaktiyan.com/पंचान्गुली-साधना/2017/10/पंचान्गुली-साधना.html): :::::::::::::::::::::पंचान्गुली साधना :::::::::::::::::::. ========================== .............................................................भविष्य ज्ञान के लिए यह एक सात्विक साधना है ,यद्यपि इसके वाममार्गी रूप भी है ,,यहाँ यह ज्ञातव्य है भविष्य ज्ञान हेतु कर्णपिशाचिनी साधना और इस साधना में उद्देश्य ही सामान है ,शक्तिया समान नहीं है ,यह सिद्धि प्राप्त हो जाने पर साधक किसी के भी चेहरे को देख भूत -भविष्य बताने - [तंत्र वैदिक काल में भी था](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-वैदिक-काल-में-भी-था/2017/10/तंत्र-वैदिक-काल-में-भी-था.html): ::::::::::::::तंत्र वैदिक काल में भी था :::::::::::::::: ================================ वेदों की रचना मानव मष्तिष्क की उन्नतता का प्रमाण है |वेद केवल धार्मिक ग्रन्थ नहीं अपितु इनमे ब्रह्माण्ड का सनातन सूत्र संगृहीत है |ब्रह्मांडीय ऊर्जा विज्ञान का मूल सूत्र और प्रकृति वेदों में है |वेदों की रचना के पूर्व भी इनकी जानकारी प्राचीन ऋषियों को इन सूत्रों - [हवन के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/हवन-के-नियम/2017/10/हवन-के-नियम.html): ::::::::::::::::::::हवन के नियम:::::::::::::::::: =========================== कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति - आवश्यक है , अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन 'अग्नि के वास - [तंत्र और उसकी परिभाषा](https://alaukikshaktiyan.com/तंत्र-और-उसकी-परिभाषा/2017/10/तंत्र-और-उसकी-परिभाषा.html): तंत्र और उसकी परिभाषा ============== तंत्र शब्द दो धातुओं "तन "व् "त्रे "से मिलकर बना है |"तन "धातु का अर्थ विस्तार करना ,फैलाना ,तानना ,उत्पन्न करना ,रूप देना ,ग्रंथादिक लिखना ,रचना करना आदि है |"त्रे "का अर्थ रक्षण करना है |तंत्र का धातु मूलक अर्थ होगा "जिस किसी वस्तु ,विचार या शक्ति का विस्तार किया - [क्रोध भैरव साधना](https://alaukikshaktiyan.com/क्रोध-भैरव-साधना/2017/10/क्रोध-भैरव-साधना.html): ::::::::::::::::::क्रोध भैरव साधना ::::::::::::::::::: ================================ तंत्र के क्षेत्र में भगवान भैरव का स्थान तो अपने आप में निराला है, यह देव अपने साधको को शीघ्र सिद्धि एवं कल्याण प्रदान करने के कारण सदियों से महत्वपूर्ण उपास्य देव रहे है. भगवान शिव के स्वरुप सम ही उनके विविध रूप भी अपने आप में निराले तथा विलक्षण - [कुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यन्त्र’ महाप्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/कुंजिका-स्तोत्र-और-बीस-2/2017/10/कुंजिका-स्तोत्र-और-बीस-2.html): :::::::::::::::::कुंजिका स्तोत्र’ और ‘बीसा यन्त्र’ अनुष्ठान ::::::::::::::::::: ============================================== बीस यन्त्र और कुंजिका स्तोत्र का संयोग कर अनुष्ठान संपन्न करने से बीस यन्त्र के लाभ बढ़ जाते हैं |इस हेतु चन्द्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, दीपावली के तीन दिन (धन तेरस, चर्तुदशी, अमावस्या), रवि-पुष्य योग, रवि-मूल योग तथा महानवमी के दिन ‘रजत-यन्त्र’ की प्राण प्रतिष्ठा, पूजादि विधान - [हवन कुंड और हवन के नियम](https://alaukikshaktiyan.com/हवन-कुंड-और-हवन-के-नियम/2017/10/हवन-कुंड-और-हवन-के-नियम.html): ::::::::::::::::हवन कुंड और हवन के नियम ::::::::::::::::: =========== ======================= हवन चाहे वैदिक हो या तांत्रिक उसके लिए हवन कुंड कि भूमि, वेदी का निर्माण एक आवश्यक अंग होता है| कहा है , कुंड, वेदी और निमंत्रित देवी देवताओं कि तथा पूर्ण सज्जा कि रक्षा करता है, उसे मंडल कहा जाता है| यज्ञ कि भूमि का - [मन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/मन्त्र/2017/10/मन्त्र.html): :::::::::::::::मन्त्र ::::::::::::: =================== मन्त्र में छन्द, ॠषि, देवता, बीज, कीलक और शक्ति ये मुख्य रूप से छह बातें मानी जाती हैं| वैदिक मन्त्रों में छन्द, ॠषि, और देवता इन तीन बातों का ही उपयोग होता हैं| अवशिष्ट के सहित षड़ंगों का उपयोग तांत्रिक मन्त्रों में होता हैं| शावर मन्त्रों के विषय में –‘अनमिल आखर अर्थ - [पूजा स्थल पर शंख रखने की परंपरा](https://alaukikshaktiyan.com/पूजा-स्थल-पर-शंख-रखने-की-पर/2017/10/पूजा-स्थल-पर-शंख-रखने-की-पर.html): हिन्दू धर्म में पूजा स्थल पर शंख रखने की परंपरा ==================================== शंख को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है।धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शंख बजाने से भूत-प्रेत, अज्ञान, रोग, दुराचार, पाप, दुषित विचार और गरीबी का नाश होता है। शंख बजाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा - [मूर्ती और चित्र के सम्बन्ध में नियम](https://alaukikshaktiyan.com/मूर्ती-और-चित्र-के-सम्बन्/2017/10/मूर्ती-और-चित्र-के-सम्बन्.html): :::::::::::::::मूर्ती और चित्र के सम्बन्ध में सामान्य नियम::::::::::::::::: ========================================== आज के समय में हनुमानजी के भक्तों की संख्या काफी अधिक है, क्योंकि बजरंग बली श्रद्धालुओं की समस्याओं को बहुत ही जल्द दूर करते हैं। इसी वजह से लोग हनुमानजी की प्रतिमा या फोटो अपने घर में भी रखते हैं। हनुमानजी के साथ ही अन्य देवी-देवताओं - [मूर्ती और चित्र के सम्बन्ध में नियम](https://alaukikshaktiyan.com/मूर्ती-और-चित्र-के-सम्बन्-2/2017/10/मूर्ती-और-चित्र-के-सम्बन्-2.html): :::::::::::::::मूर्ती और चित्र के सम्बन्ध में सामान्य नियम::::::::::::::::: ========================================== आज के समय में हनुमानजी के भक्तों की संख्या काफी अधिक है, क्योंकि बजरंग बली श्रद्धालुओं की समस्याओं को बहुत ही जल्द दूर करते हैं। इसी वजह से लोग हनुमानजी की प्रतिमा या फोटो अपने घर में भी रखते हैं। हनुमानजी के साथ ही अन्य देवी-देवताओं - [नाहर सिंह बीर की साधना](https://alaukikshaktiyan.com/नाहर-सिंह-बीर-की-साधना/2017/10/नाहर-सिंह-बीर-की-साधना.html): ::::::::::::::::नाहर सिंह बीर और उनकी साधना :::::::::::::::::: ============================================ तंत्र साधना में भूत-प्रेत ,बीर-बेताल .पिशाच-पिशाचिनी ,ब्रह्म-जिन्न ,डाकिनी-शाकिनी ,भैरव-भैरवी आदि की भी साधनाएँ होती हैं ,जो की पृथ्वी के नजदीकी वातावरण की शक्तियां हैं और तंत्र में निम्न तथा तामसिक साधना में गिनी जाती है ,इनमे बीर साधना बीर को वशीभूत करने और वचनबद्ध करने की साधना - [करवा चौथ](https://alaukikshaktiyan.com/करवा-चौथ/2017/10/करवा-चौथ.html): करवा चौथ - चन्द्र देव संग गणपति देते है अखंड सौभाग्य =================================== कार्तिक मॉस के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी में करवा चौथ का व्रत किया जाता है ,महिलाए अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत करती है और चंद्रदेव से पति के दीर्घायु की कामना करती है ,,इसदिन चन्द्रमा के दर्शन और पूजन से भगवान् - [सूर्य पूजा](https://alaukikshaktiyan.com/सूर्य-पूजा/2017/10/सूर्य-पूजा.html): :::::::::::::::: सूर्य पूजा :::::::::::::::::: ======================== जीवन में कर्म और धन को यश-प्रतिष्ठा पाने के लिए बेहद अहम माना गया है। कर्म की मजबूत इच्छाशक्ति या संकल्प से ही तमाम वैभव खिंचे चले आते हैं। वैसे भी लक्ष्मी ठहराव नहीं गति को पसंद करती है। सरल शब्दों में समझें तो काम ही कमाई का जरिया बन - [मंत्र जप और नियम](https://alaukikshaktiyan.com/मंत्र-जप-और-नियम/2017/10/मंत्र-जप-और-नियम.html): ::::::::::::::::::::मंत्र जप और नियम :::::::::::::::::::: ===================================== यदि साधनाकाल में मंत्र जप के नियमों का पालन न किया जाए तो कभी-कभी बड़े घातक परिणाम सामने आ जाते हैं। प्रयोग करते समय तो विशेष सावधानी‍ बरतनी चाहिए। मंत्र उच्चारण की तनिक सी त्रुटि सारे करे-कराए पर पानी फेर सकत‍ी है। तथा गुरु के द्वारा दिए गए निर्देशों - [शाबर मन्त्रों को जगाने की विधि](https://alaukikshaktiyan.com/शाबर-मन्त्रों-को-जगाने-की/2017/10/शाबर-मन्त्रों-को-जगाने-की.html): ~ साबर मंत्रो को जगाने की विधि ~ =================== किसी भी कारण से शाबर मन्त्र सुप्त हो तो इस विधि के बाद साबर मन्त्र पूर्ण रूप से प्रभावी होते है ! || मन्त्र || सत नमो आदेश ! ॐ गुरूजी ! ड़ार शाबर बर्भर जागे , जागे अढैया और बराट मेरा जगाया न जागे तो - [शाबर मंत्र सुप्त हो सकते हैं](https://alaukikshaktiyan.com/शाबर-मंत्र-सुप्त-हो-सकते-ह/2017/10/शाबर-मंत्र-सुप्त-हो-सकते-ह.html): शाबर मंत्र सुप्त हो सकते हैं =================== भगवान् शिव ने सभी मंत्रो को कीलित कर दिया पर साबर मन्त्र कीलित नहीं है ! साबर मन्त्र कलयुग में अमृत स्वरुप है ! साबर मंत्रो को सिद्ध करना बड़ा ही सरल है न लम्बे विधि विधान की आवश्यकता और न ही करन्यास और अंगन्यास जैसी जटिल क्रियाए - [शाबर मन्त्र साधना में ध्यान रखने योग्य बातें](https://alaukikshaktiyan.com/शाबर-मन्त्र-साधना-में-ध्य/2017/10/शाबर-मन्त्र-साधना-में-ध्य.html): शाबर मन्त्र साधना में ध्यान रखने योग्य बातें ============================= १.इस साधना को किसी भी जाति ,वर्ण ,आयु का पुरुष या स्त्री कर सकती है | २. इन मन्त्रों की साधना में गुरु की बहुत आवश्यकता नहीं रहती ,क्योकि इनके प्रवर्तक स्वयं सिद्ध साधक रहे हैं |इतने पर भी कोई निष्ठावान साधक गुरु बन जाए तो - [शाबर मंत्र](https://alaukikshaktiyan.com/शाबर-मंत्र/2017/10/शाबर-मंत्र.html): :::::::::::::::::::::शाबर मंत्र और उनकी विशेषता ::::::::::::::::::::: ========================================== शाबर तंत्र तंत्र की ग्राम्य शाखा है | शाबर का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य अथवा अपरिष्कृत | अत्यंत सरल भाषा में पाए जाने वाले सभी मंत्र शाबर की श्रेणी में आते हैं |ये मंत्र होते तो अत्यंत सरल भाषा में है परन्तु इनका कोई अर्थ नहीं - [काम भाव और सिद्धि के सूत्र](https://alaukikshaktiyan.com/काम-भाव-और-सिद्धि-के-सूत्र/2017/10/काम-भाव-और-सिद्धि-के-सूत्र.html): काम भाव और सिद्धि के सूत्र [[तंत्र में काम भाव का प्रयोग ]]. ================================= ..........................तंत्र में कामभाव के उपयोग का एक प्रमुख स्थान है ,काम भाव से सिद्धिया भी की जाती है ,सम्भोग से समाधि का यह एक मूल रहस्य है ,,ऐसा होताहै और इसके वैज्ञानिक कारण है जो प्रकृति की संरचना ,उसके उर्जा सूत्र - [शाह्तूर परी की साधना](https://alaukikshaktiyan.com/शाह्तूर-परी-की-साधना/2017/10/शाह्तूर-परी-की-साधना.html): :::::::::::::::::शाह्तूर परी की साधना [अप्सरा साधना ]::::::::::::::::: ============================================ साधना क्षेत्र से जुड़े लोग अच्छी तरह जानते हैं की कोई भी साधना सरल नहीं होती |साधना करें और सफलता भी अवश्य मिले ऐसा बहुत कम मामलों में होता है ,कारण साधना के कुछ ऐसे गोपनीय तथ्य होते हैं ,विशेष तकनीकियाँ होती हैं ,जिनका सही उपयोग किया - [श्वेतार्क गणपति साधना](https://alaukikshaktiyan.com/श्वेतार्क-गणपति-साधना/2017/10/श्वेतार्क-गणपति-साधना.html): :::::::::::::::सर्व मनोकामना सिद्धि प्रयोग ::::::::::::::::::: ==================================== मनुष्य का मन चंचल और विचलित होता है |एक कामना पूरी हुई नहीं की उससे पूर्व ही दूसरी इच्छा बलवती हो उठती है |समस्त प्रकार की मनोकामनाओं की सहजपूर्ती हेतु अत्यंत सरल किन्तु अत्यधिक प्रभावशाली प्रयोग प्रस्तुत है |जिससे अलौकिक शक्तियां पेज के पाठक लाभ उठा सकते हैं | - [हमजाद साधना](https://alaukikshaktiyan.com/हमजाद-साधना/2017/10/हमजाद-साधना.html): ::::::::::::::::::हमजाद साधना ::स्वयं द्वारा स्वयं की साधना :::::::::::::::::::: ================================================== मूलतः यह इस्लामी साधना है |इसे सिद्धों ने अपनाया और बहुत विकसित किया |बाद में इसका भारतीयकरण कर दिया गया और इसे सूक्ष्म शरीर की साधना कहा जाने लगा ,परन्तु यह सूक्ष्म शरीर की साधना नहीं है ,बल्कि उसके ऋणात्मक प्रतिरूप की साधना है |हमजाद साधना - [सूर्य साधना](https://alaukikshaktiyan.com/सूर्य-साधना/2017/10/सूर्य-साधना.html): वैदिक देवता ::तांत्रिक साधना ==================== :::::::::::::::::सूर्य साधना :::::::::::::::::: ========================= सूर्य साधना प्रकृति में हमारे सौर मंडल की धनात्मक ऊर्जा की साधना है |यह सौर मंडल इसी ऊर्जा से संचालित होता है और धनात्मक या सकारात्मक ऊर्जा के लिए यह सूर्य पर निर्भर है |सूर्य को वैदिक देवताओं में प्रमुख स्थान प्राप्त है |इनकी साधना में - [हनुमान साधना](https://alaukikshaktiyan.com/हनुमान-साधना/2017/10/हनुमान-साधना.html): वैदिक देवता ::तांत्रिक साधना ===================== :::::::::::::::::हनुमान साधना :::::::::::::::::::: ============================= वैदिक देवता की तांत्रिक साधना के क्रम में हम अपने इस लेख में अपने पेज अलौकिक शक्तियां पर वैदिक देवता हनुमान की सरलतम तांत्रिक साधना प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रहे हैं जिससे सामान्यजन लाभान्वित हो सकें |हनुमान की अवधारणा या उत्पत्ति त्रेता में भगवान् राम - [अग्नि साधना](https://alaukikshaktiyan.com/अग्नि-साधना/2017/10/अग्नि-साधना.html): वैदिक देवता :: तांत्रिक साधना ===================== :::::::::::::::::अग्नि साधना ::::::::::::::::::: =========================== वैदिक देवताओं में अग्नि का स्थान महत्वपूर्ण है |वेद के मूल देवताओं या शक्तियों में इनको स्थान दिया गया है | जैसा की हम अपने पिछले लेख वैदिक देवता ::तांत्रिक साधना में लिख आये हैं की वैदिक युग में समान्तर चलने वाली वैदिक कर्मकान्डिय और - [विष्णु साधना](https://alaukikshaktiyan.com/विष्णु-साधना/2017/10/विष्णु-साधना.html): वैदिक देवता :: तांत्रिक साधना ===================== ::::::::::::::विष्णु साधना :::::::::::::::: ======================= जैसा की हम अपने पिछले लेख वैदिक देवता ::तांत्रिक साधना में लिख आये हैं की वैदिक युग में समान्तर चलने वाली वैदिक कर्मकान्डिय और तांत्रिक साधनाएँ कालान्तर में युगीय परिवर्तन और सामयिक आवश्यकता के साथ आपस में एक दुसरे में मिलने लगी |सच्चाई-नैतिकता-आदर्शों के क्षरण - [वैदिक देवताओं की तांत्रिक साधना](https://alaukikshaktiyan.com/वैदिक-देवताओं-की-तांत्रि/2017/10/वैदिक-देवताओं-की-तांत्रि.html): :::::::::::::वैदिक देवता ::तांत्रिक साधना :::::::::::::: ================================== तंत्र के दो मुख्य मार्ग हैं ,जो दो विभिन्न सम्प्रदायों से उत्पन्न हुए हैं |वैदिक मार्ग और शैव मार्ग |इनमे वैदिक मार्ग को दक्षिण मार्ग और शैव मार्ग को वाम मार्ग सामान्य रूप से माना जाता है |वैदिक मार्ग और शैव मार्ग का कालान्तर में आपस में बहुत सम्मिश्रण - [कैसे समाप्त हो वशीकरण का प्रभाव](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-समाप्त-हो-वशीकरण-का-प/2017/09/कैसे-समाप्त-हो-वशीकरण-का-प.html): कैसे निष्क्रिय करें वशीकरण की क्रिया ========================= आज के समय में सबसे अधिक दुरुपयोग अगर किसी तांत्रिक विधा का हुआ है तो वह वशीकरण का है |दुसरे स्थान पर कष्ट देने अथवा अपनी समस्या दुसरे को देने के प्रयोग आते हैं |लोग बिना किसी गंभीर कारण के ,शारीरक आकर्षण ,क्षणिक लगाव ,एकतरफा प्यार आदि तक - [वशीकरण कब और क्यों काम नहीं करता](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-कब-और-क्यों-काम-नही/2017/09/वशीकरण-कब-और-क्यों-काम-नही.html): क्यों और कब काम नहीं करता वशीकरण प्रयोग ================================ बहुत से लोग कहते मिलते हैं वशीकरण काम नहीं किया |कुछ कहते हैं वशीकरण जैसा कुछ नहीं होता या पूछते मिलते हैं क्या सचमुच वशीकरण होता है |इनके कारण हैं |वशीकरण हमेशा हो ही जाए या वशीकरण क्रिया सफल ही हो जाए जरुरी नहीं होता |कोई - [वशीकरण :: भ्रम या सच](https://alaukikshaktiyan.com/वशीकरण-भ्रम-या-सच/2017/09/वशीकरण-भ्रम-या-सच.html): क्या सचमुच वशीकरण होता है ===================== हमने अपने पहले के लेखों में वशीकरण पर बहुत कुछ लिखा है ,जैसे वशीकरण क्या है ,,कैसे कार्य करता है वशीकरण ,, वशीकरण की तकनीक कैसी होती है ,वशीकरण के सूत्र -सिद्धांत -कार्यप्रणाली क्या हैं ,क्यों असफल होती है वशीकरण की क्रिया ,,आदि आदि |आज के अंक में हम - [कैसे करें ध्यान की शुरुआत](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-करें-ध्यान-की-शुरुआत/2017/09/कैसे-करें-ध्यान-की-शुरुआत.html): कैसे करें ध्यान की शुरुआत =================== ध्यान की शुरुआत के पूर्व की क्रिया- 'मैं क्यों सोच रहा हूं' इस पर ध्यान दें।' हमारा 'विचार' भविष्य और अतीत की हरकत है। विचार एक प्रकार का विकार है। वर्तमान में जीने से ही जागरूकता जन्मती है। भविष्य की कल्पनाओं और अतीत के सुख-दुख में जीना ध्यान विरूद्ध - [ध्यान साधना से संभव है अलौकिक कार्य](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-साधना-से-संभव-है-अलौ/2017/09/ध्यान-साधना-से-संभव-है-अलौ.html): ध्यान साधना से संभव है अलौकिक कार्य ========================= परामनोविज्ञान के वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क में छुपे हुए रहस्यमयी शक्तियों पर शोध करते हुये पता लगाया कि मनुष्य के अवचेतन मन मे अलौकिक, अविश्वसनीय और अकल्पनीय शक्तियां विद्यमान है। यदि अवचेतन मन की उन शक्तियों को योग आदि क्रियाओं के द्वारा जागृत कर लिया जाय - [कैसे जगाएं छठी इन्द्रिय को](https://alaukikshaktiyan.com/कैसे-जगाएं-छठी-इन्द्रिय-क/2017/09/कैसे-जगाएं-छठी-इन्द्रिय-क.html): :::::::::::::::::::कैसे जगाएं छठी इन्द्रिय को ::::::::::::::::::::: ======================================== छठी इंद्री को अंग्रेजी में सिक्स्थ सेंस कहते हैं। सिक्स्थ सेंस को जाग्रत करने के लिए योग में अनेक उपाय बताए गए हैं। इसे परामनोविज्ञान का विषय भी माना जाता है। असल में यह संवेदी बोध का मामला है। गहरे ध्यान प्रयोग से यह स्वत: ही जाग्रत हो - [आत्मा की अलौकिक शक्ति](https://alaukikshaktiyan.com/आत्मा-की-अलौकिक-शक्ति/2017/09/आत्मा-की-अलौकिक-शक्ति.html): आत्मा की अलौकिक शक्ति ===================== हमारे शरीर में आत्मा वह केंद्र है जिसे शक्ति भी कहते हैं। उसके अप्रकट रहने का कारण है कि हमारा शरीर उसके केंद्र से संपर्क नहीं रखता जहाँ से सब कुछ सनातन काल से संचालित हो रहा है। वस्तुतः जीवन धारा के प्रतिकूल प्रवाह से उस केंद्र में निष्क्रियता बनी - [महिलाओं की छठी इंद्री अधिक विकसित होती है](https://alaukikshaktiyan.com/महिलाओं-की-छठी-इंद्री-अधि/2017/09/महिलाओं-की-छठी-इंद्री-अधि.html): महिलाओं की छठी इंद्री अधिक विकसित होती है ============================== भारतीय परम्परा में महिलाओं को देवी कहा जाता है ,इसके अनेक कारण हैं |इसका एक कारण यह भी है की इनमे अतीन्द्रिय क्षमता पुरुष की अपेक्षा अधिक विकसित होती है |इसके विकास की संभावना अधिक होती है |कम प्रयास से अधिक सक्षम हो जाती है |इनमे - [अंतरात्मा की आवाज -ईश्वर का संकेत है](https://alaukikshaktiyan.com/अंतरात्मा-की-आवाज-ईश्वर-क/2017/09/अंतरात्मा-की-आवाज-ईश्वर-क.html): ईश्वर का संकेत है अंतरात्मा की आवाज ============================= दैनिक जीवन में अक्सर देखते हैं कि दरवाजे की घंटी बजते ही मन में ख्याल आता है कि इस समय दरवाजे पर अमुक व्यक्ति ही होगा और दरवादा खोलने पर जिसका ख्याल आया था वही व्यक्ति होता है। इस प्रकार कभी-कभी अपने किसी मित्र से मिलने के - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -१३ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या.html): ध्‍यान का लाभ ========== ध्यान हमारे तन, मन और आत्मा के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है। स्वयं को पाना है तो ध्यान जरूरी है। वहीं एकमात्र विकल्प है। ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। आत्मिक शक्ति से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। मानसिक शांति से शरीर स्वस्थ अनुभव करता है। ध्यान - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -१२ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-2/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-2.html): योग में ध्यान का महत्व ================= अग्नि की तरह है ध्यान। बुराइयां उसमें जलकर भस्म हो जाती हैं। ध्यान है धर्म और योग की आत्मा। ध्यानियों की कोई मृत्यु नहीं होती। लेकिन ध्यान से जो अलग है बुढ़ापे में उसे वह सारे भय सताते हैं, जो मृत्यु के भय से उपजते हैं। अंत काल में - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -११ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-3/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-3.html): ध्यान की अवस्था में टेलिपैथी ===================== जब ध्यान की साधना अच्छे से हो जाए |जब साधक का मन एकाग्रचित होने लगे तब टेलीपैथी का प्रयोग प्रारंभ करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अपने गुरू या इष्ट से प्रत्यक्ष अथवा ध्यानावस्था में मानसिक अनुमति ले कर प्रयोग करना चाहिए। सर्वप्रथम अपने इष्ट या गुरू की प्रतिमा - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -१० ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-4/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-4.html): ध्यान से एक से अधिक शरीरों का अनुभव ============================= ध्यान करना अद्भुत है। हमारे यूं तो मूलत: तीन शरीर होते हैं। भौतिक, सूक्ष्म और कारण, लेकिन इस शरीर के अलावा और भी शरीर होते हैं। हमारे शरीर में मुख्यत: सात चक्र हैं। प्रत्येक चक्र से जुड़ा हुआ है एक शरीर। बहुत अद्भुत और आश्चर्यजनक है - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -९ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-5/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-5.html): कैसे करें ध्यान ========== कैसे करें ध्यान? यह महत्वपूर्ण सवाल अक्सर पूछा जाता है। यह उसी तरह है कि हम पूछें कि कैसे श्वास लें, कैसे जीवन जीएं, कैसे जिंदा रहें या कैसे प्यार करें। आपसे सवाल पूछा जा सकता है कि क्या आप हंसना और रोना सीखते हैं या कि पूछते हैं कि कैसे - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -८ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-7/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-7.html): कैसे करें ध्यान साधना ================= ध्यान का सीधा-सीधा संबंध मन से है। मनुष्य के अन्दर दो प्रकार का मन होता है एक बाह्यमन तथा दुसरा अंर्तमन। अंर्तमन की अपेक्षा बाह्यमन का स्वभाव अत्यंत चंचल तथा कुटिल है जीसमे काम क्रोध, लोभ, अहंकार, इष्र्या, राग, द्वेष, छल, कपट इत्यादि विकार उत्पन्न होते रहते हैं जो मुख्य - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -७ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-8/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-8.html): क्या अनुभव हो सकता है ध्यान में [भाग-४ ]::ईश्वर के सगुण रूप का दर्शन ================================================ ईश्वर के सगुण रूप की साधना करने वाले साधकों को, भगवान का वह रूप कभी आँख वंद करने या कभी बिना आँख बंद किये यानी खुली आँखों से भी दिखाई देने का आभास सा होने लगता है या स्पष्ट दिखाई - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -६ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-9/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-9.html): क्या अनुभव हो सकता है ध्यान में [भाग- ३] =========================== साधकों को ध्यान के दौरान कुछ एक जैसे एवं कुछ अलग प्रकार के अनुभव होते हैं.|हर साधक की अनुभूतियाँ भिन्न होती हैं |अलग साधक को अलग प्रकार का अनुभव होता है |इन अनुभवों के आधार पर उनकी साधना की प्रकृति और प्रगति मालूम होती है - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -५ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-10/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-10.html): क्या अनुभव हो सकता है ध्यान में [भाग -२] ============================== साधकों को ध्यान के दौरान कुछ एक जैसे एवं कुछ अलग प्रकार के अनुभव होते हैं.|हर साधक की अनुभूतियाँ भिन्न होती हैं |अलग साधक को अलग प्रकार का अनुभव होता है |इन अनुभवों के आधार पर उनकी साधना की प्रकृति और प्रगति मालूम होती है - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -४ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-11/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-11.html): क्या अनुभव हो सकता है ध्यान में [भाग -१ ] ============================ ध्यान ,साधकों के बीच एक जाना -पहचाना नाम है |यह साधना का मूल है |ध्यान अथवा ध्यानस्थ होना अथवा किसी भाव -गुण में डूबना अथवा किसी ईष्ट पर एकाग्र हो जाना ,परम तत्त्व -परमात्मा की प्राप्ति की और मुख्या कदम है |यही वह मार्ग है - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -३ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-12/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-12.html): ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ ============================================= [[ भाग -३ ] साधना के अवधि में ध्यानस्थ हो जाना एक साथारण बात मानी जाती है ,ऐसी स्थिति अगर किसी साधक में नहीं आती तो उसे सफलता मिलती मुश्किल मानी जाती है |चाहे योग साधना हो ,तंत्र साधना हो - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -२ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-13/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-13.html): ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ ============================================= [[ भाग -२ ] ध्यान ,साधकों के बीच एक जाना -पहचाना नाम है |यह साधना का मूल है |ध्यान अथवा ध्यानस्थ होना अथवा किसी भाव -गुण में डूबना अथवा किसी ईष्ट पर एकाग्र हो जाना ,परम तत्त्व -परमात्मा की प्राप्ति - [ध्यान :: ध्यान के अनुभव :: ध्यान की प्रक्रिया और ध्यान के लाभ = [[ भाग -१ ]](https://alaukikshaktiyan.com/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-14/2017/09/ध्यान-ध्यान-के-अनुभव-ध्या-14.html): क्या हैं ध्यान ,धारणा और समाधि ----------------------------------------- ध्यान ,साधकों के बीच एक जाना -पहचाना नाम है |यह साधना का मूल है |ध्यान अथवा ध्यानस्थ होना अथवा किसी भाव -गुण में डूबना अथवा किसी ईष्ट पर एकाग्र हो जाना ,परम तत्त्व -परमात्मा की प्राप्ति की और मुख्य कदम है |यही वह मार्ग है जिससे साधना क्षेत्र - [आत्माओं को कैसे बुलाएं ?](https://alaukikshaktiyan.com/आत्माओं-को-कैसे-बुलाएं/2017/08/आत्माओं-को-कैसे-बुलाएं.html): आत्मा आह्वान की विधियां ================== आत्मा आह्वान की कई विधियां भारत में प्रचलित है - आटोमेटिक राइटिंग (स्वचलित लेखन), आटोमैटिक टायपिंग, बालक के द्वारा, यंत्र द्वारा आत्मा आह्वान, प्लेनचिट द्वारा तथा आत्म रत्न के द्वारा। आटोमेटिक रायटिंग - ------------------------- इस विधि में साधक को एक माध्यम की आवश्यकता होती है जो सरल चिŸा और निस्वार्थ - [आत्माओं को कैसे बुलाएं ?](https://alaukikshaktiyan.com/आत्माओं-को-कैसे-बुलाएं-2/2017/08/आत्माओं-को-कैसे-बुलाएं-2.html): आत्मा आह्वान की विधियां ================== आत्मा आह्वान की कई विधियां भारत में प्रचलित है - आटोमेटिक राइटिंग (स्वचलित लेखन), आटोमैटिक टायपिंग, बालक के द्वारा, यंत्र द्वारा आत्मा आह्वान, प्लेनचिट द्वारा तथा आत्म रत्न के द्वारा। आटोमेटिक रायटिंग - ------------------------- इस विधि में साधक को एक माध्यम की आवश्यकता होती है जो सरल चिŸा और निस्वार्थ - [पूजा में विघ्न भूतों -प्रेतों के कारण भी आती है](https://alaukikshaktiyan.com/पूजा-में-विघ्न-भूतों-प्रे/2017/08/पूजा-में-विघ्न-भूतों-प्रे.html): नकारात्मक ऊर्जा की छाया हो तो पूजा में भी बाधा पड़ती है ===================================== सामान्यतया हममें जो भी आस्तिक हैं ,वे अपने घर-परिवार-कार्यस्थल आदि पर सामान्य पूजा -पाठ करते रहते हैं ,ईश्वर में श्रद्धा रखते हैं और बिना किसी विशेष उद्देश्य के अपनी मंगलकामना के साथ अपनी क्षमता के अनुसार अपने ईष्ट आदि को प्रसन्न रखने - [भूतों -प्रेतों से बचाव और सावधानियां](https://alaukikshaktiyan.com/भूतों-प्रेतों-से-बचाव-और-स/2017/08/भूतों-प्रेतों-से-बचाव-और-स.html): भूत-प्रेतों से बचाव हेतु सावधानियां ====================== इस सृष्टि में जो उत्पन्न हुआ है उसका नाश भी होना है व दोबारा उत्पन्न होकर फिर से नाश होना है |यह क्रम नियमित रूप से चलता रहता है। सृष्टि के इस चक्र से मनुष्य भी बंधा है। इस चक्र की प्रक्रिया में प्रकृति के निर्धारित नियम से अलग - [कौन लोग बनते हैं भूत ?,कौन प्रेत योनी में जाता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/कौन-लोग-बनते-हैं-भूत-कौन-प्/2017/08/कौन-लोग-बनते-हैं-भूत-कौन-प्.html): कौन बनता है भूत, कैसे रहें भूतों से सुरक्षित. =========================== जिसका कोई वर्तमान न हो, केवल अतीत ही हो वही भूत कहलाता है। अतीत में अटका आत्मा भूत बन जाता है। जीवन न अतीत है और न भविष्य वह सदा वर्तमान है। जो वर्तमान में रहता है वह मुक्ति की ओर कदम बढ़ाता है। आत्मा - [आत्माओं से संपर्क कैसे किया जा सकता है ?](https://alaukikshaktiyan.com/आत्माओं-से-संपर्क-कैसे-कि/2017/08/आत्माओं-से-संपर्क-कैसे-कि.html): आत्माओं से संपर्क कैसे किया जा सकता है ============================== मनोवांछित आत्माओं से संपर्क स्थापित कर उनसे बातचीत किया जा सकता है। यह कार्य थोड़ा कठिन है पर असंभव नहीं। आत्माओं के इस भीड़ में मनोवांछित आत्माओं को ढूंढ निकालना उतना ही कठिन कार्य है, जितना कि दिल्ली जैसे महानगरों में किसी इच्छित व्यक्ति को - [घर में नकारात्मक शक्ति का प्रभाव तो नहीं ?](https://alaukikshaktiyan.com/घर-में-नकारात्मक-शक्ति-का/2017/08/घर-में-नकारात्मक-शक्ति-का.html): आप पर या घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है ====================================== प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा या शक्ति हमारे लिए लाभदायक और नकारात्मक उर्जा या शक्तिया नुक्सान करने वाली या परेशानी उत्पन्न करने वाली होती है ,,,यह समस्त प्रकृति दो प्रकार की शक्तियों या उर्जाओं से बनता है ,धनात्मक और रिनात्मक ,सूर्य और अपनी - [आपके घर में भूत भी रहते हैं !](https://alaukikshaktiyan.com/आपके-घर-में-भूत-भी-रहते-हैं/2017/08/आपके-घर-में-भूत-भी-रहते-हैं.html): आपके घर में भूतों का डेरा है ,पर आपको पतानहीं ======================== आप अपनी जिन्दगी जी रहे और अपने घर में रह रहे होते हैं ,आपको कुछ दीखता तो नहीं पर आपके घर में अदृश्य शक्तियों का भी वास होता है |इनमे भूत ,प्रेत ,ब्रह्म ,पितृ ,आदि होते हैं |जब तक इनकी संख्या या ऊर्जा या - [भूतों -प्रेतों के निवास स्थान](https://alaukikshaktiyan.com/भूतों-प्रेतों-के-निवास-स्/2017/08/भूतों-प्रेतों-के-निवास-स्.html): भूत -प्रेतों के निवास स्थान =================== भूत-प्रेतों का निवास नीचे दिए गए कुछ वृक्षों एवं स्थानों पर माना गया है। इन वृक्षों के नीचे एवं स्थानों पर किसी प्रकार की तेज खुशबू का प्रयोग एवं गंदगी नहीं करनी चाहिए, नहीं तो भूत-प्रेत का असर हो जाने की संभावना रहती है।यद्यपि भूत प्रेत कहीं भी आ - [भूत -प्रेत ग्रस्त व्यक्ति की पहचान](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेत-ग्रस्त-व्यक्ति/2017/08/भूत-प्रेत-ग्रस्त-व्यक्ति.html): भूत प्रेत -आत्मा -वायव्य बाधा ग्रस्त व्यक्ति की पहिचान ====================================== जो लोग अकाल मौत से मरते है उन्हे प्रेत योनि में जाना पडता है ऐसा गरुड-पुराण का मत है,इस प्रकार की आत्मायें जब किसी की देह में भरती है तो वह रोता है चीखता है चिल्लाता है,भागता है,कांपता है,सांस बहुत ही तीव्र गति से चलती - [प्रेत कैसे बनते हैं ?,इनका शक्ति का आधार क्या है ?](https://alaukikshaktiyan.com/प्रेत-कैसे-बनते-हैं-इनका-श/2017/08/प्रेत-कैसे-बनते-हैं-इनका-श.html): कैसे बनते हैं भूत -प्रेत ================ कैसे होता है भूत -प्रेत -ब्रह्म की शक्ति का निर्धारण ---------------------------------------------------------------- भूत -प्रेत -पिशाच -जिन्न -ब्रह्म -चुड़ैल आदि का नाम हमारी यादों में सबसे पहले आता है जब कभी किसी वायव्य अथवा बाहरी बाधा या नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का नाम लिया जाता है |बहुत से लोगों ने इसका - [भूत -प्रेतों -आत्माओं की वास्तविकता](https://alaukikshaktiyan.com/भूत-प्रेतों-आत्माओं-की-वा/2017/08/भूत-प्रेतों-आत्माओं-की-वा.html): क्या वास्तव में भूत-प्रेत होते हैं =================== आत्मा के तीन स्वरुप माने गए हैं – जीवात्मा, प्रेतात्मा और सूक्ष्मात्मा। जो भौतिक शरीर में वास करती है वह जीवात्मा कहलाती है। जब वासनामय शरीर में जीवात्मा का निवास होता है तब वह प्रेतात्मा कहलाती है। यह आत्मा जब अत्यन्त सूक्ष्म परमाणुओं से निर्मित सूक्ष्मतम शरीर - [आत्माओं की रहस्यमय दुनियां](https://alaukikshaktiyan.com/आत्माओं-की-रहस्यमय-दुनिय/2017/08/आत्माओं-की-रहस्यमय-दुनिय.html): आत्माओं का रहस्यमय संसार ===================== ब्रम्हांड में लाखों आत्माओं का अस्तित्व विद्यमान है। जो वायुमंडल में स्वतंत्र रूप सेंविचरण करते हैं। जिनमंे कई प्रकार के आत्माएं होती है। जैसे राजा, महाराजा, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, विद्वान, चोर, डाकू, बदमाश, सामान्य मनुष्य तथा उच्चकोटि के मनुष्य आदि, जिनमें मुख्यतः दो प्रकार की आत्माएं होती है। – दिव्यात्मा तथा दुष्टात्मा। दिव्य आत्मा – —————ये आत्माएं कभी कभी किसी मनुष्य की जिंदगी से प्रभावित हो जाते है औरउसको सहयोग भी करते है। खासकर उस व्यक्ति के जिंदगी से प्रभावित होते हैं, जिनकीजिंदगी उसी आत्मा के जिंदगी से मिलती–जुलती है, जैसे उस आत्मा ने अपनी पूर्व जिंदगीमें बहुत कष्ट झेले हों और दुःखों का सामना किया हो तो वह आत्मा किसी व्यक्ति केजिंदगी के कष्टों एवं दुःखों को देख नहीं सकता, क्योंकि वह अपने जिंदगी में दुख, कष्ट, कठिनाईयों और परेशानियों से भली–भांति परिचित रहा है। अतः वह किसी ऐसे व्यक्ति कीसहायता अवश्य करता है, जो इस प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त रहता है। ऐसी आत्माजिनकी जिंदगी से प्रभावित हो जाते हैं, उनकी जिंदगी खुशियों से भर जाती है और जीवन मेंकिसी प्रकार का अभाव नहीं रहता। पग–पग पर सफलताएं कदम चूमने लगती है। गांवतथा शहरों में ऐसे सैकडों उदारण देखने को मिल जाते हैं, जैसे अनायास ही गड़े धन का पतालग जाना, चांदी के सिक्कों से भरा घड़ा मिल जाना, इच्छा करते ही उसकी पूर्ति हो जाना, एक्सीडेंट या दुर्घटना का पूर्वाभास होना यह सब दिव्यात्माओं के प्रसन्न होने के कारणअनायास ही होने लगता है। दुष्टात्मा – ————- ये आत्माएं बहुत ही दुष्ट होती है। इन्हें हमेशा किसी न किसी को सताते रहने मेंबहुत आनंद आता है। ये आत्माएं कभी किसी का भला नहीं करती। ये आत्माएं जिनके पीछेपड़ जाती है, उसकी जिंदगी बर्बाद कर देती है। उनके परिवार में कभी सुख–शांति नहींरहती। कदम–कदम पर हानि पहुंचाते है। उनके साथ कब कौन सी घटना घट जाये कुछकहा नहीं जा सकता। जिस व्यक्ति पर ऐसी आत्माओं का प्रकोप हो जाता है, वह व्यक्तिपागल भी हो जाता है। दुष्ट आत्मायें किसी भी दृष्टि से हितकर नहीं हंै। आत्माओं का रहस्य –===============शरीर से निकलने के बाद सैकड़ांे वर्ष तक आत्मायें वायुमंडल में विचरण करती रहती हैं, क्योंकि वह पुनः गर्भ में जाने के इच्छुक नहीं होती या किसी ऐसे गर्भ में जन्म लेने कोउत्सुक होते हैं जो उनका मनोवांछित हो। उदाहरण के लिए अधिकांश आत्मायें तो जन्म हीनहीं लेना चाहती क्योंकि उन्होंने गर्भ में या गर्भ के बाहर जो कुछ भोगा है वह ज्यादासुखकर नहीं होता है। अगर वे जन्म भी लेना चाहें तो किसी ऐसे गर्भ की खोज में रहतें है जोसभी दृष्टियों से सुखी एवं सम्पन्न हों, तथा उन्हें खुलकर कार्य करने का मौका मिले, परऐसा संयोग से ही प्राप्त हो पाता है। क्या मनोवांछित आत्माओं से बातचीत किया जा सकता है ?आत्मायें कैसे आकर्षित होती है ?मनुष्य का शरीर जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश इन पांच तत्वों से निर्मित होता है।मृत्यु के पश्चात् जब मनुष्य स्थूल शरीर को छोड़कर सूक्ष्म शरीर धारण करता है तो इसमेमात्र दो तत्व शेष रह जातें है – वायु और आकाश तत्व, पृथ्वी तत्व समाप्त हो जाने केकारण पृथ्वी की गुरूत्वाकर्षण शक्ति का आत्माओं पर कोई असर नहीं होता। फलस्वरूपस्थूल शरीर के अलावा सूक्ष्म शरीर की शक्ति हजारों गुणा अधिक हो जाती है और विचारों के माध्यम से ही वे पूरे ब्रह्मांड में विचरण करने में समर्थ हो जाते हैं। आत्माओं की गति वायु से भी अधिक तेज होती है एक मिनट में वे पूरे ब्रह्मांड में विचरण कर सकते हैं।……………………………………………………………………..हर–हर महादेव विशेष - [रोग नहीं पर अस्वस्थ हैं](https://alaukikshaktiyan.com/रोग-नहीं-पर-अस्वस्थ-हैं/2017/08/रोग-नहीं-पर-अस्वस्थ-हैं.html): अस्वस्थ हैं पर बीमारी नहीं ================== आप खुद को अस्वस्थ महसूस कर रहे ,शरीर कमजोर हो रहा या अंग विशेष काम नहीं कर रहा या उसमे कष्ट है |लक्षण बीमारी के हैं पर जांच में कोई बीमारी नहीं पकड में आ रही |आप मेडिकली फिट हैं फिर भी रोगी हैं |आप वर्षों तक बीमार चल - [अप्सरा /यक्षिणी रति करती हैं - भ्रम या सच ?](https://alaukikshaktiyan.com/अप्सरा-यक्षिणी-रति-करती-ह/2017/08/अप्सरा-यक्षिणी-रति-करती-ह.html): भ्रम या सच - अप्सरा /यक्षिणी रति करती हैं =================== अप्सरा /परी /यक्षिणी का नाम ,कथा -कहानी से लेकर पुराण ,शास्त्र ,तंत्र जगत ,में भी आता है ।विश्वामित्र की याद आती है अप्सरा का नाम सुनते ही ।इंद्र की याद आती है अप्सरा और सुंदरियों के लिए ।तंत्र जगत में आते ही अक्सर साधकों के - [मनुष्य की उत्पत्ति और सनातन ज्ञान](https://alaukikshaktiyan.com/मनुष्य-की-उत्पत्ति-और-सना/2017/08/मनुष्य-की-उत्पत्ति-और-सना.html): सनातन ज्ञान और मनुष्य की उत्पत्ति ========================== आधुनिक विज्ञान फेल ,भारतीय सनातन विज्ञान महान ----------------------------------------------------------------- मनुष्य की उत्पत्ति के सम्बन्ध में आधुनिक विज्ञान की सभी खोजें और सिद्धांत व्यर्थ सिद्ध हुए हैं ,जबकि भारतीय सनातन ज्ञान -विज्ञान और सूत्र हमेशा सही साबित हुए हैं |आधुनिक विज्ञान उन्ही बातों को हजारों ,लाखों वर्ष बाद प्रमाणित करता - [विवाह के उपाय और सावधानियां](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-के-उपाय-और-सावधानिय/2017/08/विवाह-के-उपाय-और-सावधानिय.html): विवाह के उपाय और सावधानियां ====================== अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की इच्छा के कारण माता-पिता व भावी वर-वधू भी चाहते है कि अनुकुल समय पर ही विवाह हो जायें. कुण्डली में विवाह विलम्ब से होने के योग होने पर विवाह की बात बार-बार प्रयास करने पर भी कहीं बनती नहीं है. इस प्रकार की स्थिति - [कन्या का शीघ्र विवाह कराने के लिए उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/कन्या-का-शीघ्र-विवाह-करान/2017/08/कन्या-का-शीघ्र-विवाह-करान.html): कन्या का शीघ्र विवाह कराने के लिए उपाय =========================== १. जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से किसी भी व्यक्ति फिर वो चाहे पुरुष हो या स्त्री अपने जीवन की सबसे बड़ी खुशी विवाह से वंचित रह जाते हैं....साथ ही कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं या प्रारब्ध की वजह से भी - [पुरुष विवाह में विलम्ब अथवा बाधा होने पर प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/पुरुष-विवाह-में-विलम्ब-अथ/2017/08/पुरुष-विवाह-में-विलम्ब-अथ.html): पुरुष विवाह में विलम्ब अथवा बाधा होने पर प्रयोग ================================== १. जो माता-पिता यह सोचते हैं कि उनकी पुत्रवधु सुन्दर, सुशील एवं होशियार हो तो उसके लिए वीरवार एवं रविवार के दिन अपने पुत्र के नाखून काटकर रसोई की आग में जला दें।. २. विवाह योग्य लोगों को प्रत्येक गुरूवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी - [लडकों के विवाह में बाधा हेतु प्रयोग और टोटके](https://alaukikshaktiyan.com/लडकों-के-विवाह-में-बाधा-हे/2017/08/लडकों-के-विवाह-में-बाधा-हे.html): लड़के के विवाह में बाधा हेतु प्रयोग और टोटके ========================= १. विवाह की कामना रखने वाले पुरुषों को विभिन्न रंगों से स्त्रियों की तस्वीरें सफ़ेद कागज पर रोजाना तीन महिने तक एक एक बनानी चाहिये। २. यदि किसी के पुत्र के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो यह प्रयोग करें |यह प्रयोग अत्यंत सरल और सबकी - [कन्या विवाह बाधा निवारक टोटके और प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/कन्या-विवाह-बाधा-निवारक-ट/2017/08/कन्या-विवाह-बाधा-निवारक-ट.html): कन्या विवाह बाधा निवारक टोटके और प्रयोग ========================= १. कन्या को चाहिए कि वह बृहस्पतिवार को व्रत रखे और बृहस्पति की मंत्र के साथ पूजा करे। इसके अतिरिक्त पुखराज या सुनैला धारण करे। छोटे बच्चे को बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र दान करे। लड़के को अगर विवाह में बाधा या अड़चन आ रही हो तो चाहिए कि - [कन्या विवाह बाधा निवारक प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/कन्या-विवाह-बाधा-निवारक-प/2017/08/कन्या-विवाह-बाधा-निवारक-प.html): कन्या विवाह बाधा निवारक प्रयोग ===================== १. यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में - [विवाह बाधा और प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-बाधा-और-प्रयोग/2017/08/विवाह-बाधा-और-प्रयोग.html): REMEDIES FOR HURDLES IN GETTING MARRIED : ======================================= If you are facing delays in marriage or are afraid that a good proposal may get disturbed, then do the following: Garland the idol of Lord Ganapathi with yellow flowers. Apply Haldi(Turmeric) “Tilak” on your forehead. How to do the Ritual: For 40 days, you have to - [विवाह बाधा निवारक तंत्र और ज्योतिषीय उपाय [ कन्या के लिए ]](https://alaukikshaktiyan.com/विवाह-बाधा-निवारक-तंत्र-औ/2017/08/विवाह-बाधा-निवारक-तंत्र-औ.html): विवाह बाधा निवारक तंत्र और ज्योतिषीय उपाय [ कन्या के लिए ] ======================================= ज्योतिषीय उपाय -------------------- [१] पीला पुखराज ४ रत्ती और ओपल ४ रत्ती एक ही त्रिधातु मुद्रिका में बनवाकर ,प्राण प्रतिष्ठा ,अभिषेक करवाकर कन्या को धारण करवाए ,,,,,,,, [२]विवाह योग्य कन्या को गुरूवार का व्रत करना शीघ्र वर प्राप्ति में सहायक होता है - [व्यावसायिक सफलता में सहायक महाविद्या के यन्त्र](https://alaukikshaktiyan.com/व्यावसायिक-सफलता-में-सहा/2017/08/व्यावसायिक-सफलता-में-सहा.html): विशेष यन्त्र और व्यावसायिक सफलता --------------------------------------------- षोडशी यन्त्र और सम्पन्नता ================== षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दश महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र और यम चारो इनके - [ऋण(कर्ज ) मुक्ति के ज्योतिषीय और तंत्रिकीय सरल उपाय](https://alaukikshaktiyan.com/ऋणकर्ज-मुक्ति-के-ज्योतिष/2017/08/ऋणकर्ज-मुक्ति-के-ज्योतिष.html): ऋण(कर्ज ) मुक्ति के ज्योतिषीय और तंत्रिकीय सरल उपाय ===================================== वर्तमान समय में जादातर लोग अपनी सुविधाओ के लिए किसी न किसी प्रकार का कर्ज लेते है अथवा लोन आदि लेते हैं परन्तु वे यह नहीं सोचते की यह लोन समय पर वापस होगा या नहीं |.जब लोन या क़र्ज़ हम पर बड़ता जाता है - [व्यापारिक वृद्धि में चमत्कार और दिव्य गुटिका](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापारिक-वृद्धि-में-चमत/2017/08/व्यापारिक-वृद्धि-में-चमत.html): चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी ======================== रविपुष्य योग में निर्मित ,प्राण प्रतिष्ठित ,अभिमंत्रित दिव्य गुटिका ---------------------------------------------------------------- सामान्यरूप से हर किसी की चाह होती है की लोग उनकी और आकर्षित हों ,देखकर खींचे चले आयें ,जो मिले प्रभावित हो ,जहाँ जाए किसी काम से वहां सफलता मिले ,कहीं किसी समस्या-परेशानी का सामना न करना पड़े |हर इंसान - [व्यापार -व्यवसाय में उपयोगी कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-में-उपयो/2017/08/व्यापार-व्यवसाय-में-उपयो.html): कवच /ताबीज और व्यवसाय /व्यापार -------------------------------------------- १. आकस्मिक धन प्राप्ति हेतु कुबेर कवच ========================== लक्ष्मी चंचला है और किसी एक स्थान पर टिककर नहीं बैठती ,तभी तो शास्त्रों में इसे चंचला अथवा अस्थिरा भी कहा गया है |कल का धनि एक झटके में निर्धन हो जाता है तो कोई दरिद्र लक्ष्मी कृपावान यकायक उत्तरोत्तर प्रगति - [व्यापार -व्यवसाय में उपयोगी कवच /ताबीज](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-में-उपयो-2/2017/08/व्यापार-व्यवसाय-में-उपयो-2.html): कवच /ताबीज और व्यवसाय /व्यापार -------------------------------------------- १. आकस्मिक धन प्राप्ति हेतु कुबेर कवच ========================== लक्ष्मी चंचला है और किसी एक स्थान पर टिककर नहीं बैठती ,तभी तो शास्त्रों में इसे चंचला अथवा अस्थिरा भी कहा गया है |कल का धनि एक झटके में निर्धन हो जाता है तो कोई दरिद्र लक्ष्मी कृपावान यकायक उत्तरोत्तर प्रगति - [शेयर ,कमोडिटी ,सेल्स ,मार्केटिंग में दिव्य गुटिका का उपयोग](https://alaukikshaktiyan.com/शेयर-कमोडिटी-सेल्स-मार्क/2017/08/शेयर-कमोडिटी-सेल्स-मार्क.html): शेयर ,कमोडिटी ,सेल्स ,मार्केटिंग में अति उपयोगी है दिव्य गुटिका /डिब्बी ================================================== आज के समय में शेयर ,लाटरी ,कमोडिटी ,सट्टा ,कमीशन के कार्य आकस्मिक आय के स्रोत के रूप में विकसित हो चुके हैं |लोग इनके द्वारा आकस्मिक और अधिक आय प्राप्त कर धन प्राप्ति की कामना से इनमे इन्वेस्ट करते रहते हैं अथवा इनका - [व्यापार -व्यवसाय सम्बन्धी विविध प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/व्यापार-व्यवसाय-सम्बन्ध/2017/08/व्यापार-व्यवसाय-सम्बन्ध.html): व्यवसाय और विविध प्रयोग ---------------------------------- १. गुंजा और कारोबार में बरकत ==================== किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार के दिन 1 तांबे का सिक्का, 6 लाल गुंजा लाल कपड़े में बांधकर प्रात: 11 बजे से लेकर 1 बजे के बीच में किसी सुनसान जगह में अपने ऊपर से 11 बार उसार कर - [व्यवसाय वृद्धि के लिए होली पर महालक्ष्मी प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/व्यवसाय-वृद्धि-के-लिए-होल/2017/08/व्यवसाय-वृद्धि-के-लिए-होल.html): होली पर महालक्ष्मी प्रयोग ================== शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी -सेल्स मार्केटिंग -व्यवसायी वर्ग के लिए विशेष लाभप्रद --------------------------------------------------------- होली का पर्व जीवन में नई उमंगें और खुशियाँ लाता है |इस दिन दुर्भाग्य ,कष्ट से मुक्ति के अनेक प्रयोग और उपाय किये जाते हैं |यह तंत्र और समृद्धिकारक प्रयोगों के लिए अति अनुकूल समय होता है - [दीपावली -होली और व्यापार वर्धक प्रयोग](https://alaukikshaktiyan.com/दीपावली-होली-और-व्यापार-व/2017/08/दीपावली-होली-और-व्यापार-व.html): दीपावली -होली और व्यापार वर्धक प्रयोग ------------------------------------------------ १. दीवाली या लक्ष्मी पूजन के समय पीली कौड़ियों को केसर या हल्दी से रंगकर पीले कपड़े में बांध लें और फिर इन कौड़ियों को धन रखने के स्थान पर रखें, धन की कमी नहीं रहेगी। इसके साथ ५ गोमती चक्र ऊँ लक्ष्मी नमः’’ से अभिमंत्रित करके लाल - [व्यावसायिक सफ़लता और बाधा निवारण हेतु](https://alaukikshaktiyan.com/व्यावसायिक-सफ़लता-और-बाध/2017/08/व्यावसायिक-सफ़लता-और-बाध.html): दैनिक व्यावसायिक सफ़लता और बाधा निवारण हेतु प्रयोग -------------------------------------------------------------------- .यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते है ,कम से कम विघ्न-बाधाओं का सामना करना चाहते है ,तो निम्न प्रयोग करे ,आपके भाग्य तो नहीं बदल जायेगे ,किंतू जो मिलना है वह पूरा मिल पायेगा ऐसा विश्वास रखे ,यदि ## Pages - [Home](https://alaukikshaktiyan.com/): At Alaukikshaktiyan.com, we delve into the fascinating world of tantra sadhana, mahavidya sadhana, and kundalini awakening, providing you with the tools for spiritual growth. 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